ये पोस्ट नौकरी करने वालों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। ऐसा देखा जाता है कि ज्यादातर नौकरी करने वाले लोग प्रयास निरस जीवन व्यतीत करते है। उन्हीं लोगों के जीवन में रस भरने के लिए है। यदि इसे अपना लिया जाय तो जीवन सुखमय और प्रसन्नचित रहेगा। तो आइए जानते है।
1. इस शरीर का खयाल रखे क्योंकि ये एक मात्र जगह है जहां आप रहते है।
मैने बहुत सारे लोगों को देखा है कि वो कभी अपने सेहत और शरीर का ध्यान नहीं रखते है। नौकरी के चक्कर में अपनी सेहत खराब कर लेते है। हमें ध्यान रखना है कि सेहत किसी भी व्यक्ति की पहली जरूरत होती है। क्योंकि जब सेहत सही है, शरीर सही है, तभी कुछ है,अन्यथा सब कुछ बेकार है। इसके लिए क्या करे? अपने शरीर को आइडियल वेट और शेप में रखे,. भोजन वो करें जो शरीर को पसंद हो ना कि जीभ को यानी न्यूट्रीशन वाला भोजन लेना है। क्वालिटी हो, क्वांटिटी नहीं, प्रतिदिन आधे घंटे का एक्सरसाइज कीजिए, पर्याप्त नींद लें और तनाव को कम करें और नशे से दूर रहे क्योंकि नशा, नाश होता है।
2.जितना जल्दी हो अपना घर बनावे। आपकी नौकरी पेशा कैसा भी हो, कितनी भी कमाई हो लेकिन अपना घर बनाना प्राथमिकता में होनी चाहिए। इसे एक निवेश के तौर पर भी देखा जा सकता है। अपना घर ग्रामीण इलाके में ही क्यों ना बनाए, लेकिन बनाए अवश्य और वो भी कैरियर के शुरुआत में ही कदम उठा दीजिए। इसके कई लाभ होते है। पहला तो एक मकान होने की संतुष्टि का होना और दूसरा समय के साथ उसकी बढ़ती कीमतें जो एक समय बाद जिम्मेदारियों के बढ़ने पर कदम उठाने की हिम्मत नहीं हो पाती है। कम उम्र में होम लोन लेकर रिस्क भी लिया जा सकता है। स्टार्टिंग में उसकी किश्ते परेशान कर सकती है लेकिन समय के साथ जैसे जैसे वेतन वृद्धि होती है उसका भार हल्का हो जाता है। लोन की किश्त इनकम टैक्स में छूट का एक अलग लाभ भी देती है। इस तरह कैरियर की शुरुआत में अपने घर के लिए कदम उठाना एक समझदारी भरा कदम होता है। 50 की उम्र में या रिटायरमेंट के बाद घर बनाना कोई उपलब्धि नहीं है। सरकारी आवासों या जहां नौकरी करते है इस नियोक्ता द्वारा प्रदान किए गए आवास की आदत न डालें। यह सुविधा बहुत खतरनाक है। क्योंकि एक लंबे समय बाद इसका नुकसान समझ में आएगा। अपने पूरे परिवार को अपने घर में अच्छा समय बिताने दें।
3. नौकरी से छुट्टियां लेकर अपने परिवार और समाज में मध्य समय व्यतीत करे। मैने ऐसे बहुत सारे लोगों को देखा है जिनके जीवन का उद्देश्य ही होता है नौकरी करना। अपने पारिवारिक और सामाजिक हितों को परे रखकर पूरे साल काम करते है और छुट्टियां नहीं लेते है। ये एक घातक आदत है। नौकरी साधन है, साध्य नहीं। आप दुनिया को खीच कर लेकर नहीं चल रहे है, यदि ये मुगालता पाले हुए है तो भ्रम में है। आप अपने विभाग के स्तंभ नहीं हैं। अगर आप को आज कुछ हो जाता है, तो कोई दूसरा आपके स्थान पर आ जाएगा और काम चलता रहेगा। अपने परिवार को प्राथमिकता दें, उसे समय दीजिए।
