मंगलवार, 24 जनवरी 2023

जीवन के हीरे हम पत्थर समझ कर फेंक तो नहीं रहे हैं ?


एक सुबह, अभी सूरज भी निकला नहीं था और एक मांझी नदी के किनारे पहुंच गया था । उसका पैर किसी चीज से टकरा गया, झुक कर उसने देखा, पत्थरों से भरा हुआ एक झोला पड़ा था। उसने अपना जाल किनारे पर रख दिया, वह सुबह सूरज के उगने की प्रतीक्षा करने लगा। सूरज उग आए, वह अपना जाल फेंके और मछलियां पकड़े। वह जो झोला उसे पड़ा हुआ मिल गया था, जिसमें पत्थर थे, वह एक-एक पत्थर निकाल कर शांत नदी में फेंकने लगा।

सुबह के सन्नाटे में उन पत्थरों के गिरने की छपाक की आवाज सुनता, फिर दूसरा पत्थर फेंकता। धीरे-धीरे सुबह का सूरज निकला, रोशनी हुई। तब तक उसने झोले के सारे पत्थर फेंक दिए थे, सिर्फ एक पत्थर उसके हाथ में रह गया था। सूरज की रोशनी में देखते से ही जैसे उसके हृदय की धड़कन बंद हो गई, सांस रुक गई। उसने जिन्हें पत्थर समझ कर फेंक दिया था, वे हीरे-जवाहरात थे!

लेकिन अब तो हाथ में अंतिम टुकड़ा बचा था और वह पूरे झोले को फेंक चुका था। वह रोने लगा, चिल्लाने लगा। इतनी संपदा उसे मिल गई थी कि अनंत जन्मों के लिए काफी थी, लेकिन अंधेरे में, अनजान, अपरिचित, उसने उस सारी संपदा को पत्थर समझ कर फेंक दिया था।

लेकिन फिर भी वह मछुआ सौभाग्यशाली था क्योंकि अंतिम पत्थर फेंकने के पहले सूरज निकल आया था और उसे दिखाई पड़ गया था कि उसके हाथ में हीरा है। *साधारणतः सभी लोग इतने सौभाग्यशाली नहीं होते हैं। जिंदगी बीत जाती है, सूरज नहीं निकलता, सुबह नहीं होती, रोशनी नहीं आती और सारे जीवन के हीरे हम पत्थर समझ कर फेंक चुके होते हैं।* *जीवन एक बड़ी संपदा है, लेकिन बहुसंख्यक आदमी सिवाय उसे फेंकने और गंवाने के कुछ भी नहीं करता है। जीवन क्या है, यह भी पता नहीं चल पाता और हम उसे फेंक देते हैं। जीवन में हम क्या क्या उपलब्धि हासिल कर सकते है, समाज के कितने बड़े हिस्से का कल्याण कर सकते है....कुछ पता नहीं हो पाता।*

आवश्यकता चेतना जागृत करने की है।

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मंगलवार, 3 जनवरी 2023

एक गलत ट्रेन यात्रा

कभी कभार हम सभी स्वयं को चतुर समझकर कदम उठाते है लेकिन हकीकत में बेवकूफी वाला काम कर रहे होते है। एक ऐसी ही रेल यात्रा का जिक्र करूंगा जो कभी भूलता नहीं है। 

