सोमवार, 17 अक्टूबर 2022

कुछ निवेश संबंधी नियम

आज मैंने मनी कंट्रोल पे कई म्यूचुअल फंड स्कीमों का अध्ययन किया जो पिछले 5 सालो से बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे है । इन सबका औसत रिटर्न पिछले पाँच सालो मे प्रति वर्ष 15-23 % का रिटर्न रहा है । इनसे कुछ निष्कर्ष जो दिखे वो इस प्रकार है ---

1-कम से कम 15 सेक्टरों मे पैसा लगाना चहहिए 

2-अपने निवेश का सबसे ज्यादा हिस्सा आईटी, फार्मा और बैंकिंग मे बटना चाहिए
 
3-साल भर से ऊपर के लिए ही शेयर का चुनाव करना चाहिए 

4-साल मे आपका रिटर्न ऋणात्मक हो सकता है लेकिन जैसे ही उससे उपर का समय होता है रिटर्न दिखने लगता है 

5-लॉन्ग टर्म मे मिडकैप स्टॉक बेहतर रिटर्न दे रहे है 

6-कभी भी एक या दो सेक्टर मे पूरा पैसा नहीं डालना चाहिए 

7-फंड का चुनाव हमेशा उसके बेंचमार्क से तुलना करके देखा जाना चाहिए 

8- फंड का रिटर्न  बेंचमार्क से  हमेशा अधिक होना चाहिए 

9- जिस फंड का फंड साइज 500-5000 करोड़ का हो , मे निवेश करना चाहिए 

10- निवेश नियमित रूप से अनुशशित होकर करना चाहिए प्रयास ये करे की अपने मंथली आय से एक छोटा हिस्सा हमेशा लगातार मार्केट मे डाले 

11-जब भी लाभ दिखे मुनाफा जरूर लेना चाहिए और फिर जब मार्केट नीचे आए तो उसे फिर उसी पोर्टफोलियो मे डालना चाहिए 

12-हमेशा निवेश किसी और के कहने मात्र से नहीं करना चाहिए बल्कि उस पर अपना रिसर्च अवश्य करे 

13- ना तो कभी 100% मनी निवेश करे और ना ही 100% मुनाफा वसूली करे 

14 - साल दो साल मे अपने निवेश की एक बार समीक्षा अवश्य करे और जिस फंड / स्टॉक से रिटर्न ना मिले उसे सेल कर उसी सेक्टर के किसी और स्टॉक मे निवेश करे 

और भी बहुत सारी है लेकिन जो चुनिन्दा लगा मैंने लिख दिया । यदि कोई मदद चाहिए तो उसका स्वागत है । धन्यवाद

रविवार, 9 अक्टूबर 2022

वाहन बीमा के मायने

वाहन बीमा के रूप में थोड़े पैसे में बड़ी समस्याओं के समाधान को खरीदना

हमें यदि अपने नुकसान की चिंता नहीं हैं तो कोई बात नहीं, कम से कम हमें उनकी तो चिंता करनी ही चाहिए जिनका हमारे वजह से कोई नुकसान हो सकता है। समाचार पत्रों में आए दिन ऑडी प्रकाशित खबरें मिल जाती है जिसमें एक्सीडेंट के दौरान गाड़ी का बीमा एक्सपायर्ड हो चुका होता है।  अपने देश में ज्यादातर लोग गाड़ी का बीमा और हेलमेट की सुविधा सुरक्षा की दृष्टि से नहीं बल्कि पुलिस चेकिंग से बचने के लिए लेते है। राजनेता है तो उन्हे पुलिस चेकिंग का भय तो है नहीं, फिर काहें का बीमा। 

बहरहाल इसी से मिलता जुलता वर्षों पहले का एक प्रकरण याद आ गया। एक हमारे जानने वाले है, वो फेसबुक पर भी जुड़े हुए है, हालांकि यह घटना शेयर करने से पहर उनकी अनुमति भी नहीं लिया हूं। मित्र का ट्रक चलता था जो एक दिन झारखंड में इनके ट्रक की किसी और ट्रक से आमने सामने की टक्कर हो गई जिसमें एक की मृत्यु हो गई। उनकी बड़ी मुश्किल क्योंकि बीमा था ही नहीं। संकट काल में मुझे फोन किए कि किया क्या जाय। मेरा उनको एक ही राय था, इस पूरे मसले को कानून के दायरे से बाहर ही आपस में बैठ कर समझ लीजिए, फायदे में रहेंगे। उन्होंने औरों से भी राय लिए शायद सभी ने उन्हे यही सलाह दिया और दोनो पक्षों ने अन ऑफिसियल मामले को बाहर ही समझ लिए। इस पूरे समस्या में उनका अच्छा खासा कई लाख रु खर्च हुआ लेकिन सुकून की यह बात थी कि निबट गया वर्ना कानून के झमेले में आए होते तो लंबा झेलते। उन्हे अपने वाहन के मरम्मत में भी खर्च करने पड़े। यदि बीमा को कुछ हजार प्रीमियम वो समय से दे दिए होते तो उन्हे लाखों का नुकसान नहीं होता। और आज उनके ट्रक भी चल रहे होते।

