मैं पहले ऐसा दिखता था। अब से लगभग 4 साल पहले काफी अधिक वजन हो चुका था। 100 किलो के उपर वजन, कमर दर्द, भयंकर खर्राटे और सायटिका की समस्या से पीड़ित। लेकिन यह मुझे पता नहीं था कि यह समस्या मेरे अधिक वजन के कारण है। सत्य तो यह है कि पहले मुझे इस चीज का बोध भी नहीं था कि ज्यादा वजन जैसा कोई विषय भी होता है, पहले तो यही पता था कि एक मोटा आदमी होता है और दूसरा पतला। भला हो जो मैं न्यूट्रीशन क्लब पहुंच गया और पता चला कि ऊंचाई के अनुसार एक आदर्श वजन भी होता है। मेरी पत्नी की भी सेहत बहुत खराब थी। डॉक्टर को दिखाते दिखाते परेशान हो गया था एक साल तो अलग अलग डॉक्टर्स की सलाह पर 3 बार एमआरआई तक करानी पड़ी। लेकिन कोई लाभ नहीं होता था।
11 दिसंबर 2019 को लखनऊ के स्मृति विहार पार्क में मेरी पत्नी को एक अनजान महिला मिली जिनके माध्यम से एक हेल्थ क्लब में आमंत्रित किया गया। मन में इसे लेकर ढेर सारे भ्रम थे जिससे जाने को तैयार ना था लेकिन पत्नी की जिद के चलते गए। वहां जाकर पता चला कि मेरी ऊंचाई 6 फिट 2 इंच के सापेक्ष 80 किलो के आस पास होना चाहिए। वहां पर चाय की जगह एक विशेष ड्रिंक दिया गया और नाश्ते में भी बहुत ही स्वादिष्ट और मीठा ड्रिंक दिया गया जो शरीर की जरूरतों के अनुसार एक बैलेंस डाइट थी। उस ड्रिंक के अगले 4 घंटे कुछ भी खाना नहीं था, यहां तक कि एक बिस्किट भी नहीं। और हुआ भी ऐसा ही। पहले दिन ही क्लब का माहौल बहुत अच्छा लगा और ज्वाइन करने का निर्णय लिया। यकीन मानिए देखते देखते लाइफ चेंज हो गई।
जैसे जैसे मेरे कोच द्वारा खान पान और लाइफ स्टाइल में बदलाव कराए गए उसे आंख बंद करके फॉलो करते गए और 5 से 6 माह में मैने 20 किलो और मेरी पत्नी ने 24 किलों का वेट लॉस किया। पिछले 3 सालों से मैं सपत्नीक उस क्लब का हिस्सा बने हुए है और अब तक 200 से अधिक लोगों की लाइफ चेंज करने में मदद कर चुके है।
अब ऐसा हो गया हूं
उस क्लब में मुख्य फोकस कैलोरी मैनेजमेंट कराया जाता है। मै आज भी दिन भर में जो कुछ खाता पीता है उसके एक एक कैलोरी का ध्यान रखता हूं।
लोगों द्वारा अक्सर मुझसे पूछा जाता है कि आपने इसे कैसे किया है। मैं उनसे कहता हूं आप दिन में बार बार क्या खाते हैं उससे मिलने वाली कैलोरी को ध्यान देंगे तो निःसंदेह फिट रहना बेहद आसान है। सबसे बड़ी बात मैं भरपूर खाता हूं, भरपेट खाता हूं, शाकाहार में सबकुछ खाता हूं, मांसाहार कभी कभार ही होता है, महीने में एक या दो बार, वैसे भी मांसाहार मुझे बहुत ज्यादा पसंद नहीं है। मिठाई भी खाता हूं, मक्खन भी खाता हूं, दही भी खाता हूं, पराठा और पूड़ी भी खाता हूं, दूध भी पीता हूं, घर का बना शुद्ध घी भी लेता हूं। लेकिन कैसे खाता हूं, कितना खाता हूं और किस समय खाता हूं, यह जरूर ध्यान देता हूं।
मैं अपनी पोस्टों में कहता रहता हूं कि वजन ऊंचाई के अनुसार असंतुलित रहना एक दिक्कत की बात है। वजन ज्यादा होने से लाइफ स्टाइल रोगों को हम आमंत्रित कर रहे होते है। कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, घुटने दर्द, फैटी लीवर, ब्लड प्रेशर जैसे रोग होने की आशंका बहुत बढ़ जाती है।
वजन को समझना है
किसी भी शरीर के वजन के मुख्य रूप से 4 भाग होते है
1. हड्डियों का वजन जो कि एक समय बाद स्थिर रहता है
2. मसल्स और ऑर्गन के वजन
3. फैट का वजन और
4. पानी का वजन
उपरोक्त में से हड्डी और पानी की मात्रा/ वजन में हम छेड़ छाड़ नहीं कर सकते तो हमारे लिए बचता है मसल्स और फैट और हमारा वजन इन्ही में संतुलन के कारण खराब होता है।
वजन कैसे बढ़ता है
