बुधवार, 19 जुलाई 2023

स्टॉक मार्केट में सफलता का आसान तरीका

शेयर मार्केट में जोखिम सबसे बड़ा कारक होता है जिससे सामान्य लोग दूरी बनाए रखते है। स्टॉक मार्केट के संबंध में मेरा मत है कि जीवन में जितनी भी हम गलतियां करते है उसमें से सबसे बड़ी गलतियों में से एक आता है शेयर बाजार को न समझना। सारा जीवन हम पैसे कमाने के चक्कर में भागते रहते है लेकिन कभी पैसे के प्रति अपनी समझ को नहीं बढ़ाते। 
 बहरहाल यहां स्टॉक मार्केट में सफलता पाने का कुछ तरीका बता रहे है जिसे समझकर एक सामान्य आदमी भी आगे बढ़ सकता है। 

1) फ्यूचर/ऑप्शन नही करना है क्योंकि यदि इस सेगमेंट को जुआ कहा जाय तो कोई आश्चर्य नहीं होगा। थोड़ा पैसा लगाकर ज्यादा पैसा कमाने के चक्कर में लोग इस सेगमेंट में प्रवेश करते है और नुकसान उठाकर बाहर हो जाते है।इस सेगमेंट में लाभ कमाने वाले शायद ही कोई दिखे क्योंकि इस सेगमेंट में काम करने के लिए जिस स्तर की जानकारी, अनुभव, अनुशासन, पैसा, समय, सतर्कता चाहिए वो एक रिटेल निवेश के वश के बाहर की होती है। इस प्रकार इस सेगमेंट से दूर रहना श्रेयस्कर होता है।

2) इंट्रा डे नहीं करना है। यदि इंट्रा डे को भी जुआ कहा जाय तो कोई आश्चर्य नहीं होगा। जितना ही समय कम होता जाता है स्टॉक मार्केट की भविष्यवाणी उतनी ही कठिन होती जाती है। बहुत सारे लोगों को लगता है कि स्टॉक मार्केट से रोज पैसा निकाला जा सकता है जो कि उनका भ्रम होता है। इस सेगमेंट में भी काम करने के लिए जिस स्तर की जानकारी, अनुभव, अनुशासन, पैसा, समय, सतर्कता चाहिए वो एक रिटेल निवेश के वश के बाहर की होती है। 
     नंबर 1 और 2 सेगमेंट ब्रोकर के लिए सबसे अधिक लाभ वाला सेगमेंट होता है इसलिए इस उनके द्वारा सबसे अधिक प्रमोट किया जाता है, हम जितना पैसे देते है उससे कभी अधिक आकार में सौदे करने के अवसर प्रदान किए जाते है। जैसे हम 50 हजार रुपए उन्हे देते है उसका 3 से 5 गुना से भी अधिक रुपए के सौदे करने का लालच दिया जाता है। हम बड़े सौदे ये सोचकर करते है की लाभ भी अधिक होगा जबकि होता उलटा है। इसलिए नुकसान बहुत अधिक हो जाता है। हम लोग चाहे स्टॉक खरीदे या बेचे, ब्रोकर को दोनों तरफ से फायदा होता है। हम सभी अपने ट्रेडिंग का बड़ा हिस्सा ब्रोकरेज में से देते है। इस प्रकार दोनों से ही दूर रहना सही होता है।

3) जितना पैसा हो उतने का ही सौदा करना है।  ये सफलता का एक बड़ा आधार है। जितना हमारे पास पैसे हो उतने का ही सौदा लेना चाहिए। इससे क्या होगा कि मार्केट के अचानक दूसरी दिशा में जाने पर हमें ब्रोकर को पैसे नहीं देने होते है। फिर एक समय बाद वो स्टॉक ऊपर आ जाता है। दूसरी चीज कोई उधार और कर्ज लेकर ट्रेडिंग भी नहीं करना है।

4) इसके साथ जिन पैसे के साथ शर्त जुड़ी हो उसे भी यहां लगाने से बचना चाहिए। जैसे 1 को सैलरी हमारे खाते में आती है और कोई 15 को ईएमआई जाती है तो हमें लगता है कि 15 तक ये पैसा बेकार में खाते में पड़ा हुआ है क्यों न इसे ट्रेडिंग में लगा दे। ये एक घातक निर्णय होगा क्योंकि इससे दोहरा नुकसान होने की आशंका बढ़ जाती है।