हम मानव है, हम लोग स्वभाव से नजदीक के फायदे और नुकसान को ज्यादा तवज्जो देते है। हमें ऐसा नहीं करना चाहिए, हमेशा दूरगामी सोच रखनी चाहिए। बहुत सारे लोग टर्म प्लान भी नहीं लेते, तर्क होता है उसका क्या फायदा जो मरने के बाद मिले। हम थोड़े से प्रीमियम से बड़ी समस्याओं का समाधान खरीदते है। 
किसी भी वाहन बीमा में मुख्य रूप से 3 चीजे जुड़ी रहती है
1) ड्राइवर का बीमा
2) गाड़ी की टूट फुट या चोरी होने में सुरक्षा और 
3) थर्ड पार्टी सुरक्षा

अब हम इस पर विस्तार से बाते करते है। वाहन बीमा में जो पहली चीज होती है वो ड्राइवर की सुरक्षा। यदि गाड़ी का बीमा होता है और दुर्घटना में उसकी मृत्यु हो जाती है तो ड्राइवर के परिवार को रू 15 लाख (जहां तक मेरी जानकारी है) मिलता है। बीमा के अभाव में ये नहीं मिलता इसलिए प्रत्येक वाहन स्वामी का दायित्व कि इसे कराए और यदि कोई ड्राइवर को नौकरी पर रखे है तो उसके परिवार की सुरक्षा बढ़ जाती हैं। यदि वाहन बीमा कराते समय एक ऑप्शन और टिक कर दें तो ड्राइवर ही नहीं बाकी सभी सवारियों के जीवन का भी बीमा हो जाता है और बहुत थोड़े से प्रीमियम का ही अंतर आता है।
 दूसरी गाड़ी में टूट फुट होने पर इंश्योरेंस कंपनी द्वारा मरम्मत का एक बड़ा हिस्सा वहन किया जाता है। या गाड़ी चोरी हो जाती है तो गाड़ी की जो वैल्यू होती है, उतना पैसा बीमा कम्पनी द्वारा वाहन स्वामी को मिलता है, ताकि वो उस पैसे से दूसरा वाहन खरीद सके। ये वाला जो फीचर है न ये व्यक्तिगत लाभ और हानि से जुड़ा हुआ है, इसे हम न भी कराए तो भी चल जाएगा। 
अब हम तीसरे प्वाइंट पर आते है जो सभी में सबसे अधिक इंपॉर्टेंट है। होता क्या है कि हमारे गलतियों से किसी की मृत्यु हो जाती है तो उसके जीवन वैल्यू के बराबर पैसा देना होता है जिस बीमा कंपनी द्वारा वहन किया जाता है। जीवन वैल्यू मतलब आने वाले समयों में वह कितना पैसा कमा सकता है, यानी  यह बहुत बड़ी रकम होती है, जिसे व्यक्तिगत तौर पर भुगतान पॉसिबल नहीं होता।

 इस तरह हमारा नैतिक दायित्व है कि कम से कम थर्ड पार्टी इंश्योरेंस तो कराए ही कराए। इसका प्रीमियम भी कम आता है।