4. पदोन्नति के पीछे न भागें। अपने कौशल में निपुण बनें और जो आप करते हैं उसमें उत्कृष्ट बनें। अगर वे आपको पदोन्नत करना चाहते हैं, तो कोई बात नहीं, अगर नहीं करते हैं, तो अपने व्यक्तिगत विकास के प्रति सकारात्मक रहें। यदि आप अच्छे रहेंगे, आपके कार्य अच्छे रहेंगे तो आपको मान सम्मान आपकी उम्मीदों से अधिक मिलेगा। पदोन्नति एक प्रॉसेस है जिसमें एक बहुत बड़ी इकाई काम कर रही होती है, किसी एक नौकरी करने वाले के हाथ में नहीं होता और जो चीज अपने हाथों में नहीं होती उसके बारे चिंतन सिवाय दुख के कुछ नहीं देता।
5. ऑफिस की गपशप और राजनीति से बचें। ऐसी चीजों से बचें जो आपके नाम या प्रतिष्ठा को खराब करती हैं। अपने बॉस और सहकर्मियों की बुराई करने वालों में शामिल न हों। नकारात्मक सभाओं से दूर रहें, जिनका एजेंडा सिर्फ़ लोगों के बारे में होता है। ऑफिस की राजनीति बहुत ही गंदी किस्म की राजनीति होती है, इसमें कई तरह जाति, धर्म, क्षेत्र आधारित खेमे होते है। किसी एक खेमा का हिस्सा होना मतलब दूसरे खेमे में स्वीकार्यता का अभाव। इसलिए व्यक्तित्व का निर्माण इस तरह से कीजिए कि सभी खेमे में स्वीकार्यता हो।
6. किसी से प्रतिस्पर्धा न करें, अपनी उंगलियाँ जला लेंगे। अपने साथी सहकर्मियों से प्रतिस्पर्धा आपको तनाव दे सकती है। मैने ऐसे बहुत सारे लोगों को देखा है जो छोटी छोटी बातों को लेकर शिकायतें करते रहते है, कागजी कार्यवाही करते है, जो अंततः छवि की हानि करता है। जहां भी रहिए प्रेम और सौहार्द पूर्ण वातावरण बनाए रखे, विवादों से दूर रहे। ध्यान रखना है कि हमारी छवि, हमारी कार्यप्रणाली हमारे आगे आगे चलती है। यदि ये अच्छा रहेगा तो सब कुछ अच्छा रहेगा। कभी कभार कोई प्रतिकूल परिस्थितियां उत्पन्न होती है तो आपको सहयोग भी मिलता है लेकिन यदि हमारी छवि विवादित रहेगी तो विश्वास कीजिए कहीं से भी कोई सहयोग मिलने से रहा। अपना दिमाग खराब कर लेंगे।
7. अपना आय के स्रोत को बढ़ाइए इसलिए नौकरी के साथ साथ कोई साइड में भी कार्य प्रारंभ कीजिए। आपका वेतन लंबे समय तक आपकी जरूरतों को पूरा नहीं कर पाएगा। आप जितना ही अधिक इस इनकम पर आश्रित रहेंगे आपका उतना ही अधिक प्रेशर में रहेंगे, उतना ही अधिक दब कर रहना पड़ सकता है। कॉन्फिडेंस कमजोर रहेगा। सोर्स ऑफ इनकम जितने ही अधिक रहेंगे उतने ही अधिक खुल कर नौकरी करेंगे, निडर रहेंगे और दूसरा आपके साथ खिलवाड़ नहीं कर सकता। इसके लिए ऋण लेने में भी पीछे न रहिए, यानी ऋण लेकर भी कोई व्यवसाय प्रारंभ करने का मौका मिले तो कीजिए। कुछ लोग कर्ज पर गाड़ी लेकर ट्रेवल्स में देते है या टैक्सी में चलवाते है।
