मंगलवार, 20 फ़रवरी 2024

क्रमिक विकास स्थाई होता है

प्रकृति के नियमों के विरुद्ध तत्काल नतीजे की चाह रखना

 एक आदमी को हरियाली बहुत पसंद थी। वह अपने घर के आंगन में एक हरा-भरा पेड़ देखना चाहता था।  उसने सोचा कि अगर एक पौधा लगाया जाय तो उसे पेड़ बनने में बहुत समय लगेगा।  इसलिए क्यों न एक बड़ा पेड़ ही लगा दिया जाय। इसके लिए वह एक बगीचे के एक पूर्ण विकसित पेड़ को कई मजदूरों के सहयोग से उखड़वा कर अपने आंगन में लगा दिया। वह बहुत खुश था कि उसने  एक ही दिन में एक लंबा सफर तय कर लिया है क्योंकि एक पौधे को पेड़ बनने में समय लगता है और उसने एक ही दिन में पेड़ तैयार कर लिया।
  लेकिन अगली सुबह उसके लिए दुख वाली थी क्योंकि उसने देखा कि उसके पत्ते मुरझाने लगे थे और कुछ दिनों के बाद पूरा पेड़ सूख गया।  वह निराश हो गया। 
   यह कहानी हमें प्रकृति के नियम के बारे में बताती है, जो क्रमिक विकास पर आधारित है न कि अचानक छलांग पर। इसी तरह एक ने स्टॉक मार्केट के बारे जानकारी इकट्ठा की तो पता चला कि बहुत सारे ऐसे स्टॉक है जिन्होंने ने 10/20 सालों में सौ सौ गुना तक का रिटर्न दिया है और लालच के वशीभूत स्टॉक मार्केट में कूद गए, जहां कूदे वहीं से मार्केट गिरने लगी, लगातार उनके स्टॉक की घटती वैल्यू से घबराकर अपने स्टॉक घाटे में बेच दिए, आगे चलकर कुछ एक्सपर्ट के टिप पर भी काम किया लेकिन लगातार घाटे से परेशान हो गए, स्टॉक मार्केट को बड़े लोगों और सटोरियों के सफल होने की धारणा बनाकर स्टॉक मार्केट से हमेशा के लिए तौबा कर लिया। इसी तरह के एक लोग को जल्दी स्लिम होने की चाह उठी और एक एक दिन कई घंटे जिम में वर्कआउट करने लगे, जिसका नतीजा हुआ कि शरीर बर्दाश्त नहीं कर पाया, कुछ दिक्कत हुई तो हॉस्पिटल में पैसे खर्च करने पड़े। प्रत्येक चीज का एक प्रॉसेस होता है, जानना पड़ता है, समझना पड़ता है, अनुशासन और धैर्य के साथ कुछ नियमों को पालन करने पड़ते है, उसे पालन किए बैगर कुछ भी नहीं मिलता। जो प्रकृति के इस नियम का पालन करता है वह सफल होगा और उसकी सफलता भी स्थाई होती है।
 आज हम लोगों की एक बड़ी समस्या हो गई है कि वर्षों के नतीजे कुछ दिनों और महीनों में ही प्राप्त कर लेना चाहते है। चूंकि यह चाह प्रकृति के क्रमिक विकास के नियमों के विरुद्ध है इसलिए सफलता नहीं मिलती है और बदले में कुंठा, तनाव, हताशा अलग से मिल जाता है। ऐसा भी होता है कि कभी कभार उसके बगैर भी सफलता मिल जाती है, लेकिन टिकाऊ नहीं होती। वो कहते हैं न अंधे के हाथ बटेर लगना, एक ही बार बटेर लगेगा, बार बार नहीं। कोई भी हमारे सामने अचानक नव धनाढ्य सामने आता है तो उसका आना अचानक का नहीं होता है, उसमें उसके वर्षों की मेहनत काम कर रही होती है जिसे हमने देखा नहीं होता है। 
 प्रकृति का उपरोक्त नियम एक सार्वभौमिक नियम है।  प्रत्येक क्षेत्र में लागू होता है। प्रत्येक जगह इस प्राकृतिक मार्ग का अनुसरण करना चाहिए अन्यथा कोई सार्थक लक्ष्य प्राप्त नहीं कर सकता। प्रकृति के इस नियम का कोई अपवाद नहीं है। वास्तव में किसी भी बड़ी उपलब्धि के लिए पहले नींव बनती है उसके बाद उस पर मकान बनता है। प्रत्येक कार्य के लिए एक निर्धारित अवधि की आवश्यकता होती है जिसमें उसका फाउंडेशन तैयार होता है। छलांग लगाने से हमारे पास ऐसी नींव नहीं होती है।
  जब हम कुछ हासिल करने की जल्दी में होते हैं, तो इसका मतलब है कि हम प्रकृति के नियम को नकार रहे हैं।  हम अपने दम पर एक दुनिया बनाना चाहते हैं और इस तरह की प्रक्रिया इस दुनिया में संभव नहीं है।  जो लोग एक क्रमिक प्रक्रिया में संलग्न होते हैं उन्हें प्रकृति पूर्ण सहयोग करती है  और इस तरह के सहयोग के बिना इस दुनिया में कोई उपलब्धि संभव नहीं है। यदि हम चीजों में छलांग लगाकर कुछ हासिल करने की कोशिश करते हैं, तो अंतिम परिणाम उखड़े हुए पेड़ की तरह होगा।  लेकिन जब हम क्रमिक प्रक्रिया को अपनाते हैं, तो हम अपनी उपलब्धि को मजबूत करते हैं।

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