Time in market and timing the market

SMART INVESTING क्या है

  बाजार में निवेश करते समय निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता ज्यादा रिटर्न का पीछा करने में शामिल जोखिमों को लेकर होती है। मार्केट में शॉर्ट टर्म में जोखिम एक बहुत बड़ा इश्यू होता है जबकि लॉन्ग टर्म यानी 5 साल से अधिक का नजरिया जोखिम कम हो जाता है। बिजनेस जितना ही अच्छा होता है, समय उतना ही बड़ा रिवार्ड देता है। स्मार्ट इनवेस्टर अच्छी तरह जानते हैं कि बाजार को लेकर किसी भी तरह की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती इसलिए वो लोग अपने प्रॉसेस पर ध्यान देते है। इस संबंध में वारेन बफेट का एक कथन काफी लोकप्रिय है कि मार्केट के बारे में एक भविष्यवाणी हो सकती है कि इसके बारे में कोई भविष्यवाणी नहीं हो सकती। हमें मार्केट की दिशा की भविष्यवाणी या चिंता के बारे में सोचने के बजाय अपने निवेश स्ट्रेटजी पर ध्यान देना है। वैसे भी मार्केट को लॉन्ग टर्म में अंततः बढ़ना ही है। इसलिए ध्यान स्टॉक चुनने और उसमें निवेश के अनुशासन पर होनी चाहिए। ये जितनी अच्छी होगी उतना ही अच्छा लाभ भी मिलेगा। छोटी अवधि में मार्केट में उतार चढ़ाव होना इसका कुल स्वभाव है जिसके कारण किसी भी निवेश पर फायदा या नुकसान हो सकता है लेकिन ज्यादा रिटर्न की चाहने वाले निवेशक लंबी अवधि तक निवेश करना पसंद करते हैं। लेकिन ध्यान यहां यह देना है कि समय अच्छे बिजनेस का मित्र होता है जबकि खराब बिजनेस का शत्रु। यानी बिजनेस अच्छा होगा तो लॉन्ग टर्म नोट छापने की मशीन की तरह से होगा जबकि खराब बिजनेस वेल्थ डिस्ट्रॉय कर देता है। 
अक्सर बाजार में टाइम इन द मार्केट और टाइमिंग द मार्केट को लेकर बहस होती रहती है। कई निवेशक निवेश करते समय किसी स्टॉक के भविष्य के बाजार मूल्य का अनुमान लगाने की कोशिश करते हैं। इसमें जोखिम काफी ज्यादा होता है लेकिन यदि टेकनिकल एनालसिस सीख लिया जाय तो जोखिम को कम किया जा सकता है। टेक्निकल एनल्सिस के बहुत सारे टूल होते है लेकिन कम जानिए और उसका ज्यादा प्रयोग ज्यादा फायदेमंद होता है। शेयरों के भाव को भविष्य का अनुमान लगाकर निवेश करने की इस रणनीति को ही "टाइमिंग द मार्केट" कहते हैं. इसके उलट, कई निवेशक लंबी अवधि के लिए निवेश करते हैं। ऐसे निवेशक यह अनुमान लगाने की कोशिश किए बिना स्टॉक खरीदते हैं कि बाजार में कब तेजी या मंदी होगी। निवेश की इस रणनीति को टाइम इन द मार्केट कहा जाता है।
 अब सवाल यह है कि दोनों में बेहतर रणनीति क्या है ?

*टाइमिंग द मार्केट*
टाइमिंग द मार्केट का मतलब यह है कि एक निवेशक स्टॉक के भविष्य के शेयर की कीमत का अनुमान लगाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि यह तरीका सोचने में अच्छा लगता है कि कम कीमत पर खरीदो और कीमत ज्यादा होने पर बेच दो और यदि पूर्व के चार्ट देखिए तो यह बड़ा आसान लगता है लेकिन इस तरीके में जोखिम काफी ज्यादा होता है क्योंकि स्टॉक के वर्तमान भाव से अनुमान लगाना मुश्किल होता है कि यहां से वो बढ़ेगा या और घटेगा। इस पूरी प्रॉसेस में अपनी निवेश रणनीति के प्रति अनुशासन बहुत मायने रखता है। प्रायः देखने में आता है कि इस विधि में ज्यादातर लोग भाग्य भरोसे खेल खेलते है, ज्यादातर लोग स्टॉक इसलिए खरीदते है क्योंकि वो गिर चुका होता है। इस तरीके से हो सकता है कि हमारी ‘किस्मत’ अच्छी हो और ज्यादा रिटर्न मिल जाए। ऐसा भी हो सकता है कि किस्मत अच्छी ना हो और काफी ज्यादा नुकसान हो जाए। ये पूर्णतया सत्य है कि स्टॉक मार्केट में भविष्य के बारे में किसी भी तरह का अनुमान नहीं लगाया जा सकता, हमें सिर्फ अपने आइडियोलॉजी पर ध्यान देना है। स्टॉक की कीमतें तेजी के साथ बदलती हैं, इसका मतलब यह है कि आपका अनुमान हमेशा सटीक नहीं हो सकता। अगर आपको कोई भी वित्तीय सलाहकार इस रणनीति के साथ निवेश की सलाह देता है तो आपको सचेत हो जाना चाहिए। टाइमिंग द मार्केट में कई बार आपको बहुत ज्यादा नुकसान उठाना पड़ सकता है। अगर आप ब्रोकर की मदद ले रहे हैं तो बार-बार ट्रेडिंग करने से ब्रोकरेज कमीशन की लागत बढ़ जाती है। जितना अधिक स्टॉक खरीदा और बेचा जाता है, उतना ही ज्यादा कमीशन ब्रोकर कमाता है। इसमें सबसे बुरी बात यह है कि इस कमीशन का भुगतान निवेशक को ही करना होता है, भले ही उसे बाजार में नुकसान उठाना पड़ रहा हो। इसलिए इस विधि के लिए पहले सीखिए और अपनी सिखलाई का अधिक से अधिक प्रयोग कीजिए। जब तक अपने इन्वेस्टमेंट आइडियालॉजी के मानकों पर खरा न हो, सौदा कत्तई नहीं करना है। एक और चीज इंट्रा डे, फ्यूचर और ऑप्शन से दूर रहना है। 