8. अपनी आय का एक हिस्सा बचाएं। सिर्फ खाने पीने में ही व्यस्त न रहे बल्कि आय के एक हिस्से को बचाना भी है। पैसे की एक भाषा होती है वो कहती है कि आज मुझे आप बचा लो, आपका कल मैं बचा लूंगा। यदि आप सोचते है कि अपने खर्च से जो बचेगा, वो बचाएंगे तो बहुत ही गलत एप्रोच बनाए बैठे है। कभी पैसा नहीं बचेगा। पैसे के भी हाथ पांव होते है, यदि पास में रहेगा तो खर्च हो ही जाएगा। इसलिए पहले बचत करना है, उसके बाद खर्च करना है। कोशिश ये करनी है कि अपने पेस्लिप से अपने आप कट जाय। जिससे कर्मचारी भविष्य निधि फंड होता है उसे अवश्य लीजिए और समय के साथ इसे बढ़ाइए भी।
9. निवेश करने की आदत विकसित कीजिए। सिर्फ पैसा बचा लेना ही बुद्धिमानी नहीं होती है बल्कि साथ में निवेश करना बुद्धिमानी भरा कदम कहलाता है। क्योंकि निवेश ही आपको मुद्रा स्फीति से राहत प्रदान करता है। कॉमर्शियल रियल एस्टेट में इन्वेस्ट कीजिए, कोई व्यवसाय चिन्हित कीजिए, उसमें निवेश लीजिए। स्टॉक मार्केट को स्टडी कीजिए, वहां निवेश कीजिए। यदि समझ में न आवे तो म्यूचुअल फंड में निवेश कीजिए, लेकिन कीजिए।
10. अपने कार्यालय के कार्यों को घर न ले जाए। अपने जीवन, विवाह और परिवार को निजी रखें। उन्हें अपने काम से दूर रखें। यह बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यदि दफ्तर को घर लेकर जाएंगे तो जीवन और दुष्कर हो जाएगा। इसके साथ साथ घर को भी ऑफिस लेकर नहीं जाना, ये भी उतना ही इंपॉर्टेंट है।
11. खुद के प्रति ईमानदार रहें और अपने काम पर विश्वास करें। अपने जिम्मेदारियों के प्रति सचेत रहे और अपने कार्यों को पूरी ईमानदारी से करने का प्रयास कीजिए। जी हजूरी करके लंबे समय तक टिक नहीं पाएंगे। कुछ लोग अपनी नौकरी में अपना काम तो नहीं करते है लेकिन अपने बॉस के इर्द-गिर्द खूब घूमते है, खुशामद भी करते है। वो प्रसन्न तो सब कुछ सही। कुछ लोग तो अपने बॉस के घरेलू कार्यों को भी करने में गुरेज नहीं करते है। यहां ध्यान रखना है कि सेल्फ रिस्पेक्ट होनी चाहिए और आपको आपका कार्य ही आगे तक लेकर जाएगा। खुशामद करने से एक तरफ तो आप अपने सहकर्मियों से दूर हो जाएंगे और दूसरी तरफ यदि बॉस आपको छोड़कर चला जाएगा तो बहुत दिक्कत आएगी।
12. बच्चों का भविष्य बनाइए इसका सीधा सा मतलब है कि बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाइए ताकि आगे चलकर अपने पैरों पर खड़ा हो सके। भले ही आपकी कितनी भी दशा खराब हो लेकिन बच्चो के कैरियर बनाने में कभी भी पीछे न रहिए। बच्चों की शिक्षा में किया गया निवेश कई गुना रिटर्न लेकर आता है। परिवार की दशा और दिशा दोनों को 360 डिग्री बदल देता है।
