शनिवार, 12 जून 2021

बीजू और कलमी आम

आप सोचेंगे कि इस आम के चित्र क्या ख़ास बात है,  संख्या में कुल 8 है सभी पके है हाँ इनके आकार में जरूर अंतर है। बहुत कुछ है इस चित्र में, आईये कुछ जानकारी बढ़ाते है----

वस्तुतः आम के पैदा किये जाने के तरीके के आधार पर आम दो प्रकार का होता है प्रथम बीजू जिसे गुठली से पेड़ लगाया जाता है. ये पेड़ काफी विशाल होते है और फल काफी आकार में छोटे होने के साथ पैदावार भी कम होती है। इसके फलो को गुणवत्ता उच्च कोटि की होती है इसके अंदर रोगों से लड़ने वाले कई तत्व पाये जाते है। 
द्वितीय किस्म है कलमी का जिसमे किसी पेड़ की डाल को थोडा छीलकर मीट्टी से किसी तरीके से एक तय समय के लिए ढक देते है तो उसमे  से जड़ निकलता है और वहां से एक नए पेड़ बन जाता है फिर उसे कहीं भी काटकर लगाया जा सकता है। इसके पेड़ काफी छोटे और फल काफी बड़े होने के साथ साथ पैदावार भी काफी अधिक होती है। इसलिए व्यावसायिक दृष्टि से कलमी काफी सफल रहता है। इसके फल की गुणवत्ता काफी कम होती है और इसे खाने से डायबटीज भी हो सकता है। 

लखनऊ में आम की पैदावार खूब होती है यहाँ के मलीहाबादी आम काफी दूर दूर तक जाता है और इसके दशहरी के काफी लोग दीवाने है। मैं लखनऊ में रहता हूँ इसलिए आम खाकर तृप्त हो जाता हूँ। मैं एक खासियत पिछले 7-8 सालो से देख रहा हूँ और वो है इसकी कीमत में। एक सामान्य नौकरी करने वाले की आय इस अवधि में दो गुने से अधिक बढ़ी है लेकिन आम की कीमत औसतन  वही 25-40 रूपये किलो के भाव से है। पता नहीं किसान को कितना मिलता होगा इसमें से। पता नहीं क्यों कृषि से सम्बंधित बस्तुओं में उत्पादकों को वो लाभ मिल पाते जो लाभ दूसरे पेशे के लोगो को मिल जाया करता है। आज भी लौकी, करेला, तरोई, बैगन, टमाटर, भिन्डी आदि की कीमत 20-30 रु प्रति किलो है। कभी कभार किल्लत होती है तो जरूर एक दिन दो दिन के लिए उछाल मार देता है जिसका भी लाभ उत्पादकों को नहीं मिल पाता। कृषि से सम्बंधित पूरी की पूरी इंडस्ट्री असंगठित है बिचौलिए लाभ सबसे अधिक ले रहे है। 

अब चित्र पर आते है ऊपर वाले चारो बड़े दशहरी है कलमी है और बाजार से क्रय किये हुए है। चुकी फ्रिज से निकाला है इसलिए उस पर कुछ बर्फ का भी अस्तित्व दिख रहा है। निचे के चारो बीजू किस्म के है जो मेरे आवास में लगे पेड़ से गिरे है। मैं दोनों का लाभ ले रहा हूँ।

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