बुधवार, 11 अगस्त 2021

पैकेट बंद आटा की हकीकत

ताजा ताजा खाद्य पदार्थों का उपयोग करना चाहिए। सभी खाद्य पदार्थों के शुद्ध रहने की एक समयावधि होती है, जो उसके पैकेट पर लिखा रहता है। उस समय के व्यतीत होने के बाद वो खराब होने लगता है और उसमें कीड़े पड़ जाते है। कुछ खाद्य पदार्थों को केमिकल मिलाकर उसके खराब होने की प्रोसेस को धीमा कर दिया जाता है। उदाहरण के लिए आटा को ही ले तो बहुत कुछ उसमें मिलावट होती है जो नुकसान करती है। 

एक प्रयोग करके देखें गेहूं का आटा पिसवा कर उसे 2 महीने स्टोर करने का प्रयास करें,आटे में कीड़े पड़ जाना स्वाभाविक हैं,आप आटा स्टोर नहीं कर पाएंगे। 

फिर ये बड़े बड़े ब्रांड कैसे आटा स्टोर कर पा रहे हैं? यह सोचने वाली बात है। 

एक केमिकल है- बेंजोयलपर ऑक्साइड, जिसे ' फ्लौर इम्प्रूवर ' भी कहा जाता है। जिसे अधिकतम 4 मिलीग्राम तक प्रयोग किया जा सकता है, लेकिन आटा बनाने वाली फर्में 400 मिलीग्राम तक ठोक देती हैं। कारण क्या है? आटा खराब होने से लम्बे समय तक बचा रहे। बेशक़ उपभोक्ता की किडनी का बैंड बज जाए। 

कोशिश कीजिये खुद सीधे गेहूं खरीदकर अपना आटा पिसवाकर खाएं।

नियमानुसार आटे का समय..
ठंड के दिनों में    30 दिन
गरमी के दिनोंमें 20 दिन
बारिस के दिनोंमें 15 दिन का बताया गया है। 

ताजा खाइये स्वस्थ रहिये...

वजन कम करने के लिए संपर्क कीजिए

मोटापा या अधिक वजन आज की तिथि में एक बड़ी महामारी के रूप में फैलती जा रही है। खराब खान पान और गलत लाइफ स्टाइल के कारण हर दूसरे तीसरे आदमी का बीएमआई इंडेक्स खतरे के संकेत के पास है। संलग्न पेपर कटिंग में खतरनाक स्तर 32 के बीएमआई की चर्चा की गई है। 

बीएमआई क्या है
इसका पूरा नाम है बॉडी मास इंडेक्स जो हमारे शरीर में ऊंचाई और वजन के अनुसार उपलब्ध फैट की मात्रा को दर्शाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार ऊंचाई का वर्ग करके उसे वजन से विभाजित किया जाता है।

 बीएमआई =वजन (किलोग्राम)/लंबाई ² (मीटर)

अब मैं अपना उदाहरण लेकर देखता हूं
वजन = 80 किलोग्राम
लंबाई = 184 सेंटीमीटर = 1.84 मीटर
बीएमआई = 80 किलोग्राम/(1.84 × 1.84) मीटर
= 80किलोग्रॅम/3.38 मीटर
=23.66

बीएमआई की कितनी श्रेणी होती है
1) यदि BMI की माप 18 से कम आए, तो वजन सामान्य से कम है।
2) यदि BMI की माप 18.5 से 24.9 के बीच आए, तो आपका वजन सामान्य है।
3) यदि BMI की माप 25 से 29 के बीच आए, तो आपका वजन ज्यादा है। ऐसे में सांस फूलना, अधिक पसीना आना, सीढी चढ़ने में तकलीफ, फैटी लिवर जैसी प्रॉब्लम हो सकती हैं।
4) यदि BMI की माप 29.9 से ज्यादा आए, तो आप मोटापे के शिकार हैं। इसके कारण हार्ट डिज़ीज़, कैंसर, डायबिटीज़ की प्रॉब्लम हो सकती है। ये खतरनाक स्तर होता है और शीघ्र मोटापे से मुक्ति के लिए प्रयास किए जाने चाहिए। 