तो प्रकरण इस प्रकार है। मैं उत्तर प्रदेश के जनपद गाजीपुर के करहिया नामक गांव का रहने वाला हूं और मेरा गांव देवी मां कामख्या के मंदिर के लिए जाना जाता है। वर्ष 2000 में प्रयागराज में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करता था। एक बार का वाकया है कि मैं और मेरा mitr अजय श्रीवास्तव अपने गांव से इलाहाबाद जाना था। निर्णय ये हुआ कि रात में मगध एक्सप्रेस से निकला जाएगा। प्रायः हम लोग सुबह 10 बजे के आस पास लालकिला एक्सप्रेस से निकलते थे जो 4 बजे इलाहाबाद पहुंचा देती थी। मगध रात में थी और दिलदारनगर स्टेशन से थी जिसके लिए शाम को ही घर से निकल गए। ट्रेन के आने में समय था जिसमें एक फिल्म देखा जा सकता था, तो हम लोगों ने वो काम बखूबी किया और फिल्म समाप्त होने के उपरांत वापस आए तो स्टेशन पर एक खाली ट्रेन खड़ी थी। पता किया गया तो पता चला कि ये मुंबई जाने वाली स्पेशल ट्रेन है। 
हम दोनों के दिमाग में आया कि मुंबई जाएगी तो इलाहाबाद तो होकर ही जाएगी क्योंकि उसके लिए इंजन का पीछे लगना होता था। इलाहाबाद नहीं तो कम से कम नैनी तो जरूर जाएगी क्योंकि नैनी ही वो स्टेशन है जहां मुंबई की तरफ जाने वाली ट्रेनों का रूट कटता था। उस समय तक हमें छिवकी रेलवे स्टेशन के बारे में जानकारी नहीं थी कि छिवकी यार्ड से भी ट्रेनें मुंबई रूट को चली जाती है। छिवकी नैनी रेलवे स्टेशन के यार्ड में ही था थोड़ी दूरी पर। बहरहाल ट्रेन बहुत तेज आई और छिवकी यार्ड में खड़ी थी, हम लोग सोचे कि 5 मिनट के अंदर नैनी ब्रिज आयेगा और फिर इलाहाबाद रेलवे स्टेशन। लेकिन जब यार्ड से चली तो चलती ही जा रही है, इलाहाबाद तो दूर नैनी स्टेशन ही आया नहीं। ध्यान दिया तो पता चला कि ये ट्रेन सिंगल ट्रैक वाली रुट पर चल रही है। अब हम दोनों सोचे कि गलती तो हो ही गई है जहां रुकेगी वहां से देखा जाएगा। 
 आगे जाकर ट्रेन की चैन किसी ने खीच दिया और किसी हाल्ट पर खड़ी थी। हम लोगों ने उतरने का निर्णय लिया जो कि गलत था, जब नीचे उतरे तो पता चला कि हमारे जैसे 20 से अधिक लोग बेवकूफ बने थे। बहरहाल पीछे से एक पैसेंजर आ रही थी जिसे पकड़कर एक बड़े स्टेशन पहुंचे, उस स्टेशन का नाम याद नहीं लेकिन वो मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बॉर्डर पर स्थित था। वहां पर क्रासिंग थी तो मुंबई से वाराणसी जा रही ट्रेन रत्नागिरी एक्सप्रेस मिली और उसे पकड़कर दोपहर 1 बजे इलाहाबाद पहुंचे।
कुल मिलाकर जो यात्रा 5/6 घंटे में हो जानी थी 16/17 घंटे में। तब से अनजान ट्रेनों में बैठने से पहले विशेष ध्यान रखते है। 

सोमवार, 2 जनवरी 2023

समय का सदुपयोग कीजिए

वो बहुत व्यस्त रहते थे, समय नहीं मिलता था कि कोई अतिरिक्त कार्य कर सके। सुबह ऑफिस जाना, शाम को आना, भोजन करना, टीवी देखना और सोना बस यही जीवन रह गया था। कभी कभार दोस्तों के मध्य बैठना। चक्कर घिरनी की भांति जीवन चल रही थी जिससे मुक्ति भी चाहते थे लेकिन रास्ता नहीं दिख रहा था। जिंदगी चूहा दौड़ हो चुकी थी
चित्र गूगल से

