सोमवार, 31 मई 2021

राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार क्या होता है



 संविधान के अनुच्छेद 74 व 75 में मंत्रिपरिषद का प्रावधान किया गया है। 
सरकार चलाने के लिए कुछ लोगों की आवश्यकता होती है, जो सभी प्रकार के निर्णय लेते है, इन सभी व्यक्तियों के समूह को मंत्रिपरिषद कहा जाता है। मंत्री परिषद का कार्यकाल प्रधानमंत्री से तय होता है। प्रधानमंत्री की सलाह से राष्ट्रपति द्वारा मंत्री बनाये या हटाये जाते है। कुल चार प्रकार के मंत्री बनाये जाते है और  प्रत्येक मंत्री अपने विभाग का प्रमुख होता है तथा विभाग से सम्बंधित प्रश्नों का उत्तर देने के लिए उत्तरदायी होता है। मंत्री बनाते समय किसी सदन का सदस्य होना अनिवार्य नहीं है लेकिन 6 माह के अंदर किसी न किसी सदन की सदस्यता लेनी पड़ती है।

मंत्रिपरिषद में चार प्रकार के मंत्री होते है--
1-कैबिनेट मंत्री
2-राज्य मंत्री
3-स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री और
4-उप मंत्री

कैबिनेट मंत्री-----
प्रधान मंत्री सबसे योग्य मंत्रियों को कैबिनेट मंत्री के रूप में चुनता है, कैबिनेट सरकार के सभी निर्णयों के लिए बैठक करती है, इस बैठक में लिए गए निर्णय ही सरकार को दिशा- निर्देश प्रदान करते है । इन्हें अन्य मंत्रियों की तुलना में अधिक शक्ति और सुविधा प्रदान की जाती है। कैबिनेट की प्रत्येक बैठक में सभी कैबिनेट मंत्री का पहुंचना अनिवार्य रहता है।

राज्य मंत्री-----
कैबिनेट मंत्री के सहयोग के लिए राज्य मंत्री पद का निर्माण किया गया है, इस पद पर व्यक्ति कैबिनेट मंत्री के निर्देशानुसार कार्य करता है, राज्य मंत्री कैबिनेट मंत्री की बैठक में भाग नहीं ले सकता है । विशेष परिस्थति में वह कैबिनेट में भाग ले सकता ह

स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री----
इस पद पर व्यक्ति अपने विभाग का प्रमुख होता है, यह कैबिनेट मंत्री के अधीन नहीं होता है, यह अपने विभाग की रिपोर्ट सीधे प्रधानमंत्री को देता है, प्रधानमंत्री इसके लिए किसी विशेष मंत्री को भी नियुक्त कर सकते है | जब कैबिनेट की बैठक में स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री के विभाग से सम्बंधित चर्चा करनी होती है, उस समय स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री को बैठक में उपस्थित रहना अनिवार्य रहता है 

उप मंत्री----
किसी मंत्री के सहयोग के लिए उप मंत्री पद का निर्माण किया गया है, यह अपने वरिष्ठ मंत्री का कार्यभार देखता है तथा उनकी अनुपस्थिति में वह सम्पूर्ण विभाग के प्रमुख के रूप में कार्य करता है

मंगलवार, 4 मई 2021

100 साल पुरानी कम्पनी

अपने देश में ऐसी बहुत सारी कम्पनियां है जो पिछले 100 वर्षों से भी अधिक समय से काम कर रही है। इन कंपनियों के स्टॉक ने अपने निवेशकों को खूब वेल्थ क्रिएट किया है। तो आइए आज बात करते है कुछ 100 साल पुरानी कपनियों के बारे में जिन्होंने एक लम्बे अनुभव और उत्पादों के दम पर ब्रांड वैल्यू बनाई है. इनके उत्पादों को  हम आये दिन प्रयोग करते है. ये अभी भी मार्केट की फेवरिट हैं और हमेशा फेवरेट होने की उम्मीद भी है क्योंकि इनका रिसर्च एंड डेवलपमेंट बढ़िया है।  कहने केएस आशय है ओल्ड इज गोल्ड।

1-आईटीसी--
1910 में इंपीरियल टोबैको कंपनी नाम से स्थापित जिसे वर्ष 1970 में नाम बदलकर इंडियन टोबैको लिमिटेड और 1974 में आईटीसी कर दिया गया। आईटीसी देश की सबसे बड़ी सिगरेट निर्माता कंपनी है जो wills ब्रांड नाम से बनाती है। सिगरेट का कंपनी की कुल आय में 80 फीसदी योगदान है। 1970 में कंपनी एफएमसीजी, होटल, पेपरबोर्ड, पैकेजिंग, एग्री कारोबार में उतरी और अपने को एक एफएमसीजी कारोबार पर फोकस बढ़ा रही है। रेवेन्यू में 
सिगरेट पर ज्यादा आश्रित रहने के कारण और सरकार के टैक्स संबंधी प्रावधानों के कारण पिछले 10 सालों में निवेशकों को कुछ भी पैसा बनाकर नहीं दिया है। इस बीच डिविडेंड भी खूब देती है।  आईटीसी के लिए बड़ा पॉजिटिव है।  कंपनी एफएमसीजी पर फोकस बढ़ाना चाहती है। कंपनी 2030 तक एफएमसीजी से आय बढ़ाकर 1 लाख करोड़ करना चाहती है। आशीर्वाद, बी नैचुरल, सनफीस्ट, बिंगो, यीप्पी कंपनी के मजबूत ब्रान्ड हैं। वर्तमान में 200 रूपये पर ट्रेड कर रहा है। बहुत धैर्य मांगता है यह स्टॉक। मेरा अपना मानना है कि जब तक यह शेयर 300 के उपर एक लंबे समय तक होल्ड नहीं करता है तब तक कोई लम्बा रन अप देखने को नहीं मिलेगा। अभी फिलहाल इसमें ट्रेडिंग के बेहतरीन अवसर है। यह साल में 3 से 4 बार खरीदने बेचने का अवसर दे दे रहा है जहां एक बार के ट्रेड में 10 प्रतिशत से अधिक का रिटर्न आ जाएगा।

2-टाटा स्टील-------
1907 में इसकी शुरुआत जमशेदपुर, झारखंड में हुई थी, ये एशिया की पहली स्टील कंपनी है। टाटा स्टील एंड आयरन कंपनी के नाम से इसकी शुरुआत हुई थी। 1938 में जेआरडी टाटा कंपनी के चेयरमैन बने। 50 देशों में कंपनी का कारोबार और 5 महाद्वीपों में इसके कर्मचारी हैं। ये दुनिया की सबसे सस्ती स्टील बनाने वाली कंपनी है। टाटा स्टील की 5 साल में क्षमता बढ़ाकर दोगुनी करने की योजना है। कंपनी अपने टाटा मेटालिक, टाटा स्पॉन्ज, भूषण स्टील को मर्ज करने जा रहे है जो कि बहुत ही अच्छा है। वैसे भी टाटा ग्रुप पिछले कुछ सालों से अपने बिजनेस को पुनर्गठित करने में लगा हुआ है जिस कड़ी में टाटा ग्लोबल और टाटा केमिकल से टाटा कंज्यूमर बनाया, टाटा मोटर्स सभी को बेहतरीन बना रहे है।  टाटा स्टील ने यूरोप में नुकसान वाली यूनिट बेच दी है। भूषण स्टील के अधिग्रहण से कंपनी की ऑटो सेक्टर में पहुंच बढ़ी है। अभी 1063 रु पर ट्रेड कर रही है 
3-ब्रिटानिया--------
126 साल से ब्रिटानिया का जलवा कायम है। 1892 में 295 रुपये के निवेश से कंपनी की शुरुआत हुई थी। भारत में 13 फैक्ट्री के साथ 60 देशों में कंपनी की मौजूदगी है। ब्रिटानिया बिस्कुट इंटस्ड्री में मार्केट लीडर है। इसके गुड डे, मैरीगोल्ड, मिल्क बिकीस और टाइगर ब्रैंड हिट हैं। कंपनी बिस्कुट के अलावा डेयरी प्रोडक्ट में भी है। एक बेहतरीन रिटर्न देने वाली कंपनी है और इस समय अच्छे करेक्शन पर भी उपलब्ध है। 3435 रूपये पर ट्रेड कर रही है।

