मैं एक सकारात्मक और प्रगतिशील सोच वाला व्यक्ति हूँ तथा लिखना, पढ़ना, कुछ नया सीखना और लोगों में जानकारियाँ शेयर करना मेरा शौक है. यदि जीवन में आप कुछ अतिरिक्त उपलब्धि अर्जित करना चाह रहे है तो आपको मेरे ब्लॉग से काफी मदद मिल सकती है. वस्तुतः मैं इन्वेस्टमेंट, वेल्थ क्रिएशन, हेल्थ, मोटिवेशन आदि विषयों पर बेहद आसान भाषा में सारगर्भित पोस्ट लिखता रहता हूँ. ये सभी विषय सामान्यतया लोगों को उबाऊ लगते है लेकिन यदि मेरे पोस्ट लगातार पढ़ते रहे तो मुझे विश्वास है कि आसानी से सब समझ में आने लगेगा.
लेबल
- Investment (39)
- Health and Fitness (10)
- Happiness (9)
- health (5)
- फिल्मों के बारे में (2)
- सामान्य ज्ञान (2)
- पुस्तक समीक्षा (1)
सोमवार, 31 मई 2021
राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार क्या होता है
मंगलवार, 4 मई 2021
100 साल पुरानी कम्पनी
शेयरों में निवेश के नियम
स्टॉक मार्केट एक ऐसी जगह है जहाँ जिस तरह का वेल्थ बनता है उस तरह का कहीं भी नहीं बनता. इसा इसलिए होता है क्योंकि हम यहाँ पैसे से बिजनेस खरीदते है. हमारा पैसा हमारे लिए काम करता है. न तो हमें अकाउंट की देखभाल करनी है, न ही होलसेलर रिटेलर का झंझट झेलनी है जैसी सभी समस्याएं दूसरों के हिस्से में आती है. हमारा काम है उस कंपनी के स्टॉक लेकर बैठना. याद रखना है हमें निवेश करना है, ट्रेडिंग नहीं. ट्रेडिंग से हम बड़े लाभ को छोटे लाभ में बदल देते है, याद रखना है कि फर्क 10/20% से नहीं पड़ेगा, फर्क पड़ेगा तो 100, 200 और 500 प्रतिशत या इससे भी अधिक से. और ये रिटर्न तभी मिलेंगे जब निवेश के कुछ नियमों का पालन करेंगे. तो आईये चलते है कुछ नियमों के बारे में जानने के लिए
1. सही कंपनी चुनना है - वेल्थ क्रियेशन की पहली शर्त होती है अच्छी कंपनी में पैसा लगाना. यहाँ याद रखना है कि मार्किट में हजारों की संख्या में कम्पनियाँ लिस्टेड है जिसमें ज्यादातर खराब किस्म की है इसलिए सही कंपनी की पहचान बहुत जरुरी है. प्रश्न यह है कि सही कम्पनी की पहचान क्या होती है ? क्या इनके कोई स्टार लगे होते है ? तो इसकी पहली पहचान है कंपनी के मुनाफे में लगातार बढोत्तरी होना. हम कंपनी के 5 साल के आकड़ें को देखना है कि उनका बिजनेस, टर्न ओवर, लाभ आदि लगातार बढ़ रहा है कि नहीं, यदि बढ़ रहा है तो ओके है अन्यथा दुसरे पहलुओं पर विचार करने की आवश्यकता है। अल्प काल में तो शेयर न्यूज़, अफवाह, घटनाए आदि से घटती बढती है लेकिन लॉन्ग टर्म के शेयर केवल उनके बिज़नस और लाभ से प्रभावित होते है और इसके लिए का से कम पांच साल का समय लिया जाय तो वो एक आदर्श समय होता है. सही कंपनी को किस तरह से सेलेक्ट करे इसके लिए मैंने एक पोस्ट लिख राखी है जिसमें कई पॉइंट दिए गए है जांचने के. उसे पढ़कर काफी जानकारी प्राप्त की जा सकती है.
