बुधवार, 30 अगस्त 2023

वारेन बफेट के तरीके से वेल्थ क्रिएशन कीजिए


इस दुनिया मे हर कोई अमीर बनना चाहता है। लेकिन लोग अमीर नहीं बनते है। पहले तो कुछ लोग स्वीकार ही नहीं करते है कि वो बहुत ज्यादा पैसा कमाना चाहते है। दूसरी तरफ कुछ लोग यह सोचते है कि पैसा एक समय बाद खोने के भय से भी कदम नहीं उठाते है। अमीर बनने के बहुत से रास्ते है जिसमें एक रास्ता है बचत और निवेश का। यानी जो कमाइए उसे बचाइए और साथ में निवेश भी कीजिए।
इस रास्ते से वो सभी लोग अमीर बन पाते है, जो पैसों की तो बचत करने के साथ साथ सही जगह पर निवेश भी करते है। दुनिया के सबसे अमीर लोगों की सूचि में शामिल वॉरेन बफेट एक ऐसे ही व्यक्ति है जिसे पूरी दुनिया के निवेशक फॉलो करते है। आज इनका 93वां जन्मदिन है और इस दौरान इन्होने शेयर मार्केट में निवेश करके अपनी संपत्ति को कई गुना बढाया है। इनका निवेश यात्रा बहुत ही आसान और साधारण है लेकिन उसका पालन कर पाना बेहद कठिन क्योंकि यह बोरिंग और निष्क्रिय रहने वाला है।  दुनिया भर के निवेशक इनके कोटेशन का उल्लेख बार बार करते है लेकिन पालन मात्र 100 में से 2/3 लोग ही करते है। इसी कारण निवेश की दुनिया में बड़ी संपत्ति भी बहुत कम लोग ही बना पाते है। एक बार इनसे पूछा गया था कि आपकी यात्रा इतनी सरल है फिर सभी लोग वेल्थ क्यों नहीं बना पाते तो उन्होंने कहा था कि इसलिए क्योंकि लोग धीरे धीरे अमीर नहीं होना चाहते।

बहरहाल आईये उनके कुछ विचारों को जानते है और यदि इनके एक भी विचार क्लिक कर जाय तो आने वाला भविष्य बहुत कुछ बदल सकता है 

1- कभी भी एक इनकम के स्रोत पर निर्भर न रहे –
अगर हम एक आय पर निर्भर है तो उससे प्राप्त कमाई से हम अपने महीने का केवल खर्चा चला सकते है और उसी महीने के खर्चे मे आपका सारा पैसा खतम हो जाएगा। इसी समस्या का निवारण करने के लिए आपको अपने नौकरी या बिज़नेस के साथ दूसरे छोटे मोठे कोई काम भी करना होगा।

2- पैसों की बचत करे –
अपने आय का एक निश्चित हिस्सा अवश्य बचत करना चाहिए जानकारों के अनुसार अपनी आय का कम से कम 20% तो बचाना ही चाहिए।  पैसे खर्च करके पैसों की बचत करने से अच्छा है पैसों की बचत करके पैसे खर्च करे। अगर हर महीने कुछ बचत करते है तो कुछ सालों बाद अच्छी धनराशी बन जाएगी जिसे किसी अच्छी जगह पर निवेश हर महीने एक अच्छी पैसिव आय ली जा सकती है।

3-पैसे सही जगह पर खर्च करे –
अगर हम ऐसी चीजों को खरीद रहे है जिन चीजों की अभी जरूरत नहीं है, तो भविष्य मे हमें जरूरती चीजों को बेचना पडेगा। कोई चीजे होने के बावजूद भी अगर बिना जरुरत महंगी चीजों को खरीद रहे है तो नुकसान झेलना पड सकता है। यहां निवेश के सही जगह से आशय निवेश का सही साधन, लोग अपने निवेश को एफडी, रियल एस्टेट, जीवन बीमा जैसे जगहों पर निवेश करते है जबकि सही निवेश की जगह स्टॉक मार्केट को समझने की कोशिश ही नहीं करते।

4-बिज़नस मे कभी भी सौ प्रतिशत रिस्क न ले –
किसी भी बिज़नस मे सौ प्रतिशत रिस्क मतलब किसी भी बिज़नस मे अपना सारा धन निवेश नहीं करना चाहिए। अगर आप एक ही बिज़नस मे सारे पैसे निवेश करते है और अगर कुछ महीने बाद उस बिज़नस मे नुकसान हो जाता है तो हम पूरी तरह से बिखर सकते है, और कुछ भी नहीं बचेंगे जिस से कोई बिज़नस शुरू किया जा सके। 

5- सारे अंडे को एक ही टोकरी के नीचे न रखे।
अगर हम अपने सारे पैसे एक ही बिज़नस/स्टॉक/सेक्टर मे निवेश करते है तो भी नुकसान झेलना पड सकता है। एक अच्छी इनवेस्टमेंट करने के लिए मार्केट का ज्ञान होना जरूरी है, बिज़नस के उतार चढ़ाव के बारे मे जानकारी होनी जरूरी है।

6- निवेश का लक्ष्य बनाइए: करते वक्त जरूरी है कि दिमाग में कोई न कोई प्लान हो यानी बिना लक्ष्य के निवेश करना सही नहीं. सोच समझकर निवेश करने के बाद जरूरी है कि नतीजों के लिए धैर्यपूर्वक इंतजार किया जाए. बफे के अनुसार स्टॉक मार्केट एक ऐसा उपकरण है जो गैर अनुशासित (निवेशक) के हाथों से पैसा लेकर धैर्य/अनुशासन रखने वाले (निवेशक) को पैसा देता है.

7- कीमत वह चीज है जिसे हम चुकाते हैं लेकिन मूल्य वह चीज है जो बदले में हमे मिलती है. मूल्य के पीछे भागें, कीमत के पीछे नहीं. निवेश के मामले में ही नहीं बल्कि पैसा कमाने के अन्य तरीकों पर भी लागू होता है.

8- प्रतिष्ठा बनाने में 20 साल लग जाते हैं और इसे बरबाद करने में पांच मिनट लगते हैं. अगर इस बारे में हम सोचना शुरू कर देंगे तो जो भी कुछ करेंगे अलग तरीके से करेंगे.

9- अमीर व्यक्ति 'समय' में इन्वेस्ट करता है जबकि गरीब व्यक्ति पैसे में निवेश करता है. बफे वक्त को बेहद कीमती मानते हैं, किस चीज या काम को कितना वक्त देना है, यही मैनेजमेंट व्यक्ति को आगे ले जाता है. हर व्यक्ति को 24 घंटे ही मिले होते हैं और हर कोई इन घंटो का इस्तेमाल अपने हिसाब से करता है. सही तरह से वक्त का किया गया इस्तेमाल सही इन्वेस्टमेंट है.

10- दीर्घ काल के लिए निवेश करना है  
बफे के अनुसार अच्छी कमाई के लिए लंबे समय तक निवेश को बनाए रखना जरूरी है. किसी भी शेयर के प्रदर्शन को थोड़े समय में आंका नहीं जा सकता. 

11-जिस बिजनेस को समझते है उसी में निवेश करनी चाहिए, जो समझ में न आवे उसमे कभी भी पैसा नहीं लगाना चाहिए 

12-स्टॉक मार्किट में खरीदारी तब करनी चाहिए जब सभी लोग बेच रहे हो और भय का वातावारण हो क्योंकि उस समय अच्छे बिजनेस फेयर वैल्यू पर मिलते है

प्रश्नों का स्वागत है।

बुधवार, 19 जुलाई 2023

स्टॉक मार्केट में सफलता का आसान तरीका

शेयर मार्केट में जोखिम सबसे बड़ा कारक होता है जिससे सामान्य लोग दूरी बनाए रखते है। स्टॉक मार्केट के संबंध में मेरा मत है कि जीवन में जितनी भी हम गलतियां करते है उसमें से सबसे बड़ी गलतियों में से एक आता है शेयर बाजार को न समझना। सारा जीवन हम पैसे कमाने के चक्कर में भागते रहते है लेकिन कभी पैसे के प्रति अपनी समझ को नहीं बढ़ाते। 
 बहरहाल यहां स्टॉक मार्केट में सफलता पाने का कुछ तरीका बता रहे है जिसे समझकर एक सामान्य आदमी भी आगे बढ़ सकता है। 

1) फ्यूचर/ऑप्शन नही करना है क्योंकि यदि इस सेगमेंट को जुआ कहा जाय तो कोई आश्चर्य नहीं होगा। थोड़ा पैसा लगाकर ज्यादा पैसा कमाने के चक्कर में लोग इस सेगमेंट में प्रवेश करते है और नुकसान उठाकर बाहर हो जाते है।इस सेगमेंट में लाभ कमाने वाले शायद ही कोई दिखे क्योंकि इस सेगमेंट में काम करने के लिए जिस स्तर की जानकारी, अनुभव, अनुशासन, पैसा, समय, सतर्कता चाहिए वो एक रिटेल निवेश के वश के बाहर की होती है। इस प्रकार इस सेगमेंट से दूर रहना श्रेयस्कर होता है।