4-फीनिक्स मिल्स------
1905 में बनी फीनिक्स मिल्स 100 साल से ज्यादा का पुराना इतिहास है। मुंबई में टैक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के तौर पर इसकी शुरुआत हुई। सन 2000 के आसपास कंपनी ने टेक्सटाइल यूनिट बंद कर दी। बाद में कंपनी मॉल डेवलपर बनकर धमाल मचाया। यूनिट की जमीन पर हाई स्ट्रीट फीनिक्स मॉल बनाया। हाई स्ट्रीट फीनिक्स मॉल मुंबई का सबसे चर्चित मॉल है। आज देश के हर बड़े शहरों में इसके मॉल हैं ।

5-टीवीएस मोटर----
1911 में टीवीएस ग्रुप की शुरुआत हुई। इसने 1911 में दिल्ली में पहली बस सर्विस शुरू की। आज 90 से ज्यादा कंपनियां ग्रुप के अंदर हैं। कंपनी ने 1980 में मोपेड उतारकर धमाका किया। टू-सीटर 50सीसी मोपेड ने ऑटो सेक्टर की दिशा बदल दी थी। ये देश की तीसरी सबसे बड़ी टू-व्हीलर कंपनी है। फाइनेंस, इंश्योरेंस, टायर, हाउसिंग, एविएशन में भी कंपनी का कारोबार है। कंपनी आज स्कूटर, मोटरसाइकिल, मोपेड, थ्री-व्हीलर बनाती है।
6-गोदरेज इंडस्ट्रीज-----
गोदरेज इंडस्ट्रीज 119 साल पुरानी कंपनी है। अरदेशीर गोदरेज ने इसकी स्थापना की थी। ये गोदरेज ग्रुप की एक होल्डिंग कंपनी है। अदि गोदरेज ग्रुप के चेयरमैन हैं। कंपनी कंज्यूमर प्रोडक्ट, एग्री, रियल एस्टेट और रिटेल कारोबार में है। कंपनी का कारोबार 18 देशों में फैला है। ग्रुप की कई कंपनियों की लिस्टिंग संभव। कंपनी के प्रोमोटर की इमेज बेहद अच्छी है। कंपनी हर साल मोटा डिविडेंड देती है।

शेयरों में निवेश के नियम

स्टॉक मार्केट एक ऐसी जगह है जहाँ जिस तरह का वेल्थ बनता है उस तरह का कहीं भी नहीं बनता. इसा इसलिए होता है क्योंकि हम यहाँ पैसे से बिजनेस खरीदते है. हमारा पैसा हमारे लिए काम करता है. न तो हमें अकाउंट की देखभाल करनी है, न ही होलसेलर रिटेलर का झंझट झेलनी है जैसी सभी समस्याएं दूसरों के हिस्से में आती है. हमारा काम है उस कंपनी के स्टॉक लेकर बैठना.  याद रखना है हमें निवेश करना है, ट्रेडिंग नहीं. ट्रेडिंग से हम बड़े लाभ को छोटे लाभ में बदल देते है, याद रखना है कि फर्क 10/20% से नहीं पड़ेगा, फर्क पड़ेगा तो 100, 200 और 500 प्रतिशत या इससे भी अधिक से. और ये रिटर्न तभी मिलेंगे जब निवेश के कुछ नियमों का पालन करेंगे. तो आईये चलते है कुछ नियमों के बारे में जानने के लिए

1. सही कंपनी चुनना है - वेल्थ क्रियेशन की पहली शर्त होती है अच्छी कंपनी में पैसा लगाना. यहाँ याद रखना है कि मार्किट में हजारों की संख्या में कम्पनियाँ लिस्टेड है जिसमें ज्यादातर खराब किस्म की है इसलिए सही कंपनी की पहचान बहुत जरुरी है. प्रश्न यह है कि सही कम्पनी की पहचान क्या होती है ? क्या इनके कोई स्टार लगे होते है ? तो इसकी पहली पहचान है कंपनी के  मुनाफे में लगातार बढोत्तरी होना. हम कंपनी के 5 साल के आकड़ें को देखना है कि उनका बिजनेस, टर्न ओवर, लाभ  आदि लगातार बढ़ रहा है कि नहीं, यदि बढ़ रहा है तो ओके है अन्यथा दुसरे पहलुओं पर विचार करने की आवश्यकता है। अल्प काल में तो शेयर न्यूज़, अफवाह, घटनाए आदि से घटती बढती है लेकिन लॉन्ग टर्म के शेयर केवल उनके बिज़नस और लाभ से प्रभावित होते है और इसके लिए का से कम पांच साल का समय लिया जाय तो वो एक आदर्श समय होता है. सही कंपनी को किस तरह से सेलेक्ट करे इसके लिए मैंने एक पोस्ट लिख राखी है जिसमें कई पॉइंट दिए गए है जांचने के. उसे पढ़कर काफी जानकारी प्राप्त की जा सकती है.

2.धैर्य व अनुशासन का रहना  बहुत जरुरी है - शेयर में निवेश एक लंबी सीखने की प्रक्रिया है, जिसमें  हम अपनी गलतियों से सीखते हैं। यह एक ऐसी जगह है जहाँ हम हर रोज कुछ न कुछ नया सीखते है. निवेश की प्रक्रिया में जो में जो भी कार्य करने है उसमें धैर्य व अनुशासन का होना बहुत जरुरी है, याद रखना है, मार्केट अनुशाषित निवेशको को रिवार्ड देती है और गैर अनुशाषित पैसा गंवाता है, मार्किट गैर अनुशाषित से पैसा लेकर अनुशाषित निवेशक को देती है. इसलिए जितना अधिक अनुशासित रहेंगे लाभ की उम्मीदे और बढ़ जाती है. 

3-निवेश में विविधता-विविधता बहुत जरुरी है, पैसा कई सेक्टरों में लगाने चाहिए.  किसी भी  एक शेयर में अपने फण्ड का 10% से ज्यादा नहीं डालना चाहिए भले ही वो बहुत बढ़िया कंपनी हो, दूसरी ओर बहुत अधिक शेयरों में भी निवेश न करें क्योंकि उनकी  निगरानी करना मुश्किल होता है। जानकारों के अनुसार 15-20 विभिन्न सेक्टरों के शेयर रखे जाय तो अच्छा पोर्टफोलियो बनता है।.अपनी कंपनी के प्रदर्शन का विश्लेषण उसके तिमाही आकड़ों से करते रहन है। जैसे ही कोई गड़बड़ी प्रतीत हो बगैर किसी राग द्वेष से निकल जाना है.
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4).किसी शेयर को सिर्फ इसलिए नहीं खरीदना है कि वो बहुत गिर गया है- यह छोटे निवेशकों द्वारा की जाने वाली बहुत बड़ी गलती होती है. किसी शेयर का गिरता भाव निचे गिरते चाकू की तरह होता है जिसे पकड़ने पर घायल होने की आशंका काफी अधिक होती है. खरीदने से पहले यह जांचना है कि शेयर क्यों गिर रहा है और जब तक उसके गिरने का कारण दूर नहीं होता तब तक उसमें हाथ नहीं डालना है. इसी के उल्टा किसी स्टॉक को सिर्फ इसलिए नहीं बेच देना है कि वो बहुत बढ़ गया है. एक चीज हमेशा याद रखना है कि निचे के अंक की एक सीमा होती है कि शून्य हो सकता है लेकिन ऊँचाई की कोई सीमा नहीं होती. किसी से पूछिये कि सबसे बड़ा अंक कौन सा है कोई नहीं बता सकता लेकिन सबसे छोटी कौन सी संख्या है सभी बता देगे. इसके अतिरिक्त यह भी ध्यान रखना है कि बहुत सारे लोग पन्नी स्टॉक खरीदते है इस उम्मीद में कि वो बहुत बढ़ जाएगा, वो एक भयंकर गलती कर रहे होते है. कोई स्टॉक कम कीमत का है तो कोई न कोई कारण होगा, एक और चीज समझना है कि अच्छी चीज सस्ती नही मिलती और महँगी चीज सस्ती नहीं होती, वो कहावत है न सस्ता रोये बार बार,  महंगा रोये एक बार, यानी अच्छे स्टॉक लेने पर एक बार रोना पड़ता है लेकिन जीवन भर सुखी रखती है. किसी स्टॉक के महंगा और सस्ता होने का बहुत सारे मानक होते है एक 5 रुपया कीमत वाली कंपनी 1000 रुपे के भाव वाली कंपनी से महंगी हो सकती है. हमें स्टॉक की कीमत पर नहीं बल्कि मार्किट कैपिटल पर ज्यादा ध्यान देना है

