वो बहुत व्यस्त रहते थे, समय नहीं मिलता था कि कोई अतिरिक्त कार्य कर सके। सुबह ऑफिस जाना, शाम को आना, भोजन करना, टीवी देखना और सोना बस यही जीवन रह गया था। कभी कभार दोस्तों के मध्य बैठना। चक्कर घिरनी की भांति जीवन चल रही थी जिससे मुक्ति भी चाहते थे लेकिन रास्ता नहीं दिख रहा था। जिंदगी चूहा दौड़ हो चुकी थी
कुछ दिनों से उनकी बाइक ठीक से नहीं चल रहा था, सर्विस मांग रही थी, जिसके लिए समय नहीं मिल रहा था। किसी तरह मैकेनिक तक पहुंचे तो काफी सीख मिली। मैकेनिक ने कहा सर इसमें कोई खराबी नहीं थी बस कुछ पार्ट ढीले हो गए थे, अब कस दिया हूं। आराम से कुछ महीना और चलाइए लेकिन समय समय पर इसकी सर्विस जरूर करा लीजिए।
बातो बातो में उन्हे लगा हमारा समय थी तो वैसे ही है सब अस्त व्यस्त और ढीले है, उसे किसी रिंच प्लास से कस दिया जाय तो जीवन और भी सुंदर हो सकता है। उसके बाद उन्होंने प्रतिदिन की दिनचर्या को रात में सोने से पहले लिखना शुरू कर दिया तो पाया कि बेकार टाइम तो रील देखने में जाता है, बेवजह का टीवी न्यूज पर टॉक्सिक बहस देखते है। इस तरह एक सप्ताह जब उसे पढ़ा तब उन्हे लगा कि वो कौन सी जगह है जहां रिंच प्लास लेकर कसने की जरूरत है। धीरे धीरे समय चुराना और टाइम मैनेजमेंट किया और उस समय को सकारात्मक कार्यों और पढ़ने लिखने में व्यतीत करने लगे और एक सालों बाद ही चमत्कारिक परिणाम उन्हे मिले।
दुनिया में समय ही एक ऐसी चीज जो एक बार खो जाती है तो दुबारा मिलती नहीं है। बाकी चीजें एक बार फिर से अर्जित की जा सकती है, लेकिन समय नहीं। इस संबंध एक बड़ा आश्चर्य यह होता है कि धन, स्वास्थ्य, कोई वस्तु जब खो रहे होते है तो उसका बोध तो हो जाता है लेकिन समय जब गवां रहे होते है तो इसका बोध नहीं होता है, एक अंतराल व्यतीत होने के बाद अहसास होता है, फिर हम पछताते है कि काश उस समय थोड़ा ध्यान दे दिए होते तो आज कुछ बेहतर होते।
कुछ लोग तो आज की तिथि जिस तरह से दफ्तरों में कार्य के दौरान फाइलों में समय देते है, अक्सर उन लोगों के मुख से ऐसा सुनने को मिलता है कि इतनी पढ़ाई अपने छात्र जीवन में किए होते तो आज आईएएस होते। अर्थ वित्त विषयों पर चर्चा के दौरान जब किसी को मुद्रा स्फीति, बचत, निवेश, सीएजीआर आदि जा कॉन्सेप्ट जब समझते है तो ओ हो मैने कितना समय गवां दिया। फलनवा हमें म्यूचुअल फंड एसआईपी बता रहा था, लेकिन तब नहीं समझे, काश उस समय स्टार्ट कर लिए होते तो आज हम लाखों रुपए के फंड बना लिए होते।
ऐसा पछतावा अक्सर लोग करते है और उसका कारण होता है समय की वैल्यू को न समझ पाना। मै बार बार लिखता हूं कि ईश्वर ने एक मामले में सभी के साथ न्याय किया है वो है समय के मामले में, सभी को 24 घंटे ही मिले है। इसके उपयोग से कोई एलन मस्क, मार्क जुकरबर्ग, विजय शेखर शर्मा, नीतीश कामत होता है, तो कोई तेंदुलकर, धोनी, कपिल शर्मा तो राधा किशन दमानी, रामदेव अग्रवाल होता है। उसी में हम भी होते है, आप भी होते है। समय कितना महत्वपूर्ण है उसे एक उदाहरण से समझने की कोशिश करते है। मान लीजिए आपके बैंक खाते में प्रतिदिन उपर वाला 86400 रुपए डालता है और शर्त होता है कि उसे आज ही प्रयोग न किया जाय तो वापस ले लिया जाएगा, तो हम क्या करेंगे ? जाहिर सी बात है उसे रात 12 बजने से पहले सभी पैसों का कुछ न कुछ प्रयोग कर ही लेंगे क्योंकि थोड़े देर बाद फिर से उतना पैसा आ जाना है। यही काम हमें समय के साथ करना है क्योंकि ईश्वर प्रति दिन हमारे खाते में 86,400 सेकेंड देता है जिसका उपयोग ना किया जाय तो वो व्यर्थ हो जाता है।
किसी अच्छे विषय को लेकर चर्चा करो तो अक्सर लोग कहते है कि मेरे पास समय नहीं है। दरअसल वो लोग समय का बहाना बनाकर यह बताना चाहते है वो कार्य उनकी प्राथमिकता सूची में है। ये सारा काम प्राथमिकता का होता है। समय किसी के पास नहीं रहता है, उसे मैनेज करना पड़ता है। प्राथमिकताएं तय करनी पड़ती है, कौन सा काम मेरे लिए इंपॉर्टेंट है, कौन सा नहीं, किससे मुझे ज्यादा लाभ मिलने वाला है, कौन सा काम मुझे बहुत आगे ले के जा सकता है। सामने आ रही अवसरों को नुकसान, फायदा, कम फायदा और ज्यादा फायदे के मानकों पर जांचना होगा। दिन शुरू होने से पहले दिन को खत्म कर लेना चाहिए।
तो वर्ष 2023 में समय के महत्व को समझकर प्रयोग करने है।
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