5)  इन्वेस्टमेंट कम ट्रेडिंग करना है इसका मतलब है कि अच्छे स्टॉक को चुनकर इन्वेस्टमेंट करने है तथा ट्रेडिंग भी करनी है तो स्विंग ट्रेडिंग करना है। स्विंग ट्रेडिंग में मतलब सौदे को एक से अधिक दिन तक होल्ड करना। कुल मिलाकर हमें इन्वेस्टमेंट यानी लॉन्ग टर्म के उद्देश्य से पैसे लगाने है तथा शॉर्ट टर्म मे कोई अवसर दिखे या बहुत ज्यादा प्रॉफिट दिखे तो ट्रेडिंग भी करनी चाहिए। कुल मिलाकर यह है कि हमें ज्यादा से ज्यादा फोकस लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट को करना है जबकि ट्रेडिंग कम करनी है। पैसे की बात की जाय तो कितना पोर्टफोलियो साइज हो उसका 10/20% हिस्सा ट्रेडिंग के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। जिसके लिए स्माल कैप और पैनी स्टॉक से दूरी रखनी है।

6) अच्छे स्टॉक की सूची बनाइए
पिछले कुछ सालों से मार्केट को आउट परफॉर्म करने वाले अपने पसंदीदा 15/20 स्टॉक की वॉचलिस्ट बनाना है। जैसे एचडीएफसी, hdfc bank, रिलायंस इंडस्ट्री, टीसीएस, एशियन पेंट, टाइटन, बजाज फाइनेंस, पिडिलाइट, एस्ट्रल, हैवेल्स, वरुण वेबरीज, हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसे स्टॉक के पिछले 10 सालों के प्रदर्शन को देखेंगे तो पाएंगे कि ये स्टॉक मार्केट के सबसे मजबूत स्टॉक है जिसमें साल में 2/3 बार एंट्री/exit के मौके मिलते है। जब जब ये स्टॉक नया ऊंचाई बनाते है वहां बेचकर नीचे आने पर फिर खरीदारी के लिए प्रयास किया जा सकता है। यहां यह ध्यान देना है कि यदि वो स्टॉक निफ्टी 50 और निफ्टी नेक्स्ट 50 के हो तो ज्यादा सही रहेगा। क्योंकि वो स्टॉक फंडामेंटल तौर पर बहुत स्ट्रॉन्ग होते है। जब नीचे आये खरीदो और जब नईं ऊंचाई को जाए बेचो ।

7) खरीदने बेचने के सही लेवल क्या हो
इस के लिए स्टॉक का  10/20/50/ 100/200 दिन के मूविंग एवरेज को आधार बनाना चाहिए। 

8) अगर नीचे खरीदा है और वहाँ से और नीचे आ गया है तो इन्वेस्टमेंट समझ के भूल जाओ थोड़े दिनों में ऊपर आ जाएगा

9) इस पूरी प्रक्रिया को अनुशासन के साथ बार बार करते करते अपने ट्रेडिंग/इन्वेस्टमेंट आइडियोलॉजी का  एक्सपर्ट बनना है।

10) फाइनेंस को ठीक से समझने के लिए लगातार सीखते रहना है। सफल लोगों के ट्रेडिंग/,इन्वेस्टमेंट आइडियोलॉजी को समझते रहना है। 

फिर एंजॉय कीजिए वेल्थ को

शनिवार, 15 जुलाई 2023

हम अपनी आदतों से अपना व्यक्तित्व बनाते है

हमारा व्यक्तित्व हमारे आदतों का प्रतिफल होता है

क्या आपने ध्यान दिया है कि हम अपने कार्य सालों से एक ही जैसा करते आए है। नहीं ध्यान दिया है, ध्यान दीजिए। क्या रोज सुबह जागने के बाद एक ही जैसे ब्रश पकड़ते है, एक ही जैसे पेस्ट लगाते है, एक ही जैसे रोज ब्रश करते है, रोज एक ही जगह बैठकर पेपर पढ़ते हैं। मतलब सुबह से लेकर शाम तक जो भी कार्य करते है, सभी रोज की तरह एक ही जैसे होते है। एक नशेड़ी रोज संकल्प लेता है नशा छोड़ने का लेकिन जैसे ही शाम यानी नशे का समय होता है, नशा ले ही लेता है। ऐसा क्यों ? क्योंकि जब वो नशा छोड़ने का संकल्प करते वक्त एक आम व्यक्ति होता है लेकिन जब समय आता है तो वो अपनी आदतों का गुलाम होता है। क्योंकि वो "बेसल गेंगलिया" के प्रभाव में होता है। जब हम इसके प्रभाव में रहते है तो हमें गलत सही, वादे, संकल्प का कुछ भी बोध नहीं होता। 