5)-न एक बार में कोई शेयर खरीदना है और न ही एक बार में पूरा बेचना है- बहुत अच्छा फार्मूला है कि एक बार न पूरा स्टॉक खरीदना और न ही एक बार में पूरा बेचना. मार्किट की भविष्यवाणी कोई नहीं कर सकता. इसलिए सबसे सही स्ट्रेटेजी होती है टुकड़ों टुकड़ों में स्टॉक खरीदना और बेचना. इसे निवेश के क्षेत्र में पिरामिड स्टाइल कहा जाता है. जब स्टॉक गिर रहे होते है तो ज्यादा मात्रा में स्टॉक मिलते है जिससे लागत कम होती है. उसी तरह जब भाव बढ़ रहे होते है तो लाभ की उम्मीद और बढ़ जाती है 

6- मार्किट की टाइमिंग करने की कोशिश बेकार है- मार्किट की टाइमिंग मतलब जब मार्किट एकदम निचे के स्तर पर होगा तो स्टॉक खरीदना और जब सबसे उच्चत्तम स्तर पर होगा तो बेचना. यह कोई नहीं कर सकता. विजय केडिया कहते है कि सबसे उच्चत्तम स्तर पर बेचना और सबसे निचे के भाव पर खरीदना दो ही आदमी करते है एक तो भगवान् और दुसरे झूठा व्यक्ति. मतलब कोई नहीं जानता कि स्टॉक का सबसे न्यूनतम और उच्चतम स्तर क्या है. जो मार्केट में आदर्श समय का  इन्तजार करता है वो इन्तजार ही करता रह जाता है, मार्किट में सबसे अच्छा समय होता है जब हमारे पास पैसे हो और बिकवाली का सबसे उत्तम समय है जब हमे पैसे की जरुरत हो या फिर जब लक्ष्य की प्राप्ति हो जाय. 

7) रोज कुछ न कुछ सीखना है- एक चीज सभी को समझना है कि पैसा औकात देखकर आता है, जितनी हमारी औकात होती है, उतनी ही आता है, कभी कभार झटके में ज्यादा पैसा आ जाएगा लेकिन वो टिक नहीं पायेगा, पैसा तभी टिकेगा जब अपनी औकात बढ़ाई जायेगी. यहाँ औकात से आशय है अपनी योग्यता को लगातार बढ़ाना जीतनी योग्यता बढ़ेगी लाभ भी उतना ही बढेगा तो अपनी योग्यता बढानी है. किसी भी मानवा का सबसे बड़ा इन्वेस्टमेंट होता है अपने में निवेश करना. हम शारीर के लिए अच्छा और स्वादिष्ट खाना तो खाते है, सुन्दर दिखने के लिए अच्छे कपडे पहनते है लेकिन जहाँ से हम पैसा कमाते है यानी दिमाग, क्या उसको कभी कोई खुराक देते है ? नहीं न तो मष्तिष्क को भी खुराक चाहिए और वो खुराक है निवेश और पर्सनाल्टी ग्रोथ से सम्बंधित बुक्स को पढ़ना. सफल लोगों के इंटरव्यू पढ़ना, फंड मैनेजर की स्ट्रेटेजी समझना, FII के माइंड सेट को समझना, ब्रोकर रिपोर्ट पढ़ना आदि सभी चीजे हमारी योग्यता को दिन दुनी रात चौगुनि बढ़ाती है. हम जिनता पढेंगे उतना अधिक सीखेंगे, उतनी हमारी योग्यता बढ़ेगी और कमाई भी उसी अनुपात में बढ़ेगी.

8) कम आओगे कमाओगे और रोज आओगे रो जाओगे- बहुत बड़ा कोटेशन है जितना ही कम मार्किट में हम आते है यानी कम ट्रेड करते है तो  उतना ही अधिक कमाने की उम्मीद बढ़ जाती है और जितना ही अधिक आते है उतना ही अधिक ट्रेड करते है तो हम अपने ब्रोकर को पैसा कमाने का एक जरिया बन जाते है क्यंकि हम जब भी कुछ खरीदते और बेचते है दोना  बार में उसे कमीशन जाता है जो एक समय बाद गन्ना की जाती है तो कुल लाभ को कम कर देता है. बार बार स्टॉक को खरीदने  बेचने में हम एक बड़े लाभ को छोटे लाभ में बदल देते है.

9) गलतियों से सीखना है - समीक्षा के दौरान अपनी गलतियों को पहचानना है  और उनसे सीखें, क्योंकि  खुद के अनुभव को कोई नही हरा सकता। यही अनुभव आपके ‘ ज्ञान के मोती ’ बनेंगे जो निश्चित ही हमें एक सफल शेयर निवेशक बनाने में सहायक होंगे।

सोमवार, 3 मई 2021

दिग्गज निवेशकों के स्टॉक्स

  कई लोग निवेश के लिए शेयरों का चुनाव खुद करते हैं जिसके काफी अध्ययन करते है. खुद स्टॉक सेलेक्ट कर निवेश में सफलता के लिए कई चीजे बहुत जरुरी होता है जो सभी नहीं कर पाते है एक आम निवेशक तो कर ही नहीं पाता. इसके उलट  कुछ लोग दिग्गज निवेशकों के पसंद के स्टॉक में पैसा लगाना पसंद करते हैं. कुछ दिग्गज निवेशकों के नाम है राकेश झुनझुनवाला, आर के दमानी, रमेश दमानी, रामदेव अग्रवाल, डोली खन्ना, आशीष कचौलिया, अनिल अग्रवाल, विजय केडिया, पोरिन्जू वेलियाथ, मोहनीश पबराइ आदि जिनके पोर्टफोलियों में शामिल शेयरों में लोग निवेश करते हैं. स्टॉक मार्किट में लिस्ट कंपनियों को 1% से अधिक हिस्सेदार लोगों की सूचि एक्सचेंज को देनी पड़ती है जहाँ से यह पता लग जाता है दिग्गज निवेशको की होल्डिंग पता चल जाती है .हम आपको शेयर बाजार के दिग्गज निवेशकों के पोर्टफोलियो के बारे में बता रहे हैं. 

१-राकेश झुनझुनवाला 

भारत के Warren Buffett कहे जाने वाले दिग्गज निवेशक राकेश झुनझुनवाला को शेयरों में निवेश का मास्टर माना जाता है। इनके प्रमुख स्टॉक है 

TITAN

LUPIN

FEDERAL BANK

VIP INDUSTRY

KARUR VYASYA BANK

JUBILANT LIFE

FIRST SOURCE SOLUTION

AGRO TECH FOOD

TV 18

AUTOLINE INDUSTRY

TATA MOTORS

FORTIS HOSPITAL 

VA TECH WABAG

ESCORT

ION EXHANGE

2-राधाकिशन दमानी 

इस कड़ी में अब बात करेंगे राधाकिशन दमानी के पोर्टफोलियो की जो वैल्यू-पिक के लिए जाने जाते हैं। ये  डी-मार्ट रिटेल चेन के ओनर व प्रमोटर भी है । 

VST INDUSTRY

UNITWD BEWRIES 

3 M INDIA 

SUNDARAM FINANCE

TRENT

BLUE DART

TV 18  

INDIA CEMENT

3-ASHISH KACHAULIA

उन्हें क्वालिटी शेयरों की पहचान करने में महारत हासिल है.
उन्हें क्वालिटी शेयरों की पहचान करने में महारत हासिल है.