इसे समझने के लिए पहले हमें बीएमआर को समझना होगा। बीएमआर का मतलब है बेसल मेटाबॉलिक रेट है। शरीर को चलने के लिए दिन भर जितनी कैलोरी उर्जा की जरूरत पड़ती है उसे बीएमआर कहते है। यानी दिन भर कुछ न किया सिर्फ सोया जाय तब भी शरीर की अंदर की गतिविधियां चलती रहती है जिसके लिए जितनी ऊर्जा की जरूरत होती है वो बीएमआर हो जाती है। शरीर में भोजन, ऊर्जा के रूप में परिवर्तित होना, मेटाबॉलिज्म कहलाता है। इसे रेस्टिंग मेटाबोलिक रेट के रूप में भी जाना जाता है।
सामान्य तौर अब हमें दिन भर में कितनी कैलोरी का भोजन लेना है ये इसी बीएमआर पर निर्भर करता है। बीएमआर पता करने के लिए नीचे एक बीएमआर कैलक्यूटर दिया गया है जिसमें हाइट और वेट डालकर पता किया जा सकता है।
https://www.calculator.net/bmr-calculator.html
एक सामान्य व्यक्ति को जितनी बीएमआर निकलकर आती है उसका 10/20% अधिक की कैलरी का इंटेक करना चाहिए। जब यही इससे अधिक हो जाता है तो वो कैलोरी जो बर्न नहीं हो पाती है शरीर में इकट्ठा होने लगती है जो मोटापा का रूप लेकर आती है। लगभग 7000 कैलोरी अतिरिक्त जब शरीर में जमा हो जाता है तो 1 किलो वजन बढ़ जाता है। वजन प्रबंधन का राज इसी कैलोरी प्रबंधन में छुपा हुआ है।
जिसे वजन घटाना है उसे अपने बीएमआर से कम कैलोरी लेनी है और जिसे बढ़ाना है बीएमआर से ज्यादा कैलोरी लेना है। यदि प्रतिदिन 500 कैलोरी कम लेते है तो 30 दिन में लगभग 15000 कैलोरी हो जाती है जिससे 2 किलो से उपर के वेटलॉस होती है।
वजन ज्यादा होने का नुकसान कैसे होता है
होता क्या है हमारे खान पान और लाइफ स्टाइल बहुत खराब हो गई है। अब बैठकर ज्यादा काम किया जाता है जिससे शारीरिक एक्टिविटी बहुत कम है जिससे कैलोरी बर्न नहीं हो पाती हैं। दूसरी तरफ हम लोगों के खान पान में ऑयली और फास्ट फूड अधिक हो गया है साथ में भोजन में स्वाद को तरजीह देने के कारण बहुत सारे केमिकल और मसाले प्रयोग हो रहे है जिससे एक तो कैलोरी बढ़ रही है, दूसरी तरफ पोषण वैल्यू भी गिर रही है। हमारे खान में खराब फैट अधिक हो गया है और प्रोटीन कम और जो प्रोटीन लिया भी जा रहा है वो एनिमल आधारित है जिसके बहुत सारी खराबिया आती है। तो इस तरह हम फैट अधिक और प्रोटीन कम ले रहे है। हमारे ऑर्गन प्रोटीन के बने होते है और प्रोटीन कम होने के कारण वो कमजोर हो रहा है। फैट अधिक होने के कारण ऑर्गन पर एक परत जमा हो रही है और धीरे धीरे ऑर्गन के अंदर भी जा रहा है जिससे ऑर्गन की कार्य क्षमता कमजोर हो रही है जिससे बहुत सारे रोग हो रहे है। लीवर फैटी हो रहा है, थायराइड हो रहा है, डायबिटीज हो रही है।
वजन नियंत्रित करने की यात्रा में प्रोटीन का इंटेक बढ़ाते है जबकि फैट को कम करते है।
एक व्यक्ति को एक किलो वजन पर सामान्य तौर पर 1 ग्राम प्रोटीन लेने चाहिए, यानी एक 50 किलो वजन वाले व्यक्ति कम से कम 50 ग्राम प्रोटीन तो लेना ही लेना चाहिए। प्रोटीन शरीर का बिल्डिंग ब्लॉक है और ये पहली जरूरत है। प्रोटीन का जो मुख्य स्रोत है उसमें दालें, दूध, अंडा, सोयाबीन आदि से मुश्किल से एक व्यक्ति को जरूरत का आधा भाग भी मिल नहीं पाता है। तो हमारे हेल्थ क्लब में जिस तरह के खान पान को निर्धारित किया जाता है उसमें पहली चीज प्रोटीन बढ़ाई जाती है और खान पान से फैट कम कराया जाता है जिसे ओवर आल फैट लॉस/वेटलॉस होने लगता है।
शरीर की रचना के महत्व को समझना है
ऐसा नहीं है कि सिर्फ पतले लोग फिट होते है। अक्सर हम लोग देखते है कि पतले लोग भी गंभीर रोगों का शिकार हो जाते है। दरअसल शरीर में फैट की मात्रा खतरनाक होती है। एक पतले आदमी में भी फैट की मात्रा मानकों से अधिक हो सकती है और एक ज्यादा वजन वाले व्यक्ति में फैट की मात्रा कम हो सकती है।
एक स्वस्थ मनुष्य के शरीर में औसतन कितना फैट होना चाहिए?
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