बेसल गेंगलिया होता क्या है
आज और अभी इसे लेकर गूगल पर पढ़िए और इसके महत्व को समझिए। दरअसल हमारे मस्तिष्क में एक प्याज जैसे शक्ल का एक अंग होता है जहां से हमारे मस्तिष्क के कार्यों का निर्धारण होता है। 
जब हम कोई कार्य किसी समय विशेष में लगातार करते है तो वो हमारे बेसल गेंगलिया में स्टोर होता जाता है और एक समय बाद जैसे ही वो समय आता है बेसल गेंगलिया हमारे दिमाग को वही कार्य करने का आदेश देता है। उस समय आदमी स्वाभाविक रूप से वही कार्य करता है, हम गलत चीज स्टोर करेंगे तो गलत काम करेंगे और सही कार्य स्टोर करेंगे तो सही कार्य करेंगे। अब हमारे उपर निर्भर करता है कि अब यहां किस तरह की आदतों को स्टोर करते है। अच्छा करेंगे तो व्यक्तित्व अच्छा बनेगा और खराब आदतें डालेंगे तो व्यक्तित्व खराब बनेगा।
 मनोविज्ञान के अनुसार एक नई आदत बनने में 21 दिन लगते हैं। यानी अच्छे व्यक्तिव की जो आदतें है उन आदतों को 21 दिन लगातार करने पर वो स्वचालित हो जाएगा। तो आइए जानते है कुछ ऐसी छोटी आदतों के बारे में जिसे अपनाकर बेहतर स्थिति में पहुंच सकते है। छोटी छोटी चीजें एक दिन बड़ा नतीजा देती है। कुछ छोटी आदतें इस प्रकार है जिसे बेसल गेंगलिया में स्टोर करना है 

 1. सूर्योदय से पूर्व जागना है क्योंकि सबसे उत्तम समय होता है पूरे दिन की अच्छी शुरुआत की।

 2. जागने के उपरांत सर्वप्रथम ईश्वर को धन्यवाद देना है। अपने जीवन, अपने पास उपलब्ध संसाधनों, परिजनों, मित्रों और जिनके कारण भी हमारा जीवन सहज और सुखद होता है, सभी के लिए ईश्वर को धन्यवाद देना है।

3. आत्म विकास, अध्यात्म, व्यक्तित्व विकास, फाइनेंस आदि से संबंधित पुस्तकों का एक अध्याय पढ़ना है। हो सके तो उसे लिखना है और लोगों के मध्य शेयर भी करना है।

 4. कम से कम 30 मिनट टहलने और योग/व्यायाम करना है

 4. न्यूट्रीशन से भरपूर संतुलित नाश्ता करना है और भोजन जीभ के अनुसार नहीं अपितु शरीर की जरूरतों के अनुसार करना है। 

 5. 5 मिनट के लिए अपने भविष्य के व्यक्तित्व और सपनों की कल्पना करना है

6.किसी भी विषय पर तत्काल प्रतिक्रिया देने से बचना है, संदर्भ प्रसंग के बारे में जानना, समझना और विचार करना है, उसके बात कोई प्रतिक्रिया देने है

 7. रोज कुछ नया सीखना है, नए लोगों से मिलना है और रोज शाम को सोने से पूर्व उसे एक बार स्मरण कर लेना है। 

क्या इनमें से कोई आप आज से लागू करेंगे?
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सोमवार, 10 जुलाई 2023

