मंगलवार, 4 मई 2021

शेयरों में निवेश के नियम

स्टॉक मार्केट एक ऐसी जगह है जहाँ जिस तरह का वेल्थ बनता है उस तरह का कहीं भी नहीं बनता. इसा इसलिए होता है क्योंकि हम यहाँ पैसे से बिजनेस खरीदते है. हमारा पैसा हमारे लिए काम करता है. न तो हमें अकाउंट की देखभाल करनी है, न ही होलसेलर रिटेलर का झंझट झेलनी है जैसी सभी समस्याएं दूसरों के हिस्से में आती है. हमारा काम है उस कंपनी के स्टॉक लेकर बैठना.  याद रखना है हमें निवेश करना है, ट्रेडिंग नहीं. ट्रेडिंग से हम बड़े लाभ को छोटे लाभ में बदल देते है, याद रखना है कि फर्क 10/20% से नहीं पड़ेगा, फर्क पड़ेगा तो 100, 200 और 500 प्रतिशत या इससे भी अधिक से. और ये रिटर्न तभी मिलेंगे जब निवेश के कुछ नियमों का पालन करेंगे. तो आईये चलते है कुछ नियमों के बारे में जानने के लिए

1. सही कंपनी चुनना है - वेल्थ क्रियेशन की पहली शर्त होती है अच्छी कंपनी में पैसा लगाना. यहाँ याद रखना है कि मार्किट में हजारों की संख्या में कम्पनियाँ लिस्टेड है जिसमें ज्यादातर खराब किस्म की है इसलिए सही कंपनी की पहचान बहुत जरुरी है. प्रश्न यह है कि सही कम्पनी की पहचान क्या होती है ? क्या इनके कोई स्टार लगे होते है ? तो इसकी पहली पहचान है कंपनी के  मुनाफे में लगातार बढोत्तरी होना. हम कंपनी के 5 साल के आकड़ें को देखना है कि उनका बिजनेस, टर्न ओवर, लाभ  आदि लगातार बढ़ रहा है कि नहीं, यदि बढ़ रहा है तो ओके है अन्यथा दुसरे पहलुओं पर विचार करने की आवश्यकता है। अल्प काल में तो शेयर न्यूज़, अफवाह, घटनाए आदि से घटती बढती है लेकिन लॉन्ग टर्म के शेयर केवल उनके बिज़नस और लाभ से प्रभावित होते है और इसके लिए का से कम पांच साल का समय लिया जाय तो वो एक आदर्श समय होता है. सही कंपनी को किस तरह से सेलेक्ट करे इसके लिए मैंने एक पोस्ट लिख राखी है जिसमें कई पॉइंट दिए गए है जांचने के. उसे पढ़कर काफी जानकारी प्राप्त की जा सकती है.

2.धैर्य व अनुशासन का रहना  बहुत जरुरी है - शेयर में निवेश एक लंबी सीखने की प्रक्रिया है, जिसमें  हम अपनी गलतियों से सीखते हैं। यह एक ऐसी जगह है जहाँ हम हर रोज कुछ न कुछ नया सीखते है. निवेश की प्रक्रिया में जो में जो भी कार्य करने है उसमें धैर्य व अनुशासन का होना बहुत जरुरी है, याद रखना है, मार्केट अनुशाषित निवेशको को रिवार्ड देती है और गैर अनुशाषित पैसा गंवाता है, मार्किट गैर अनुशाषित से पैसा लेकर अनुशाषित निवेशक को देती है. इसलिए जितना अधिक अनुशासित रहेंगे लाभ की उम्मीदे और बढ़ जाती है. 

3-निवेश में विविधता-विविधता बहुत जरुरी है, पैसा कई सेक्टरों में लगाने चाहिए.  किसी भी  एक शेयर में अपने फण्ड का 10% से ज्यादा नहीं डालना चाहिए भले ही वो बहुत बढ़िया कंपनी हो, दूसरी ओर बहुत अधिक शेयरों में भी निवेश न करें क्योंकि उनकी  निगरानी करना मुश्किल होता है। जानकारों के अनुसार 15-20 विभिन्न सेक्टरों के शेयर रखे जाय तो अच्छा पोर्टफोलियो बनता है।.अपनी कंपनी के प्रदर्शन का विश्लेषण उसके तिमाही आकड़ों से करते रहन है। जैसे ही कोई गड़बड़ी प्रतीत हो बगैर किसी राग द्वेष से निकल जाना है.
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4).किसी शेयर को सिर्फ इसलिए नहीं खरीदना है कि वो बहुत गिर गया है- यह छोटे निवेशकों द्वारा की जाने वाली बहुत बड़ी गलती होती है. किसी शेयर का गिरता भाव निचे गिरते चाकू की तरह होता है जिसे पकड़ने पर घायल होने की आशंका काफी अधिक होती है. खरीदने से पहले यह जांचना है कि शेयर क्यों गिर रहा है और जब तक उसके गिरने का कारण दूर नहीं होता तब तक उसमें हाथ नहीं डालना है. इसी के उल्टा किसी स्टॉक को सिर्फ इसलिए नहीं बेच देना है कि वो बहुत बढ़ गया है. एक चीज हमेशा याद रखना है कि निचे के अंक की एक सीमा होती है कि शून्य हो सकता है लेकिन ऊँचाई की कोई सीमा नहीं होती. किसी से पूछिये कि सबसे बड़ा अंक कौन सा है कोई नहीं बता सकता लेकिन सबसे छोटी कौन सी संख्या है सभी बता देगे. इसके अतिरिक्त यह भी ध्यान रखना है कि बहुत सारे लोग पन्नी स्टॉक खरीदते है इस उम्मीद में कि वो बहुत बढ़ जाएगा, वो एक भयंकर गलती कर रहे होते है. कोई स्टॉक कम कीमत का है तो कोई न कोई कारण होगा, एक और चीज समझना है कि अच्छी चीज सस्ती नही मिलती और महँगी चीज सस्ती नहीं होती, वो कहावत है न सस्ता रोये बार बार,  महंगा रोये एक बार, यानी अच्छे स्टॉक लेने पर एक बार रोना पड़ता है लेकिन जीवन भर सुखी रखती है. किसी स्टॉक के महंगा और सस्ता होने का बहुत सारे मानक होते है एक 5 रुपया कीमत वाली कंपनी 1000 रुपे के भाव वाली कंपनी से महंगी हो सकती है. हमें स्टॉक की कीमत पर नहीं बल्कि मार्किट कैपिटल पर ज्यादा ध्यान देना है