2.धैर्य व अनुशासन का रहना बहुत जरुरी है - शेयर में निवेश एक
लंबी सीखने की प्रक्रिया है, जिसमें हम अपनी गलतियों से सीखते हैं। यह एक ऐसी जगह है जहाँ हम हर रोज कुछ न कुछ नया सीखते है. निवेश की प्रक्रिया में जो में जो भी कार्य करने है उसमें धैर्य व अनुशासन का होना बहुत जरुरी है, याद रखना है, मार्केट अनुशाषित निवेशको को रिवार्ड देती है और गैर अनुशाषित पैसा गंवाता है, मार्किट गैर अनुशाषित से पैसा लेकर अनुशाषित निवेशक को देती है. इसलिए जितना अधिक अनुशासित रहेंगे लाभ की उम्मीदे और बढ़ जाती है.
3-निवेश में विविधता-विविधता बहुत जरुरी है, पैसा कई सेक्टरों में लगाने चाहिए. किसी भी
एक शेयर में अपने फण्ड का 10% से ज्यादा नहीं डालना चाहिए भले ही वो बहुत बढ़िया कंपनी हो, दूसरी
ओर बहुत अधिक शेयरों में भी निवेश न करें क्योंकि उनकी निगरानी करना
मुश्किल होता है। जानकारों के अनुसार 15-20 विभिन्न
सेक्टरों के शेयर रखे जाय तो अच्छा पोर्टफोलियो बनता है।.अपनी कंपनी के प्रदर्शन का विश्लेषण उसके तिमाही आकड़ों से करते रहन है। जैसे ही कोई गड़बड़ी प्रतीत हो बगैर किसी राग द्वेष से निकल जाना है.
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4).किसी शेयर को सिर्फ इसलिए नहीं खरीदना है कि वो बहुत गिर गया है- यह छोटे निवेशकों द्वारा की जाने वाली बहुत बड़ी गलती होती है. किसी शेयर का गिरता भाव निचे गिरते चाकू की तरह होता है जिसे पकड़ने पर घायल होने की आशंका काफी अधिक होती है. खरीदने से पहले यह जांचना है कि शेयर क्यों गिर रहा है और जब तक उसके गिरने का कारण दूर नहीं होता तब तक उसमें हाथ नहीं डालना है. इसी के उल्टा किसी स्टॉक को सिर्फ इसलिए नहीं बेच देना है कि वो बहुत बढ़ गया है. एक चीज हमेशा याद रखना है कि निचे के अंक की एक सीमा होती है कि शून्य हो सकता है लेकिन ऊँचाई की कोई सीमा नहीं होती. किसी से पूछिये कि सबसे बड़ा अंक कौन सा है कोई नहीं बता सकता लेकिन सबसे छोटी कौन सी संख्या है सभी बता देगे. इसके अतिरिक्त यह भी ध्यान रखना है कि बहुत सारे लोग पन्नी स्टॉक खरीदते है इस उम्मीद में कि वो बहुत बढ़ जाएगा, वो एक भयंकर गलती कर रहे होते है. कोई स्टॉक कम कीमत का है तो कोई न कोई कारण होगा, एक और चीज समझना है कि अच्छी चीज सस्ती नही मिलती और महँगी चीज सस्ती नहीं होती, वो कहावत है न सस्ता रोये बार बार, महंगा रोये एक बार, यानी अच्छे स्टॉक लेने पर एक बार रोना पड़ता है लेकिन जीवन भर सुखी रखती है. किसी स्टॉक के महंगा और सस्ता होने का बहुत सारे मानक होते है एक 5 रुपया कीमत वाली कंपनी 1000 रुपे के भाव वाली कंपनी से महंगी हो सकती है. हमें स्टॉक की कीमत पर नहीं बल्कि मार्किट कैपिटल पर ज्यादा ध्यान देना है