जीवन बीमा एक निवेश उत्पाद नहीं है

आज सुबह सुबह एक हमारे परिचित एलआईसी एजेंट नाराज हो गए और बहस कर लिए। मन बड़ा दुखित हुआ कि क्या सोचे और क्या हो गया। वैसे मेरी भी गलती थी बल्कि मेरी ही गलती थी जिसके लिए उनसे क्षमा भी मांग ली लेकिन मुझे पता है कि उनका जो स्वभाव है वो इसे गांठ बांधे रखेंगे। 
  बहरहाल विषय पर आते है। अपने सोशल मीडिया वाल पर उन्होंने किसी पेंशन प्लान को पोस्ट किया था जिसका स्क्रीन शॉट यह है
इस पोस्ट में शुद्ध रूप से एक निवेश योजना का उन्होंने उल्लेख किया था और निवेशकों के लिए निवेश के लिए क्या बेहतर विकल्प हो सकते है, उसके लिए मैने ये टिप्पणी किया जिसके लिए वो बेहद नाराज हो गए।
बीमा योजना में कुल कितना लाभ होगा
  मैने लिखा कि 300 रु प्रतिदिन मतलब महीने का 9000 और 15 सालों तक जमा करने पर कुल 16.20 लाख रुपए जमा होंगे। 15 वे साल बाद हर माह 10000 रु निवेशक को मिलेंगे और मैच्योरिटी पर 1.8 करोड़ देगी। यदि हम ये मान ले कि एक व्यक्ति की उम्र 100 साल तक रहेगी तो एक 30 साल वाला आदमी स्टार्ट करता है और 100 की उम्र तक कुल लाभ होंगे 2.46 करोड़। बाद में उनसे फोन पर बातचीत में उन्होंने ये बताया कि 10 लाख का रिस्क कवर भी रहेगा।
अब इसी को टर्म इंश्योरेन्स और म्यूचुअल फंड के साथ लेने पर देखते है 
 एक 30 की उम्र वाले व्यक्ति को 20 हजार रु की प्रीमियम पर आसानी से 50 लाख का टर्म इंश्योरेंस मिल जाएगा। 9000 प्रति माह की एलआईसी प्रीमियम में से 1500 प्रति माह टर्म इंश्योरेंस की प्रोमियम के लिए निकाल लेते है। अब जो बचा है 7500 इसे म्यूचुअल फंड की किसी मिड और लार्ज कैप सेगमेंट की स्कीम में SIP करते है। म्यूचुअल फंड 15 सालों की अवधि में आसानी से 15% सीएजीआर दे देगा। इस प्रकार 15 सालों में कुल जमा रकम होगी 13.50 लाख जिसकी वैल्यू होगी 46.30 लाख रुपए। 

अब हम पेंशन की बात करेंगे
ज्यादा रकम जमा कर प्रति माह पेंशन लेने के लिए SWP स्कीम सही रहता है।
और यहां से इसे उसी फंड में SWP करे और हर माह 45 हजार लिया जाय और 100 साल की उम्र पूरी होने पर पैसा मिल चुका होगा 2.97 करोड़ निकाल चुके होंगे और फंड की फाइनल बैलेंस रहेगी 164 करोड़ से भी अधिक। 
हमें कैसे फायदा अधिक हुआ
1. रिस्क कवर 10 लाख से बढ़कर 50 लाख हो गया
2. पैसा इक्विटी में लगने के कारण तीव्र ग्रोथ मिलता है
3. अंततः फायदा बहुत अधिक हुआ बल्कि 50 गुना से भी अधिक का फायदा हुआ है।

क्या सहन करना है
चूंकि पैसा म्यूचुअल फंड में लग रहा है जो स्टॉक मार्केट आ डायरेक्ट कनेक्ट है तो उतार चढ़ाव का होना स्वाभाविक है। इस उतार चढ़ाव रूपी रिस्क को टाइम आ खत्म किया जा सकता है। यानी समय जितना ही अधिक जोखिम उतना ही कम होता है।

तो पोस्ट कैसा लगा अवश्य टिप्पणी करे। और अधिक जानकारी के लिए मेरे whatsaap number 7272957000 पर संपर्क कर सकते है।