2) इंट्रा डे नहीं करना है। यदि इंट्रा डे को भी जुआ कहा जाय तो कोई आश्चर्य नहीं होगा। जितना ही समय कम होता जाता है स्टॉक मार्केट की भविष्यवाणी उतनी ही कठिन होती जाती है। बहुत सारे लोगों को लगता है कि स्टॉक मार्केट से रोज पैसा निकाला जा सकता है जो कि उनका भ्रम होता है। इस सेगमेंट में भी काम करने के लिए जिस स्तर की जानकारी, अनुभव, अनुशासन, पैसा, समय, सतर्कता चाहिए वो एक रिटेल निवेश के वश के बाहर की होती है। 
     नंबर 1 और 2 सेगमेंट ब्रोकर के लिए सबसे अधिक लाभ वाला सेगमेंट होता है इसलिए इस उनके द्वारा सबसे अधिक प्रमोट किया जाता है, हम जितना पैसे देते है उससे कभी अधिक आकार में सौदे करने के अवसर प्रदान किए जाते है। जैसे हम 50 हजार रुपए उन्हे देते है उसका 3 से 5 गुना से भी अधिक रुपए के सौदे करने का लालच दिया जाता है। हम बड़े सौदे ये सोचकर करते है की लाभ भी अधिक होगा जबकि होता उलटा है। इसलिए नुकसान बहुत अधिक हो जाता है। हम लोग चाहे स्टॉक खरीदे या बेचे, ब्रोकर को दोनों तरफ से फायदा होता है। हम सभी अपने ट्रेडिंग का बड़ा हिस्सा ब्रोकरेज में से देते है। इस प्रकार दोनों से ही दूर रहना सही होता है।

3) जितना पैसा हो उतने का ही सौदा करना है।  ये सफलता का एक बड़ा आधार है। जितना हमारे पास पैसे हो उतने का ही सौदा लेना चाहिए। इससे क्या होगा कि मार्केट के अचानक दूसरी दिशा में जाने पर हमें ब्रोकर को पैसे नहीं देने होते है। फिर एक समय बाद वो स्टॉक ऊपर आ जाता है। दूसरी चीज कोई उधार और कर्ज लेकर ट्रेडिंग भी नहीं करना है।

4) इसके साथ जिन पैसे के साथ शर्त जुड़ी हो उसे भी यहां लगाने से बचना चाहिए। जैसे 1 को सैलरी हमारे खाते में आती है और कोई 15 को ईएमआई जाती है तो हमें लगता है कि 15 तक ये पैसा बेकार में खाते में पड़ा हुआ है क्यों न इसे ट्रेडिंग में लगा दे। ये एक घातक निर्णय होगा क्योंकि इससे दोहरा नुकसान होने की आशंका बढ़ जाती है।

5)  इन्वेस्टमेंट कम ट्रेडिंग करना है इसका मतलब है कि अच्छे स्टॉक को चुनकर इन्वेस्टमेंट करने है तथा ट्रेडिंग भी करनी है तो स्विंग ट्रेडिंग करना है। स्विंग ट्रेडिंग में मतलब सौदे को एक से अधिक दिन तक होल्ड करना। कुल मिलाकर हमें इन्वेस्टमेंट यानी लॉन्ग टर्म के उद्देश्य से पैसे लगाने है तथा शॉर्ट टर्म मे कोई अवसर दिखे या बहुत ज्यादा प्रॉफिट दिखे तो ट्रेडिंग भी करनी चाहिए। कुल मिलाकर यह है कि हमें ज्यादा से ज्यादा फोकस लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट को करना है जबकि ट्रेडिंग कम करनी है। पैसे की बात की जाय तो कितना पोर्टफोलियो साइज हो उसका 10/20% हिस्सा ट्रेडिंग के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। जिसके लिए स्माल कैप और पैनी स्टॉक से दूरी रखनी है।

6) अच्छे स्टॉक की सूची बनाइए
पिछले कुछ सालों से मार्केट को आउट परफॉर्म करने वाले अपने पसंदीदा 15/20 स्टॉक की वॉचलिस्ट बनाना है। जैसे एचडीएफसी, hdfc bank, रिलायंस इंडस्ट्री, टीसीएस, एशियन पेंट, टाइटन, बजाज फाइनेंस, पिडिलाइट, एस्ट्रल, हैवेल्स, वरुण वेबरीज, हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसे स्टॉक के पिछले 10 सालों के प्रदर्शन को देखेंगे तो पाएंगे कि ये स्टॉक मार्केट के सबसे मजबूत स्टॉक है जिसमें साल में 2/3 बार एंट्री/exit के मौके मिलते है। जब जब ये स्टॉक नया ऊंचाई बनाते है वहां बेचकर नीचे आने पर फिर खरीदारी के लिए प्रयास किया जा सकता है। यहां यह ध्यान देना है कि यदि वो स्टॉक निफ्टी 50 और निफ्टी नेक्स्ट 50 के हो तो ज्यादा सही रहेगा। क्योंकि वो स्टॉक फंडामेंटल तौर पर बहुत स्ट्रॉन्ग होते है। जब नीचे आये खरीदो और जब नईं ऊंचाई को जाए बेचो ।

7) खरीदने बेचने के सही लेवल क्या हो
इस के लिए स्टॉक का  10/20/50/ 100/200 दिन के मूविंग एवरेज को आधार बनाना चाहिए। 

8) अगर नीचे खरीदा है और वहाँ से और नीचे आ गया है तो इन्वेस्टमेंट समझ के भूल जाओ थोड़े दिनों में ऊपर आ जाएगा

9) इस पूरी प्रक्रिया को अनुशासन के साथ बार बार करते करते अपने ट्रेडिंग/इन्वेस्टमेंट आइडियोलॉजी का  एक्सपर्ट बनना है।

10) फाइनेंस को ठीक से समझने के लिए लगातार सीखते रहना है। सफल लोगों के ट्रेडिंग/,इन्वेस्टमेंट आइडियोलॉजी को समझते रहना है। 

फिर एंजॉय कीजिए वेल्थ को

शनिवार, 15 जुलाई 2023

हम अपनी आदतों से अपना व्यक्तित्व बनाते है

हमारा व्यक्तित्व हमारे आदतों का प्रतिफल होता है

क्या आपने ध्यान दिया है कि हम अपने कार्य सालों से एक ही जैसा करते आए है। नहीं ध्यान दिया है, ध्यान दीजिए। क्या रोज सुबह जागने के बाद एक ही जैसे ब्रश पकड़ते है, एक ही जैसे पेस्ट लगाते है, एक ही जैसे रोज ब्रश करते है, रोज एक ही जगह बैठकर पेपर पढ़ते हैं। मतलब सुबह से लेकर शाम तक जो भी कार्य करते है, सभी रोज की तरह एक ही जैसे होते है। एक नशेड़ी रोज संकल्प लेता है नशा छोड़ने का लेकिन जैसे ही शाम यानी नशे का समय होता है, नशा ले ही लेता है। ऐसा क्यों ? क्योंकि जब वो नशा छोड़ने का संकल्प करते वक्त एक आम व्यक्ति होता है लेकिन जब समय आता है तो वो अपनी आदतों का गुलाम होता है। क्योंकि वो "बेसल गेंगलिया" के प्रभाव में होता है। जब हम इसके प्रभाव में रहते है तो हमें गलत सही, वादे, संकल्प का कुछ भी बोध नहीं होता। 

बेसल गेंगलिया होता क्या है
आज और अभी इसे लेकर गूगल पर पढ़िए और इसके महत्व को समझिए। दरअसल हमारे मस्तिष्क में एक प्याज जैसे शक्ल का एक अंग होता है जहां से हमारे मस्तिष्क के कार्यों का निर्धारण होता है। 
जब हम कोई कार्य किसी समय विशेष में लगातार करते है तो वो हमारे बेसल गेंगलिया में स्टोर होता जाता है और एक समय बाद जैसे ही वो समय आता है बेसल गेंगलिया हमारे दिमाग को वही कार्य करने का आदेश देता है। उस समय आदमी स्वाभाविक रूप से वही कार्य करता है, हम गलत चीज स्टोर करेंगे तो गलत काम करेंगे और सही कार्य स्टोर करेंगे तो सही कार्य करेंगे। अब हमारे उपर निर्भर करता है कि अब यहां किस तरह की आदतों को स्टोर करते है। अच्छा करेंगे तो व्यक्तित्व अच्छा बनेगा और खराब आदतें डालेंगे तो व्यक्तित्व खराब बनेगा।
 मनोविज्ञान के अनुसार एक नई आदत बनने में 21 दिन लगते हैं। यानी अच्छे व्यक्तिव की जो आदतें है उन आदतों को 21 दिन लगातार करने पर वो स्वचालित हो जाएगा। तो आइए जानते है कुछ ऐसी छोटी आदतों के बारे में जिसे अपनाकर बेहतर स्थिति में पहुंच सकते है। छोटी छोटी चीजें एक दिन बड़ा नतीजा देती है। कुछ छोटी आदतें इस प्रकार है जिसे बेसल गेंगलिया में स्टोर करना है 