5)-न एक बार में कोई शेयर खरीदना है और न ही एक बार में पूरा बेचना है- बहुत अच्छा फार्मूला है कि एक बार न पूरा स्टॉक खरीदना और न ही एक बार में पूरा बेचना. मार्किट की भविष्यवाणी कोई नहीं कर सकता. इसलिए सबसे सही स्ट्रेटेजी होती है टुकड़ों टुकड़ों में स्टॉक खरीदना और बेचना. इसे निवेश के क्षेत्र में पिरामिड स्टाइल कहा जाता है. जब स्टॉक गिर रहे होते है तो ज्यादा मात्रा में स्टॉक मिलते है जिससे लागत कम होती है. उसी तरह जब भाव बढ़ रहे होते है तो लाभ की उम्मीद और बढ़ जाती है
6- मार्किट की टाइमिंग करने की कोशिश बेकार है- मार्किट की टाइमिंग मतलब जब मार्किट एकदम निचे के स्तर पर होगा तो स्टॉक खरीदना और जब सबसे उच्चत्तम स्तर पर होगा तो बेचना. यह कोई नहीं कर सकता. विजय केडिया कहते है कि सबसे उच्चत्तम स्तर पर बेचना और सबसे निचे के भाव पर खरीदना दो ही आदमी करते है एक तो भगवान् और दुसरे झूठा व्यक्ति. मतलब कोई नहीं जानता कि स्टॉक का सबसे न्यूनतम और उच्चतम स्तर क्या है. जो मार्केट में आदर्श समय का इन्तजार करता है वो इन्तजार ही करता रह जाता है, मार्किट में सबसे अच्छा समय होता है जब हमारे पास पैसे हो और बिकवाली का सबसे उत्तम समय है जब हमे पैसे की जरुरत हो या फिर जब लक्ष्य की प्राप्ति हो जाय.
7) रोज कुछ न कुछ सीखना है- एक चीज सभी को समझना है कि पैसा औकात देखकर आता है, जितनी हमारी औकात होती है, उतनी ही आता है, कभी कभार झटके में ज्यादा पैसा आ जाएगा लेकिन वो टिक नहीं पायेगा, पैसा तभी टिकेगा जब अपनी औकात बढ़ाई जायेगी. यहाँ औकात से आशय है अपनी योग्यता को लगातार बढ़ाना जीतनी योग्यता बढ़ेगी लाभ भी उतना ही बढेगा तो अपनी योग्यता बढानी है. किसी भी मानवा का सबसे बड़ा इन्वेस्टमेंट होता है अपने में निवेश करना. हम शारीर के लिए अच्छा और स्वादिष्ट खाना तो खाते है, सुन्दर दिखने के लिए अच्छे कपडे पहनते है लेकिन जहाँ से हम पैसा कमाते है यानी दिमाग, क्या उसको कभी कोई खुराक देते है ? नहीं न तो मष्तिष्क को भी खुराक चाहिए और वो खुराक है निवेश और पर्सनाल्टी ग्रोथ से सम्बंधित बुक्स को पढ़ना. सफल लोगों के इंटरव्यू पढ़ना, फंड मैनेजर की स्ट्रेटेजी समझना, FII के माइंड सेट को समझना, ब्रोकर रिपोर्ट पढ़ना आदि सभी चीजे हमारी योग्यता को दिन दुनी रात चौगुनि बढ़ाती है. हम जिनता पढेंगे उतना अधिक सीखेंगे, उतनी हमारी योग्यता बढ़ेगी और कमाई भी उसी अनुपात में बढ़ेगी.
8) कम आओगे कमाओगे और रोज आओगे रो जाओगे- बहुत बड़ा कोटेशन है जितना ही कम मार्किट में हम आते है यानी कम ट्रेड करते है तो उतना ही अधिक कमाने की उम्मीद बढ़ जाती है और जितना ही अधिक आते है उतना ही अधिक ट्रेड करते है तो हम अपने ब्रोकर को पैसा कमाने का एक जरिया बन जाते है क्यंकि हम जब भी कुछ खरीदते और बेचते है दोना बार में उसे कमीशन जाता है जो एक समय बाद गन्ना की जाती है तो कुल लाभ को कम कर देता है. बार बार स्टॉक को खरीदने बेचने में हम एक बड़े लाभ को छोटे लाभ में बदल देते है.