13.जल्दी रिटायर होने को योजना बनावे। नौकरी आपके लिए है, आप नौकरी के लिए नहीं। इसलिए कोशिश करनी है कि 40 से 50 की उम्र के मध्य रिटायरमेंट लेकर अपना बिंदास जीवन जीने की तैयारी किया जाय। वो कहते है ना एक बेहतरीन लाइफ का मतलब है अपने पास पर्याप्त पैसा हो, पैसे का वो स्रोत सुरक्षित रहे और पर्याप्त समय हो। 60/65 साल की रिटायर होंगे ये तीनों तो होगा लेकिन एंजॉयमेंट के लिए उत्साह नहीं रहेगा। इसलिए जरूरी है कि वैसे समय में बाहर हो जाए जब शरीर में ऊर्जा और इच्छाएं भी हो।
14. समाज कल्याण के कार्यों से जुड़ें और हमेशा सक्रिय सदस्य बनें। किसी भी आकस्मिक स्थिति में यह आपकी बहुत मदद करेगा।
15. छुट्टी के दिनों का उपयोग अपने भविष्य के घर या परियोजनाओं को विकसित करने में करें. आमतौर पर आप अपनी छुट्टी के दिनों में जो करते हैं, वह इस बात का प्रतिबिंब होता है कि आप सेवानिवृत्ति के बाद कैसे रहेंगे। अगर इसका मतलब है कि आप अपना सारा समय रिमोट कंट्रोल पर फिल्मे वेब सीरीज देखने में बिताएंगे, तो सेवानिवृत्ति के बाद कुछ अलग होने की उम्मीद न करें। छुट्टियों का वहां निवेश कीजिए जहां से भविष्य की दशा और दिशा सुधरे। यदि आप अपने वर्तमान हालात से संतुष्ट नहीं है और छुट्टियां यों ही जाया कर रहे है तो कुछ भी बदलने वाला नहीं है। दुनिया में ऐसे बहुत सारे लोग है जो छुट्टियों का निवेश करके एक अच्छा भविष्य तैयार कर लिए। इसलिए ध्यान रखे।
16. नौकरी करते हुए ही कोई प्रोजेक्ट शुरू करें. काम करते हुए अपने प्रोजेक्ट को चलने दें और अगर यह अच्छा नहीं चलता है, तो तब तक कोई दूसरा प्रोजेक्ट शुरू करें जब तक कि यह ठीक से न चलने लगे. जब आपका प्रोजेक्ट ठीक से चलने लगे, तो अपने व्यवसाय को संभालने के लिए रिटायर हो जाएँ. ज़्यादातर लोग या पेंशनभोगी जीवन में असफल होते हैं क्योंकि वे प्रोजेक्ट चलाने के लिए रिटायर होने के बजाय प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए रिटायर होते हैं.
17. पेंशन का पैसा किसी प्रोजेक्ट को शुरू करने या स्टैंड खरीदने या घर बनाने के लिए नहीं होता है, बल्कि यह आपके भरण-पोषण या खुद को अच्छे स्वास्थ्य में बनाए रखने के लिए होता है। पेंशन का पैसा स्कूल की फीस भरने या कम उम्र की पत्नी से शादी करने के लिए नहीं होता है, बल्कि खुद की देखभाल करने के लिए होता है।
18. हमेशा याद रखें, जब आप रिटायर होते हैं, तो रिटायर होने के बाद कभी भी दुखी जीवन जीने का उदाहरण न बनें, बल्कि सहकर्मियों के लिए एक रोल मॉडल बनें, जो रिटायर होने के बारे में सोचें।
उम्मीद है लेख आपको बहुत अच्छा लगा होगा और मुझे पूरी उम्मीद है कि यह आपको जीवन को सकारात्मक रूप से देखने में मदद करेगा। किसी भी तरह की मदद और जानकारी के लिए मुझसे मेरे नंबर 9889307067 और 7272957000 पर संपर्क किया जा सकता है।