 1. सूर्योदय से पूर्व जागना है क्योंकि सबसे उत्तम समय होता है पूरे दिन की अच्छी शुरुआत की।

 2. जागने के उपरांत सर्वप्रथम ईश्वर को धन्यवाद देना है। अपने जीवन, अपने पास उपलब्ध संसाधनों, परिजनों, मित्रों और जिनके कारण भी हमारा जीवन सहज और सुखद होता है, सभी के लिए ईश्वर को धन्यवाद देना है।

3. आत्म विकास, अध्यात्म, व्यक्तित्व विकास, फाइनेंस आदि से संबंधित पुस्तकों का एक अध्याय पढ़ना है। हो सके तो उसे लिखना है और लोगों के मध्य शेयर भी करना है।

 4. कम से कम 30 मिनट टहलने और योग/व्यायाम करना है

 4. न्यूट्रीशन से भरपूर संतुलित नाश्ता करना है और भोजन जीभ के अनुसार नहीं अपितु शरीर की जरूरतों के अनुसार करना है। 

 5. 5 मिनट के लिए अपने भविष्य के व्यक्तित्व और सपनों की कल्पना करना है

6.किसी भी विषय पर तत्काल प्रतिक्रिया देने से बचना है, संदर्भ प्रसंग के बारे में जानना, समझना और विचार करना है, उसके बात कोई प्रतिक्रिया देने है

 7. रोज कुछ नया सीखना है, नए लोगों से मिलना है और रोज शाम को सोने से पूर्व उसे एक बार स्मरण कर लेना है। 

क्या इनमें से कोई आप आज से लागू करेंगे?
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सोमवार, 10 जुलाई 2023

जीवन बीमा एक निवेश उत्पाद नहीं है

आज सुबह सुबह एक हमारे परिचित एलआईसी एजेंट नाराज हो गए और बहस कर लिए। मन बड़ा दुखित हुआ कि क्या सोचे और क्या हो गया। वैसे मेरी भी गलती थी बल्कि मेरी ही गलती थी जिसके लिए उनसे क्षमा भी मांग ली लेकिन मुझे पता है कि उनका जो स्वभाव है वो इसे गांठ बांधे रखेंगे। 
  बहरहाल विषय पर आते है। अपने सोशल मीडिया वाल पर उन्होंने किसी पेंशन प्लान को पोस्ट किया था जिसका स्क्रीन शॉट यह है
इस पोस्ट में शुद्ध रूप से एक निवेश योजना का उन्होंने उल्लेख किया था और निवेशकों के लिए निवेश के लिए क्या बेहतर विकल्प हो सकते है, उसके लिए मैने ये टिप्पणी किया जिसके लिए वो बेहद नाराज हो गए।
बीमा योजना में कुल कितना लाभ होगा
  मैने लिखा कि 300 रु प्रतिदिन मतलब महीने का 9000 और 15 सालों तक जमा करने पर कुल 16.20 लाख रुपए जमा होंगे। 15 वे साल बाद हर माह 10000 रु निवेशक को मिलेंगे और मैच्योरिटी पर 1.8 करोड़ देगी। यदि हम ये मान ले कि एक व्यक्ति की उम्र 100 साल तक रहेगी तो एक 30 साल वाला आदमी स्टार्ट करता है और 100 की उम्र तक कुल लाभ होंगे 2.46 करोड़। बाद में उनसे फोन पर बातचीत में उन्होंने ये बताया कि 10 लाख का रिस्क कवर भी रहेगा।
अब इसी को टर्म इंश्योरेन्स और म्यूचुअल फंड के साथ लेने पर देखते है 
 एक 30 की उम्र वाले व्यक्ति को 20 हजार रु की प्रीमियम पर आसानी से 50 लाख का टर्म इंश्योरेंस मिल जाएगा। 9000 प्रति माह की एलआईसी प्रीमियम में से 1500 प्रति माह टर्म इंश्योरेंस की प्रोमियम के लिए निकाल लेते है। अब जो बचा है 7500 इसे म्यूचुअल फंड की किसी मिड और लार्ज कैप सेगमेंट की स्कीम में SIP करते है। म्यूचुअल फंड 15 सालों की अवधि में आसानी से 15% सीएजीआर दे देगा। इस प्रकार 15 सालों में कुल जमा रकम होगी 13.50 लाख जिसकी वैल्यू होगी 46.30 लाख रुपए। 

अब हम पेंशन की बात करेंगे
ज्यादा रकम जमा कर प्रति माह पेंशन लेने के लिए SWP स्कीम सही रहता है।
और यहां से इसे उसी फंड में SWP करे और हर माह 45 हजार लिया जाय और 100 साल की उम्र पूरी होने पर पैसा मिल चुका होगा 2.97 करोड़ निकाल चुके होंगे और फंड की फाइनल बैलेंस रहेगी 164 करोड़ से भी अधिक। 
हमें कैसे फायदा अधिक हुआ
1. रिस्क कवर 10 लाख से बढ़कर 50 लाख हो गया
2. पैसा इक्विटी में लगने के कारण तीव्र ग्रोथ मिलता है
3. अंततः फायदा बहुत अधिक हुआ बल्कि 50 गुना से भी अधिक का फायदा हुआ है।

क्या सहन करना है
चूंकि पैसा म्यूचुअल फंड में लग रहा है जो स्टॉक मार्केट आ डायरेक्ट कनेक्ट है तो उतार चढ़ाव का होना स्वाभाविक है। इस उतार चढ़ाव रूपी रिस्क को टाइम आ खत्म किया जा सकता है। यानी समय जितना ही अधिक जोखिम उतना ही कम होता है।

तो पोस्ट कैसा लगा अवश्य टिप्पणी करे। और अधिक जानकारी के लिए मेरे whatsaap number 7272957000 पर संपर्क कर सकते है।

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रविवार, 9 जुलाई 2023

फिटनेस एक यात्रा है पड़ाव नहीं

मैं पहले ऐसा दिखता था। अब से लगभग 4 साल पहले काफी अधिक वजन हो चुका था। 100 किलो के उपर वजन, कमर दर्द, भयंकर खर्राटे और सायटिका की समस्या से पीड़ित। लेकिन यह मुझे पता नहीं था कि यह समस्या मेरे अधिक वजन के कारण है। सत्य तो यह है कि पहले मुझे इस चीज का बोध भी नहीं था कि ज्यादा वजन जैसा कोई विषय भी होता है, पहले तो यही पता था कि एक मोटा आदमी होता है और दूसरा पतला। भला हो जो मैं न्यूट्रीशन क्लब पहुंच गया और पता चला कि ऊंचाई के अनुसार एक आदर्श वजन भी होता है। मेरी पत्नी की भी सेहत बहुत खराब थी। डॉक्टर को दिखाते दिखाते परेशान हो गया था एक साल तो अलग अलग डॉक्टर्स की सलाह पर 3 बार एमआरआई तक करानी पड़ी। लेकिन कोई लाभ नहीं होता था।
   11 दिसंबर 2019 को लखनऊ के स्मृति विहार पार्क में मेरी पत्नी को एक अनजान महिला मिली जिनके माध्यम से एक हेल्थ क्लब में आमंत्रित किया गया। मन में इसे लेकर ढेर सारे भ्रम थे जिससे जाने को तैयार ना था लेकिन पत्नी की जिद के चलते गए। वहां जाकर पता चला कि मेरी ऊंचाई 6 फिट 2 इंच के सापेक्ष 80  किलो के आस पास होना चाहिए। वहां पर चाय की जगह एक विशेष ड्रिंक दिया गया और नाश्ते में भी बहुत ही स्वादिष्ट और मीठा ड्रिंक दिया गया जो शरीर की जरूरतों के अनुसार एक बैलेंस डाइट थी। उस  ड्रिंक के अगले 4 घंटे कुछ भी खाना नहीं था, यहां तक कि एक बिस्किट भी नहीं। और हुआ भी ऐसा ही। पहले दिन ही क्लब का माहौल बहुत अच्छा लगा और ज्वाइन करने का निर्णय लिया। यकीन मानिए देखते देखते लाइफ चेंज हो गई। 
 जैसे जैसे मेरे कोच द्वारा खान पान और लाइफ स्टाइल में बदलाव कराए गए उसे आंख बंद करके फॉलो करते गए और 5 से 6 माह में मैने 20 किलो और मेरी पत्नी ने 24 किलों का वेट लॉस किया। पिछले 3 सालों से मैं सपत्नीक उस क्लब का हिस्सा बने हुए है और अब तक 200 से अधिक लोगों की लाइफ चेंज करने में मदद कर चुके है।
अब ऐसा हो गया हूं 
उस क्लब में मुख्य फोकस कैलोरी मैनेजमेंट कराया जाता है। मै आज भी दिन भर में जो कुछ खाता पीता है उसके एक एक कैलोरी का ध्यान रखता हूं।
   लोगों द्वारा अक्सर मुझसे पूछा जाता है कि आपने इसे कैसे किया है। मैं उनसे कहता हूं आप दिन में बार बार क्या खाते हैं उससे मिलने वाली कैलोरी को ध्यान देंगे तो निःसंदेह फिट रहना बेहद आसान है। सबसे बड़ी बात मैं भरपूर खाता हूं, भरपेट खाता हूं, शाकाहार में सबकुछ खाता हूं, मांसाहार कभी कभार ही होता है, महीने में एक या दो बार, वैसे भी मांसाहार मुझे बहुत ज्यादा पसंद नहीं है। मिठाई भी खाता हूं, मक्खन भी खाता हूं, दही भी खाता हूं, पराठा और पूड़ी भी खाता हूं, दूध भी पीता हूं, घर का बना शुद्ध घी भी लेता हूं। लेकिन कैसे खाता हूं, कितना खाता हूं और किस समय खाता हूं, यह जरूर ध्यान देता हूं।
  मैं अपनी पोस्टों में कहता रहता हूं कि वजन ऊंचाई के अनुसार असंतुलित रहना एक दिक्कत की बात है। वजन ज्यादा होने से लाइफ स्टाइल रोगों को हम आमंत्रित कर रहे होते है। कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, घुटने दर्द, फैटी लीवर, ब्लड प्रेशर जैसे रोग होने की आशंका बहुत बढ़ जाती है। 
वजन को समझना है
किसी भी शरीर के वजन के मुख्य रूप से 4 भाग होते है
1. हड्डियों का वजन जो कि एक समय बाद स्थिर रहता है
2. मसल्स और ऑर्गन के वजन
3. फैट का वजन और 
4. पानी का वजन 
उपरोक्त में से हड्डी और पानी की मात्रा/ वजन में हम छेड़ छाड़ नहीं कर सकते तो हमारे लिए बचता है मसल्स और फैट और हमारा वजन इन्ही में संतुलन के कारण खराब होता है।
 वजन कैसे बढ़ता है 
इसे समझने के लिए पहले हमें बीएमआर को समझना होगा। बीएमआर का मतलब है बेसल मेटाबॉलिक रेट है। शरीर को चलने के लिए दिन भर जितनी कैलोरी उर्जा की जरूरत पड़ती है उसे बीएमआर कहते है। यानी दिन भर कुछ न किया सिर्फ सोया जाय तब भी शरीर की अंदर की गतिविधियां चलती रहती है जिसके लिए जितनी ऊर्जा की जरूरत होती है वो बीएमआर हो जाती है।  शरीर में भोजन, ऊर्जा के रूप में परिवर्तित होना, मेटाबॉलिज्म कहलाता है। इसे रेस्टिंग मेटाबोलिक रेट के रूप में भी जाना जाता है। 
 सामान्य तौर अब हमें दिन भर में कितनी कैलोरी का भोजन लेना है ये इसी बीएमआर पर निर्भर करता है। बीएमआर पता करने के लिए नीचे एक बीएमआर कैलक्यूटर दिया गया है जिसमें हाइट और वेट डालकर पता किया जा सकता है।