 कुछ दिनों से उनकी बाइक ठीक से नहीं चल रहा था, सर्विस मांग रही थी, जिसके लिए समय नहीं मिल रहा था। किसी तरह मैकेनिक तक पहुंचे तो काफी सीख मिली। मैकेनिक ने कहा सर इसमें कोई खराबी नहीं थी बस कुछ पार्ट ढीले हो गए थे, अब कस दिया हूं। आराम से कुछ महीना और चलाइए लेकिन समय समय पर इसकी सर्विस जरूर करा लीजिए।
चित्र गूगल से
  बातो बातो में उन्हे लगा हमारा समय थी तो वैसे ही है सब अस्त व्यस्त और ढीले है, उसे किसी रिंच प्लास से कस दिया जाय तो जीवन और भी सुंदर हो सकता है। उसके बाद उन्होंने प्रतिदिन की दिनचर्या को रात में सोने से पहले लिखना शुरू कर दिया तो पाया कि बेकार टाइम तो रील देखने में जाता है, बेवजह का टीवी न्यूज पर टॉक्सिक बहस देखते है। इस तरह एक सप्ताह जब उसे पढ़ा तब उन्हे लगा कि वो कौन सी जगह है जहां रिंच प्लास लेकर कसने की जरूरत है। धीरे धीरे समय चुराना और टाइम मैनेजमेंट किया और उस समय को सकारात्मक कार्यों और पढ़ने लिखने में व्यतीत करने लगे और एक सालों बाद ही चमत्कारिक परिणाम उन्हे मिले।
    दुनिया में समय ही एक ऐसी चीज जो एक बार खो जाती है तो दुबारा मिलती नहीं है। बाकी चीजें एक बार फिर से अर्जित की जा सकती है, लेकिन समय नहीं। इस संबंध एक बड़ा आश्चर्य यह होता है कि धन, स्वास्थ्य, कोई वस्तु जब खो रहे होते है तो उसका बोध तो हो जाता है लेकिन समय जब गवां रहे होते है तो इसका बोध नहीं होता है, एक अंतराल व्यतीत होने के बाद अहसास होता है, फिर हम पछताते है कि काश उस समय थोड़ा ध्यान दे दिए होते तो आज कुछ बेहतर होते। 
कुछ लोग तो आज की तिथि जिस तरह से दफ्तरों में कार्य के दौरान फाइलों में समय देते है, अक्सर उन लोगों के मुख से ऐसा सुनने को मिलता है कि इतनी पढ़ाई अपने छात्र जीवन में किए होते तो आज आईएएस होते। अर्थ वित्त विषयों पर चर्चा के दौरान जब किसी को मुद्रा स्फीति, बचत, निवेश, सीएजीआर आदि जा कॉन्सेप्ट जब समझते है तो ओ हो मैने कितना समय गवां दिया। फलनवा हमें म्यूचुअल फंड एसआईपी बता रहा था, लेकिन तब नहीं समझे, काश उस समय स्टार्ट कर लिए होते तो आज हम लाखों रुपए के फंड बना लिए होते। 

   ऐसा पछतावा अक्सर लोग करते है और उसका कारण होता है समय की वैल्यू को न समझ पाना। मै बार बार लिखता हूं कि ईश्वर ने एक मामले में सभी के साथ न्याय किया है वो है समय के मामले में, सभी को 24 घंटे ही मिले है। इसके उपयोग से कोई एलन मस्क, मार्क जुकरबर्ग, विजय शेखर शर्मा, नीतीश कामत होता है, तो कोई तेंदुलकर, धोनी, कपिल शर्मा तो राधा किशन दमानी, रामदेव अग्रवाल होता है। उसी में हम भी होते है, आप भी होते है। समय कितना महत्वपूर्ण है उसे एक उदाहरण से समझने की कोशिश करते है। मान लीजिए आपके बैंक खाते में प्रतिदिन उपर वाला 86400 रुपए डालता है और शर्त होता है कि उसे आज ही प्रयोग न किया जाय तो वापस ले लिया जाएगा, तो हम क्या करेंगे ? जाहिर सी बात है उसे रात 12 बजने से पहले सभी पैसों का कुछ न कुछ प्रयोग कर ही लेंगे क्योंकि थोड़े देर बाद फिर से उतना पैसा आ जाना है। यही काम हमें समय के साथ करना है क्योंकि ईश्वर प्रति दिन हमारे खाते में 86,400 सेकेंड देता है जिसका उपयोग ना किया जाय तो वो व्यर्थ हो जाता है। 
 किसी अच्छे विषय को लेकर चर्चा करो तो अक्सर लोग कहते है कि मेरे पास समय नहीं है। दरअसल वो लोग समय का बहाना बनाकर यह बताना चाहते है वो कार्य उनकी प्राथमिकता सूची में है।  ये सारा काम प्राथमिकता का होता है। समय किसी के पास नहीं रहता है, उसे मैनेज करना पड़ता है। प्राथमिकताएं तय करनी पड़ती है, कौन सा काम मेरे लिए इंपॉर्टेंट है, कौन सा नहीं, किससे मुझे ज्यादा लाभ मिलने वाला है, कौन सा काम मुझे बहुत आगे ले के जा सकता है। सामने आ रही अवसरों को नुकसान, फायदा,  कम फायदा और ज्यादा फायदे के मानकों पर जांचना होगा। दिन शुरू होने से पहले दिन को खत्म कर लेना चाहिए। 

तो वर्ष 2023 में समय के महत्व को समझकर प्रयोग करने है।
किसी तरह की हेल्प के लिए कॉन्टैक्ट कीजिए
https://wa.me/message/6PB2HXEQ5CAXO1