आप भी अपना बीएमआई पता कीजिए और कमेंट में बताए कि किस श्रेणी की है। पेपर कटिंग में आपरेशन विधि से फैट निकलवाने की बात कही जा रही है जिसके अलग से नुकसान होता है। पेपर कटिंग में बैरिएट्रिक सर्जरी का जिक्र किया गया है जिसमें सर्जरी से पेट के आकार को छोटा कर दिया जाता है, जिसमें पाचनतंत्र भी शामिल रहता है. इस सर्जरी के बाद भूख कम लगने लगती है जिससे लोग भोजन का कम मात्रा में उपयोग करते हैं, जिससे वजन धीरे-धीरे कम होने लगता है। ऐसा करने के कई सारे साइड-इफेक्ट्स हैं जिनमें संक्रमण, अस्थि विकृति, रक्तल्पता, डायरिया, पोषण में कमी, पथरी, हार्निया, महिलाओं के लिए गर्भावस्था में परेशानी और समय से पहले बच्चे का जन्म जैसी कई समस्याएं जन्म लेती हैं।

मैने कैसे वजन को कम किया

मेरा भी एक समय यानी 2 साल से पहले वजन 100 किलो के उपर था और बीएमआई 29 से उपर था जिसके कारण स्लिप एपनिया, सायटिका, सांस फूलना, कमर दर्द जैसी समस्याएं हो रही थी। फिर मैने हेल्थ और न्यूट्रिशन क्लब ज्वाइन किया जहां से खान पान, नॉर्मल एक्सरसाइज, पानी पीना और लाइफ स्टाइल में बदलाव किया जिसे पहले महीने में 5 किलों और अब 20 किलो से अधिक  का वेट लॉस  और कमर से 5 इंच से अधिक का इंच लॉस करके सेहत के आदर्श मानकों पर रह रहा हूं। कपड़ों की साइज xxl से xl पर आ गाया और पैंट 40 इंच से 36 पर आ गया है। अब मैं ऐसा हूं और ऐसा ही रहूंगा क्योंकि क्लब के माध्यम से सेहत के संबंध में इतनी जानकारी हो गई है कि जब चाहे वजन बढ़ा ले और जब चाहे घटा ले। 

मैं Health, Wealth and Happiness रूपी तीनों मुहिम  पर समान रूप से सक्रिय रहता हूं और जो व्यक्ति चाहे हमारे इस मुहिम का हिस्सा बन सकता है। मोबाइल नंबर 9889307067 और 7272957000 पर संपर्क कीजिए।

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सोमवार, 9 अगस्त 2021

रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी कैसे बढ़ाएं

वर्तमान कोरोना संकट काल में प्रत्येक जगह इम्यूनिटी अर्थात रोग प्रतिरोधक क्षमता की चर्चा हो रही है। अचानक से इम्यूनिटी की खोज करना मतलब प्यास लगने पर कुएं खोदने जैसा है। यह कोई वस्तु नहीं है जिसे किसी दुकान से पैसे देकर खरीद कर एक दिन में तैयार किया जा सके। यह एक सतत की जाने वाली प्रक्रिया है।  
इम्युनिटी 2 प्रकार की होती है
एक जन्म से मिलता है और दूसरे को समय के साथ बनाना पड़ता है। 
1) बच्चा जब मां के गर्भ में रहता है, तभी से इम्यूनिटी बनने लगती है। इसे हम जेनेटिक या मेटरनल इम्यूनिटी कहते हैं । जब बच्चा पैदा होता है तो मां के दूध से इम्यूनिटी मिलती है। इसके बाद सही खानपान और रुटीन के माध्यम से यह और मजबूत होता है। जैसे ही हमारा शरीर संक्रमित होता है हमारे शरीर के अंदर इम्यूनिटी वाले मौजूद रक्षा सैनिक बचाव करने उतर जाते है। ये सभी के अंदर स्व निर्मित होता है लेकिन दिक्कत तब होती है जब बाहर से कोई बड़ा आक्रमण होता है जिससे ये रक्षा सैनिक बचाव करने में सक्षम नहीं होते है तो उससे रक्षा के लिए बाहर से इम्यूनिटी लेनी पड़ती है।

