हम में से बहुत सारे लोग यह विश्वास ही नहीं कर पाते है कि हमारे साथ भी कुछ अच्छा हो सकता है।
यह एक कटु सच्चाई है कि हम जीवन भर स्वयं की क्षमताओं पर शक करते रहते हैं। अमुक कार्य मैं नहीं कर सकता, अमुक चीज मेरे लिए नहीं है, आदि संशय की स्थिति से बाहर निकलने व आत्म-विश्वास हासिल करने के लिए हमें अपने डर से छुटकारा पाना ही होगा। इसके लिए खुद को प्रशिक्षित करना जरूरी है। याद रखें, हमारे जीवन में जो कुछ भी है, वह हमारे आत्म-विश्वास और हमारी आस्था का ही परिणाम है। खुद में यकीन कैसे मजबूत किया जाए, इसके लिए बस ये कुछ कदम उठाकर देखिए।
सबसे पहले यह विश्वास करें कि यह काम संभव है। विश्वास करें कि हम इसे कर सकते हैं, चाहे कोई कुछ भी कहे या जीवन में हम जहां कहीं भी हों।
दूसरा, उस कार्य का बिंब अपने मन में खड़ा करें और सोचें कि यदि हमनेे पहले ही यह सपना पूरा कर लिया होता, तो हमारा जीवन कैसा दिखता?
तीसरा, हमेशा ऐसे कदम उठाएं, जो लक्ष्य की ओर जाते हों।
चौथा, डर को अपने करीब नहीं आने दें।
पांचवां अपने समान विचार वाले समूह के लोगों के साथ रहे
छठवां मन को प्रेरणा और पसंदीदा क्षेत्र की जानकारी वाली पुस्तके, ब्लॉग, वीडियो को दिनचर्या में शामिल कीजिए।
खुद पर यकीन पुख्ता करने के लिए हमें सबसे पहले यह विश्वास करना पड़ता है कि हम जो कुछ चाहते हैं, वह बिल्कुल मुमकिन है।
पहले वैज्ञानिक मानते थे कि इंसान बाहरी दुनिया से दिमाग को मिलने वाली सूचनाओं पर प्रतिक्रिया करता है, लेकिन अब हम जानते हैं कि पिछले अनुभवों के आधार पर हमारा दिमाग आगे की संभावनाओं, आशंकाओं के बिंब ग्रहण करता है, और उनके मुताबिक हम जवाबी कदम उठाते हैं। वास्तव में, हमारा मन एक ऐसा शक्तिशाली यंत्र है कि यह वह सब कुछ प्रदान कर सकता है, जो हम अपनी सकारात्मक अपेक्षा से चाहते हैं। हम जो चाहते हैं, वह होने जा रहा है, यह एक सकारात्मक अपेक्षा है, जिसे बनाए रखना चाहिए। यह मन का अनुशासन है। याद रखें, जब हम खुद पर भरोसा करने लगते हैं और मानते हैं कि सफलता संभव है, और उस पर कदम उठाने लगते हैं, तो हमारा जीवन जादुई रूप से आलोकित हो उठता है। लगने लगता है कि ब्रह्मांड हमारा मार्गदर्शन और समर्थन कर रहा है। तब हम सचेत और अवचेतन रूप में भी उन अवसरों को पहचानना शुरू कर देते हैं, जो आमतौर पर पहले नहीं दिखते थे। हमें यह बात याद रखनी चाहिए कि हम अपने लक्ष्य निर्धारित कर सकते हैं, इसे लेकर दिमाग में बिंब भी बना सकते हैं, पर तब तक कुछ नहीं होगा, जब तक कार्य नहीं करते।
ज्यादातर लोग अपने सपनों को इसलिए साकार नहीं कर पाते, क्योंकि वे कदम नहीं बढ़ाते, और कार्रवाई न करने का सबसे बड़ा कारण डर है। भय सामान्य है, और जब तक आप कार्य शुरू नहीं करते, तब तक इसका साम्राज्य कायम रहेगा। कार्य शुरू करते ही भय भागने लगता है और भरोसा मजबूत होने लगता है।
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