NOCIL

BIRLASOFT

IFB INDUSTRY

MAJESCO

MASTEK

VAIBHAW GLOBAL

POKARANA

DFM FOOD

KEI INDUSTRY

 

4-DOLLY KHANNA  

चेन्नई आधारित निवेशक डॉली खन्ना आम निवेशकों के बीच खासी लोकप्रिय हैं. उनके पोर्टफोलियो का प्रबंधन उनके पति राजीव खन्ना करते हैं, जो शुरुआती दौर में क्वालिटी शेयर भांपने की काबिलियत रखते हैं.  केमिकल सेक्टर में एक से बढ़कर एक मल्टी बैगर स्टॉक ये चुने है

NOCIL

RAIN INDUSTRY 

RADICO KHETAN

NILKAMAL LTD

JK PAPER

MUTHOOT CAPITAL

SOM DISTELERIES

IFB AGRO

RSWM LTD

BUTTERFLY  

5-VIJAY KEDIA 

SUDERSHAN CHEMICAL

VAIBHAW GLOBAL

REPRO INDIA

EVERST IND

CERA SANITAYWARE

HERITEJ FOOD

APCOTEX IND 

ASTEC LIFE

KOKUYO CAMLIN

ATUL AUTO 

6-ANIL KUMAR GOEL

DHAMPUR SUGER

TRIVENI ENG

UTTAM SUGAR

AVADH SUGER

VARDHMAN SPG

MAJESTIC AUTO

SEMTEX FASHION 

SRIKALAHASTI PIPE


1. डॉली खन्ना चेन्नई आधारित निवेशक डॉली खन्ना आम निवेशकों के बीच खासी लोकप्रिय हैं. उनके पोर्टफोलियो का प्रबंधन उनके पति राजीव खन्ना करते हैं, जो शुरुआती दौर में क्वालिटी शेयर भांपने की काबिलियत रखते हैं. डॉली खन्ना के पास कई कंपनियों में बड़ी हिस्सेदारी है.
1. डॉली खन्ना चेन्नई आधारित निवेशक डॉली खन्ना आम निवेशकों के बीच खासी लोकप्रिय हैं. उनके पोर्टफोलियो का प्रबंधन उनके पति राजीव खन्ना करते हैं, जो शुरुआती दौर में क्वालिटी शेयर भांपने की काबिलियत रखते हैं. डॉली खन्ना के पास कई कंपनियों में बड़ी हिस्सेदारी है.

 

आशीष कचोलिया वैल्यू निवेशक के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले आशीष कचोलिया के प्रशंसकों की संख्या कम नहीं है. उन्हें क्वालिटी शेयरों की पहचान करने में महारत हासिल है. उनके पोर्टफोलियों में एस्टर इंडट्रीज, शैली इंजीनियरिंग प्लास्टिक्स और वैभव ग्लोबल की खास जगह है.
1. डॉली खन्ना चेन्नई आधारित निवेशक डॉली खन्ना आम निवेशकों के बीच खासी लोकप्रिय हैं. उनके पोर्टफोलियो का प्रबंधन उनके पति राजीव खन्ना करते हैं, जो शुरुआती दौर में क्वालिटी शेयर भांपने की काबिलियत रखते हैं. डॉली खन्ना के पास कई कंपनियों में बड़ी हिस्सेदारी है.
1. डॉली खन्ना चेन्नई आधारित निवेशक डॉली खन्ना आम निवेशकों के बीच खासी लोकप्रिय हैं. उनके पोर्टफोलियो का प्रबंधन उनके पति राजीव खन्ना करते हैं, जो शुरुआती दौर में क्वालिटी शेयर भांपने की काबिलियत रखते हैं. डॉली खन्ना के पास कई कंपनियों में बड़ी हिस्सेदारी है.
1. डॉली खन्ना चेन्नई आधारित निवेशक डॉली खन्ना आम निवेशकों के बीच खासी लोकप्रिय हैं. उनके पोर्टफोलियो का प्रबंधन उनके पति राजीव खन्ना करते हैं, जो शुरुआती दौर में क्वालिटी शेयर भांपने की काबिलियत रखते हैं. डॉली खन्ना के पास कई कंपनियों में बड़ी हिस्सेदारी है.

ध्यान देना है कि हम किस श्रेणी में है

समाज में ऐसे काफी लोग मिल जायेगे जिनके ये पिक्चर अबूझ पहेली है. इस पहेली को समझने के हमे कुछ पुस्तकें पढ़नी पड़ेगी तब जाके इसका महत्व और मतलब समझ में आएगा. कुछ किताबो के नाम इस प्रकार है -बिज़नस स्कूल, कैश फ्लो क्वाड्रेंट, रिटायर यंग रिटायर रिच, रिच डैड पुअर डैड , पैराबोला ऑफ़ पाईप लाईन, कोपी कैट मार्केटिंग 101 आदि . इन सभी बुक को पढने के बाद सही कांसेप्ट समझ में आता है . वैसे अपने आस पास बारीकी से मूल्यांकन किया जाय तब भी आसानी से समझा जा सकता है लेकिन उसके लिए जिस तरह की दृष्टि और समझ चाहिए वो आसानी से नहीं मिलता। बहरहाल जो भी हो, मुख्य विषय पर आते है।  इन किताबो में बताया गया है कि हम अपना जीविकोपार्जन के लिए कौन सा पेशा करते है, उस पेशे का हमारे जीवन पर कितना असर होता है, वो समाज में हमें कहां लेकर जाता है और उसका क्या परिणाम मिलता है। वो कहते है न कि अपने लिए तो सभी जीते है, सफल जीवन तो वो होता है जिसमें हम दूसरे लोगों को भी आगे लेकर चलते है।  हमे कौन सा काम करना चाहिए जिससे कि हम अपना भला तो करे ही साथ में अपनी आने वाली पीढ़िया और समाज के लिए भी कुछ कर सके। इस विषय पर बहुत अच्छे से प्रकाश डाला गया है। 
   आईये थोडा डिटेल में चलते है . रैगनर नर्क्से नामक अर्थशास्त्री ने '' गरीबी के दुश्चक्र '' को परिभाषित किया है जिसमे इन्होने बताया है कि ये  एक ऐसा चक्र होता है जिसमें कोई अर्थव्यवस्था फंसी रहती है। किसी देश में यह दुश्चक्र अनेक शक्तियों का ऐसा चक्रीय समूह होता है जो एक-दूसरे को प्रभावित करता है। एक गरीब देश में आय कम होती है जिससे बचत भी कम होती है, कम बचत के कारण निवेश भी कम होता है, जिससे इंडस्ट्री नहीं बढ़ती है और  उत्पादकता कम होती है, इससे रोजगार भी कम मिलता है और  पुन: कम आय को उत्पन्न करती है । देश निकालने की  लाख कोशिश करता है लेकिन निकल नहीं पाता। ठीक उसी प्रकार रोबेर्ट टी कियोसाकी ने व्यक्ति के लिए चूहा दौड़ यानी Rat Race की परिभाषा दिया है जिसमें आदमी व्यस्त तो हमेशा रहता है लेकिन उपलब्धियां कुछ नहीं मिलती। उन्होंने कहा है कि मध्यम वर्ग हमेशा इसमें पिसा रहता है और उसे पता ही नहीं होता कि वो कर क्या रहा है और करना क्या चाहिए। जब हम  एक आम मध्यम वर्ग की लाइफ को देखते है , वो खूब मन लगा के पढता है किसके लिए नौकरी के लिए और जीवन भर गरीब रहने का रास्ता चुनता है क्योंकि नौकरी मतलब पूरे जीवन रेंगकर व्यतीत होता है। गाड़ी लोन पे, मकान लोन पे ,घर का सारा सामान लोन पे और कर्ज की किस्ते चुकाते चुकाते जीवन की इह लीला को समाप्त कर लेते है और कोई जान भी नहीं पाता। फिर भी वही आदमी अपने बच्चो को अपने जैसा ही  बनाने का प्रयास करता है। कितना बेवकूफाना काम करता है वो। संतोषम परम सुखं में रहता है। अपने  पैसे का 80% मार्केट में खर्च करता है  और 20% बचत में से सपने पूरा करने को सोचता हैै। क्या ये संभव है ? दरअसल उसकी समस्या उस आय की प्रकृति की होती है जिसे वो समझ ही नहीं पाता। दुर्भाग्य से अपने देश में पैसे की समझ के बढ़ाना ही नहीं चाहते लोग। उन लोगो के लिए ये उबाऊ विषय है . यदि आप लोगो को जीवन में आर्थिक रूप से फ्री होना है तो इस पैसे की समझ को बढ़ाना ही होगा। हमारी मूल समस्या पैसा है तो इसकी प्रकृति और स्रोतों के बारे में जानना पड़ेगा। 
  वैसे आम लोगो से बात की जाय कि आय/इनकम कितने प्रकार का होता है तो सभी लोग कहेगे की दो प्रकार का 1- नंबर 1 की इनकम और 2- नंबर 2 की इनकम जो भ्रष्ट तरीके से मिलती है . लेकिन यहाँ पे बताया गया है की दो प्रकार की होती तो है लेकिन रेखीय या एक्टिव इनकम और एक्स्पोंसिअल या पैसिव इनकम।  एक में बहुत स्लो गति से बढ़ती है जैसे 1, 2, 3, 4, 5 .... इसमें नियमित रूप से काम करना पड़ता है, काम बंद पैसा भी बंद हो जाता है। जब कि दूसरी में बहुत तेज बढ़ती है जैसे 1, 2, 4, 8, 16 .....। शुरू शुरू में तो 0 से स्टार्ट होता है या बहुत कम से स्टार्ट होता है लेकिन धीरे धीरे एक लंबे समय इतना तेज बढ़ता है कि उसकी कल्पना ही नहीं की जा सकती और इनकम के लिए सक्रियता भी कम हो जाती है, हम काम करे या न करे लेकिन इनकम बंद नहीं होती है। इन इनकमों को पाने के लिए कुल चार तरह के लोग होते है।  उपर का चित्र उसी को प्रदर्शित करता है...
 