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रविवार, 9 जुलाई 2023

फिटनेस एक यात्रा है पड़ाव नहीं

मैं पहले ऐसा दिखता था। अब से लगभग 4 साल पहले काफी अधिक वजन हो चुका था। 100 किलो के उपर वजन, कमर दर्द, भयंकर खर्राटे और सायटिका की समस्या से पीड़ित। लेकिन यह मुझे पता नहीं था कि यह समस्या मेरे अधिक वजन के कारण है। सत्य तो यह है कि पहले मुझे इस चीज का बोध भी नहीं था कि ज्यादा वजन जैसा कोई विषय भी होता है, पहले तो यही पता था कि एक मोटा आदमी होता है और दूसरा पतला। भला हो जो मैं न्यूट्रीशन क्लब पहुंच गया और पता चला कि ऊंचाई के अनुसार एक आदर्श वजन भी होता है। मेरी पत्नी की भी सेहत बहुत खराब थी। डॉक्टर को दिखाते दिखाते परेशान हो गया था एक साल तो अलग अलग डॉक्टर्स की सलाह पर 3 बार एमआरआई तक करानी पड़ी। लेकिन कोई लाभ नहीं होता था।
   11 दिसंबर 2019 को लखनऊ के स्मृति विहार पार्क में मेरी पत्नी को एक अनजान महिला मिली जिनके माध्यम से एक हेल्थ क्लब में आमंत्रित किया गया। मन में इसे लेकर ढेर सारे भ्रम थे जिससे जाने को तैयार ना था लेकिन पत्नी की जिद के चलते गए। वहां जाकर पता चला कि मेरी ऊंचाई 6 फिट 2 इंच के सापेक्ष 80  किलो के आस पास होना चाहिए। वहां पर चाय की जगह एक विशेष ड्रिंक दिया गया और नाश्ते में भी बहुत ही स्वादिष्ट और मीठा ड्रिंक दिया गया जो शरीर की जरूरतों के अनुसार एक बैलेंस डाइट थी। उस  ड्रिंक के अगले 4 घंटे कुछ भी खाना नहीं था, यहां तक कि एक बिस्किट भी नहीं। और हुआ भी ऐसा ही। पहले दिन ही क्लब का माहौल बहुत अच्छा लगा और ज्वाइन करने का निर्णय लिया। यकीन मानिए देखते देखते लाइफ चेंज हो गई। 
 जैसे जैसे मेरे कोच द्वारा खान पान और लाइफ स्टाइल में बदलाव कराए गए उसे आंख बंद करके फॉलो करते गए और 5 से 6 माह में मैने 20 किलो और मेरी पत्नी ने 24 किलों का वेट लॉस किया। पिछले 3 सालों से मैं सपत्नीक उस क्लब का हिस्सा बने हुए है और अब तक 200 से अधिक लोगों की लाइफ चेंज करने में मदद कर चुके है।
अब ऐसा हो गया हूं 
उस क्लब में मुख्य फोकस कैलोरी मैनेजमेंट कराया जाता है। मै आज भी दिन भर में जो कुछ खाता पीता है उसके एक एक कैलोरी का ध्यान रखता हूं।
   लोगों द्वारा अक्सर मुझसे पूछा जाता है कि आपने इसे कैसे किया है। मैं उनसे कहता हूं आप दिन में बार बार क्या खाते हैं उससे मिलने वाली कैलोरी को ध्यान देंगे तो निःसंदेह फिट रहना बेहद आसान है। सबसे बड़ी बात मैं भरपूर खाता हूं, भरपेट खाता हूं, शाकाहार में सबकुछ खाता हूं, मांसाहार कभी कभार ही होता है, महीने में एक या दो बार, वैसे भी मांसाहार मुझे बहुत ज्यादा पसंद नहीं है। मिठाई भी खाता हूं, मक्खन भी खाता हूं, दही भी खाता हूं, पराठा और पूड़ी भी खाता हूं, दूध भी पीता हूं, घर का बना शुद्ध घी भी लेता हूं। लेकिन कैसे खाता हूं, कितना खाता हूं और किस समय खाता हूं, यह जरूर ध्यान देता हूं।
  मैं अपनी पोस्टों में कहता रहता हूं कि वजन ऊंचाई के अनुसार असंतुलित रहना एक दिक्कत की बात है। वजन ज्यादा होने से लाइफ स्टाइल रोगों को हम आमंत्रित कर रहे होते है। कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, घुटने दर्द, फैटी लीवर, ब्लड प्रेशर जैसे रोग होने की आशंका बहुत बढ़ जाती है। 
वजन को समझना है
किसी भी शरीर के वजन के मुख्य रूप से 4 भाग होते है
1. हड्डियों का वजन जो कि एक समय बाद स्थिर रहता है
2. मसल्स और ऑर्गन के वजन
3. फैट का वजन और 
4. पानी का वजन 
उपरोक्त में से हड्डी और पानी की मात्रा/ वजन में हम छेड़ छाड़ नहीं कर सकते तो हमारे लिए बचता है मसल्स और फैट और हमारा वजन इन्ही में संतुलन के कारण खराब होता है।
 वजन कैसे बढ़ता है 
इसे समझने के लिए पहले हमें बीएमआर को समझना होगा। बीएमआर का मतलब है बेसल मेटाबॉलिक रेट है। शरीर को चलने के लिए दिन भर जितनी कैलोरी उर्जा की जरूरत पड़ती है उसे बीएमआर कहते है। यानी दिन भर कुछ न किया सिर्फ सोया जाय तब भी शरीर की अंदर की गतिविधियां चलती रहती है जिसके लिए जितनी ऊर्जा की जरूरत होती है वो बीएमआर हो जाती है।  शरीर में भोजन, ऊर्जा के रूप में परिवर्तित होना, मेटाबॉलिज्म कहलाता है। इसे रेस्टिंग मेटाबोलिक रेट के रूप में भी जाना जाता है। 
 सामान्य तौर अब हमें दिन भर में कितनी कैलोरी का भोजन लेना है ये इसी बीएमआर पर निर्भर करता है। बीएमआर पता करने के लिए नीचे एक बीएमआर कैलक्यूटर दिया गया है जिसमें हाइट और वेट डालकर पता किया जा सकता है।