https://www.calculator.net/bmr-calculator.html

एक सामान्य व्यक्ति को जितनी बीएमआर निकलकर आती है उसका 10/20% अधिक की कैलरी का इंटेक करना चाहिए। जब यही इससे अधिक हो जाता है तो वो कैलोरी जो बर्न नहीं हो पाती है शरीर में इकट्ठा होने लगती है जो मोटापा का रूप लेकर आती है। लगभग 7000 कैलोरी अतिरिक्त जब शरीर में जमा हो जाता है तो 1 किलो वजन बढ़ जाता है। वजन प्रबंधन का राज इसी कैलोरी प्रबंधन में छुपा हुआ है।
 जिसे वजन घटाना है उसे अपने बीएमआर से कम कैलोरी लेनी है और जिसे बढ़ाना है बीएमआर से ज्यादा कैलोरी लेना है। यदि प्रतिदिन 500 कैलोरी कम लेते है तो 30 दिन में लगभग 15000 कैलोरी हो जाती है जिससे 2 किलो से उपर के वेटलॉस होती है।
वजन ज्यादा होने का नुकसान कैसे होता है 
होता क्या है हमारे खान पान और लाइफ स्टाइल बहुत खराब हो गई है। अब बैठकर ज्यादा काम किया जाता है जिससे शारीरिक एक्टिविटी बहुत कम है जिससे कैलोरी बर्न नहीं हो पाती हैं। दूसरी तरफ हम लोगों के खान पान में ऑयली और फास्ट फूड अधिक हो गया है साथ में भोजन में स्वाद को तरजीह देने के कारण बहुत सारे केमिकल और मसाले प्रयोग हो रहे है जिससे एक तो कैलोरी बढ़ रही है, दूसरी तरफ पोषण वैल्यू भी गिर रही है। हमारे खान में खराब फैट अधिक हो गया है और प्रोटीन कम और जो प्रोटीन लिया भी जा रहा है वो एनिमल आधारित है जिसके बहुत सारी खराबिया आती है। तो इस तरह हम फैट अधिक और प्रोटीन कम ले रहे है। हमारे ऑर्गन प्रोटीन के बने होते है और प्रोटीन कम होने के कारण वो कमजोर हो रहा है। फैट अधिक होने के कारण ऑर्गन पर एक परत जमा हो रही है और धीरे धीरे ऑर्गन के अंदर भी जा रहा है जिससे ऑर्गन की कार्य क्षमता कमजोर हो रही है जिससे बहुत सारे रोग हो रहे है। लीवर फैटी हो रहा है, थायराइड हो रहा है, डायबिटीज हो रही है।

वजन नियंत्रित करने की यात्रा में प्रोटीन का इंटेक बढ़ाते है जबकि फैट को कम करते है।
एक व्यक्ति को एक किलो वजन पर सामान्य तौर पर 1 ग्राम प्रोटीन लेने चाहिए, यानी एक 50 किलो वजन वाले व्यक्ति कम से कम 50 ग्राम प्रोटीन तो लेना ही लेना चाहिए। प्रोटीन शरीर का बिल्डिंग ब्लॉक है और ये पहली जरूरत है। प्रोटीन का जो मुख्य स्रोत है उसमें दालें, दूध, अंडा, सोयाबीन आदि से मुश्किल से एक व्यक्ति को जरूरत का आधा भाग भी मिल नहीं पाता है। तो हमारे हेल्थ क्लब में जिस तरह के खान पान को निर्धारित किया जाता है उसमें पहली चीज प्रोटीन बढ़ाई जाती है और खान पान से फैट कम कराया जाता है जिसे ओवर आल फैट लॉस/वेटलॉस होने लगता है।

शरीर की रचना के महत्व को समझना है
ऐसा नहीं है कि सिर्फ पतले लोग फिट होते है। अक्सर हम लोग देखते है कि पतले लोग भी गंभीर रोगों का शिकार हो जाते है। दरअसल शरीर में फैट की मात्रा खतरनाक होती है। एक पतले आदमी में भी फैट की मात्रा मानकों से अधिक हो सकती है और एक ज्यादा वजन वाले व्यक्ति में फैट की मात्रा कम हो सकती है।

लखनऊ पुणे की यात्रा वृतांत

दिनांक 29.05.2023 को एक शादी में सम्मिलित होने के लिए जाना था। इसके लिए फरवरी माह में ही फ्लाइट का टिकट करवा लिया गया था। चूंकि बच्चो को पहले जाना था इसलिए उनका टिकट 24 मई का था और मेरा 27 को था। बच्चों को फ्लाइट इंडिगो में थी जो रात 9.50 पर लखनऊ से 12.00 तक पुणे पहुंचना था। 
मैने इस बार थोड़ा अलग तरीका अपनाया यात्रा ब्रेक करके टिकट किया। मैने एयर एशिया से टिकट कराया था जो रात में 9 बजे लखनऊ से 11 बजे के आस पास बैंगलोर पहुंचना और पुनः सुबह 4 बजे बैंगलोर से पुणे के लिए फ्लाइट थी। तो इस तरह से मैं ब्रेक जर्नी का अनुभव लेने के लिए ऐसे टिकट किया। 
   इस कार्य हेतु कार्यालय से 5 दिन की छुट्टी लिया था। बहरहाल निर्धारित तिथि 27 मई को शाम को 6 बजे बादशाह नगर रेलवे स्टेशन से मेट्रो पकड़कर चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट लखनऊ पहुंच गया। सबसे पहले बैग चेक इन किया तो वहां से जानकारी ली कि क्या हमें लगेज बैंगलोर में भी लेना पड़ेगा। उत्तर मिला नहीं, लगेज आपको सीधे पुणे में ही मिलेगा। बैंगलोर एयरपोर्ट पर आपको सिक्योरिटी चेक से गुजरना पड़ेगा।
दोनों जगहों का बोर्डिंग पास यहीं दे दिया गया लेकिन बंगलोर में किस गेट से फ्लाइट पकड़नी है, वो नहीं लिखा था। बताया गया कि वहीं पर पता चलेगा। खुशी हुई कि दोनों फ्लाइट में सीट खिड़की वाली मिली। लखनऊ में गेट नंबर 2 रहा जिससे गुजरकर बस में बैठकर फ्लाइट तक पहुंचाया गया। इस बीच सिक्योरिटी चेक में सीआईएसएफ द्वारा मेरे बैग के सेविंग किट में रखा कैंची निकलवा दिया गया जिसका मुझे मलाल हुआ। हालांकि वो कोई खास कीमती नहीं था लेकिन पैसे का नुकसान चल जाता है लेकिन वस्तु का नुकसान थोड़ा तकलीफ देता है।
जैसे ट्रेन की यात्रा में पीछे जाता पेड़, खेत, व्यक्ति, शहर देखना अच्छा लगता है ठीक उसी तरह फ्लाइट में जब विमान उड़ने के लिए रनवे पर स्पीड पकड़ती है और उड़ती है तो वो एक अनूठा अनुभव होता है। उसे बार बार लेने की इच्छा होती है। विमान धीरे धीरे चलकर रनवे पर आता है और अचानक अनाउंस के बाद स्पीड पकड़ती है। हां उस समय तेज आवाज बताने के लिए पर्याप्त होता है ईंजन की क्या हालत होगी। विमान उड़ान भरी और अपने प्यारे शहर को नीचे देखना आकर्षक लगा।