1) E यानी Employee अर्थात नौकरी करने वाले --
 ये जीवन में नौकरी करने के लिए ही पढ़ते है और अपनी सभी समस्याओं को इससे समाधान करने का प्रयास करते है, सोचते है कि सभी सपने पूर्ण हो जाएंगे। ये पढ़ने लिखने मे स्कालर होते है ये जानते है किसी भी काम को कैसे किया जाय।  इनका "How यानी कैसे किया जाय" काफी स्ट्रॉन्ग होता है। ये शिक्षा लेके एक योग्यता बनाते है और उसी योग्यता को बेचने का काम करते है। हालांकि कोई इसे स्वीकार नहीं करता है, लेकिन यही यथार्थ और यही कटु सत्य है। हम अपनी योग्यता को बेचते है तो हमें सेलरी मिलती है। जितने समय बेचते हैं उतनी इनकम होती है, कुछ लोग अतिरिक्त योग्यता जैसे Btech और एमबीए साथ कर लिए, अर्जित करके थोड़ा ज्यादा पैसा कमाते है, लेकिन यह इनकम तभी तक मिलती है जब तक उसे टाइम के अनुसार बेचते हैं. जिनकी जितनी बड़ी योग्यता उतनी बड़ी इनकम। ये अस्थाई इनकम होती है जो उसके जीवन के साथ ही ख़त्म हो जाती है। नौकरी करने वालो को यह अधिकार नहीं होता कि अपने बच्चो को अपने बाद वहां बैठा दे। उन्हे भी शून्य से शुरू करनी पड़ती है। अब तो सरकारी नौकरियो में पेंसन और आश्रित कोटे की नौकरी के भी लाले पड़ गए है.

आय = योग्यता * समय 

 अब मान लेते है कि उन्हे इनकम बढ़ाना है तो या तो समय बढ़ावे या फिर योग्यता जिसकी एक सीमा  है। ईश्वर ने एक मामले में सभी के साथ न्याय किया है वो ये कि सभी को 24 घंटे का समय दिया है। चाहे राजा हो या भिखारी सभी को 24 घंटे, किसी को भी एक्स्ट्रा एक मिनट भी नहीं मिलता।  योग्यता के लिए मान लेते है कि कोई मैथ का teacher  है और सरकार मैथ की सभी नौकरिया ख़त्म कर दे तो ये संभव नहीं होगा की वो फिर से कोई डिग्री ले, कोई दूसरी योग्यता बनाए, कोई और नौकरी करे .वैसे भी रिटायर मेंट पे इनकम भी आधी हो जाती है . अंत में डिपार्टमेंट भागवत गीता पकड़ा के नमस्कार कर लेता है .बच्चे को भी एकदम नए सिरे से स्टार्ट करना पड़ता है .   . 

 2- S यानी Self Employee - हिंदी में कहे तो स्वरोजगारी
अब आईये चर्चा करते है यस पे . एस मीन्स सेल्फ एम्प्लाई  यानि स्वरोजगारी . इसमें होता क्या है व्यक्ति अपने अन्दर कोई गुण विकसित करके छोटा सा सिस्टम बनता है और खुद को ही नौकरी पे रख लेता है . चुकी वो अपने क्षेत्र का एक्सपर्ट होता है इससे उसे लगता है की सबसे बढ़िया काम वही कर सकता है। इसमें दुकानदार , प्लम्बर, आर्किटेक्ट, डाक्टर, वकील, सीए आदि आते है। ये अपने योग्यता और समय के साथ पूंजी का भी प्रयोग करते है जिससे ये थोड़ा बेहतर स्तिथि में होते है। लेकिन इनके यहाँ सबसे बड़ी जरुरी ये होता है कि अपने आपको लगातार अपडेट करते रहे अन्यथा दूसरा उनको मार्केट से बाहर करके उनका स्थान ले लेगा। इनका इनकम सूत्र ये है 
 योग्यता * समय * पूजी = मनी
 इनमे से कोई भी जीरो होता है तो इनकम भी जीरो हो जाता है .अर्थात अस्थायी आय होती है। काफी ऐसे सेल्फ एम्प्लाई ऐसे लोग मिलते है जो अपने आपको बिज़नस मैन बताते है. लेकिन ऐसा नहीं होता। बिज़नस का सीधा फंडा है कि यदि हम महीने साल भर काम करना बंद कर देते है तो इनकम कम न हो। चेक करे कि महीने दो महीने हम काम नहीं करते है, तो क्या इनकम आती रहेगी, यदि उत्तर हां मिले तो बिजनेस में है अन्यथा स्वरोजगारी। यानी हम असुरक्षित है। 

3) B यानी Business 
ये अपने आप में बिलकुल अलग ही विधा होती है। फ़ोर्ब्स मैगजीन के अनुसार यदि आपके लिए 500 से अधिक व्यक्ति काम करते है और आप के बगैर रहे वो काम हो रहा है तो इसका मतलब आप बिज़नस कर रहे है. ये लोग काम नहीं करते है बल्कि काम किससे और कैसे कराया जाय यही सीखते है। ये खुद कोई खास पढ़े लिखे नहीं होते है लेकिन कैसे काम लिया जाय बखूबी जानते है। इनका ह्वाई अर्थात काम क्यों किया जाय, एकदम क्लियर होता है।  यदि किसी उद्योग पति को कोई नया कारोबार करना है तो क्या करते है ये। एक छोटा सा उदाहरण लेते है कि मान लीजिए किसी को कोई ब्रेड की फैक्ट्री लगानी है तो क्या करते है ? मजदूरों को खरीद लेते है, कैसे बनता है उसके लिए इंजीनियर, एक एमबीए किया हुआ मैनेजर, अकाउंट, होलसेल, रिटेल आदि सभी के लिए अलग अलग लोगों को नौकरी पर रख लेते है। स्वयं फ्री रहते है। और इनकम की बात की जाय तो सबसे अधिक कमाते है क्योंकि सभी लोग बिजनेस मैन के लिए काम करते है। यदि उस ब्रेड फैक्ट्री में 50 लोग भी 8/8 घंटे नौकरी करते है तो बिजनेस मैन के लिए एक दिन के लिए कुल काम होता है
50*8=400 घंटे
तो बिजनेस मैन को कमाई होती है 400 घंटे की, जबकि नौकरी करने वाले को मिलता है मात्र 8 घंटे का पैसा और दूसरी चीज किसी एक नौकरी करने वाले को कुछ होता है तो उसकी तो दुनिया ही उजड़ जाती है लेकिन बिजनेस मैन की इनकम पर कोई फर्क नहीं पड़ता है। इनके मरने के बाद इनके परिवार के लोग बिजनेस संभाल लेते है जो पीढ़ियों तक चलता है। कुल मिलाकर ये सबसे अधिक सुरक्षित होते है। 

4)I यानी Investor हिंदी में निवेशक
 ये वो लोग होते है बिजनेस में पैसा लगाकर पैसे से पैसा बनाते है। पैसा इनके लिए काम करता है। 
अभी लिखना बाकी है। 