*टाइमिंग इन मार्केट*
टाइम इन द मार्केट, टाइमिंग द मार्केट से बिल्कुल अलग है क्योंकि इस रणनीति में छोटी अवधि के लिए भविष्यवाणी नहीं किए जाते। यहां निवेशक यह अनुमान लगाने की कोशिश नहीं करेगा कि बाजार अपने सबसे निचले स्तर पर है या उच्चतम स्तर पर। इसमें निवेशक को स्टॉक खरीदते समय यह पता होता है कि हो सकता है उसकी टाइमिंग सही ना हो, लेकिन लंबी अवधि में वह स्टॉक ज्यादा रिटर्न दे सकती है। अगर स्टॉक फंडामेंटली स्ट्रांग है और उसमें लंबी अवधि में ज्यादा रिटर्न देने की संभावनाएं हैं, तो ऐसे में शॉर्ट टर्म में उस स्टॉक की कीमत में होने वाला उतार-चढ़ाव से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता।
यह रणनीति साबित करती है कि बाजार को समय देना और धैर्य बनाकर रखना, छोटी अवधि के निवेश से ज्यादा फायदेमंद है। जब कोई किसी शेयर को 10 साल के लिए अपने पास रखता है, तो चक्रवृद्धि और इनवेस्टमेंट ग्रोथ के सकारात्मक प्रभाव से बढ़िया रिटर्न मिलता है। धैर्य के साथ निवेश करने वाले निवेशकों को रिटर्न ज्यादा मिलता है। लंबी अवधि में ज्यादा रिटर्न जनरेट करने के लिए बाजार में समय बिताना जरूरी होता है  ऐसा करने से, निवेशक नेचुरल मार्केट साइकिल पर काबू पा लेता है। कुछ लोगों को बाजार में ज्यादा समय बिताना मुश्किल लग सकता है, लेकिन उन्हें यह समझना चाहिए लंबी अवधि में उनका फाइनेंशियल गोल क्या है। समय के साथ स्थिर ग्रोथ के लिए इंतजार करके, स्मार्ट निवेशक अपनी लंबी अवधि के वित्तीय लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं। 

कौन सी विधि बेहतर है
दोनों विधि सही है लेकिन पहली विधि उनके लिए है जो रोज मार्केट के लिए रिसर्च के लिए कुछ न कुछ समय निकालते है, यह रोमांचक भी होता है क्योंकि रोज कुछ न कुछ करने को होता है। यदि आप रोज 2 घंटे या सप्ताह में 8/10 घंटे रिसर्च के लिए निकाल सकते है तो यह विधि सही है। इस विधि में तकनीकी विश्लेषक का गुण होता ज्यादा फायदेमंद होता है। वहीं दूसरी तरफ दूसरी विधि थोड़ी सी बोरिंग होती है इसमें पैसे डालकर चुपचाप धैर्य से बैठना होता है और समय अपने आप रिवार्ड देता है। मेरा तो मानना है कि जो मार्केट के लिए टाइम नहीं निकाल सकता चुपचाप कुछ पसंदीदा बिजनेस को चिन्हित करे और पैसा लगाते रहे तो बड़ा वेल्थ क्रिएट कर सकता है। 

लेख कैसा लगा जरूर बताएं। कुछ जानकारी के लिए 7272957000 पर कॉन्टैक्ट कर सकते हैं।

शुक्रवार, 7 अक्टूबर 2022

कुछ वित्तीय नियम


     अपने यहां बहुत सारी पढ़ाईयां होती है लेकिन अर्थ वित्त को लेकर नहीं होती है। आदमी पूरा जीवन जीविकोपार्जन के लिए पैसा कमाने में व्यस्त रहता है, लेकिन उसके लिए कहीं नहीं पढ़ाया जाता है जिसके वजह से बहुसंख्यक लोग मैनेज नहीं कर पाते है, या फिर किसी गलत व्यक्ति के चक्कर में पड़कर नुकसान उठाते है। हम भले ही अर्थशास्त्र और फाइनेंस की पढ़ाई कर ले लेकिन असली जरूरत की चीजे उसमें नदारद होती है। मेरे विचार से व्यावहारिक वित्तीय शिक्षा पढ़ाई का एक अनिवार्य हिस्सा होनी चाहिए। हम लोगों को जो अनुभव और माता पिता की सीख सिखाती है वो पढ़ाई वाली पुस्तकें नहीं। पढ़ाई के बाहर कुछ पुस्तके है जिसे हमें हर हाल में पढ़नी चाहिए और अपने बच्चों को भी पढ़ानी चाहिए। मैंने जो चिन्हित किया है वो पुस्तकें है
1) बेबीलोन का सबसे अमीर आदमी
2) रिच डैड पूअर डैड
3) द सीक्रेट ऑफ मिलेनेयर माइंड
4) साइकोलॉजी ऑफ मनी
ये पुस्तके आपको वो ज्ञान देगी जो हम अपने वर्षों के अनुभव से सीखते है, कहने का आशय यह है कि ये हमें दूसरों की तुलना में नहीं नहीं तो भी 10 साल आगे कर देती है। 
 सौरव जी ने पहली पुस्तक की सिखलाई को पढ़कर सारांश लिखा जिसे नीचे अपनी पोस्ट के अनुसार एडिट करके दे रहा हूं। लेखक कुछ काम करने को कहता है जो इस प्रकार है

