शनिवार, 15 जुलाई 2023

हम अपनी आदतों से अपना व्यक्तित्व बनाते है

हमारा व्यक्तित्व हमारे आदतों का प्रतिफल होता है

क्या आपने ध्यान दिया है कि हम अपने कार्य सालों से एक ही जैसा करते आए है। नहीं ध्यान दिया है, ध्यान दीजिए। क्या रोज सुबह जागने के बाद एक ही जैसे ब्रश पकड़ते है, एक ही जैसे पेस्ट लगाते है, एक ही जैसे रोज ब्रश करते है, रोज एक ही जगह बैठकर पेपर पढ़ते हैं। मतलब सुबह से लेकर शाम तक जो भी कार्य करते है, सभी रोज की तरह एक ही जैसे होते है। एक नशेड़ी रोज संकल्प लेता है नशा छोड़ने का लेकिन जैसे ही शाम यानी नशे का समय होता है, नशा ले ही लेता है। ऐसा क्यों ? क्योंकि जब वो नशा छोड़ने का संकल्प करते वक्त एक आम व्यक्ति होता है लेकिन जब समय आता है तो वो अपनी आदतों का गुलाम होता है। क्योंकि वो "बेसल गेंगलिया" के प्रभाव में होता है। जब हम इसके प्रभाव में रहते है तो हमें गलत सही, वादे, संकल्प का कुछ भी बोध नहीं होता। 

बेसल गेंगलिया होता क्या है
आज और अभी इसे लेकर गूगल पर पढ़िए और इसके महत्व को समझिए। दरअसल हमारे मस्तिष्क में एक प्याज जैसे शक्ल का एक अंग होता है जहां से हमारे मस्तिष्क के कार्यों का निर्धारण होता है। 
जब हम कोई कार्य किसी समय विशेष में लगातार करते है तो वो हमारे बेसल गेंगलिया में स्टोर होता जाता है और एक समय बाद जैसे ही वो समय आता है बेसल गेंगलिया हमारे दिमाग को वही कार्य करने का आदेश देता है। उस समय आदमी स्वाभाविक रूप से वही कार्य करता है, हम गलत चीज स्टोर करेंगे तो गलत काम करेंगे और सही कार्य स्टोर करेंगे तो सही कार्य करेंगे। अब हमारे उपर निर्भर करता है कि अब यहां किस तरह की आदतों को स्टोर करते है। अच्छा करेंगे तो व्यक्तित्व अच्छा बनेगा और खराब आदतें डालेंगे तो व्यक्तित्व खराब बनेगा।
 मनोविज्ञान के अनुसार एक नई आदत बनने में 21 दिन लगते हैं। यानी अच्छे व्यक्तिव की जो आदतें है उन आदतों को 21 दिन लगातार करने पर वो स्वचालित हो जाएगा। तो आइए जानते है कुछ ऐसी छोटी आदतों के बारे में जिसे अपनाकर बेहतर स्थिति में पहुंच सकते है। छोटी छोटी चीजें एक दिन बड़ा नतीजा देती है। कुछ छोटी आदतें इस प्रकार है जिसे बेसल गेंगलिया में स्टोर करना है 

 1. सूर्योदय से पूर्व जागना है क्योंकि सबसे उत्तम समय होता है पूरे दिन की अच्छी शुरुआत की।

 2. जागने के उपरांत सर्वप्रथम ईश्वर को धन्यवाद देना है। अपने जीवन, अपने पास उपलब्ध संसाधनों, परिजनों, मित्रों और जिनके कारण भी हमारा जीवन सहज और सुखद होता है, सभी के लिए ईश्वर को धन्यवाद देना है।

3. आत्म विकास, अध्यात्म, व्यक्तित्व विकास, फाइनेंस आदि से संबंधित पुस्तकों का एक अध्याय पढ़ना है। हो सके तो उसे लिखना है और लोगों के मध्य शेयर भी करना है।

 4. कम से कम 30 मिनट टहलने और योग/व्यायाम करना है

 4. न्यूट्रीशन से भरपूर संतुलित नाश्ता करना है और भोजन जीभ के अनुसार नहीं अपितु शरीर की जरूरतों के अनुसार करना है। 

 5. 5 मिनट के लिए अपने भविष्य के व्यक्तित्व और सपनों की कल्पना करना है

6.किसी भी विषय पर तत्काल प्रतिक्रिया देने से बचना है, संदर्भ प्रसंग के बारे में जानना, समझना और विचार करना है, उसके बात कोई प्रतिक्रिया देने है

 7. रोज कुछ नया सीखना है, नए लोगों से मिलना है और रोज शाम को सोने से पूर्व उसे एक बार स्मरण कर लेना है। 

क्या इनमें से कोई आप आज से लागू करेंगे?
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