निर्धारित समय पर कैम्पा गौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, बैंगलोर पहुंच गया। एराइवल से बाहर निकलते हुए पूछ लिया कि किस तरफ से फिर इंट्री करनी है। एक बार को इच्छा हुई कि बाहर निकलकर बाहर का नजारा लिया जाय लेकिन इरादा त्याग दिया कि कौन रात में घूमेगा और फिर से इंट्री करने का निर्णय लिया। लेकिन जैसे ही इंट्री की ओर बढ़ा एयरपोर्ट की बनावट देखकर दिल बाग बाग हो गया। मन अतिशय प्रसन्न हुआ। विश्वास बहुत ही खुबसूरत बना है। दरअसल वहां दो टर्मिनल है। टर्मिनल 1 जो पुराना है और 2 जो हाल ही में बना है। मैं टर्मिनल 2 पर था। 
अंदर जाते समय गेट पर कहा गया कि इतनी जल्दी क्यों जा रहे है। मैने कहा कहां बाहर घूमूं, अंदर ही बैठा जाय। इस तरह पूरा प्रॉसेस करने के बाद अंदर आ गया और यह एयरपोर्ट अंदर से और भी खूबसूरत है।

रात में 12 सोचा पेट पूजा की जाय तो वहां के महंगे रेस्टोरेंट में सैंडविच और कॉफी लिया जो लगभग 900 रुपए का पड़ा। लेकिन ऐसी महंगाई सहन की जा सकती है।
गेट नंबर 5 से फ्लाइट में बैठना था जो सीढ़ियों से नीचे उतर कर था। मैने उपर ही बैठने का निर्णय लिया। गेट नंबर 12 के पास आराम कर कुर्सी रही जहां लेट गया और ब्लूटूथ लगाकर पसंदीदा गाने का  लेने लगा। सामने स्थित शीशे से एयरपोर्ट का पूरा नजारा दिख रहा था। कुछ देर बाद गेट नंबर 5 के पास ही आ गया। बैंगलोर एयरपोर्ट पर एक अच्छी चीज है और वो है कुर्सियों के बीच लगा चार्जिंग प्वाइंट और हमने मोबाइल चार्जिंग में लगाकर ऊंघने लगे। सामने बोर्ड पर तमाम फ्लाइट की जानकारी देखता रहा। 

इस गेट से एक हैदराबाद की भी फ्लाइट उड़ी थी। थोड़े देर बाद मेरी फ्लाइट की अनाउंस हुआ और हम लाइन में लग गए फ्लाइट में बैठने के बाद नींद आने लगी। निर्धारित समय पर पुणे पहुंच गया लेकिन वहां अनुभव बहुत कड़वा हुआ और वो अनुभव हुआ ओला कैब का।  दूरी मात्र 3 किलोमीटर की रही लेकिन क्या कहे  पहली चीज तो गाड़ी ही खराब रही बार बार बंद हो जा रही थी, दूसरी चीज बहुत देर तक इंतजार करवाया, बार बार बंद हो जाने के कारण कैब को गंतव्य से पहले ही छोड़ दिया लेकिन चार्ज हुआ 324 रुपए।

यहां पहुंचने के बाद पुणे शहर के सबसे अच्छे डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए लोकप्रिय स्थल जोशी फॉर्म पहुंचे। जहां बहुत ही ज्यादा मस्ती की गई। 


पुणे में घर में पली बिल्लियों से भी मित्रता हो गई।

3 दिन वहां व्यतीत करने के उपरांत वापस लखनऊ को आए। वापसी में इंडिगो से फ्लाइट थी जो रात 4 बजे जिसे पकड़ने के लिए रात 2 बजे ही घर से निकलना पड़ा था। 
और इस तरह सुबह 6 बजे तक लखनऊ चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट आ गए जहां लगेज लेने के बाद मेट्रो पकड़कर अपने घर आ गए। इस तरह यात्रा की समाप्ति हो गई।

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रविवार, 11 जून 2023

real estate vs equity

क्या आपने भी कोई ऐसा आकर्षक विज्ञापन देखकर रियल एस्टेट में इन्वेस्टमेंट किया है या करने जा रहे है तो सतर्क हो जाईएगा। क्योंकि ये लुभावना है जिसका वास्तविकता से उतना सही संबंध नहीं है, जितना आप समझते है।
  पिछले दिनों एक पुस्तक पढ़ रहा था "Coffee Can Investing" पढ़ रहा था जिसमें एक अध्याय था The Real Estate Trap जिसमें किस तरह से भारत का मध्यम  वर्ग रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट के जाल में फंसा हुआ है, विस्तार से वर्णन है। इस पोस्ट को पढ़ने वाले ज्यादातर लोगों ने निवेश के नाम पर कहीं न कहीं कोई प्लॉट ले रखा होगा। रहने के नियत से प्लॉट लेना तो सही है लेकिन निवेश के उद्देश्य से प्लॉट लेना उचित निर्णय नहीं होता है। अपने कुल पोर्टफोलियो का एक छोटा हिस्सा रियल एस्टेट का रख सकते है, बड़ा हिस्सा तो इक्विटी ही होनी चाहिए। नीचे 2017 के आरबीआई के आंकड़े को पाई चित्र के माध्यम से दिखाया गया है कि 77% पैसा रियल एस्टेट, 11% गोल्ड में और मात्र 5% फाइनेंशियल एसेट में लगा हुआ है। 

जैसे जैसे लोगों की जागरूकता फैल रही है ये फाइनेंशियल वाला हिस्सा बढ़ना ही है और जब बढ़ेगा तो सेंसेक्स और निफ्टी के भविष्य का अनुमान लगाया जा सकता है। जो स्टॉक मार्केट की ओर रुख नहीं करेगा वो एक बड़ी ऑपर्च्युनिटी से वंचित रहेगा। मान लीजिए आप स्टॉक मार्केट के उतार चढ़ाव से डरते है तो म्यूचुअल फंड का रास्ता अपनाए लेकिन निवेश जरूर करे। आज उसी पर बात करते है। हम विभिन्न मानकों पर परीक्षण करेंगे कि रियल एस्टेट सही है या म्यूचुअल फंड 

1) सबसे पहले रिटर्न की बात
2/3 साल पहले एक जानने वाले की प्लॉट की रजिस्ट्री हो रही थी। मुझे गवाही के लिए बुलाए थे। आर्थिक दिमाग खाली नहीं रहता, कुछ न कुछ खोज बिन करता रहता है। मैने  विक्रेता पक्ष से बात चीत से ज्ञात हुआ कि उन्होंने 2009 में उक्त प्लॉट को 350 रू प्रति वर्ग फिट के हिसाब से लिए थे और 10 सालों बाद 1100 के भाव से बेच रहे है। बड़े प्रसन्न थे कि 3/3.5 गुना रिटर्न मिल रहा था जो गणित के हिसाब से 10% भी सीएजीआर नहीं हो रहा था वहीं म्यूचुअल फंड के सामान्य सी योजना भी 14% से अधिक का सीएजीआर दे रही थी। उनके ज्ञान चक्षु खुले लेकिन मध्यम वर्ग का परंपरा से हट कर कदम उठाना सहज नहीं होता। ये रीयल एस्टेट में निवेश इच्छुक लोगों को मोटे मोटे अक्षरों में नोट कर लेना चाहिए कि यहां 7-11% से अधिक का रिटर्न नहीं मिलता है। यदि कोई विशेष बात हो जाय जैसे कोई उस प्लॉट के पास कोई योजना आ जाय या हाईवे निकल जाय तो थोड़ा बढ़ जाता है। दूसरी तरफ म्यूचुअल फंड में 14-17% रिटर्न पा सकते हैं जो चुने गए फंड पर निर्भर करता है। लंबे समय तक म्यूचुअल फंड में निवेश पर इससे भी अधिक शानदार रिटर्न हासिल कर सकते हैं क्योंकि इसमें पैसे कंपाउंडिंग होकर बढ़ते हैं जबकि रीयल एस्टेट में ऐसा नहीं है। 