1) अपने पर्स को मोटा करना शुरू करें जिसमें लेखक कहता है कि अपने पर्स में रखे 10 सिक्के में से 9 खर्च कीजिए तो जो बचत होगी उससे पर्स मोटा होने लगेगा। जो अपनी आमदनी का एक निश्चित हिस्सा बचाता है उसके पास धन और आता है, धन खाली पर्स वाले पर मेहरबान नहीं होता। पर्स से जो पैसे निकालते है उससे वर्तमान की इच्छाएं पूर्ण होती है जबकि जो बचाते है उससे दीर्घकालिक की। 

2) ख़र्च को नियंत्रित करें
        जरुरी ख़र्च और अपनी इच्छाओं के बीच के फ़र्क़ को नज़रअंदाज़ न करें। आपकी आमदनी से आपकी जितनी इच्छाएँ संतुष्ट हो सकती हैं, आपकी और आपके परिवार की इच्छाएँ उससे कहीं ज़्यादा होती हैं। इसलिए आप जिन चीज़ों के लिए ख़र्च करना चाहते हों, उन्हें लिख लें। सिर्फ़ आवश्यक चीज़ों को चुनें। इसके अलावा सिर्फ़ उन्हीं चीज़ों को चुनें, जो आपकी 90% आमदनी में संभव हों। बाक़ी सब चीज़ों को हटा दें और उन्हें अपनी असीमित इच्छाओं का हिस्सा मान लें, जो संतुष्ट नहीं होंगी। उनका अफ़सोस न करें।

3) अपने धन को कई गुना बढ़ाएँ
        अब हमें यह सोचना है कि उस पैसे को कैसे काम पर लगाए ताकि वो और पैसा लेकर आए। क्योंकि पैसे को सिर्फ रखे रहने पर महंगाई यानी मुद्रा स्फीति उसकी दिन प्रति दिन वैल्यू कम करती जाती है। ध्यान देना है कि दौलत सिर्फ पर्स में खनखना रहे सिक्‍कों से नहीं बनती है। असली दौलत तो निवेश से प्राप्त आमदनी से बनती है। दौलत का अर्थ धन की वह धारा है, जो लगातार पर्स में बहकर आती है ओर उसे हमेशा मोटा करती रहती है।

4) अपनी पूंजी की रक्षा करें
 इंसान को अपने पर्स में रखे धन की दृढ़ता से रक्षा करनी चाहिए। अगर वह ऐसा नहीं करेगा, तो धन उसके पास से चला जाएगा। निवेश का पहला सिद्धांत है आपके मूलधन की सुरक्षा। अगर मूलधन के चले जाने का ख़तरा हो, तो क्या ज़्यादा कमाई के लालच में पड़ना समझदारी है?  इसमें ज़रा भी समझदारी नज़र नहीं आती है। अगर आप इतना बड़ा जोखिम उठाते हैं, तो इसकी सज़ा यह होगी कि शायद आप अपना मूलधन भी गँवा दें।  अपनी जमापूँजी का निवेश करने से पहले सावधानी से जाँच-पड़ताल करें। पहले पूरी तरह आश्वस्त हो जाएँ कि आपकी पूँजी सुरक्षित लौट आएगी। बेहतर यह है कि आप धन के प्रबंधन में अनुभवी लोगों की समझदारी भरी सलाह लें। इस तरह की सलाह माँगने पर मुफ़्त मिल जाती है। हो सकता है यह सलाह उतनी ही मूल्यवान साबित हो, जितनी रक़म का आप निवेश करने जा रहे हैं। सच तो यह है कि अगर यह सलाह आपकी पूँजी को डूबने से बचाती है, तो यह आपकी पूँजी जितनी ही मूल्यवान होती है।

5) अपने घर को लाभकारी निवेश बनाएँ
        किसी भी व्यक्ति का परिवार तब तक ज़िंदगी का पूरा आनंद नहीं ले सकता, जब तक कि उसके मकान में इतनी जगह न हो कि उसके बच्चे साफ़-सुथरी धरती पर खेल सकें और उसकी पत्नी न सिर्फ़ सुंदर फूल उगा सके, बल्कि परिवार को खिलाने के लिए अच्छी सब्ज़ियाँ भी उगा सके।
अपने घर का स्वामी बनने में हमें गर्व का एहसास होता है। इससे हमारा आत्मविश्वास बढ़ता है और हम अपने सभी प्रयासों में ज़्यादा मेहनत करते है। इसलिए हर आदमी के पास अपना ख़ुद का मकान होना चाहिए, जिसमें वह और उसका परिवार रह सके।