https://www.calculator.net/bmr-calculator.html

एक सामान्य व्यक्ति को जितनी बीएमआर निकलकर आती है उसका 10/20% अधिक की कैलरी का इंटेक करना चाहिए। जब यही इससे अधिक हो जाता है तो वो कैलोरी जो बर्न नहीं हो पाती है शरीर में इकट्ठा होने लगती है जो मोटापा का रूप लेकर आती है। लगभग 7000 कैलोरी अतिरिक्त जब शरीर में जमा हो जाता है तो 1 किलो वजन बढ़ जाता है। वजन प्रबंधन का राज इसी कैलोरी प्रबंधन में छुपा हुआ है।
 जिसे वजन घटाना है उसे अपने बीएमआर से कम कैलोरी लेनी है और जिसे बढ़ाना है बीएमआर से ज्यादा कैलोरी लेना है। यदि प्रतिदिन 500 कैलोरी कम लेते है तो 30 दिन में लगभग 15000 कैलोरी हो जाती है जिससे 2 किलो से उपर के वेटलॉस होती है।
वजन ज्यादा होने का नुकसान कैसे होता है 
होता क्या है हमारे खान पान और लाइफ स्टाइल बहुत खराब हो गई है। अब बैठकर ज्यादा काम किया जाता है जिससे शारीरिक एक्टिविटी बहुत कम है जिससे कैलोरी बर्न नहीं हो पाती हैं। दूसरी तरफ हम लोगों के खान पान में ऑयली और फास्ट फूड अधिक हो गया है साथ में भोजन में स्वाद को तरजीह देने के कारण बहुत सारे केमिकल और मसाले प्रयोग हो रहे है जिससे एक तो कैलोरी बढ़ रही है, दूसरी तरफ पोषण वैल्यू भी गिर रही है। हमारे खान में खराब फैट अधिक हो गया है और प्रोटीन कम और जो प्रोटीन लिया भी जा रहा है वो एनिमल आधारित है जिसके बहुत सारी खराबिया आती है। तो इस तरह हम फैट अधिक और प्रोटीन कम ले रहे है। हमारे ऑर्गन प्रोटीन के बने होते है और प्रोटीन कम होने के कारण वो कमजोर हो रहा है। फैट अधिक होने के कारण ऑर्गन पर एक परत जमा हो रही है और धीरे धीरे ऑर्गन के अंदर भी जा रहा है जिससे ऑर्गन की कार्य क्षमता कमजोर हो रही है जिससे बहुत सारे रोग हो रहे है। लीवर फैटी हो रहा है, थायराइड हो रहा है, डायबिटीज हो रही है।