2) हम लोग क्वांटिटी पर फोकस करते है, क्वालिटी पर नहीं
उपर के उदाहरण में विक्रेता को मात्रात्मक रूप से कितना फायदा हुआ है उसी को ध्यान दे रहा है और गुणात्मक रूप से कितना प्रति वर्ष ग्रोथ क्या हो रही है, उस पर ध्यान ही नहीं है। वहां रिटर्न ज्यादा इसलिए दिख रहा है क्योंकि इन्वेस्टमेंट अमाउंट भी तो बहुत ज्यादा हुआ है। 

3) कानूनी पेच
रीयल एस्टेट के साथ एक दिक्कत कानूनी पेच का आता है। अगर किसी प्रॉपर्टी के साथ कोई कानूनी दिक्कत आ गई तो यह मामला लंबे समय तक खिंच सकता है। इससे प्रॉपर्टी की वैल्यू भी कम होती है और हो सकता है कि पैसा लंबे समय तक फंसा रहे। वहीं दूसरी तरफ म्यूचुअल फंड को सेबी रेगुलेट करती है जिसके चलते इसमें कानूनी दिक्कतें आने की आशंका बहुत ही कम होती है।

4) निगरानी
 प्रॉपर्टी की नियमित रूप से निगरानी करनी पड़ती है। ऐसा अक्सर देखा जाता है कि लंबे समय तक उसे न देखिए तो कोई दबंग उस पर कब्जा कर लेता है जिससे छुड़ा पाना असम्भव हो जाता है। या फिर उसे भूमि को विक्रेता द्वारा किसी और रजिस्ट्री कर दी जाती है जो लंबे विवाद में फंस जाता है। इस प्रकार रियल एस्टेट की निगरानी काफी मुश्किल भरा होता है। वहीं दूसरी तरफ म्यूचुअल फंड में निवेश को ऑनलाइन जब चाहे ट्रैक कर सकते हैं कि आपका पैसा आपके लक्ष्य के हिसाब से बढ़ रहा है या नहीं।

5) पूंजी कितनी चाहिए
रीयल एस्टेट में निवेश के लिए ढेर सारे पैसे की जरूरत होती है जबकि म्यूचुअल फंड में छोटी सी राशि से भी शुरुआत की जा सकती है। म्यूचुअल फंड में महज 500 रुपये में भी एसआईपी शुरू कर सकते हैं जो हर महीने आपके बैंक खाते से अपने आप कटता जाएगा और कुछ समय बाद आपके पास अच्छी-खासी पूंजी तैयार हो जाएगी। हालांकि रियल एस्टेट में भी बहुत सारी ऐसी कंपनियां है जो एक छोटे टोकन अमाउंट लेकर एसआईपी के रूप में किश्त पर प्लॉट देती है लेकिन इस तरह से काम करने वाली ज्यादातर कंपनियां फ्रॉड का काम कर रही है। बहुत सारे भोले भाले लोग फंस जा रहे है।

6) टैक्स देनदारी
रीयल एस्टेट और म्यूचुअल फंड, दोनों में निवेश पर टैक्स बेनेफिट्स हासिल कर सकते हैं।कुछ म्यूचुअल फंड्स में सेक्शन 80सी के तहत 1.5 लाख रुपये तक की जमा पर टैक्स बेनेफिट्स हासिल कर सकते हैं। रीयल एस्टेट में इंडेक्सेशन के जरिए निवेशक टैक्स बचा सकते हैं। 

7) लिक्विडिटी
पैसे लगाने से पहले निवेशक लिक्विडिटी पर भी गौर करते हैं यानी कि जरूरत के समय कितनी जल्द उनके हाथ में नगदी आ सकती है। इस कसौटी पर म्यूचुअल फंड अधिक बेहतर है क्योंकि रीयल एस्टेट के निवेश से बाहर निकलना समय खाने वाला प्रोसेस है। आपको कम पैसे की जरूरत है और सोचते है कि उसका एक हिस्सा बेच दे, एक कमरा बेच दे तो असंभव है। इसके विपरीत म्यूचुअल फंड से आप जब चाहें घर बैठे ऑनलाइन और जितना चाहे उतना पैसे निकाल सकते हैं। रियल एस्टेट को निकलने कभी कभी महीनों लग जाते है। कुल मिलाकर लब्बो लुआब यह है लिक्विडिटी के मामले में रीयल एस्टेट फिसड्डी है। 

8) निवेश की प्रक्रिया
रीयल एस्टेट में निवेश के लिए कई प्रक्रियाओं और पेपरवर्क से गुजरना होता है। इसके अलावा निवेशकों को स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन चार्ज इत्यादि चुकाना होता है। ऐसे में यह काफी समय खाने वाला प्रोसेस साबित होता है। इसके विपरीत म्यूचुअल फंड में निवेश में मिनटों का ही समय लगता है। इसमें एसआईपी के जरिए निवेश करते हैं तो नियमित अंतराल पर आपके बैंक खाते से अपने आप पैसे कट जाएंगे और कोई अतिरिक्त खर्च भी नहीं है।

9) विशेषज्ञ की सेवाएं
म्यूचुअल फंड विशेषज्ञ द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाली सेवा है जो विभिन्न तरह के बिजनेस को चिन्हित करके स्टॉक चुनते है। हम छोटे से पैसे से ढेर सारे बिजनेस में इन्वेस्टमेंट करते है।

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स्टॉक मार्केट में पैसा कैसे बनता है ?
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स्वयं को आगे की ओर ले जाए

हम में से बहुत सारे लोग यह विश्वास ही नहीं कर पाते है कि हमारे साथ भी कुछ अच्छा हो सकता है।

यह एक कटु सच्चाई है कि हम जीवन भर स्वयं की क्षमताओं पर शक करते रहते हैं। अमुक कार्य मैं नहीं कर सकता, अमुक चीज मेरे लिए नहीं है, आदि संशय की स्थिति से बाहर निकलने व आत्म-विश्वास हासिल करने के लिए हमें अपने डर से छुटकारा पाना ही होगा। इसके लिए खुद को प्रशिक्षित करना जरूरी है। याद रखें, हमारे जीवन में जो कुछ भी है, वह हमारे आत्म-विश्वास और हमारी आस्था का ही परिणाम है। खुद में यकीन कैसे मजबूत किया जाए, इसके लिए बस ये कुछ कदम उठाकर देखिए।

सबसे पहले यह विश्वास करें कि यह काम संभव है। विश्वास करें कि हम इसे कर सकते हैं, चाहे कोई कुछ भी कहे या जीवन में हम जहां कहीं भी हों। 
दूसरा, उस कार्य का बिंब अपने मन में खड़ा करें और सोचें कि यदि हमनेे पहले ही यह सपना पूरा कर लिया होता, तो हमारा जीवन कैसा दिखता?
 तीसरा, हमेशा ऐसे कदम उठाएं, जो लक्ष्य की ओर जाते हों। 
चौथा, डर को अपने करीब नहीं आने दें।
पांचवां अपने समान विचार वाले समूह के लोगों के साथ रहे
छठवां मन को प्रेरणा और पसंदीदा क्षेत्र की जानकारी वाली पुस्तके, ब्लॉग, वीडियो को दिनचर्या में शामिल कीजिए।
 खुद पर यकीन पुख्ता करने के लिए हमें सबसे पहले यह विश्वास करना पड़ता है कि हम जो कुछ चाहते हैं, वह बिल्कुल मुमकिन है।
पहले वैज्ञानिक मानते थे कि इंसान बाहरी दुनिया से दिमाग को मिलने वाली सूचनाओं पर प्रतिक्रिया करता है, लेकिन अब हम जानते हैं कि पिछले अनुभवों के आधार पर हमारा दिमाग आगे की संभावनाओं, आशंकाओं के बिंब ग्रहण करता है, और उनके मुताबिक हम जवाबी कदम उठाते हैं। वास्तव में, हमारा मन एक ऐसा शक्तिशाली यंत्र है कि यह वह सब कुछ प्रदान कर सकता है, जो हम अपनी सकारात्मक अपेक्षा से चाहते हैं। हम जो चाहते हैं, वह होने जा रहा है, यह एक सकारात्मक अपेक्षा है, जिसे बनाए रखना चाहिए। यह मन का अनुशासन है। याद रखें, जब हम खुद पर भरोसा करने लगते हैं और मानते हैं कि सफलता संभव है, और उस पर कदम उठाने लगते हैं, तो हमारा जीवन जादुई रूप से आलोकित हो उठता है। लगने लगता है कि ब्रह्मांड हमारा मार्गदर्शन और समर्थन कर रहा है। तब हम सचेत और अवचेतन रूप में भी उन अवसरों को पहचानना शुरू कर देते हैं, जो आमतौर पर पहले नहीं दिखते थे। हमें यह बात याद रखनी चाहिए कि हम अपने लक्ष्य निर्धारित कर सकते हैं, इसे लेकर दिमाग में बिंब भी बना सकते हैं, पर तब तक कुछ नहीं होगा, जब तक कार्य नहीं करते। 
ज्यादातर लोग अपने सपनों को इसलिए साकार नहीं कर पाते, क्योंकि वे कदम नहीं बढ़ाते, और कार्रवाई न करने का सबसे बड़ा कारण डर है। भय सामान्य है, और जब तक आप कार्य शुरू नहीं करते, तब तक इसका साम्राज्य कायम रहेगा। कार्य शुरू करते ही भय भागने लगता है और भरोसा मजबूत होने लगता है।

मंगलवार, 24 जनवरी 2023

जीवन के हीरे हम पत्थर समझ कर फेंक तो नहीं रहे हैं ?