2) जब बच्चे का वैक्सिनेशन होता है तो जिस बीमारी से बचाव का टीका लगा है , उसके प्रति इम्यूनिटी विकसित हो जाती है। अलग अलग रोगों के लिए अलग अलग टिके विकसित होते है। चूंकि कोरोना पहले नहीं था, इसलिए इसका टीका भी नहीं था जो बनन  के बाद टीकाकरण की शुरुआत हुई। अभी भी इसका टिका पूर्ण रक्षा प्रदान नहीं कर पाया है।
बहरहाल हमारी इम्यूनिटी हमारी सबसे बड़ी रक्षा सैनिक है ये जितना स्ट्रॉन्ग होता है हमें रोगों के दुष्प्रभाव से बचने में सक्षम होते है। जिनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है वो रोगों से शीघ्र प्रभावित होते है।  जिन लोगों ने अपने खान पान पर ध्यान नहीं देते है, उन लोगों के लिए इम्यूनिटी एक बड़ा मुद्दा है। यहां हमें एक चीज और नोट करना है कि कोराना कोई आखिरी वायरस नहीं है, इसके बाद भी कोई वायरस बगैर किसी सूचना के आता रहेगा इसलिए जरूरी है कि इम्यूनिटी पर काम किया जाय। 
कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता का कारण और समस्या का निवारण

इम्यूनिटी में सबसे अहम रोल होता है हमारे खान पान का, यदि हम पोषक पदार्थों से रहित खाद्य पदार्थ खाते है तो शरीर के लिए आवश्यक विटामिन, मिनिरल, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फैट आदि का संतुलन बिगड़ जाता है। इसके अतिरिक्त एक्सरसाइज न करना, पर्याप्त मात्रा में पानी न पीना, जनक फूड खाना आदि भी इम्यूनिटी को कमजोर करता है।  बेहतर तो ये होता है कि हम अपने खान पान में फल, सब्जियों, अनाजों, ड्राई फूट्स को सही से ले। लेकिन खाद्य पदार्थ वर्तमान में मिलावट और दूषित भी आ रहे है इसलिए इसके साथ डॉक्टर्स/डाइटीशियन की मदद से फूड सप्लीमेंट ले सकते है। इसके अतिरिक्त एक और बड़ी अजीब दशा है अपने देश की, देश में एक बड़ी संख्या में  लोग सिरदर्द, फ्लू, वायरल, खांसी , दर्द आदि  के लिए बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक दवाएं ले लेते हैं, खुद से दवा लेने का  असर एक या दो दिन में नहीं, बल्कि तीन से चार साल के अंदर नजर आता है। दवाओं के अधिक इस्तेमाल के बाद शरीर में बैक्टीरिया के खिलाफ काम करने वाला  इम्यून सिस्टम खराब  हो जाते हैं और उन पर दवाओं का असर लगभग खत्म हो जाता है। ऐसे में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने से आसानी से कैंसर, टीबी और एड्स जैसी गंभीर बीमारियों का जन्म हो रहा  है। हम लोगो को सतर्क हो जाना चाहिए और बगैर डाक्टर के सलाह से दवा  कम से कम एंटी बायोटिक तो लेनी ही नहीं चाहिए . इस मामले में चित्र से मदद मिल सकती है।
इस संबंध में विशेष जानकारी के लिए मेरे नंबर 9889307067 और 7272957000 पर कॉन्टेक्ट किया जा सकता है। हमारे यहां खान पान और लाइफ स्टाइल में बदलाव करके सेहतमंद रहना सिखाया जाता है। 
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