नए वर्ष का संदेश

 वर्ष के अवसर पर इन आदतों से स्वयं को एक स्वस्थ जीवन का गिफ्ट दीजिए

कहा जाता है निरोगी काया सबसे बड़ा धन होता है और इसका महत्व तब समझ में आता है जब कोई रोग होता है। अपने देश में लोगों में आम मानसिकता यही है कि उन्हे कोई रोग नहीं हो रहा है तो वो स्वस्थ है। इस तरह हम सभी के जीवन में स्वास्थ्य का स्थान हमेशा निचले पायदान पर होता है जबकि सबसे पहली प्राथमिकता इसी का होना चाहिए। इस पर किया जाने वाला खर्च नहीं बल्कि एक निवेश होता है। हम लोग इसे खर्च समझते है इसीलिए जब तक हम बीमार नहीं होते है, तब तक इस विषय पर तनिक भी विचार नहीं करते है। 
मैने भी अपने स्वास्थ्य को बेहतर किया है।लेकिन ध्यान तभी गया जब संकट में आया। अब मैं सचेत हूं और दूसरों को भी सचेत करता हूं। एक समय मैं 101 किलो का था और खर्राटे, कमर दर्द, सायटिका जैसी समस्याओं से परेशान था जो अपने हेल्थ कोच के माध्यम से नियंत्रित किया। 
पूरी दुनिया में स्वास्थ्य को लेकर 3 तरह के एप्रोच अपनाया जाता है

1) प्रीवेंटिव जिसमें बीमारियों पर रोकथाम की बात की जाती है

2) क्यूरेटिव यानी बीमारी होने पर इलाज और 

3) प्रोमोटिव यानी जो स्वस्थ है उसे स्वस्थ बनाए रखना

हम सभी के यहां नंबर 2 को पहले स्थान पर रखते है जबकि कायदे से प्रोमोटिव,प्रिवेंटिव और क्यूरेटिव क्रम से होना चाहिए।

 विज्ञान के अनुसार एक स्वस्थ और लंबा जीवन तीन आदतों पर निर्भर करता है। ये तीन आदतें हैं- 
न्यूट्रीशन से भरपूर डाइट लेना, 
नशे से दूर रहना
और रोजाना 20/25 मिनट एक्सरसाइज करना।
 लंबी रिसर्च के अनुसार, जो लोग इस लाइफ स्टाइल को फॉलो करते हैं, उनके स्वास्थ्य खराब होने की संभावना 82% तक घट जाती है।

कैसे बनाएं इन 3 आदतों को अपने जीवन का हिस्सा

1. हेल्दी डाइट को दें प्राथमिकता: अपने शरीर को स्वस्थ रखना है तो आज ही ज्यादा तेल, मसाला और जंक फूड छोड़ देंना है। अपनी डाइट में ज्यादा से ज्यादा फल और सब्जियों को शामिल करें। इंसान जल्दी बीमारियों से पीड़ित इसलिए हो जाता है क्योंकि उसका शरीर ऑक्सीडाइज होने लगता है। लेकिन एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर आहार लेने से इस प्रक्रिया को धीमा किया जा सकता है। खाना वो खाना है जो शरीर को पसंद हो, ना कि जीभ को और शरीर को चाहिए प्रोटीन, विटामिन, मिनिरिल, फाइबर, ओमेगा 3, कॉम्प्लेक्स कार्ब, अन सेचुरेटेड फैट आदि। ग्लायस्मिक इंडेक्स कम वाले भोज्य पदार्थ। आज ही गूगल में खोजिए शरीर को लगने वाले भोजन और लीजिए। 2. नशे से रहे दूर क्योंकि अच्छी डाइट लेते भी हैं, तो भी नशे की लत आपके जीवनकाल को घटा देती है।
3. एक्सरसाइज कीजिए प्रतिदिन. 24 घंटे में 24 मिनट का सिद्धांत एक कारगर सिद्धांत होता है। यानी 24 मिनट की हल्की फुल्की एक्सरसाइज पर्याप्त होता है। लॉकडाउन और वर्क फ्रॉम होम ने हमारे चलने-फिरने को पूरी तरह बंद कर दिया है। आप जॉगिंग-रनिंग से लेकर पसंदीदा खेल भी खेल सकते हैं। आप साइकिल भी चला सकते है, पैदल चलना भी एक तरह की एक्सरसाइज है। 
4.भोजन की कैलोरी काउंट कीजिए जो भी खाते है उसकी कैलोरी काउंट कीजिए और देखिए वो बीएमआर से अधिक नहीं होनी चाहिए। 

किसी प्रश्न के लिए संपर्क कर सकते है

https://wa.me/message/6PB2HXEQ5CAXO1

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