वजन नियंत्रित करने की यात्रा में प्रोटीन का इंटेक बढ़ाते है जबकि फैट को कम करते है।
एक व्यक्ति को एक किलो वजन पर सामान्य तौर पर 1 ग्राम प्रोटीन लेने चाहिए, यानी एक 50 किलो वजन वाले व्यक्ति कम से कम 50 ग्राम प्रोटीन तो लेना ही लेना चाहिए। प्रोटीन शरीर का बिल्डिंग ब्लॉक है और ये पहली जरूरत है। प्रोटीन का जो मुख्य स्रोत है उसमें दालें, दूध, अंडा, सोयाबीन आदि से मुश्किल से एक व्यक्ति को जरूरत का आधा भाग भी मिल नहीं पाता है। तो हमारे हेल्थ क्लब में जिस तरह के खान पान को निर्धारित किया जाता है उसमें पहली चीज प्रोटीन बढ़ाई जाती है और खान पान से फैट कम कराया जाता है जिसे ओवर आल फैट लॉस/वेटलॉस होने लगता है।

शरीर की रचना के महत्व को समझना है
ऐसा नहीं है कि सिर्फ पतले लोग फिट होते है। अक्सर हम लोग देखते है कि पतले लोग भी गंभीर रोगों का शिकार हो जाते है। दरअसल शरीर में फैट की मात्रा खतरनाक होती है। एक पतले आदमी में भी फैट की मात्रा मानकों से अधिक हो सकती है और एक ज्यादा वजन वाले व्यक्ति में फैट की मात्रा कम हो सकती है।

लखनऊ पुणे की यात्रा वृतांत

दिनांक 29.05.2023 को एक शादी में सम्मिलित होने के लिए जाना था। इसके लिए फरवरी माह में ही फ्लाइट का टिकट करवा लिया गया था। चूंकि बच्चो को पहले जाना था इसलिए उनका टिकट 24 मई का था और मेरा 27 को था। बच्चों को फ्लाइट इंडिगो में थी जो रात 9.50 पर लखनऊ से 12.00 तक पुणे पहुंचना था। 
मैने इस बार थोड़ा अलग तरीका अपनाया यात्रा ब्रेक करके टिकट किया। मैने एयर एशिया से टिकट कराया था जो रात में 9 बजे लखनऊ से 11 बजे के आस पास बैंगलोर पहुंचना और पुनः सुबह 4 बजे बैंगलोर से पुणे के लिए फ्लाइट थी। तो इस तरह से मैं ब्रेक जर्नी का अनुभव लेने के लिए ऐसे टिकट किया। 
   इस कार्य हेतु कार्यालय से 5 दिन की छुट्टी लिया था। बहरहाल निर्धारित तिथि 27 मई को शाम को 6 बजे बादशाह नगर रेलवे स्टेशन से मेट्रो पकड़कर चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट लखनऊ पहुंच गया। सबसे पहले बैग चेक इन किया तो वहां से जानकारी ली कि क्या हमें लगेज बैंगलोर में भी लेना पड़ेगा। उत्तर मिला नहीं, लगेज आपको सीधे पुणे में ही मिलेगा। बैंगलोर एयरपोर्ट पर आपको सिक्योरिटी चेक से गुजरना पड़ेगा।
दोनों जगहों का बोर्डिंग पास यहीं दे दिया गया लेकिन बंगलोर में किस गेट से फ्लाइट पकड़नी है, वो नहीं लिखा था। बताया गया कि वहीं पर पता चलेगा। खुशी हुई कि दोनों फ्लाइट में सीट खिड़की वाली मिली। लखनऊ में गेट नंबर 2 रहा जिससे गुजरकर बस में बैठकर फ्लाइट तक पहुंचाया गया। इस बीच सिक्योरिटी चेक में सीआईएसएफ द्वारा मेरे बैग के सेविंग किट में रखा कैंची निकलवा दिया गया जिसका मुझे मलाल हुआ। हालांकि वो कोई खास कीमती नहीं था लेकिन पैसे का नुकसान चल जाता है लेकिन वस्तु का नुकसान थोड़ा तकलीफ देता है।
जैसे ट्रेन की यात्रा में पीछे जाता पेड़, खेत, व्यक्ति, शहर देखना अच्छा लगता है ठीक उसी तरह फ्लाइट में जब विमान उड़ने के लिए रनवे पर स्पीड पकड़ती है और उड़ती है तो वो एक अनूठा अनुभव होता है। उसे बार बार लेने की इच्छा होती है। विमान धीरे धीरे चलकर रनवे पर आता है और अचानक अनाउंस के बाद स्पीड पकड़ती है। हां उस समय तेज आवाज बताने के लिए पर्याप्त होता है ईंजन की क्या हालत होगी। विमान उड़ान भरी और अपने प्यारे शहर को नीचे देखना आकर्षक लगा।

