गर्मी से राहत के लिए वर्षा का इंतजार किया जा रहा है। तो आइए जानते है कि वर्षा कैसे होती है-------
वर्षा सामान्यतया दो किस्म की होती है ।
1-मानसूनी वर्षा और
2- संवहन वर्षा।
मानसूनी वर्षा मैदानी इलाको में होती है जब हवा उच्च वायुदाब से निम्न वायु दाब की ओर जाती है तो अपने साथ बारिश भी लाती है। अपने देश के सन्दर्भ में गर्मियो में उत्तर पश्चिम इलाके में तापमान काफी अधिक होने के कारण निम्नवायु दाब जोन बन जाता है। हवा की यह प्रकृति है कि वो हमेशा उच्च वायुदाब से निम्न वायु दाब की ओर जाती है। अरब सागर में उच्च वायु दाब होता है इसलिए यहाँ से हवा चलती है जो भारत के पश्चिमी घाटो से प्रवेश कर पूर्वी घाट होते हुए बंगाल की खाड़ी होकर पुनः भारत के मैदानी इलाके में प्रवेश करती है। इस समय समुद्र से नमी भी साथ रहती है जो वर्षा को जन्म देती है।
फिर यही जाड़े के दिनों में हवाए वापस आती है तो तमिलनाडु और आन्ध्र में बारिश करती है। इसे लौटती मानसूनी वारिश कहते है।
अब आईये संवहन पे आते है। ये पहाड़ी इलाको और अत्यंत गर्म प्रदेशो में बारिश करता है। जब कोई क्षेत्र चारो ओर पहाड़ी से घिरा होता है तो हवा गर्म होकर ऊपर उठनी शरू हो जाती है जो एक पॉइंट के बाद बारिश होने लगता है। मासिन राम और चेरापूंजी जैसे जगहों की वर्षा इसी श्रेणी में आती है। दुसरा विषुवत रेखीय प्रदेशो में जहाँ अत्यंत गर्मी होती है वह भी ऐसे ही बारिश होती है।
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