प्रसन्नता मानव का एक स्वाभाविक गुण है जो सभी को प्राप्त नहीं होती है। जो प्रसन्न रहता है वो सदैव सुखी तो रहता ही है साथ में दूसरों को सदैव प्रसन्न भी रख कर माहौल को खुशनुमा बनाए रहता है. लोग उनका सानिध्य चाहते है, सकारात्मक और प्रगतिशील विचारों से पूर्ण रहते है वो. निराशाजनक माहौल से किस तरह बाहर आया जाय, वो अच्छे से जानते है।
सभी लोग प्रसन्न रहना चाहते है लेकिन यह कोई वस्तु नहीं होती है जिसे बाजार से किलो या लीटर के भाव से खरीद लिया जाय। इसे बनाना पड़ता है जिसे कुछ तरीके से प्राप्त किया जा सकता है
1. सकारात्मक रहना
2. कुछ नई चीजे सीखते रहना
3. दूसरों को सिखाने को सदैव तत्पर रहना
4. अपनी पसंद के कार्य करना
5. अपने परम्परागत पेशा, नौकरी, व्यापार के अतिरिक्त किसी सक्रिय ग्रुप से जुड़े रहना
6. अच्छी अच्छी पुस्तके, वीडियो देखना
7. अच्छे दोस्त के समूह में रहना
8. लक्ष्य बनाकर कार्य करना
9. नियमित अंतराल पर स्वयं की समीक्षा करना
10. डायरी लिखना
उपरोक्त आदतें अपनाने के उपरांत हम प्रसन्न तो रहते ही है साथ दूसरों की तुलना में मान, सम्मान, यश, कीर्ति, समृद्धि ज्यादा प्राप्त करते है। अपनी दुनिया में काफी सफल व्यक्ति हो जाते है और यह सफलता ही उनकी प्रसन्नता का राज होती है.
प्रसन्नता के साथ हम अपने जीवन वह सब कुछ हासिल कर सकते हैं, जो चाहते हैं, मगर हम वास्तव में चाहते क्या है, कितना चाहते है और कब तक चाहते है आदि सभी चीजे स्पष्ट होती है व्यवस्थाएं अपने आप बननी लगती है। यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि हम कैसा जीवन जीना चाहते हैं, हमारे भविष्य का व्यक्तित्व कैसा होना चाहिए, हमारे जीवन का उद्देश्य क्या है। इंसान को बहुत समय तक यह नहीं मालूम होता कि वह इस दुनिया में क्यों आया है? उसके होने का मतलब क्या है? जीवन के लिए क्या जरूरी है और क्या नहीं है? बिना किसी विचार के जीना और विचार करके जीना, दो अलग-अलग बातें हैं। अपने लिए जीना और अपने लिए मकसद के साथ जीना दो तरह का जीवन है। दोनो का व्यक्तित्व पर बहुत असर होता है। चीजे जितना अधिक क्लियर होगी, उसे प्राप्त करने को जितना अधिक कटिबद्ध रहेंगे, व्यक्तित्व उतना ही बड़ा होगा, हम उतने ही अधिक प्रसन्न रहेंगे।
Shandar
जवाब देंहटाएं🙏 बहुत सुंदर लेख
जवाब देंहटाएंअतिसुंदर
जवाब देंहटाएंबढ़िया
जवाब देंहटाएंबहुत ही शानदार लेख।
जवाब देंहटाएंप्रसन्नता ईश्वर की दी हुई औषधि है।