निर्धारित समय पर कैम्पा गौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, बैंगलोर पहुंच गया। एराइवल से बाहर निकलते हुए पूछ लिया कि किस तरफ से फिर इंट्री करनी है। एक बार को इच्छा हुई कि बाहर निकलकर बाहर का नजारा लिया जाय लेकिन इरादा त्याग दिया कि कौन रात में घूमेगा और फिर से इंट्री करने का निर्णय लिया। लेकिन जैसे ही इंट्री की ओर बढ़ा एयरपोर्ट की बनावट देखकर दिल बाग बाग हो गया। मन अतिशय प्रसन्न हुआ। विश्वास बहुत ही खुबसूरत बना है। दरअसल वहां दो टर्मिनल है। टर्मिनल 1 जो पुराना है और 2 जो हाल ही में बना है। मैं टर्मिनल 2 पर था। 
अंदर जाते समय गेट पर कहा गया कि इतनी जल्दी क्यों जा रहे है। मैने कहा कहां बाहर घूमूं, अंदर ही बैठा जाय। इस तरह पूरा प्रॉसेस करने के बाद अंदर आ गया और यह एयरपोर्ट अंदर से और भी खूबसूरत है।

रात में 12 सोचा पेट पूजा की जाय तो वहां के महंगे रेस्टोरेंट में सैंडविच और कॉफी लिया जो लगभग 900 रुपए का पड़ा। लेकिन ऐसी महंगाई सहन की जा सकती है।
गेट नंबर 5 से फ्लाइट में बैठना था जो सीढ़ियों से नीचे उतर कर था। मैने उपर ही बैठने का निर्णय लिया। गेट नंबर 12 के पास आराम कर कुर्सी रही जहां लेट गया और ब्लूटूथ लगाकर पसंदीदा गाने का  लेने लगा। सामने स्थित शीशे से एयरपोर्ट का पूरा नजारा दिख रहा था। कुछ देर बाद गेट नंबर 5 के पास ही आ गया। बैंगलोर एयरपोर्ट पर एक अच्छी चीज है और वो है कुर्सियों के बीच लगा चार्जिंग प्वाइंट और हमने मोबाइल चार्जिंग में लगाकर ऊंघने लगे। सामने बोर्ड पर तमाम फ्लाइट की जानकारी देखता रहा। 

इस गेट से एक हैदराबाद की भी फ्लाइट उड़ी थी। थोड़े देर बाद मेरी फ्लाइट की अनाउंस हुआ और हम लाइन में लग गए फ्लाइट में बैठने के बाद नींद आने लगी। निर्धारित समय पर पुणे पहुंच गया लेकिन वहां अनुभव बहुत कड़वा हुआ और वो अनुभव हुआ ओला कैब का।  दूरी मात्र 3 किलोमीटर की रही लेकिन क्या कहे  पहली चीज तो गाड़ी ही खराब रही बार बार बंद हो जा रही थी, दूसरी चीज बहुत देर तक इंतजार करवाया, बार बार बंद हो जाने के कारण कैब को गंतव्य से पहले ही छोड़ दिया लेकिन चार्ज हुआ 324 रुपए।

यहां पहुंचने के बाद पुणे शहर के सबसे अच्छे डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए लोकप्रिय स्थल जोशी फॉर्म पहुंचे। जहां बहुत ही ज्यादा मस्ती की गई। 


पुणे में घर में पली बिल्लियों से भी मित्रता हो गई।

3 दिन वहां व्यतीत करने के उपरांत वापस लखनऊ को आए। वापसी में इंडिगो से फ्लाइट थी जो रात 4 बजे जिसे पकड़ने के लिए रात 2 बजे ही घर से निकलना पड़ा था। 
और इस तरह सुबह 6 बजे तक लखनऊ चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट आ गए जहां लगेज लेने के बाद मेट्रो पकड़कर अपने घर आ गए। इस तरह यात्रा की समाप्ति हो गई।

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