एक सुबह, अभी सूरज भी निकला नहीं था और एक मांझी नदी के किनारे पहुंच गया था । उसका पैर किसी चीज से टकरा गया, झुक कर उसने देखा, पत्थरों से भरा हुआ एक झोला पड़ा था। उसने अपना जाल किनारे पर रख दिया, वह सुबह सूरज के उगने की प्रतीक्षा करने लगा। सूरज उग आए, वह अपना जाल फेंके और मछलियां पकड़े। वह जो झोला उसे पड़ा हुआ मिल गया था, जिसमें पत्थर थे, वह एक-एक पत्थर निकाल कर शांत नदी में फेंकने लगा।

सुबह के सन्नाटे में उन पत्थरों के गिरने की छपाक की आवाज सुनता, फिर दूसरा पत्थर फेंकता। धीरे-धीरे सुबह का सूरज निकला, रोशनी हुई। तब तक उसने झोले के सारे पत्थर फेंक दिए थे, सिर्फ एक पत्थर उसके हाथ में रह गया था। सूरज की रोशनी में देखते से ही जैसे उसके हृदय की धड़कन बंद हो गई, सांस रुक गई। उसने जिन्हें पत्थर समझ कर फेंक दिया था, वे हीरे-जवाहरात थे!

लेकिन अब तो हाथ में अंतिम टुकड़ा बचा था और वह पूरे झोले को फेंक चुका था। वह रोने लगा, चिल्लाने लगा। इतनी संपदा उसे मिल गई थी कि अनंत जन्मों के लिए काफी थी, लेकिन अंधेरे में, अनजान, अपरिचित, उसने उस सारी संपदा को पत्थर समझ कर फेंक दिया था।

लेकिन फिर भी वह मछुआ सौभाग्यशाली था क्योंकि अंतिम पत्थर फेंकने के पहले सूरज निकल आया था और उसे दिखाई पड़ गया था कि उसके हाथ में हीरा है। *साधारणतः सभी लोग इतने सौभाग्यशाली नहीं होते हैं। जिंदगी बीत जाती है, सूरज नहीं निकलता, सुबह नहीं होती, रोशनी नहीं आती और सारे जीवन के हीरे हम पत्थर समझ कर फेंक चुके होते हैं।* *जीवन एक बड़ी संपदा है, लेकिन बहुसंख्यक आदमी सिवाय उसे फेंकने और गंवाने के कुछ भी नहीं करता है। जीवन क्या है, यह भी पता नहीं चल पाता और हम उसे फेंक देते हैं। जीवन में हम क्या क्या उपलब्धि हासिल कर सकते है, समाज के कितने बड़े हिस्से का कल्याण कर सकते है....कुछ पता नहीं हो पाता।*

आवश्यकता चेतना जागृत करने की है।

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मंगलवार, 3 जनवरी 2023

एक गलत ट्रेन यात्रा

कभी कभार हम सभी स्वयं को चतुर समझकर कदम उठाते है लेकिन हकीकत में बेवकूफी वाला काम कर रहे होते है। एक ऐसी ही रेल यात्रा का जिक्र करूंगा जो कभी भूलता नहीं है। 

तो प्रकरण इस प्रकार है। मैं उत्तर प्रदेश के जनपद गाजीपुर के करहिया नामक गांव का रहने वाला हूं और मेरा गांव देवी मां कामख्या के मंदिर के लिए जाना जाता है। वर्ष 2000 में प्रयागराज में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करता था। एक बार का वाकया है कि मैं और मेरा mitr अजय श्रीवास्तव अपने गांव से इलाहाबाद जाना था। निर्णय ये हुआ कि रात में मगध एक्सप्रेस से निकला जाएगा। प्रायः हम लोग सुबह 10 बजे के आस पास लालकिला एक्सप्रेस से निकलते थे जो 4 बजे इलाहाबाद पहुंचा देती थी। मगध रात में थी और दिलदारनगर स्टेशन से थी जिसके लिए शाम को ही घर से निकल गए। ट्रेन के आने में समय था जिसमें एक फिल्म देखा जा सकता था, तो हम लोगों ने वो काम बखूबी किया और फिल्म समाप्त होने के उपरांत वापस आए तो स्टेशन पर एक खाली ट्रेन खड़ी थी। पता किया गया तो पता चला कि ये मुंबई जाने वाली स्पेशल ट्रेन है। 
हम दोनों के दिमाग में आया कि मुंबई जाएगी तो इलाहाबाद तो होकर ही जाएगी क्योंकि उसके लिए इंजन का पीछे लगना होता था। इलाहाबाद नहीं तो कम से कम नैनी तो जरूर जाएगी क्योंकि नैनी ही वो स्टेशन है जहां मुंबई की तरफ जाने वाली ट्रेनों का रूट कटता था। उस समय तक हमें छिवकी रेलवे स्टेशन के बारे में जानकारी नहीं थी कि छिवकी यार्ड से भी ट्रेनें मुंबई रूट को चली जाती है। छिवकी नैनी रेलवे स्टेशन के यार्ड में ही था थोड़ी दूरी पर। बहरहाल ट्रेन बहुत तेज आई और छिवकी यार्ड में खड़ी थी, हम लोग सोचे कि 5 मिनट के अंदर नैनी ब्रिज आयेगा और फिर इलाहाबाद रेलवे स्टेशन। लेकिन जब यार्ड से चली तो चलती ही जा रही है, इलाहाबाद तो दूर नैनी स्टेशन ही आया नहीं। ध्यान दिया तो पता चला कि ये ट्रेन सिंगल ट्रैक वाली रुट पर चल रही है। अब हम दोनों सोचे कि गलती तो हो ही गई है जहां रुकेगी वहां से देखा जाएगा। 
 आगे जाकर ट्रेन की चैन किसी ने खीच दिया और किसी हाल्ट पर खड़ी थी। हम लोगों ने उतरने का निर्णय लिया जो कि गलत था, जब नीचे उतरे तो पता चला कि हमारे जैसे 20 से अधिक लोग बेवकूफ बने थे। बहरहाल पीछे से एक पैसेंजर आ रही थी जिसे पकड़कर एक बड़े स्टेशन पहुंचे, उस स्टेशन का नाम याद नहीं लेकिन वो मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बॉर्डर पर स्थित था। वहां पर क्रासिंग थी तो मुंबई से वाराणसी जा रही ट्रेन रत्नागिरी एक्सप्रेस मिली और उसे पकड़कर दोपहर 1 बजे इलाहाबाद पहुंचे।
कुल मिलाकर जो यात्रा 5/6 घंटे में हो जानी थी 16/17 घंटे में। तब से अनजान ट्रेनों में बैठने से पहले विशेष ध्यान रखते है। 

सोमवार, 2 जनवरी 2023

समय का सदुपयोग कीजिए

वो बहुत व्यस्त रहते थे, समय नहीं मिलता था कि कोई अतिरिक्त कार्य कर सके। सुबह ऑफिस जाना, शाम को आना, भोजन करना, टीवी देखना और सोना बस यही जीवन रह गया था। कभी कभार दोस्तों के मध्य बैठना। चक्कर घिरनी की भांति जीवन चल रही थी जिससे मुक्ति भी चाहते थे लेकिन रास्ता नहीं दिख रहा था। जिंदगी चूहा दौड़ हो चुकी थी
चित्र गूगल से