6) भविष्य में आमदनी होती रहे, ये सुनिश्चित करना है
        हर व्यक्ति की ज़िंदगी बचपन से बुढ़ापे की तरफ़ चलती है। यह ज़िंदगी का मार्ग है और इस पर हर एक को चलना पड़ता है, जब तक कि देवता उसे असमय ही अपने पास न बुला लें। इसलिए इंसान को अपने भविष्य या बुढ़ापे के लिए उचित आमदनी की व्यवस्था कर लेना चाहिए। इसके अलावा उसे इस बात की भी व्यवस्था कर लेना चाहिए कि अगर वह इस दुनिया में न रहे, तो भी उसके परिवार को सहारा तथा आराम मिलता रहे।

7) अपनी आमदनी की क्षमता बढ़ाएँ
        पैसा हमारी योग्यता का प्रतिफल होता है। यदि जानें 10 हजार रुपया मिल रहा है तो ये स्वीकार करना है कि हमारी योग्यता ही 10 हजार की है। कमाई कभी भी हमारी योग्यता को लांघती नहीं है। इसलिए सबसे पहले हमें अपनी योग्यता पर काम करना है। जितना ज्ञान लेते है, योग्यता उतनी बेहतर होती है। जब मनुष्य अपने काम में ज़्यादा कुशल बनता है, तो वह अपनी कमाने की क्षमता को भी बढ़ा लेता है। हमारे पास जितना ज्ञान होता है, हम उतना ही ज़्यादा कमा सकते हैं। जो व्यक्ति अपनी कला में ज़्यादा निपुणता हासिल करने की कोशिश करता है, उसे उसके अच्छे पुरस्कार मिलते हैं* |

शुक्रवार, 12 अगस्त 2022

यदि दिन की शुरुआत चाय से करते है तो सतर्क हो जाइए


हम में से 90/95% लोग दिन की शुरुआत एक कप चाय या कॉफी से करते है। हालांकि एक समय मैं भी इसी श्रेणी में था, लेकिन अब नहीं। कुछ लोगों की तो जब तक सुबह की चाय/कॉफी न मिले तब तक उठना और काम करना मुश्किल हो जाता है। क्या आप जानते हैं कि, अपने दिन की शुरुआत चाय या कॉफी से करना सेहत के लिए काफी नुकसानदायक हो सकता है।  सेहत के लिहाज से यह आदत अच्छी नहीं मानी जाती है। सुबह उठते ही खाली पेट चाय या कॉफी पीने की आदत आपके ब्लड प्रेशर, हार्ट रेट और ब्रीदिंग रेट पर असर डाल सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार ये गलत आदत है। प्रयास यह करना है कि दिन की शुरुआत में प्रथम अन्न मीठा यानी सिंपल कार्बोहाइड्रेट या फिर चाय न हो। दरअसल चाय में कैफीन होती है जिससे शुरुआत नहीं करनी चाहिए इससे आपकी सेहत पर बुरा असर पड़ता है।

दिन की शुरुआत चाय-कॉफी से करने से क्या नुकसान उठाने पड़ सकते हैं
1.सुबह की चाय-कॉफी ब्लड शुगर को बढ़ाती है और साथ में कोई न्यूट्रिशन नहीं प्रदान करती है। जबकि सबसे पोषक चीज चाहिए। इसके अलावा सुबह की चाय या कॉफी बॉडी के एसिड-एल्कलाइन के संतुलन को बाधित करके मतली जैसी समस्याओं को बढ़ाती है।
2.भूख कम करती है चाय-कॉफी
सुबह उठते ही चाय या कॉफी का सेवन, आपकी भूख को कम करता है। इसके सेवन से लंबे समय तक भूख नहीं लगती है, और ज्यादा समय तक भूखे रहने से शरीर में कैलोरी की कमी हो जाती है, और इसी कमी के चलते लोग ओवरईटिंग (Overeating) कर लेते हैं जिसकी वजह से आगे चलकर समस्या पैदा हो सकती है, और सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है।

3.चाय-कॉफी मेटाबॉलिज्म को धीमा करता है यानी भोजन के पाचन और उससे बनने वाली ऊर्जा धीमी हो जाती है। वहीं सुबह के वक्त हेल्दी नाश्ता करना आपके मेटाबॉलिज्म रेट को बढ़ा सकता है।

4.गैस्ट्रिक समस्या बढ़ सकती है क्योंकि चाय और कॉफी में कैफीन होता है  खाली पेट कैफीन का सेवन करने से गैस्ट्रिक कोशिकाएं उत्तेजित होती है, जिससे हार्टबर्न और एसिड रिफ्लक्स हो सकता है। ऐसी स्थिति में शरीर पर इसका बेहद ही बुरा असर पड़ सकता है।