9) गलतियों से सीखना है - समीक्षा के दौरान अपनी गलतियों को पहचानना है और उनसे सीखें, क्योंकि खुद के अनुभव को कोई नही हरा सकता। यही अनुभव आपके ‘ ज्ञान के मोती ’ बनेंगे जो निश्चित ही हमें एक सफल शेयर निवेशक बनाने में सहायक होंगे।
सोमवार, 3 मई 2021
दिग्गज निवेशकों के स्टॉक्स
कई लोग निवेश के लिए शेयरों का चुनाव खुद करते हैं जिसके काफी अध्ययन करते है. खुद स्टॉक सेलेक्ट कर निवेश में सफलता के लिए कई चीजे बहुत जरुरी होता है जो सभी नहीं कर पाते है एक आम निवेशक तो कर ही नहीं पाता. इसके उलट कुछ लोग दिग्गज निवेशकों के पसंद के स्टॉक में पैसा लगाना पसंद करते हैं. कुछ दिग्गज निवेशकों के नाम है राकेश झुनझुनवाला, आर के दमानी, रमेश दमानी, रामदेव अग्रवाल, डोली खन्ना, आशीष कचौलिया, अनिल अग्रवाल, विजय केडिया, पोरिन्जू वेलियाथ, मोहनीश पबराइ आदि जिनके पोर्टफोलियों में शामिल शेयरों में लोग निवेश करते हैं. स्टॉक मार्किट में लिस्ट कंपनियों को 1% से अधिक हिस्सेदार लोगों की सूचि एक्सचेंज को देनी पड़ती है जहाँ से यह पता लग जाता है दिग्गज निवेशको की होल्डिंग पता चल जाती है .हम आपको शेयर बाजार के दिग्गज निवेशकों के पोर्टफोलियो के बारे में बता रहे हैं.
१-राकेश झुनझुनवाला
भारत के Warren Buffett कहे जाने वाले दिग्गज निवेशक राकेश झुनझुनवाला को शेयरों में निवेश का मास्टर माना जाता है। इनके प्रमुख स्टॉक है
TITAN
LUPIN
FEDERAL BANK
VIP INDUSTRY
KARUR VYASYA BANK
JUBILANT LIFE
FIRST SOURCE SOLUTION
AGRO TECH FOOD
TV 18
AUTOLINE INDUSTRY
TATA MOTORS
FORTIS HOSPITAL
VA TECH WABAG
ESCORT
ION EXHANGE
2-राधाकिशन दमानी
इस कड़ी में अब बात करेंगे राधाकिशन दमानी के पोर्टफोलियो की जो वैल्यू-पिक के लिए जाने जाते हैं। ये
डी-मार्ट रिटेल चेन के ओनर व प्रमोटर भी है ।
VST INDUSTRY
UNITWD BEWRIES
3 M INDIA
SUNDARAM FINANCE
TRENT
BLUE DART
TV 18
INDIA CEMENT
3-ASHISH KACHAULIA
NOCIL
BIRLASOFT
IFB INDUSTRY
MAJESCO
MASTEK
VAIBHAW GLOBAL
POKARANA
DFM FOOD
KEI INDUSTRY
4-DOLLY KHANNA
चेन्नई आधारित निवेशक डॉली खन्ना आम निवेशकों के बीच खासी लोकप्रिय हैं.