 कुछ दिनों से उनकी बाइक ठीक से नहीं चल रहा था, सर्विस मांग रही थी, जिसके लिए समय नहीं मिल रहा था। किसी तरह मैकेनिक तक पहुंचे तो काफी सीख मिली। मैकेनिक ने कहा सर इसमें कोई खराबी नहीं थी बस कुछ पार्ट ढीले हो गए थे, अब कस दिया हूं। आराम से कुछ महीना और चलाइए लेकिन समय समय पर इसकी सर्विस जरूर करा लीजिए।
चित्र गूगल से
  बातो बातो में उन्हे लगा हमारा समय थी तो वैसे ही है सब अस्त व्यस्त और ढीले है, उसे किसी रिंच प्लास से कस दिया जाय तो जीवन और भी सुंदर हो सकता है। उसके बाद उन्होंने प्रतिदिन की दिनचर्या को रात में सोने से पहले लिखना शुरू कर दिया तो पाया कि बेकार टाइम तो रील देखने में जाता है, बेवजह का टीवी न्यूज पर टॉक्सिक बहस देखते है। इस तरह एक सप्ताह जब उसे पढ़ा तब उन्हे लगा कि वो कौन सी जगह है जहां रिंच प्लास लेकर कसने की जरूरत है। धीरे धीरे समय चुराना और टाइम मैनेजमेंट किया और उस समय को सकारात्मक कार्यों और पढ़ने लिखने में व्यतीत करने लगे और एक सालों बाद ही चमत्कारिक परिणाम उन्हे मिले।
    दुनिया में समय ही एक ऐसी चीज जो एक बार खो जाती है तो दुबारा मिलती नहीं है। बाकी चीजें एक बार फिर से अर्जित की जा सकती है, लेकिन समय नहीं। इस संबंध एक बड़ा आश्चर्य यह होता है कि धन, स्वास्थ्य, कोई वस्तु जब खो रहे होते है तो उसका बोध तो हो जाता है लेकिन समय जब गवां रहे होते है तो इसका बोध नहीं होता है, एक अंतराल व्यतीत होने के बाद अहसास होता है, फिर हम पछताते है कि काश उस समय थोड़ा ध्यान दे दिए होते तो आज कुछ बेहतर होते। 
कुछ लोग तो आज की तिथि जिस तरह से दफ्तरों में कार्य के दौरान फाइलों में समय देते है, अक्सर उन लोगों के मुख से ऐसा सुनने को मिलता है कि इतनी पढ़ाई अपने छात्र जीवन में किए होते तो आज आईएएस होते। अर्थ वित्त विषयों पर चर्चा के दौरान जब किसी को मुद्रा स्फीति, बचत, निवेश, सीएजीआर आदि जा कॉन्सेप्ट जब समझते है तो ओ हो मैने कितना समय गवां दिया। फलनवा हमें म्यूचुअल फंड एसआईपी बता रहा था, लेकिन तब नहीं समझे, काश उस समय स्टार्ट कर लिए होते तो आज हम लाखों रुपए के फंड बना लिए होते। 

   ऐसा पछतावा अक्सर लोग करते है और उसका कारण होता है समय की वैल्यू को न समझ पाना। मै बार बार लिखता हूं कि ईश्वर ने एक मामले में सभी के साथ न्याय किया है वो है समय के मामले में, सभी को 24 घंटे ही मिले है। इसके उपयोग से कोई एलन मस्क, मार्क जुकरबर्ग, विजय शेखर शर्मा, नीतीश कामत होता है, तो कोई तेंदुलकर, धोनी, कपिल शर्मा तो राधा किशन दमानी, रामदेव अग्रवाल होता है। उसी में हम भी होते है, आप भी होते है। समय कितना महत्वपूर्ण है उसे एक उदाहरण से समझने की कोशिश करते है। मान लीजिए आपके बैंक खाते में प्रतिदिन उपर वाला 86400 रुपए डालता है और शर्त होता है कि उसे आज ही प्रयोग न किया जाय तो वापस ले लिया जाएगा, तो हम क्या करेंगे ? जाहिर सी बात है उसे रात 12 बजने से पहले सभी पैसों का कुछ न कुछ प्रयोग कर ही लेंगे क्योंकि थोड़े देर बाद फिर से उतना पैसा आ जाना है। यही काम हमें समय के साथ करना है क्योंकि ईश्वर प्रति दिन हमारे खाते में 86,400 सेकेंड देता है जिसका उपयोग ना किया जाय तो वो व्यर्थ हो जाता है। 
 किसी अच्छे विषय को लेकर चर्चा करो तो अक्सर लोग कहते है कि मेरे पास समय नहीं है। दरअसल वो लोग समय का बहाना बनाकर यह बताना चाहते है वो कार्य उनकी प्राथमिकता सूची में है।  ये सारा काम प्राथमिकता का होता है। समय किसी के पास नहीं रहता है, उसे मैनेज करना पड़ता है। प्राथमिकताएं तय करनी पड़ती है, कौन सा काम मेरे लिए इंपॉर्टेंट है, कौन सा नहीं, किससे मुझे ज्यादा लाभ मिलने वाला है, कौन सा काम मुझे बहुत आगे ले के जा सकता है। सामने आ रही अवसरों को नुकसान, फायदा,  कम फायदा और ज्यादा फायदे के मानकों पर जांचना होगा। दिन शुरू होने से पहले दिन को खत्म कर लेना चाहिए। 

तो वर्ष 2023 में समय के महत्व को समझकर प्रयोग करने है।
किसी तरह की हेल्प के लिए कॉन्टैक्ट कीजिए
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नए वर्ष का संदेश

 वर्ष के अवसर पर इन आदतों से स्वयं को एक स्वस्थ जीवन का गिफ्ट दीजिए

कहा जाता है निरोगी काया सबसे बड़ा धन होता है और इसका महत्व तब समझ में आता है जब कोई रोग होता है। अपने देश में लोगों में आम मानसिकता यही है कि उन्हे कोई रोग नहीं हो रहा है तो वो स्वस्थ है। इस तरह हम सभी के जीवन में स्वास्थ्य का स्थान हमेशा निचले पायदान पर होता है जबकि सबसे पहली प्राथमिकता इसी का होना चाहिए। इस पर किया जाने वाला खर्च नहीं बल्कि एक निवेश होता है। हम लोग इसे खर्च समझते है इसीलिए जब तक हम बीमार नहीं होते है, तब तक इस विषय पर तनिक भी विचार नहीं करते है। 
मैने भी अपने स्वास्थ्य को बेहतर किया है।लेकिन ध्यान तभी गया जब संकट में आया। अब मैं सचेत हूं और दूसरों को भी सचेत करता हूं। एक समय मैं 101 किलो का था और खर्राटे, कमर दर्द, सायटिका जैसी समस्याओं से परेशान था जो अपने हेल्थ कोच के माध्यम से नियंत्रित किया। 
पूरी दुनिया में स्वास्थ्य को लेकर 3 तरह के एप्रोच अपनाया जाता है

1) प्रीवेंटिव जिसमें बीमारियों पर रोकथाम की बात की जाती है

2) क्यूरेटिव यानी बीमारी होने पर इलाज और 

3) प्रोमोटिव यानी जो स्वस्थ है उसे स्वस्थ बनाए रखना

हम सभी के यहां नंबर 2 को पहले स्थान पर रखते है जबकि कायदे से प्रोमोटिव,प्रिवेंटिव और क्यूरेटिव क्रम से होना चाहिए।

 विज्ञान के अनुसार एक स्वस्थ और लंबा जीवन तीन आदतों पर निर्भर करता है। ये तीन आदतें हैं- 
न्यूट्रीशन से भरपूर डाइट लेना, 
नशे से दूर रहना
और रोजाना 20/25 मिनट एक्सरसाइज करना।
 लंबी रिसर्च के अनुसार, जो लोग इस लाइफ स्टाइल को फॉलो करते हैं, उनके स्वास्थ्य खराब होने की संभावना 82% तक घट जाती है।

कैसे बनाएं इन 3 आदतों को अपने जीवन का हिस्सा

1. हेल्दी डाइट को दें प्राथमिकता: अपने शरीर को स्वस्थ रखना है तो आज ही ज्यादा तेल, मसाला और जंक फूड छोड़ देंना है। अपनी डाइट में ज्यादा से ज्यादा फल और सब्जियों को शामिल करें। इंसान जल्दी बीमारियों से पीड़ित इसलिए हो जाता है क्योंकि उसका शरीर ऑक्सीडाइज होने लगता है। लेकिन एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर आहार लेने से इस प्रक्रिया को धीमा किया जा सकता है। खाना वो खाना है जो शरीर को पसंद हो, ना कि जीभ को और शरीर को चाहिए प्रोटीन, विटामिन, मिनिरिल, फाइबर, ओमेगा 3, कॉम्प्लेक्स कार्ब, अन सेचुरेटेड फैट आदि। ग्लायस्मिक इंडेक्स कम वाले भोज्य पदार्थ। आज ही गूगल में खोजिए शरीर को लगने वाले भोजन और लीजिए। 2. नशे से रहे दूर क्योंकि अच्छी डाइट लेते भी हैं, तो भी नशे की लत आपके जीवनकाल को घटा देती है।
3. एक्सरसाइज कीजिए प्रतिदिन. 24 घंटे में 24 मिनट का सिद्धांत एक कारगर सिद्धांत होता है। यानी 24 मिनट की हल्की फुल्की एक्सरसाइज पर्याप्त होता है। लॉकडाउन और वर्क फ्रॉम होम ने हमारे चलने-फिरने को पूरी तरह बंद कर दिया है। आप जॉगिंग-रनिंग से लेकर पसंदीदा खेल भी खेल सकते हैं। आप साइकिल भी चला सकते है, पैदल चलना भी एक तरह की एक्सरसाइज है। 
4.भोजन की कैलोरी काउंट कीजिए जो भी खाते है उसकी कैलोरी काउंट कीजिए और देखिए वो बीएमआर से अधिक नहीं होनी चाहिए। 

किसी प्रश्न के लिए संपर्क कर सकते है

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