जानकारों के अनुसार दिन भर में 2/3 कप से अधिक चाय नहीं पीनी चाहिए। मैं अपनी बात कहूं तो एक समय सुबह की शुरुआत 2 कप चाय से होती थी जो शाम होने तक 6/7 कप हो जाती थी। फिर जब अपने हेल्थ कोच के संपर्क में आया तो सबसे पहले चाय ही छूटी और वर्तमान 2 दिन में औसतन 1 चाय होती है वो भी मित्रों के साथ बैठने पर। घर पर तो चाय बनती ही नहीं, हालांकि दूसरे लोगों के चायपत्ती रखी रहती है। अपने हेल्थ कोच के सहयोग से चाय की जगह जिस पेय को लेते है वो ग्रीन टी, ब्लैक टी  और ओलाँग टी के गुण पाए जाते है जो सेहत को बहुत लाभ पहुंचाता है।
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शुक्रवार, 15 जुलाई 2022

हमारा व्यक्तित्व हमारे आदतों का प्रतिफल होता है



क्या आपने ध्यान दिया है कि हम अपने कार्य सालों से एक ही जैसा करते आए है। नहीं ध्यान दिया है, ध्यान दीजिए। क्या रोज सुबह जागने के बाद एक ही जैसे ब्रश पकड़ते है, एक ही जैसे पेस्ट लगाते है, एक ही जैसे रोज ब्रश करते है, रोज एक ही जगह बैठकर पेपर पढ़ते हैं। मतलब सुबह से लेकर शाम तक जो भी कार्य करते है, सभी रोज की तरह एक ही जैसे होते है। एक नशेड़ी रोज संकल्प लेता है नशा छोड़ने का लेकिन जैसे ही शाम होता है, नशा ले ही लेता है। ऐसा क्यों ? क्योंकि जब वो नशा छोड़ने का संकल्प करते वक्त एक आम व्यक्ति होता है लेकिन जब समय आता है तो वो अपने "बेसल गेंगलिया" के प्रभाव में होता है और जब हम इसके प्रभाव में रहते है तो हमें गलत सही, वादे, संकल्प का कुछ भी बोध नहीं होता। 

बेसल गेंगलिया होता क्या है
आज और अभी इसे लेकर गूगल पर पढ़िए और इसके महत्व को समझिए। दरअसल हमारे मस्तिष्क में एक प्याज जैसे शक्ल का एक अंग होता है जहां से हमारे मस्तिष्क के कार्यों का निर्धारण होता है। जब हम कोई कार्य किसी समय विशेष में लगातार करते है तो वो हमारे बेसल गेंगलिया में स्टोर होता जाता है और एक समय बाद जैसे ही वो समय आता है बेसल गेंगलिया हमारे दिमाग को वही कार्य करने का आदेश देता है। अब हमारे उपर निर्भर करता है कि अब यहां किस तरह की आदतों को स्टोर करते है। अच्छा करेंगे तो व्यक्तित्व अच्छा बनेगा और खराब आदतें डालेंगे तो व्यक्तित्व खराब बनेगा।
 मनोविज्ञान के अनुसार एक नई आदत बनने में 21 दिन लगते हैं। यानी अच्छे व्यक्तिव की जो आदतें है उन आदतों को 21 दिन लगातार करने पर वो स्वचालित हो जाएगा। तो आइए जानते है कुछ ऐसी छोटी आदतों के बारे में जिसे अपनाकर बेहतर स्थिति में पहुंच सकते है। छोटी छोटी चीजें एक दिन बड़ा नतीजा देती है। कुछ छोटी आदतें इस प्रकार है जिसे बेसल गेंगलिया में स्टोर करना है 

 1. सूर्योदय से पूर्व जागना है क्योंकि सबसे उत्तम समय होता है पूरे दिन की अच्छी शुरुआत की।

 2. जागने के उपरांत सर्वप्रथम ईश्वर को धन्यवाद देना है। अपने जीवन, अपने पास उपलब्ध संसाधनों, परिजनों, मित्रों और जिनके कारण भी हमारा जीवन सहज और सुखद होता है, सभी के लिए ईश्वर को धन्यवाद देना है।

3. आत्म विकास, अध्यात्म, व्यक्तित्व विकास, फाइनेंस आदि से संबंधित पुस्तकों का एक अध्याय पढ़ना है। हो सके तो उसे लिखना है और लोगों के मध्य शेयर भी करना है।

 4. कम से कम 30 मिनट टहलने और योग/व्यायाम करना है

 4. न्यूट्रीशन से भरपूर संतुलित नाश्ता करना है और भोजन जीभ के अनुसार नहीं अपितु शरीर की जरूरतों के अनुसार करना है। 

 5. 5 मिनट के लिए अपने भविष्य के व्यक्तित्व और सपनों की कल्पना करना है

6.किसी भी विषय पर तत्काल प्रतिक्रिया देने से बचना है, संदर्भ प्रसंग के बारे में जानना, समझना और विचार करना है, उसके बात कोई प्रतिक्रिया देने है

