आज 15 मार्च को वर्ल्ड स्लीप डे है जिसमें 88 से अधिक देश इस दिवस को मना रहे है। दरअसल लोगों को नींद की अहमियत बताने के लिए आज यानी कि 15 मार्च को दुनियाभर में वर्ल्ड स्लीप डे मनाया जा रहा है। इस साल की थीम है - Sleep Equity For Global Health, इस अभियान के तहत लोगों को अच्छी गुणवत्ता वाली नींद का फायदा लोगों को समझाया जाता है। इसके साथ ही ये बढ़ावा दिया जाता है कि हर कोई 7 से 8 घंटे की नींद जरूर पूरी करे।
यदि आदर्श सेहत की बात की जाती है तो उसका एक स्थान पर्याप्त नींद भी आता है। यानी यदि हम अपनी नींद पूरी नहीं करते है तो कहीं न कहीं हम सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे होते है। दरअसल सोते समय हमारे शरीर में रिपेयरिंग का काम हो रहा होता है। शरीर ऊर्जा बटोर रही होती है। भले ही हम सो जाते है लेकिन शरीर नियमित रूप से सक्रिय रहते है, वो अपना काम कर रहे होते है। इसलिए यदि नींद गड़बड़ होती है तो शरीर को कई क्रियाएं प्रभावित होती है। खराब नींद के कारण लाइफ स्टाइल बीमारियों को बढ़ने का खतरा होता है। एक समय था, जब लोग अपनी सेहत पर अच्छी तरह से ध्यान देते थे, लेकिन आज के समय में ज्यादातर लोग अपनी जरूरतों के पीछे इस कदर भागते रहते हैं, इतनी भाग दौड़ बढ़ गई है, काम बहुत बढ़ गया है, देर रात तक टीवी, मोबाइल, सोशल मीडिया देख रहे है। सूचनाओं का अंबार हो गया है। काम में तनाव बढ़ रहे है। आज हम लोग इतना व्यस्त हो गए है कि उन्हें अपनी सेहत पर ध्यान देने का समय ही नहीं मिलता। किसी भी व्यक्ति के लिए सेहत पहली प्राथमिकता होनी चाहिए तो सबसे नीचे चली गई है। जब तक हमारी तबियत खराब नहीं होती तब तक किसी के लिए भी ये अवॉइड लिस्ट में पड़ा रहता है। इसका सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ता है। थकान और कमजोरी महसूस होने लगती है। इन सभी परेशानियों के बीच सबसे बड़ी समस्या उत्पन्न होती है नींद न आने की।
भारत विश्व का दूसरा ऐसा देश है, जहां अधिकतर लोग अनिद्रा से जूझ रहे हैं। इंटरनेशरनल जर्नल ऑफ कंटेम्पररी मेडिकल रिसर्च में प्रकाशित शोध के अनुसार भारत में 45 प्रतिशत लोग अनिद्रा के शिकार है। रिसर्च में यह भी पाया गया कि डायबिटीज और दिल के रोगों का अनिद्रा से गहरा संबंध है। एम्स के एक अध्ययन के अनुसार 50 साल पहले तक लोग प्रतिदिन साढ़े 7 घंटे की नींद ले रहे थे, लेकिन अब लोग लगभग 6 घंटे की ही नींद ले पा रहे हैं। नींद में इस कटौती की एक बड़ी वजह है, लोगों की अतिव्यस्त और तनावपूर्ण जीवनशैली, कामों की हड़बड़ी और भागदौड़ में नींद में कटौती करना ही सबसे आसान लगता है। धीरे-धीरे बेचैनी, सिर दर्द व चिड़चिड़ापन बढ़ने लगता है। तन व मन की कई समस्याएं परेशान करने लगती हैं। थकान और सुस्ती भगाने के लिए चाय, कॉफी व सिगरेट का सेवन बढ़ जाता है। वहीं नींद लाने के लिए अल्कोहल व नशीली दवाओं पर निर्भरता बढ़ती है, जो संपूर्ण सेहत पर असर डालती है।