उनके पोर्टफोलियो का प्रबंधन उनके पति राजीव खन्ना करते हैं, जो शुरुआती
दौर में क्वालिटी शेयर भांपने की काबिलियत रखते हैं. केमिकल सेक्टर में एक से बढ़कर एक मल्टी बैगर स्टॉक ये चुने है
NOCIL
RAIN INDUSTRY
RADICO KHETAN
NILKAMAL LTD
JK PAPER
MUTHOOT CAPITAL
SOM DISTELERIES
IFB AGRO
RSWM LTD
BUTTERFLY
5-VIJAY KEDIA
SUDERSHAN CHEMICAL
VAIBHAW GLOBAL
REPRO INDIA
EVERST IND
CERA SANITAYWARE
HERITEJ FOOD
APCOTEX IND
ASTEC LIFE
KOKUYO CAMLIN
ATUL AUTO
6-ANIL KUMAR GOEL
DHAMPUR SUGER
TRIVENI ENG
UTTAM SUGAR
AVADH SUGER
VARDHMAN SPG
MAJESTIC AUTO
SEMTEX FASHION
SRIKALAHASTI PIPE
ध्यान देना है कि हम किस श्रेणी में है
रविवार, 2 मई 2021
पूर्व में दिए गए ट्रेडिंग आइडिया की समीक्षा
शनिवार, 1 मई 2021
लापरवाही ने कोरोना को बढ़ाया
SIP सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान
स्टॉक मार्किट में दो तरीके से निवेश करते है
१- डायरेक्ट जिसमें हमें खुद से स्टॉक सेलेक्ट कर पैसे लगाने पड़ते है.चूँकि मार्किट में पैसे लगाने और उस पर रिटर्न के लिए समय, ज्ञान, संसाधन, दूरदर्शिता, अनुशासन, धैर्य चाहिए जो सभी के पास नहीं होता है इसलिए यहाँ बहुसंख्यक लोग नुकसान उठाते है.
२- इन डायरेक्ट इसमें हमारे और मार्केट के बिच में एक बिचौलिया होता है जिसका काम ही होता है स्टॉक मार्किट में इन्वेस्टमेंट यानी कुल मिलाकर वो एक्सपर्ट होता है, उसकी एक रिसर्च टीम होती है जो कई मानकों पर स्टॉक को फ़िल्टर करके चुन कर एक पोर्टफोलियो बनाती है जिसमें हम उन्हें पैसा देते है तो वो उसमें अपना खर्चा काटकर पूरा पैसा लगा देते है और जो लाभ/हानि होता है वो निवेशक के तौर पर मिल जाता है. जो इन डायरेक्ट तरीके से ये कम करते है उन्हें म्यूच्यूअल फण्ड, पीएमएस, इंश्योरेंस आदि कहा जाता है. लेकिन यहाँ हम बात करेंगे म्यूच्यूअल फण्ड की क्योंकि एक तो ये काफी सरल होते है, दुसरे इनके चार्जेज काफी कम होते है और आसानी से उपलब्ध होते है. तो म्यूच्यूअल फण्ड में भी इन्वेस्टमेंट कई तरीको से करते है
१- एक बार या बार बार
२-sip
SIP सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान
निवेश करने के सबसे लोकप्रिय तरीकों में से एक तरिका है SIP यानी सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान जिसमें नियमित रूप से एक निर्धारीत धनराशि किसी म्यूच्यूअल फण्ड में इन्वेस्ट होती रहती है। आसान भाषा में समझे तो यह एक आरडी यानी आवर्ती जमा की तरह होता है जिसमें हम हर महिने कुछ न कुछ धनराशि डालते हैं जो धीरे धीरे एक बड़े कार्पस में बदल जाता है. जैसे कहावत है न कि बूँद बूँद से तालाब भरता है लेकिन उसके साथ यह शर्त होती है कि बूँद लगातार गिरनी चाहिए और यदि हम वो करने में सफल हो जाते है तो एक समय एक बड़ी संपत्ति के स्वामी बन सकते है. यह इतना आसान है कि मात्र 500 रु से भी कम में स्टार्ट किया जा सकता है
कैसे करते है ?