5)-न एक बार में कोई शेयर खरीदना है और न ही एक बार में पूरा बेचना है- बहुत अच्छा फार्मूला है कि एक बार न पूरा स्टॉक खरीदना और न ही एक बार में पूरा बेचना. मार्किट की भविष्यवाणी कोई नहीं कर सकता. इसलिए सबसे सही स्ट्रेटेजी होती है टुकड़ों टुकड़ों में स्टॉक खरीदना और बेचना. इसे निवेश के क्षेत्र में पिरामिड स्टाइल कहा जाता है. जब स्टॉक गिर रहे होते है तो ज्यादा मात्रा में स्टॉक मिलते है जिससे लागत कम होती है. उसी तरह जब भाव बढ़ रहे होते है तो लाभ की उम्मीद और बढ़ जाती है 

6- मार्किट की टाइमिंग करने की कोशिश बेकार है- मार्किट की टाइमिंग मतलब जब मार्किट एकदम निचे के स्तर पर होगा तो स्टॉक खरीदना और जब सबसे उच्चत्तम स्तर पर होगा तो बेचना. यह कोई नहीं कर सकता. विजय केडिया कहते है कि सबसे उच्चत्तम स्तर पर बेचना और सबसे निचे के भाव पर खरीदना दो ही आदमी करते है एक तो भगवान् और दुसरे झूठा व्यक्ति. मतलब कोई नहीं जानता कि स्टॉक का सबसे न्यूनतम और उच्चतम स्तर क्या है. जो मार्केट में आदर्श समय का  इन्तजार करता है वो इन्तजार ही करता रह जाता है, मार्किट में सबसे अच्छा समय होता है जब हमारे पास पैसे हो और बिकवाली का सबसे उत्तम समय है जब हमे पैसे की जरुरत हो या फिर जब लक्ष्य की प्राप्ति हो जाय. 

7) रोज कुछ न कुछ सीखना है- एक चीज सभी को समझना है कि पैसा औकात देखकर आता है, जितनी हमारी औकात होती है, उतनी ही आता है, कभी कभार झटके में ज्यादा पैसा आ जाएगा लेकिन वो टिक नहीं पायेगा, पैसा तभी टिकेगा जब अपनी औकात बढ़ाई जायेगी. यहाँ औकात से आशय है अपनी योग्यता को लगातार बढ़ाना जीतनी योग्यता बढ़ेगी लाभ भी उतना ही बढेगा तो अपनी योग्यता बढानी है. किसी भी मानवा का सबसे बड़ा इन्वेस्टमेंट होता है अपने में निवेश करना. हम शारीर के लिए अच्छा और स्वादिष्ट खाना तो खाते है, सुन्दर दिखने के लिए अच्छे कपडे पहनते है लेकिन जहाँ से हम पैसा कमाते है यानी दिमाग, क्या उसको कभी कोई खुराक देते है ? नहीं न तो मष्तिष्क को भी खुराक चाहिए और वो खुराक है निवेश और पर्सनाल्टी ग्रोथ से सम्बंधित बुक्स को पढ़ना. सफल लोगों के इंटरव्यू पढ़ना, फंड मैनेजर की स्ट्रेटेजी समझना, FII के माइंड सेट को समझना, ब्रोकर रिपोर्ट पढ़ना आदि सभी चीजे हमारी योग्यता को दिन दुनी रात चौगुनि बढ़ाती है. हम जिनता पढेंगे उतना अधिक सीखेंगे, उतनी हमारी योग्यता बढ़ेगी और कमाई भी उसी अनुपात में बढ़ेगी.

8) कम आओगे कमाओगे और रोज आओगे रो जाओगे- बहुत बड़ा कोटेशन है जितना ही कम मार्किट में हम आते है यानी कम ट्रेड करते है तो  उतना ही अधिक कमाने की उम्मीद बढ़ जाती है और जितना ही अधिक आते है उतना ही अधिक ट्रेड करते है तो हम अपने ब्रोकर को पैसा कमाने का एक जरिया बन जाते है क्यंकि हम जब भी कुछ खरीदते और बेचते है दोना  बार में उसे कमीशन जाता है जो एक समय बाद गन्ना की जाती है तो कुल लाभ को कम कर देता है. बार बार स्टॉक को खरीदने  बेचने में हम एक बड़े लाभ को छोटे लाभ में बदल देते है.

9) गलतियों से सीखना है - समीक्षा के दौरान अपनी गलतियों को पहचानना है  और उनसे सीखें, क्योंकि  खुद के अनुभव को कोई नही हरा सकता। यही अनुभव आपके ‘ ज्ञान के मोती ’ बनेंगे जो निश्चित ही हमें एक सफल शेयर निवेशक बनाने में सहायक होंगे।

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