स्टॉक मार्किट में दो तरीके से निवेश करते है
१- डायरेक्ट जिसमें हमें खुद से स्टॉक सेलेक्ट कर पैसे लगाने पड़ते है.चूँकि मार्किट में पैसे लगाने और उस पर रिटर्न के लिए समय, ज्ञान, संसाधन, दूरदर्शिता, अनुशासन, धैर्य चाहिए जो सभी के पास नहीं होता है इसलिए यहाँ बहुसंख्यक लोग नुकसान उठाते है.
२- इन डायरेक्ट इसमें हमारे और मार्केट के बिच में एक बिचौलिया होता है जिसका काम ही होता है स्टॉक मार्किट में इन्वेस्टमेंट यानी कुल मिलाकर वो एक्सपर्ट होता है, उसकी एक रिसर्च टीम होती है जो कई मानकों पर स्टॉक को फ़िल्टर करके चुन कर एक पोर्टफोलियो बनाती है जिसमें हम उन्हें पैसा देते है तो वो उसमें अपना खर्चा काटकर पूरा पैसा लगा देते है और जो लाभ/हानि होता है वो निवेशक के तौर पर मिल जाता है. जो इन डायरेक्ट तरीके से ये कम करते है उन्हें म्यूच्यूअल फण्ड, पीएमएस, इंश्योरेंस आदि कहा जाता है. लेकिन यहाँ हम बात करेंगे म्यूच्यूअल फण्ड की क्योंकि एक तो ये काफी सरल होते है, दुसरे इनके चार्जेज काफी कम होते है और आसानी से उपलब्ध होते है. तो म्यूच्यूअल फण्ड में भी इन्वेस्टमेंट कई तरीको से करते है
१- एक बार या बार बार
२-sip
SIP सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान
निवेश करने के सबसे लोकप्रिय तरीकों में से एक तरिका है SIP यानी सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान जिसमें नियमित रूप से एक निर्धारीत धनराशि किसी म्यूच्यूअल फण्ड में इन्वेस्ट होती रहती है। आसान भाषा में समझे तो यह एक आरडी यानी आवर्ती जमा की तरह होता है जिसमें हम हर महिने कुछ न कुछ धनराशि डालते हैं जो धीरे धीरे एक बड़े कार्पस में बदल जाता है. जैसे कहावत है न कि बूँद बूँद से तालाब भरता है लेकिन उसके साथ यह शर्त होती है कि बूँद लगातार गिरनी चाहिए और यदि हम वो करने में सफल हो जाते है तो एक समय एक बड़ी संपत्ति के स्वामी बन सकते है. यह इतना आसान है कि मात्र 500 रु से भी कम में स्टार्ट किया जा सकता है
कैसे करते है ?
इसके लिए चेक, पैन, एक फोटो, बैंक की डिटेल और चेक के साथ फॉर्म भरा जाता है फिर बैंक से OTM अप्रूवे हो जाता है तो जो रकम हम बताते है उतनी रकम निर्धारित तारीख को मेरे बैंक खाते से कट जाती है. बहुत ही आसान है. ऑनलाइन सिस्टम और भी आसान होता है. ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट के लिए निचे के लिंक से अकाउंट ओपन कर स्टार्ट कर सकते है या फिर अपना मोबाइल नंबर निचे कमेन्ट बॉक्स में लिख दीजिये आवश्यक मदद मिल जाएगी
SIP के फायदे
1- ये एक बार में बड़ा अमाउंट निवेश करने की जगह छोटी छोटी किश्तों में भुगतान करने का अवसर देता है। उदाहरण के लिए 5,000 रूपये को एकमुश्त देने के बजाय 500/500 रूपये करके 10 बार में पेमेंट कर सकते है। कई फण्ड तो ऐसे है जो न्यूनतम 100 से भी निवेश करने की सुविधा देते है.