इसके लिए चेक, पैन, एक फोटो, बैंक की डिटेल और चेक के साथ फॉर्म भरा जाता है फिर बैंक से OTM अप्रूवे हो जाता है तो जो रकम हम बताते है उतनी रकम निर्धारित तारीख को मेरे बैंक खाते से कट जाती है. बहुत ही आसान है. ऑनलाइन सिस्टम और भी आसान होता है. ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट के लिए निचे के लिंक से अकाउंट ओपन कर स्टार्ट कर सकते है या फिर अपना मोबाइल नंबर निचे कमेन्ट बॉक्स में लिख दीजिये आवश्यक मदद मिल जाएगी
SIP के फायदे
1- ये एक बार में बड़ा अमाउंट निवेश करने की जगह छोटी छोटी किश्तों में भुगतान करने का अवसर देता है। उदाहरण के लिए 5,000 रूपये को एकमुश्त देने के बजाय 500/500 रूपये करके 10 बार में पेमेंट कर सकते है। कई फण्ड तो ऐसे है जो न्यूनतम 100 से भी निवेश करने की सुविधा देते है.
2) Rupee cost averaging पर काम करता है, मार्केट के अप डाउन के दौरान हमारी खरीद होती रहती है जिससे समय के अनुसार हमारी लागत एवरेज होती रहती है। जैसे जैसे उसमें पैसा जुड़ता रहता है एक समय बाद power of compounding का विस्फोटक असर दिखता है।
3) इससे निवेश की एक अनिवार्य शर्त अनुशासन होता है जो अपने आप आ जाता है। क्योंकि एक निर्धारित पैसा एक निश्चित तिथि को मार्केट में निवेश होता जाता है। शॉर्ट टर्म में मार्केट में उतार चढ़ाव होता है जबकि लॉन्ग टर्म में मार्केट अंततः बढ़ती ही है। इस सफर में SIP एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। निवेश नियम कहता है कि लगातार निवेश करें,अपने निवेशों पर ध्यान केन्द्रित रखें और अपने निवेश के तरीके में अनुशासन बनाये रखें। हर महिने कुछ राशि अलग निकालने से हमारी आमदनी पर कोई खास अंतर नहीं पड़ता है।
4) SIP के माध्यम से छोटी छोटी बचत करना शायद पहली बार में आकर्षक न लगे लेकिन ये निवेशकों को बचत की आदत डालता है और भविष्य में एक बड़ी रकम बन जाता है। यदि हर महीने 1000 रू का एक SIP किसी इक्विटी फंड 12% की दर से 10 वर्षों में बढकर 2.24 लाख रूपये, 20 साल में 9.92 लाख रु तो 30 सालों में 30.84 लाख रुपये और 40 साल में 98.02 लाख तक हो सकता है। यानी 1 हजार रूपये हमें एक करोड़पति बना सकता है।
5) स्टेप अप की सुविधा
SIP में स्टेप अप की सुविधा होती है। स्टेप अप मतलब हम यदि चाहे तो एक समय ऐसी सुविधा ले सकते है जिसमें अपने आप निवेशित रकम बढ़ जाती है। जैसे 1000 रू की SIP करते है और सोचते है कि अगले वर्ष से यह रकम 1100 हो जाय तो रिटर्न का मजा और भी बढ़ जाता है। उपरोक्त क्रमांक में अंकित उदाहरण में 10% स्टेप अप की सुविधा लेते है तो देखते है क्या रिजल्ट आएगा। इस तरह से फंड की वैल्यू 10 सालों में 3.27 लाख, 20 सालों में 18.65 लाख, 30 सालों में 79.94 लाख और 40 सालों में 3.05 करोड़ फंड बन जाएगा। तो स्टेप अप की सुविधा अपने आप में बेजोड़ है।
