वर्तमान कोरोना संकट काल में प्रत्येक जगह इम्यूनिटी अर्थात रोग प्रतिरोधक क्षमता की चर्चा हो रही है। अचानक से इम्यूनिटी की खोज करना मतलब प्यास लगने पर कुएं खोदने जैसा है। यह कोई वस्तु नहीं है जिसे किसी दुकान से पैसे देकर खरीद कर एक दिन में तैयार किया जा सके। यह एक सतत की जाने वाली प्रक्रिया है।
इम्युनिटी 2 प्रकार की होती है
एक जन्म से मिलता है और दूसरे को समय के साथ बनाना पड़ता है।
1) बच्चा जब मां के गर्भ में रहता है, तभी से इम्यूनिटी बनने लगती है। इसे हम जेनेटिक या मेटरनल इम्यूनिटी कहते हैं । जब बच्चा पैदा होता है तो मां के दूध से इम्यूनिटी मिलती है। इसके बाद सही खानपान और रुटीन के माध्यम से यह और मजबूत होता है। जैसे ही हमारा शरीर संक्रमित होता है हमारे शरीर के अंदर इम्यूनिटी वाले मौजूद रक्षा सैनिक बचाव करने उतर जाते है। ये सभी के अंदर स्व निर्मित होता है लेकिन दिक्कत तब होती है जब बाहर से कोई बड़ा आक्रमण होता है जिससे ये रक्षा सैनिक बचाव करने में सक्षम नहीं होते है तो उससे रक्षा के लिए बाहर से इम्यूनिटी लेनी पड़ती है।
2) जब बच्चे का वैक्सिनेशन होता है तो जिस बीमारी से बचाव का टीका लगा है , उसके प्रति इम्यूनिटी विकसित हो जाती है। अलग अलग रोगों के लिए अलग अलग टिके विकसित होते है। चूंकि कोरोना पहले नहीं था, इसलिए इसका टीका भी नहीं था जो बनन के बाद टीकाकरण की शुरुआत हुई। अभी भी इसका टिका पूर्ण रक्षा प्रदान नहीं कर पाया है।
बहरहाल हमारी इम्यूनिटी हमारी सबसे बड़ी रक्षा सैनिक है ये जितना स्ट्रॉन्ग होता है हमें रोगों के दुष्प्रभाव से बचने में सक्षम होते है। जिनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है वो रोगों से शीघ्र प्रभावित होते है। जिन लोगों ने अपने खान पान पर ध्यान नहीं देते है, उन लोगों के लिए इम्यूनिटी एक बड़ा मुद्दा है। यहां हमें एक चीज और नोट करना है कि कोराना कोई आखिरी वायरस नहीं है, इसके बाद भी कोई वायरस बगैर किसी सूचना के आता रहेगा इसलिए जरूरी है कि इम्यूनिटी पर काम किया जाय।
कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता का कारण और समस्या का निवारण
इम्यूनिटी में सबसे अहम रोल होता है हमारे खान पान का, यदि हम पोषक पदार्थों से रहित खाद्य पदार्थ खाते है तो शरीर के लिए आवश्यक विटामिन, मिनिरल, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फैट आदि का संतुलन बिगड़ जाता है। इसके अतिरिक्त एक्सरसाइज न करना, पर्याप्त मात्रा में पानी न पीना, जनक फूड खाना आदि भी इम्यूनिटी को कमजोर करता है। बेहतर तो ये होता है कि हम अपने खान पान में फल, सब्जियों, अनाजों, ड्राई फूट्स को सही से ले। लेकिन खाद्य पदार्थ वर्तमान में मिलावट और दूषित भी आ रहे है इसलिए इसके साथ डॉक्टर्स/डाइटीशियन की मदद से फूड सप्लीमेंट ले सकते है। इसके अतिरिक्त एक और बड़ी अजीब दशा है अपने देश की, देश में एक बड़ी संख्या में लोग सिरदर्द, फ्लू, वायरल, खांसी , दर्द आदि के लिए बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक दवाएं ले लेते हैं, खुद से दवा लेने का असर एक या दो दिन में नहीं, बल्कि तीन से चार साल के अंदर नजर आता है। दवाओं के अधिक इस्तेमाल के बाद शरीर में बैक्टीरिया के खिलाफ काम करने वाला इम्यून सिस्टम खराब हो जाते हैं और उन पर दवाओं का असर लगभग खत्म हो जाता है। ऐसे में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने से आसानी से कैंसर, टीबी और एड्स जैसी गंभीर बीमारियों का जन्म हो रहा है। हम लोगो को सतर्क हो जाना चाहिए और बगैर डाक्टर के सलाह से दवा कम से कम एंटी बायोटिक तो लेनी ही नहीं चाहिए . इस मामले में चित्र से मदद मिल सकती है।
इस संबंध में विशेष जानकारी के लिए मेरे नंबर 9889307067 और 7272957000 पर कॉन्टेक्ट किया जा सकता है। हमारे यहां खान पान और लाइफ स्टाइल में बदलाव करके सेहतमंद रहना सिखाया जाता है।
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