2) Rupee cost averaging पर काम करता है, मार्केट के अप डाउन के दौरान हमारी खरीद होती रहती है जिससे समय के अनुसार हमारी लागत एवरेज होती रहती है। जैसे जैसे उसमें पैसा जुड़ता रहता है एक समय बाद power of compounding का विस्फोटक असर दिखता है।
3) इससे निवेश की एक अनिवार्य शर्त अनुशासन होता है जो अपने आप आ जाता है। क्योंकि एक निर्धारित पैसा एक निश्चित तिथि को मार्केट में निवेश होता जाता है। शॉर्ट टर्म में मार्केट में उतार चढ़ाव होता है जबकि लॉन्ग टर्म में मार्केट अंततः बढ़ती ही है। इस सफर में SIP एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। निवेश नियम कहता है कि लगातार निवेश करें,अपने निवेशों पर ध्यान केन्द्रित रखें और अपने निवेश के तरीके में अनुशासन बनाये रखें। हर महिने कुछ राशि अलग निकालने से हमारी आमदनी पर कोई खास अंतर नहीं पड़ता है।
4) SIP के माध्यम से छोटी छोटी बचत करना शायद पहली बार में आकर्षक न लगे लेकिन ये निवेशकों को बचत की आदत डालता है और भविष्य में एक बड़ी रकम बन जाता है। यदि हर महीने 1000 रू का एक SIP किसी इक्विटी फंड 12% की दर से 10 वर्षों में बढकर 2.24 लाख रूपये, 20 साल में 9.92 लाख रु तो 30 सालों में 30.84 लाख रुपये और 40 साल में 98.02 लाख तक हो सकता है। यानी 1 हजार रूपये हमें एक करोड़पति बना सकता है।
5) स्टेप अप की सुविधा
SIP में स्टेप अप की सुविधा होती है। स्टेप अप मतलब हम यदि चाहे तो एक समय ऐसी सुविधा ले सकते है जिसमें अपने आप निवेशित रकम बढ़ जाती है। जैसे 1000 रू की SIP करते है और सोचते है कि अगले वर्ष से यह रकम 1100 हो जाय तो रिटर्न का मजा और भी बढ़ जाता है। उपरोक्त क्रमांक में अंकित उदाहरण में 10% स्टेप अप की सुविधा लेते है तो देखते है क्या रिजल्ट आएगा। इस तरह से फंड की वैल्यू 10 सालों में 3.27 लाख, 20 सालों में 18.65 लाख, 30 सालों में 79.94 लाख और 40 सालों में 3.05 करोड़ फंड बन जाएगा। तो स्टेप अप की सुविधा अपने आप में बेजोड़ है।
6) मार्केट एक्सपर्ट हमेशा जल्दी निवेश शुरू करने की राय देते है क्योंकि जितना अधिक समय मिलता है चक्रवृद्धि ब्याज का लाभ भी उतना ही बड़ा होता है। एक उदाहरण लेते है जिसमें A नाम के व्यक्ति ने 30 साल की उम्र से 1,000 रूपये हर साल बचाना शुरू करता है,वहीं B भी इतना ही धन बचाता है लेकिन 35 साल की आयु से। जब 60 साल की उम्र में फंड वैल्यू देखी जाती है तो A की फंड वैल्यू 30.84 लाख होता है जबकि B का केवल 17.04 लाख। इस उदाहरण में हम 12% की दर से रिटर्न मिलना मान सकते हैं। ये फर्क होता पावर ऑफ कंपाउंडिंग के कारण जिसके लिए जितना ही अधिक समय मिलता उतना ही बड़ा फंड होता है। जितना लंबा निवेश करेंगे उतना ज्यादा आपको रिटर्न मिलेगा।
7) फण्ड मैनेजर की सुविधा हमारे पुरे पैसे को एक प्रोफेशनल फण्ड मैनेजर मैनेज करता है. उसकी अपने काम में विशेषज्ञता होती है इसके लिए उसकी अपनी एक रिसच टीम होती है जो अच्छे से रिसर्च करके अच्छे अच्छे स्टॉक चुनते है . कोई भी स्टॉक चुनने से पहले एक लम्बी रिसर्च प्रक्रिया से गुजरते है जिसके तहत अर्थव्यवस्था की हालत, सेक्टर की हालत फिर उस विशेष कंपनी की बैलेंस शीट, आय व्यय का लेखा जोखा, उसका प्रोडक्ट मार्किट में स्थिति आदि पहलुओं पर विचार करने के उपरान्त वो निवेश करते है. ये जिस तरह से रिसर्च करते है एक सामान्य व्यक्ति के लिए आसान नहीं होता है. इसलिए निवेश पर जोखिम काफी कम हो जाता है
8) एक डायवरसिफाई पोर्टफोलियो. फंड मैनेजर द्वारा निवेश के लिए एक पोर्टफोलियो बनता है जिसमें 20 से लेकर 60 स्टॉक होते है जिसे हम बाहर इतने स्टॉक खरीद भी नहीं पायेंगे. सभी स्टॉक का रिसक रिवार्ड के हिसाब से निश्चित वेटेज प्रदान किया जाता है. और ये सरे स्टॉक मिलते है एक छोटी रकम में. उदाहरण के लिए मान लीजिये आज की तिथि में हम एशियन पेंट के स्टॉक लेना चाहते है तो हमें एक स्टॉक के लिए 2500 रु देने पड़ेंगे. लेकिन हम म्यूच्यूअल फण्ड के माध्यम से 1000 रु. में भी एशियन पेंट के साथ दुसरे स्टॉक भी मिल जाता है. होता क्या है कि एक फण्ड में हजारो लोग निवेश करते है जिससे उसका फण्ड साइज़ हजारो करोड़ों में होता है जिसका एक छोटा हिस्सा किसी विशेष स्टॉक में लगाते है
9) रूपये की कीमत का औसत (Rupee Cost Averaging)
ये मुख्य रूप से शेयरों में निवेश के लिये उपयोगी है। जब हम किसी फंड में नियमित रूप से एक तय धन का निवेश करते हैं तो मार्केट की गिरावट की दशा में हम ज्यादा शेयर की ज्यादा यूनिट खरीदते हैं। इस प्रकार समय के साथ आपकी प्रति शेयर या (प्रति यूनिट) औसत कीमत कम होती जाती है। ये सुविधा बाजार की उतार चढ़ाव में निवेश के जोखिम को कम करती है। इसलिए जो लोग SIP के माध्यम से निवेश करते हैं वे बाजार के गिरने के समय फायदा होता है।
10- पारदर्शिता और सुविधाजनक फंड्स का NAV दैनिक आधार पर आकंडे उपलब्ध कराए जाते हैजिसे हम कभी भी देख सकते है और जब भी पैसे निकलने होते है तो रिक्वेस्ट करने के बाद 3 दिन में बैंक खाते में पैसा आ जाता है.
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