6) मार्केट एक्सपर्ट हमेशा जल्दी निवेश शुरू करने की राय देते है क्योंकि जितना अधिक समय मिलता है चक्रवृद्धि ब्याज का लाभ भी उतना ही बड़ा होता है। एक उदाहरण लेते है जिसमें A नाम के व्यक्ति ने 30 साल की उम्र से 1,000 रूपये हर साल बचाना शुरू करता है,वहीं B भी इतना ही धन बचाता है लेकिन 35 साल की आयु से। जब 60 साल की उम्र में फंड वैल्यू देखी जाती है तो A की फंड वैल्यू 30.84 लाख होता है जबकि B का केवल 17.04 लाख। इस उदाहरण में हम 12% की दर से रिटर्न मिलना मान सकते हैं। ये फर्क होता पावर ऑफ कंपाउंडिंग के कारण जिसके लिए जितना ही अधिक समय मिलता उतना ही बड़ा फंड होता है। जितना लंबा निवेश करेंगे उतना ज्यादा आपको रिटर्न मिलेगा।
7) फण्ड मैनेजर की सुविधा हमारे पुरे पैसे को एक प्रोफेशनल फण्ड मैनेजर मैनेज करता है. उसकी अपने काम में विशेषज्ञता होती है इसके लिए उसकी अपनी एक रिसच टीम होती है जो अच्छे से रिसर्च करके अच्छे अच्छे स्टॉक चुनते है . कोई भी स्टॉक चुनने से पहले एक लम्बी रिसर्च प्रक्रिया से गुजरते है जिसके तहत अर्थव्यवस्था की हालत, सेक्टर की हालत फिर उस विशेष कंपनी की बैलेंस शीट, आय व्यय का लेखा जोखा, उसका प्रोडक्ट मार्किट में स्थिति आदि पहलुओं पर विचार करने के उपरान्त वो निवेश करते है. ये जिस तरह से रिसर्च करते है एक सामान्य व्यक्ति के लिए आसान नहीं होता है. इसलिए निवेश पर जोखिम काफी कम हो जाता है
8) एक डायवरसिफाई पोर्टफोलियो. फंड मैनेजर द्वारा निवेश के लिए एक पोर्टफोलियो बनता है जिसमें 20 से लेकर 60 स्टॉक होते है जिसे हम बाहर इतने स्टॉक खरीद भी नहीं पायेंगे. सभी स्टॉक का रिसक रिवार्ड के हिसाब से निश्चित वेटेज प्रदान किया जाता है. और ये सरे स्टॉक मिलते है एक छोटी रकम में. उदाहरण के लिए मान लीजिये आज की तिथि में हम एशियन पेंट के स्टॉक लेना चाहते है तो हमें एक स्टॉक के लिए 2500 रु देने पड़ेंगे. लेकिन हम म्यूच्यूअल फण्ड के माध्यम से 1000 रु. में भी एशियन पेंट के साथ दुसरे स्टॉक भी मिल जाता है. होता क्या है कि एक फण्ड में हजारो लोग निवेश करते है जिससे उसका फण्ड साइज़ हजारो करोड़ों में होता है जिसका एक छोटा हिस्सा किसी विशेष स्टॉक में लगाते है
9) रूपये की कीमत का औसत (Rupee Cost Averaging)
ये मुख्य रूप से शेयरों में निवेश के लिये उपयोगी है। जब हम किसी फंड में नियमित रूप से एक तय धन का निवेश करते हैं तो मार्केट की गिरावट की दशा में हम ज्यादा शेयर की ज्यादा यूनिट खरीदते हैं। इस प्रकार समय के साथ आपकी प्रति शेयर या (प्रति यूनिट) औसत कीमत कम होती जाती है। ये सुविधा बाजार की उतार चढ़ाव में निवेश के जोखिम को कम करती है। इसलिए जो लोग SIP के माध्यम से निवेश करते हैं वे बाजार के गिरने के समय फायदा होता है।
10- पारदर्शिता और सुविधाजनक फंड्स का NAV दैनिक आधार पर आकंडे उपलब्ध कराए जाते हैजिसे हम कभी भी देख सकते है और जब भी पैसे निकलने होते है तो रिक्वेस्ट करने के बाद 3 दिन में बैंक खाते में पैसा आ जाता है.
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