जीवन व काम का असंतुलन स्लीप स्टैटिस्टिक ऑफ इंडिया द्वारा किए नए एक रिसर्च के अनुसार नाइट शिफ्ट में काम करने वाले 75 प्रतिशत लोग मानते हैं कि वे हमेशा अच्छी नींद से वंचित रहते हैं। उनका नींद का पैटर्न बिगड़ जाता है। प्राकृतिक रूप से रात में अंधेरा होने से ब्रेन से मेलाटोनिन नामक हॉर्मोन का स्राव तेजी से होता है, जो नींद में मदद करता है। नाइट शिफ्ट करने वालों में यह हॉर्मोन कम बनता है। बॉडी क्लॉक पर बुरा असर पड़ता है। जीवन और काम के बीच संतुलन न होने से बढ़ने वाला असर नींद पर बुरा असर डालता है। कई मांनसिक समस्याओं के अलावा रात में भूख लगने पर जंक फूड, सॉफ्ट ड्रिंक्स या कैफीनयुक्त चीजें खाना मोटापे व मधुमेह की आशंका बढ़ा देता है।
नींद से वंचित रहती हैं महिलाएं नेशनल स्लोप फाउंडेशन द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार भारत में लगभग 65 प्रतिशत महिलाएं पर्याप्त नींद से वंचित हैं और उन्हें पुरुषों की तुलना में अधिक नींद की जरूरत होती है। कामकाजी महिलाएं व नवजात शिशु की माताएं खासतौर पर अनिद्रा से जूझ रहीं होती हैं।
इसके अलावा शरीर में एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरॉन हॉर्मोन का असंतुलन भी अनिद्रा का बड़ा कारण है। आमतौर पर माना जाता है कि 45 के बाद मीनोपॉज की अवस्था गुरू होती है। पर, अब महिलाओं में मह जल्दी हो रहा है। रात में 'हॉट फ्लैशेज' व पसीने के साथ नींद खुलती है तो स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह जरूर लेनी चाहिए। पुरुषों में इस अवस्था को एंड्रोपॉज कहा जाता है, आमतौर पर 50 के बाद पुरुषों में इस कारण मूड स्विंग्स व नींद की कमी जैसे लक्षण दिख सकते हैं।
खतरे का संकेत हैं खर्राटे
माना जाता है कि खरटि आ रहे हैं तो व्यक्ति गहरी नींद में है, पर ऐसा नहीं है। लंबे समय तक यह ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एप्नीया का कारण बन सकता है। खरटि तब आते हैं. जब सांस लेने में बाधा पैदा होती है। ऑक्सीजन की पूर्ति में कमी आते ही दिमाग चौकन्ना हो जाता है और नींद खुल जाती है। जब सो रहे व्यक्ति की सांस 10 सेकंड से ज्यादा समय के लिए रुक जाती है या ब्रेन में ऑक्सीजन की पूर्ति 50 प्रतिशत से कम हो जाती है तो ऐसी दशा को ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्नीया कहा जाता है। इस समस्या से पीड़ित व्यक्ति को सुबह बहुत सुस्ती होती है और पूरे दिन उसे नींद आ रही होती है। बार-बार पेशाब आता है।
कई बार लोग अचानक चौंक कर उठ आते , मानो कोई इनका गला दबा रहा हो। सांस हैं नलों के संकरे होने पर हवा के भीतर जाने में बाधा होती है और खरटि सुनाई देने लगते हैं। कई बार मोटापे या गले की संरचना में गड़बड़ी से भी ऐसा हो सकता है। लंबे समय से खरटि की समस्या है तो फेफड़े रोग विशेषज्ञ से मिलना चाहिए। एक समय मैं इससे बहुत पीड़ित था। जब न्यूट्रीशन क्लब ज्वाइन किया तो कोच की देख रेख में मेरा खान पान और लाइफ स्टाइल बदला तो बहुत कुछ अच्छा होने लगा।
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