रविवार, 2 मई 2021

पूर्व में दिए गए ट्रेडिंग आइडिया की समीक्षा

वैसे तो मैंने ब्लॉग और यू ट्यूब चैनल काफी पहले एक्टिव कर दिए थे लेकिन कभी उस पार काम किया नहीं। मुझे अनगिनत लोगों ने सलाह दिया कि इस पर काम करे जिससे लोगों की सलाह पर मैने 2019 में यू ट्यूब पर और 2021 में ब्लॉग पर काम शुरू कर दिया। शुरू में खूब वीडियो बनाए लेकिन इधर कुछ अन्य व्यस्तताओं के कारण कोई वीडियो नहीं बनाया। वीडियो न बनाने का एक कारण अच्छा वीडियो न बनन भी रहा। मुझे बहुत कुछ सीखना है इन सभी चीजों में। बहरहाल अपने यू ट्यूब चैनल पर काफी ट्रेडिंग आइडिया लेकर आता रहता हूं और एक समय उन स्टॉक की भी समीक्षा करता हूं। समीक्षा में मैने पाया कि मेरे चुने हुए 10 में लगभग 6/7 स्टॉक आसानी से दो महीने की अवधि में 10/15 प्रतिशत का आसानी से रिटर्न दे देते है। मेरे चुने स्टॉक फंडामेंटल तौर पर स्ट्रॉन्ग होते है और 2 महीने का समय स्टॉप लॉस भी होता है, यानी यदि 2 महीने में सकारात्मक रिटर्न नहीं दिया तो उसे बेचकर निकल जाना है। समीक्षा की कड़ी में पिछली बार नवंबर और दिसंबर में कुछ स्टॉक चुने थे जिसकी समीक्षा करने जा रहा हूं। 
Date 07.12.2020 को कुल 3 स्टॉक चुने थे। सभी स्टॉक का 1/1 महीने के अंतराल पर क्या भाव रहा है उसका भी उल्लेख कर रहा हूं
 1) Metropolish Healthcare
7.12 को 1958, 7.01 को 2100, 7.02 को 2169, 7.03 को 1949, 7.04 को 2271 और 1.05 को 2394 

2) Rallis India 
7.12 को 293, 7.01 को 283, 7.02 को 271, 7.03 को 272, 7.04 को 270 और 1.05 को 293

3)JB CHEMICAL
7.12 को 1004, 7.01 को 1055, 7.02 को 1033, 7.03 को 1207, 7.04 को 1245 और 1.05 को 1349

1 दिसंबर 2020 को चुने गए स्टॉक
 1) DR REDDY
1.12 को 4830, 1.01 को 5241, 1.02 को 4448, 1.03 को 4453, 1.04 को 4587 और 1.05 को 5163

2) ADVANCE ENZYME
1.12 को 350, 1.01 को 336, 1.02 को 327, 1.03 को 348, 1.04 को 353 और 1.05 को 401

3) LAURUS LAB
1.12 को 322, 1.01 को 353, 1.02 को 350, 1.03 को 363, 1.04 को 365 और 1.05 को 452

4) IOL Chemical
1.12 को 748, 1.01 को 752, 1.02 को 689, 1.03 को 548 , 1.04 को 552 और 1.05 को 591

25 नवंबर को चुने स्टॉक
1) COFORGE
25.11 को 2424, 25.12 को 2652, 25.01 को 2448, 25.02 को 2516 , 25.03 को 2751, 25.04 को 2808 और 1.05 को 5163

2) MINDTREE
25.11 को 1376, 25.12 को 1597, 25.01 को 1740, 25.02 को 1604 , 25.03 को 1969, 25.04 को 2018 और 1.05 को 2104

3) KPIT TECH
25.11 को 101, 25.12 को 119, 25.01 को 133, 25.02 को 146 , 25.03 को 170, 25.04 को 196 और 1.05 को 197

कुल मिलाकर 10 स्टॉक चुने गए थे जिसमें IOL CHEMICAL, RALLIS के स्टॉक को छोड़ दिया जाय तो अन्य से जबरदस्त रिटर्न दिया है जिसमें KPIT और माइंड ट्री ने जबरदस्त प्रदर्शन किया है। पूरी पोस्ट में डेट के अनुसार भाव लिखने का आशय है कि जो मार्केट को हमें आउट परफॉर्म करते है उन्हे जब जब 52 विक हाई से 10 प्रतिशत के आस पास करेक्शन देते है तो खरीदने के मौके देते है और नया हाई बनाने के फिर करेक्शन देते है तो पुनः खरीदारी करनी चाहिए। खरीदने के दौरान दो माह का स्टॉप लॉस रखा जाय यानी वहां घाटे में हो तो बेच दिया जाय तो IOL के उदाहरण से हम देख सकते है कि हम कुछ बचा भी लेते है। 

इस प्रकार ग्रोथ स्टॉक के साथ हम जब भी ट्रेडिंग/इन्वेस्टमेंट करते है तो लाभ की उम्मीद बढ़ जाती है। ग्रोथ स्टॉक ऐसे स्टॉक होते है जिनमें कुछ ऐसे गुण भी मिलते है कि मार्केट किसी भी दिशा में हमेशा आउट परफॉर्म करते है। 2 माह की स्टॉप लॉस की प्रक्रिया खराब स्टॉक को अपने आप पोर्टफोलियो से बाहर कर देता है।





शनिवार, 1 मई 2021

लापरवाही ने कोरोना को बढ़ाया

साल भर पहले कोरोना महामारी की क्या स्थिति थी, उन दिनों के समाचारों का अवलोकन कीजिए तो पता चल जाएगा। चूंकि हम अपने फेसबुक टाइम लाइन पर इस तरह की खबरों को पोस्ट करते रहते हैं, तो अक्सर करके सामने आ ही जाती है। पिछले वर्ष आज ही की तारीख यानी 1 मई 2020 की एक पेपर कटिंग को देखते है

    पिछले वर्ष यूरोप और अमेरिका की ऐसी स्थिति थी कि 3 में एक मरीज वापस नहीं आता था, यह तब की दशा थी जबकि वो स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में शीर्ष पर आते थे, हम लोग तो उसके सामने कही नहीं टिकते है। पिछले साल जब अपने देश में इस महामारी ने कोई खास नुकसान नहीं पहुंचाया तो हम लोग स्वीकार कर लिए थे कि हमने इस माहामारी पर विजय श्री प्राप्त कर लिया है। हमारा खान पान, रहन सहन इतना मजबूत है कि कुछ नही होगा, होगा भी तो सर्दी, खांसी और बुखार तक सीमित रहेगा। इसी विश्वास पर लोगों ने टीका लगाने का भी विरोध किया, बकायदा लोगों ने सोशल मीडिया में अपने विचार रखे कि सरकार को टीकाकरण पर पैसा खर्च करने की क्या जरूरत, टिका लगाने के लिए लोगों के साथ जबरदस्ती कितना उचित है। टिके के साइड इफेक्ट की कहानियां तक गढ़ी गई, किसी पार्टी विशेष का बताया गया और पता नहीं क्या क्या नहीं किया गया।  वो सभी चीजे हम लोगों के आस पास ही है। मेरा विभाग ऐसा है जहां टीकाकरण के शुरुआती दौर में ही लगवाने थे, टिका लगवाकर प्रमाणपत्र तक देना था। ऐसे में बहुत से लोगों ने महामारी से बचाव के लिए नहीं अपितु इसलिए कि वेतन न कटे। बहरहाल हम लोगों की लापरवाही ने यूरोंप वाली स्थिति अपने देश में ला दी। नया वर्ष, होली, रमजान, कुंभ, पंचायत चुनाव, विधान सभा चुनाव, किसान आंदोलन को लेकर हुई महापंचायतें ने इस महामारी के फैलने में खाद पानी का काम किया। सरकारों ने भी इसके लिए कोई तैयारी नहीं किया। वर्तमान स्थिति इतनी खराब हो गई है कि मार्केट में ऑक्सीजन और दवाओं को लेकर काला बाजारी चरम पर है, लोग भय से ग्रस्त है। प्रत्येक व्यक्ति के आस पास कई मौते हो चुकी है। बहुत से लोग अभी भी सचेत नहीं है, मार्केट में 10/20 प्रतिशत लोग बगैर मास्क के दिख ही जाते है।

   जैसे जैसे एक एक दिन निकलते है ईश्वर को विशेष धन्यवाद देते है कि हम सुरक्षित है, लेकिन कब तक ? दिन प्रति दिन करीब आती जा रही है। अपना काम है सरकार के आवश्यक दिशा निर्देशों का पालन करते हुए अपने से जो भी उचित हो सकता है, एहतियात करना। यह रोग भयंकर छुआछूत का है। इस रोग से बचाव के लिए जितना ही कम से कम लोगों के संपर्क में आए, उतना ही सही रहता है।

SIP सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान

 स्टॉक मार्किट में दो तरीके से निवेश करते है 

१- डायरेक्ट  जिसमें हमें खुद से स्टॉक सेलेक्ट कर पैसे लगाने पड़ते है.चूँकि मार्किट में पैसे लगाने और उस पर रिटर्न  के लिए समय, ज्ञान, संसाधन, दूरदर्शिता, अनुशासन, धैर्य चाहिए जो सभी के पास नहीं होता है इसलिए यहाँ बहुसंख्यक लोग नुकसान उठाते है. 

