मंगलवार, 3 जनवरी 2023

एक गलत ट्रेन यात्रा

कभी कभार हम सभी स्वयं को चतुर समझकर कदम उठाते है लेकिन हकीकत में बेवकूफी वाला काम कर रहे होते है। एक ऐसी ही रेल यात्रा का जिक्र करूंगा जो कभी भूलता नहीं है। 

तो प्रकरण इस प्रकार है। मैं उत्तर प्रदेश के जनपद गाजीपुर के करहिया नामक गांव का रहने वाला हूं और मेरा गांव देवी मां कामख्या के मंदिर के लिए जाना जाता है। वर्ष 2000 में प्रयागराज में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करता था। एक बार का वाकया है कि मैं और मेरा mitr अजय श्रीवास्तव अपने गांव से इलाहाबाद जाना था। निर्णय ये हुआ कि रात में मगध एक्सप्रेस से निकला जाएगा। प्रायः हम लोग सुबह 10 बजे के आस पास लालकिला एक्सप्रेस से निकलते थे जो 4 बजे इलाहाबाद पहुंचा देती थी। मगध रात में थी और दिलदारनगर स्टेशन से थी जिसके लिए शाम को ही घर से निकल गए। ट्रेन के आने में समय था जिसमें एक फिल्म देखा जा सकता था, तो हम लोगों ने वो काम बखूबी किया और फिल्म समाप्त होने के उपरांत वापस आए तो स्टेशन पर एक खाली ट्रेन खड़ी थी। पता किया गया तो पता चला कि ये मुंबई जाने वाली स्पेशल ट्रेन है। 
हम दोनों के दिमाग में आया कि मुंबई जाएगी तो इलाहाबाद तो होकर ही जाएगी क्योंकि उसके लिए इंजन का पीछे लगना होता था। इलाहाबाद नहीं तो कम से कम नैनी तो जरूर जाएगी क्योंकि नैनी ही वो स्टेशन है जहां मुंबई की तरफ जाने वाली ट्रेनों का रूट कटता था। उस समय तक हमें छिवकी रेलवे स्टेशन के बारे में जानकारी नहीं थी कि छिवकी यार्ड से भी ट्रेनें मुंबई रूट को चली जाती है। छिवकी नैनी रेलवे स्टेशन के यार्ड में ही था थोड़ी दूरी पर। बहरहाल ट्रेन बहुत तेज आई और छिवकी यार्ड में खड़ी थी, हम लोग सोचे कि 5 मिनट के अंदर नैनी ब्रिज आयेगा और फिर इलाहाबाद रेलवे स्टेशन। लेकिन जब यार्ड से चली तो चलती ही जा रही है, इलाहाबाद तो दूर नैनी स्टेशन ही आया नहीं। ध्यान दिया तो पता चला कि ये ट्रेन सिंगल ट्रैक वाली रुट पर चल रही है। अब हम दोनों सोचे कि गलती तो हो ही गई है जहां रुकेगी वहां से देखा जाएगा। 
 आगे जाकर ट्रेन की चैन किसी ने खीच दिया और किसी हाल्ट पर खड़ी थी। हम लोगों ने उतरने का निर्णय लिया जो कि गलत था, जब नीचे उतरे तो पता चला कि हमारे जैसे 20 से अधिक लोग बेवकूफ बने थे। बहरहाल पीछे से एक पैसेंजर आ रही थी जिसे पकड़कर एक बड़े स्टेशन पहुंचे, उस स्टेशन का नाम याद नहीं लेकिन वो मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बॉर्डर पर स्थित था। वहां पर क्रासिंग थी तो मुंबई से वाराणसी जा रही ट्रेन रत्नागिरी एक्सप्रेस मिली और उसे पकड़कर दोपहर 1 बजे इलाहाबाद पहुंचे।
कुल मिलाकर जो यात्रा 5/6 घंटे में हो जानी थी 16/17 घंटे में। तब से अनजान ट्रेनों में बैठने से पहले विशेष ध्यान रखते है। 

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