शुक्रवार, 5 मार्च 2021

फैट की उलझन

आज इस विषय पर लिखने का विचार एक पेपर कटिंग को देखकर आया जिसका शीर्षक था रोहू मछली खाने से कैंसर के खतरे से बचाती हैं। उसमें बताया गया है कि इसमें पूफा यानी पॉली अन सेचूरेटेड फैटी एसिड होता है जो कि फायदेमंद होता है। आज इसी के बारे में बात करना है। 
 पहले जान लेते है कि शरीर को ऊर्जा 3 स्रोतों से मिलती है, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और फैट। शरीर को सबसे अधिक ऊर्जा कार्बोहाइड्रेट से मिलती है और प्रति ग्राम की बात की जाय तो फैट से मिलती है। प्रोटीन और कार्बोहाइडेट के एक 1 यूनिट से 4, 4 कैलोरी जबकि फैट के एक यूनिट से 9 कैलोरी मुक्त होती है। लेकिन चूंकि हम कार्बोहाइड्रेट ज्यादा खाते है इसलिए 40% से 50% ऊर्जा कार्ब्स से मिलती है।  फैट को सबसे अच्छा माना जाता है। जिसे देखिए फैट के लिए ज्यादा से ज्यादा खाना खाता है। लेकिन इसके नुकसान भी होते है फैट ज्यादा लेने पर मोटापा, डायबिटीज, हार्ट, ब्लड प्रेशर जैसी अनगिनत खतरनाक बीमारियां भी होती है। कुछ अच्छे फैट भी होते है जो शरीर को चाहिए ही चाहिए।  इसे जब फैट के प्रकार को समझ लेंगे तो पूरा तस्वीर साफ हो जाएगा। 
फैट के प्रकार
1. अन सेचुरेटेड फैट यानी अच्छा फैट 
यह बहुत अच्छा माना जाता है। शरीर को कई रोगों से बचाता भी है। अच्छे कोलेस्ट्रॉल यानी एचडीएल को बढ़ाता है और बुरे कोलेस्ट्रॉल यानी एलडीएल को कम करता है। 
यह भी दो प्रकार का होता है 
ए. मोनो अन सेचुरेटेड जो ओलिव ऑयल, सन फ्लावर, पीनट ऑयल, कनोला ऑयल आदि में मिलता है।
बी. पॉली अन सेचूरेटेड फैट जो सोयाबीन, अलसी, अखरोट, मछली, बादाम आदि में मिलता है। यह हमारे शरीर को चाहिए ही चाहिए। इसमें ओमेगा 3 और ओमेगा 6 आता है।  ओमेगा 3  व 6 का सही अनुपात में होना कई रोगों से बचाता है। हम ओमेगा 3 कम और ओमेगा 6 ज्यादा ले रहे है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 1:7 इनका अनुपात होना चाहिए लेकिन वर्तमान में खान पान की आदतों, लाइफ स्टाइल के चलते 1:70 से अधिक हो गया है। जिसके वजह से भारत हृदय, डायबिटीज, बीपी, कैंसर जैसे रोगों की राजधानी होती जा रही है। इसलिए ओमेगा 3 लेते रहना चाहिए क्योंकि जब अनुपात सही रहेगा तो  हार्ट, दिमाग, घुटने, मोटापा जैसे कई रोगों से बचाता है। इसे प्रतिदिन लेना होता है। ओमेगा 3 सबसे उत्तम स्रोत गहरे समुद्र की मछलियां जैसे सालमन, टूना होती है। मार्केट में ओमेगा 3 के सप्लीमेंट भी मिलते है लेकिन घटिया क्वालिटी के। क्योंकि ओमेगा 3 भी 3 तरह का होता है ईपीए, ALA और DHA। मिलने वाला सप्लीमेंट में ये तीनों नहीं होते है। उसके लिए खास कम्पनियों द्वारा बनाया जाता है। 
2. सेचुरेटेड फैट यानी खराब फैट इसको ज्यादा लेने से हृदय रोग, बुरे कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है। इसलिए इसे कम से कम लेना चाहिए। यह शरीर में देर से पचता है इसलिए मोटापा लाता है। ये मुख्य रूप से अंडा, चिकन, मीट, मांस, नारियल, आलू, केक, पेस्ट्री, पिज्जा, बटर, वनस्पति घी आदि में मिलता है।  ये सामान्यतया ठोस होते है लेकिन गर्म करने पर पिघल जाते है।  3. ट्रांस फैट . सबसे खराब फैट होते है ये। ये प्रोसेस्ड अन सेचूरेटेड  फैट होते है, खास प्रोसेस से सेचू रेटेड की तरह हो जाता है।  इसे धीमा जहर भी कहते है। इससे बचने का प्रयास करना चाहिए। ये फ्राई की हुई चीजों में मिलता है। यह रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाले तेल में मिलता है। रेडिमेड खाद्य पदार्थों में बहुत मिलता है। जैसे बिस्किट, कुकीज, केक, फास्ट फूड, क्रीम, समोसा, चिप्स, पकौड़ा, कचौड़ी, पूड़ी, तली भुनी चीजे। 

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