२- इन डायरेक्ट इसमें हमारे और मार्केट के बिच में एक बिचौलिया होता है जिसका काम ही होता है स्टॉक मार्किट में इन्वेस्टमेंट यानी कुल मिलाकर वो एक्सपर्ट होता है, उसकी एक रिसर्च टीम होती है जो कई मानकों पर स्टॉक को फ़िल्टर करके चुन कर एक पोर्टफोलियो बनाती है जिसमें हम उन्हें पैसा देते है तो वो उसमें अपना खर्चा काटकर पूरा पैसा लगा देते है और जो लाभ/हानि  होता है वो निवेशक के तौर पर मिल जाता है. जो इन डायरेक्ट तरीके से ये कम करते है उन्हें म्यूच्यूअल फण्ड, पीएमएस, इंश्योरेंस आदि कहा जाता है. लेकिन यहाँ हम बात करेंगे म्यूच्यूअल फण्ड की क्योंकि एक तो ये काफी सरल होते है, दुसरे इनके चार्जेज काफी कम होते है और आसानी से उपलब्ध होते है. तो म्यूच्यूअल फण्ड में भी इन्वेस्टमेंट कई तरीको से करते है 

१- एक बार या बार बार

२-sip 


 SIP  सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान

 निवेश करने के सबसे लोकप्रिय तरीकों में से एक तरिका है SIP यानी सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान जिसमें नियमित रूप से एक निर्धारीत धनराशि किसी म्यूच्यूअल फण्ड में इन्वेस्ट होती रहती है। आसान भाषा में समझे तो यह एक आरडी यानी आवर्ती जमा की तरह होता है जिसमें हम हर महिने कुछ न कुछ धनराशि डालते हैं जो धीरे धीरे एक बड़े कार्पस में बदल जाता है. जैसे कहावत है न कि बूँद बूँद से तालाब भरता है लेकिन उसके साथ यह शर्त होती है कि बूँद लगातार गिरनी चाहिए और यदि हम वो करने में सफल हो जाते है तो एक समय एक बड़ी संपत्ति के स्वामी बन सकते है. यह इतना आसान है कि मात्र 500 रु से भी कम में स्टार्ट किया जा सकता है

 

 

कैसे करते है ?

 इसके लिए चेक, पैन, एक फोटो, बैंक की डिटेल और  चेक के साथ फॉर्म भरा जाता है फिर बैंक से OTM अप्रूवे हो जाता है तो जो रकम हम बताते है उतनी रकम निर्धारित तारीख को मेरे बैंक खाते से कट जाती है. बहुत ही आसान है. ऑनलाइन सिस्टम और भी आसान होता है. ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट के लिए निचे के लिंक से अकाउंट ओपन कर स्टार्ट कर सकते है या फिर अपना मोबाइल नंबर निचे कमेन्ट बॉक्स में लिख दीजिये आवश्यक मदद मिल जाएगी 


SIP के फायदे

 1- ये एक बार में बड़ा अमाउंट निवेश करने की जगह छोटी छोटी किश्तों में भुगतान करने का अवसर देता है। उदाहरण के लिए 5,000 रूपये को एकमुश्त देने के बजाय 500/500 रूपये करके 10 बार में पेमेंट कर सकते  है। कई फण्ड तो ऐसे है जो न्यूनतम 100 से भी निवेश करने की सुविधा देते है.

2)  Rupee cost averaging पर काम करता है, मार्केट के अप डाउन के दौरान हमारी खरीद होती रहती है जिससे समय के अनुसार हमारी लागत एवरेज होती रहती है। जैसे जैसे उसमें पैसा जुड़ता रहता है एक समय बाद power of compounding का विस्फोटक असर दिखता है।

3) इससे निवेश की एक अनिवार्य शर्त अनुशासन होता है जो अपने आप आ जाता है। क्योंकि एक निर्धारित पैसा एक निश्चित तिथि को मार्केट में निवेश होता जाता है। शॉर्ट टर्म में मार्केट में उतार चढ़ाव होता है जबकि लॉन्ग टर्म में मार्केट अंततः बढ़ती ही है। इस सफर में SIP एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। निवेश नियम कहता है कि लगातार निवेश करें,अपने निवेशों पर ध्यान केन्द्रित रखें और अपने निवेश के तरीके में अनुशासन बनाये रखें। हर महिने कुछ राशि अलग निकालने से हमारी आमदनी पर कोई खास अंतर नहीं पड़ता है।  

4) SIP के माध्यम से छोटी छोटी बचत करना शायद पहली बार में आकर्षक न लगे लेकिन ये निवेशकों को बचत की आदत डालता है और  भविष्य में एक बड़ी रकम बन जाता है। यदि हर महीने 1000 रू  का एक SIP किसी इक्विटी फंड  12% की दर से 10 वर्षों में बढकर 2.24 लाख रूपये, 20 साल में 9.92 लाख रु तो 30 सालों में 30.84 लाख रुपये और 40 साल में 98.02 लाख तक हो सकता है।  यानी 1 हजार रूपये हमें एक करोड़पति बना सकता है।

5) स्टेप अप की सुविधा

SIP में स्टेप अप की सुविधा होती है। स्टेप अप मतलब हम यदि चाहे तो एक समय ऐसी सुविधा ले सकते है जिसमें अपने आप निवेशित रकम बढ़ जाती है। जैसे 1000 रू की SIP करते है और सोचते है कि अगले वर्ष से यह रकम 1100 हो जाय तो रिटर्न का मजा और भी बढ़ जाता है। उपरोक्त क्रमांक में अंकित उदाहरण में 10% स्टेप अप की सुविधा लेते है तो देखते है क्या रिजल्ट आएगा।  इस तरह से फंड की वैल्यू 10 सालों में 3.27 लाख, 20 सालों में 18.65 लाख, 30 सालों में 79.94 लाख और 40 सालों में 3.05 करोड़ फंड बन जाएगा। तो स्टेप अप की सुविधा अपने आप में बेजोड़ है। 


6) मार्केट एक्सपर्ट हमेशा जल्दी निवेश शुरू करने की राय देते है क्योंकि जितना अधिक समय मिलता है चक्रवृद्धि ब्याज का लाभ भी उतना ही बड़ा होता है।  एक उदाहरण लेते है जिसमें A नाम के व्यक्ति ने 30 साल की उम्र से 1,000 रूपये हर साल बचाना शुरू करता है,वहीं B भी इतना ही धन बचाता है लेकिन 35 साल की आयु से। जब 60 साल की उम्र में फंड वैल्यू देखी जाती है तो A की फंड वैल्यू 30.84 लाख होता है जबकि B का केवल 17.04 लाख। इस उदाहरण में हम 12% की दर से रिटर्न मिलना मान सकते हैं। ये फर्क होता पावर ऑफ कंपाउंडिंग के कारण जिसके लिए जितना ही अधिक समय मिलता उतना ही बड़ा फंड होता है। जितना लंबा निवेश करेंगे उतना ज्यादा आपको रिटर्न मिलेगा। 


7) फण्ड मैनेजर की सुविधा हमारे पुरे पैसे को एक प्रोफेशनल फण्ड मैनेजर मैनेज करता है. उसकी अपने काम में विशेषज्ञता होती है इसके लिए उसकी अपनी एक रिसच टीम होती है जो अच्छे से रिसर्च करके अच्छे अच्छे स्टॉक चुनते है . कोई भी स्टॉक चुनने से पहले एक लम्बी रिसर्च प्रक्रिया से गुजरते है जिसके तहत अर्थव्यवस्था की हालत, सेक्टर की हालत फिर उस विशेष कंपनी की बैलेंस शीट, आय व्यय का लेखा जोखा, उसका प्रोडक्ट मार्किट में स्थिति आदि पहलुओं पर विचार करने के उपरान्त वो निवेश करते है. ये जिस तरह से रिसर्च करते है एक सामान्य व्यक्ति के लिए आसान नहीं होता है. इसलिए निवेश पर जोखिम काफी कम हो जाता है 


8) एक डायवरसिफाई पोर्टफोलियो. फंड मैनेजर द्वारा निवेश के लिए एक पोर्टफोलियो बनता है जिसमें 20 से लेकर 60 स्टॉक होते है जिसे हम बाहर इतने स्टॉक खरीद भी नहीं पायेंगे. सभी स्टॉक का रिसक रिवार्ड के हिसाब से निश्चित वेटेज प्रदान किया जाता है. और ये सरे स्टॉक मिलते है एक छोटी रकम में. उदाहरण के लिए मान लीजिये आज की तिथि में हम एशियन पेंट के स्टॉक लेना चाहते है तो हमें एक स्टॉक के लिए 2500 रु देने पड़ेंगे. लेकिन हम म्यूच्यूअल फण्ड के माध्यम से 1000 रु. में भी एशियन पेंट के साथ दुसरे स्टॉक भी मिल जाता है. होता क्या है कि एक फण्ड में हजारो लोग निवेश करते है जिससे उसका फण्ड साइज़ हजारो करोड़ों में होता है जिसका एक छोटा हिस्सा किसी विशेष स्टॉक में लगाते है

9) रूपये की कीमत का औसत (Rupee Cost Averaging)

ये मुख्य रूप से शेयरों में निवेश के लिये उपयोगी है। जब हम किसी  फंड में नियमित रूप से  एक तय धन का निवेश करते हैं तो मार्केट की गिरावट की दशा में हम ज्यादा शेयर की ज्यादा यूनिट खरीदते हैं। इस प्रकार समय के साथ आपकी प्रति शेयर या (प्रति यूनिट) औसत कीमत कम होती जाती है। ये सुविधा बाजार की उतार चढ़ाव में निवेश के जोखिम को कम करती है। इसलिए जो लोग SIP के माध्यम से निवेश करते हैं वे बाजार के गिरने के समय फायदा होता है।

 

10- पारदर्शिता और सुविधाजनक फंड्स का NAV दैनिक आधार पर आकंडे उपलब्ध कराए जाते हैजिसे हम कभी भी देख सकते है और जब भी पैसे निकलने होते है तो रिक्वेस्ट करने के बाद 3 दिन में बैंक खाते में पैसा आ जाता है.

पा रदर्शिता और रिडेम्शन की आसान प्रक्रिया म्यूचुअल फंड्स में इस बात को लेकर पारदर्शिता होती है कि किसी निवेशक का पैसा कहां निवेश हो रहा है. फंड्स का NAV दैनिक आधार पर उपलब्ध होता है और फंड्स का पोर्टफोलियो मासिक आधार पर अवेलेबल होता है. यह काफी लाभदायक होता है क्योंकि निवेशकों को इस बात की जानकारी होती है कि उनके रुपये का निवेश कहां हो रहा है. ये निवेश का बहुत ही आसान तरीका है। आपको केवल पूरे भरे हुये नामांकन फॉर्म के साथ चेक जमा करना होगा जिससे म्यूचु्अल फंड में आपके द्वारा कही गयी तारीख पर चेक जमा हो जायेगा और अपके खाते में शेयर यूनिट आ जायेंगी ।

ज्यादा वजन की समस्या


          नवभारत टाइम्स 1 मई 2021
आज के समाचार पत्र में दिया गया है कि ब्रिटेन में एक रिसर्च से पता चला है कि वजन बढ़ने पर कोरोना के खतरे अधिक है। गलत लिखा है, सही तथ्य तो यह है कि वजन बढ़ने से कोरोना ही नहीं डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, हार्ट, घुटने दर्द जैसे अनगिनत बीमारियों को फलने फूलने का अवसर मिलता है। एक ज्यादा वजन वाला व्यक्ति एक सामान्य वजन के व्यक्ति की तुलना में ज्यादा अस्वस्थ होता है, उस पर बीमारियां जल्दी आक्रमण करती है क्योंकि ज्यादा वजन होने से हमारे शरीर के नाजुक अंगों को चारो तरफ फैट को लेयर बन जाती है जो उन अंगों की कार्यक्षमता को कम कर देता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाती है। तो सेहत पर काम करने की शुरुआत सबसे पहले अपने वजन को लंबाई के हिसाब से आदर्श करना होगा। उसके लिए हाइट और वेट का एक चार्ट आता है, गूगल से निकालकर चेक कीजिए। यदि सही है तब तो कोई बात नहीं, अन्यथा इस पर आज से काम शुरू कर दीजिए।
    यदि चार्ट नही देख सकते तो समाचार में बताए गए बीएमआई यानी बॉडी मास इंडेक्स को सही कीजिए। बॉडी मास इंडेक्स पूरी दुनिया में सेहत को नापने का एक लोकप्रिय पैमाना है। विज्ञान के अनुसार कुछ श्रेणिया है
19 से कम यानी कम वजन
19 से 24.9 सामान्य वजन
25 से 29.9 ज्यादा वजन
30 के उपर मतलब ऐसा मोटापा जो जीवन पर खतरे लाता है। 

बीएमआई नापते कैसे है 
अपने वजन में लंबाई मीटर का वर्ग करके भाषा किया जाता है। जैसे मैंने अपना निकालू तो आज का वजन 80 किलो और लंबाई लगभग 6 फिट 2 इंच को मीटर में है 1.84
बीएमआई=वजन/लंबाई*लंबाई
            = 80/1.84*1.84
             =23.66
लेकिन यह पहले ऐसा नहीं था। अब से लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व मेरा वजन लगभग 100 किलो रहा था जिस पर बीएमआई 29.58 रहा था। बिल्कुल खतरे के निशान पर था। लेकिन मैं अपने मोटापे को लेकर एकदम चिंतित नहीं था वो तो भला हो हमारी श्रीमती जी का जो हम हेल्थ और न्यूट्रिशन क्लब लेकर गई और अपना वजन सामान्य कर दिया। वजन जो सामान्य हुआ उसके बाद मेरा खर्राटे, स्लिप एपनिया, शायटिका, कमर दर्द जैसी समस्याएं कब दूर हो गई, पता ही नहीं चला।
  पहले मैं समझता था कि हेल्दी रहने के लिए योगा, व्यायाम, भाग, दौड़ करने पर आदमी स्वस्थ रहता है। किसी से पूछो कि स्वास्थ्य के लिए क्या कर रहे हो तो वो भी कहता है योग, टहलना, दौड़ करने की बात करता है जबकि अच्छे सेहत में भाग दौड़ की तो मात्र 20 प्रतिशत की ही भूमिका होती है, 80% योगदान तो हमारे खान पान का होता है। जब तक खान पान सही नहीं होगा, अच्छे सेहत की कल्पना नहीं की जा सकती। अच्छा खान पान मतलब विटामिन, मिनिरल, प्रोटीन, फाइबर, ओमेगा 3 आदि पोषक पदार्थों से भरपूर डाइट लेना।
   इस मामले में मैं अपनी श्रीमती जी का छात्र हूं वो आज एक हेल्थ और न्यूट्रिशन क्लब चला रही है जहां अनगिनत लोग अपने अच्छे सेहत को प्राप्त कर चुके हैं और बहुत सारे लोग अच्छे सेहत प्राप्त करने की यात्रा में लगे हुए है। वो अपने इस कार्य को जितनी सफलता पूर्वक कर रही है, उसके लिए मेरे पास शब्द नहीं है। उपरोक्त जानकारियों में उनके हेल्थ क्लब का बहुत बड़ा योगदान है। जो मैं हेल्थ संबंधी जानकारियां शेयर करता रहता हूं, वो वहीं से मिलती है।