 7. रोज कुछ नया सीखना है, नए लोगों से मिलना है और रोज शाम को सोने से पूर्व उसे एक बार स्मरण कर लेना है। 

क्या इनमें से कोई आप आज से लागू करेंगे?
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शुक्रवार, 8 जुलाई 2022

भीड़ का चयन बुद्धिमानी से

भीड़ का चुनाव बुद्धिमानी से
(ओशो विचार से कॉपी/एडिट)

तुमने कभी इस बात का गहन निरीक्षण किया है कि तुम कैसे भीड़ में गिरकर उसके साथ हो जाते हो? हिंदुओं की भीड़ मस्जिद को जलाने जा रही है या मुसलमानों की भीड़ किसी मंदिर का विध्वंस करने। तुम वास्तव में मस्जिद जलाने के बारे में नहीं सोचते, तुम मंदिर गिराने के बारे में नहीं सोचते, तुमने तो इस बारे में पहले कभी सोचा ही नहीं था। तुम इस तरह के व्यक्ति हो ही नहीं। तुम उस तरह के विध्वंसक, हिंसक और आक्रामक हो ही नहीं। तुम तो एक भले व्यक्ति हो... तुमने कभी कोई वस्तु या किसी व्यक्ति को नहीं जलाया। और जब तुम भीड़ में सम्मिलित हुए थे, तब वास्तव मेें इस बारे में कुछ करने की सोच भी नहीं रहे थे, तुम्हें तो बस इतनी सी उत्सुकता थी कि यह भीड़ कहां जा रही है? तुम्हारी केवल यह जानने में रुचि थी कि आखिर क्या होने जा रहा है? तुम तो बस एक तरह के मनोरंजन के लिए जा रहे थे।

धीरे-धीरे तुम भीड़ के साथ उत्तेजित होने लगते हो, क्योंकि लोग तुम्हेें चारों तरफ से घेरे हुए हैं। पूरी ऊर्जा के साथ चीखते-चिल्लाते हुए नारे लगा रहे हैं, विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। अब उन सबकी ऊर्जा तुम पर काम करना शुरू कर देती है और तुम्हारी ऊर्जा भी जागने लगती है। धीरे-धीरे तुम पाते हो कि तुम खुद उत्तेजित होने लगे हो। जब उत्तेजना तुम्हारे चारों तरफ व्याप्त है, तो भला तुम कैसे उससे अलग रह सकते हो? तुम भी उत्तेजित हो जाते हो और जब तुम मंदिर या मस्जिद तक पहुंचते हो और लोग उसे ध्वस्त करना शुरू कर देते हैं, उसे आग लगाना शुरू करते हैं, तो तुम अचानक वह सब करना शुरू कर देते हो, जिसकी तुमने कभी कोई योजना ही नहीं बनाई थी।
लोगों को सामूहिक मन द्वारा उन्मत्त किया जाता है। धर्म तो तुम्हारा अनूठा अनुभव है। उसका सामूहिक मन से कोई लेना-देना नहीं। दरअसल, समूह या भीड़ में तुम अपनी पहचान खो देते हो, बल्कि तुम्हारा पतन हो जाता है। धार्मिक अनुभव में भी तुम अपनी पहचान खो देते हो, लेकिन वहां तुम्हारा उत्थान होता है, उन्नयन होता है, तुम ऊंचे उठ जाते हो।
 आइए जरा इसका उल्टा करते है यानी एक ऐसे कम्युनिटी/भीड़ का हिस्सा होते है जिनका उद्देश्य समाज की भलाई का होता है, जिनका उद्देश्य लगातार उन्नति करने का है, हम पाएंगे कि उस कम्युनिटी के प्रत्येक सदस्य प्रगति कर रहे है और उस कम्युनिटी का हिस्सा बनकर हम भी आगे बढ़ सकते है। मुंबई लोकल की भीड़ में शामिल हो जाइए, वो भीड़ आपको ट्रेन में बैठा भी देगी, गंतव्य तक पहुंचाकर उतार भी देगी। सिविल सर्विस की तैयारी करने वाले लोगों के साथ हो जाय, यह जरूरी नहीं कि हम भी यूपीएससी का एग्जाम क्लियर कर ले, लेकिन वर्तमान से तो बेहतर हो ही जाएंगे यह तय है। 
इसलिए भीड़ का चुनाव बुद्धिमानी से

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शुक्रवार, 1 जुलाई 2022

वर्तमान में मार्केट में क्या करे

लाभ की बातें

इस कॉलम के कई पाठक है और जब पोस्ट आने में लंबा समय निकलने लगता है तो लोग रिमाइंडर देने लगते है। हम भी क्या करे, हमारी भी बहुत व्यस्तताएं रहती है उसमें से जो थोड़े थोड़े लिखकर तैयार करता हूं और पूर्ण हो जाता है तो पोस्ट कर देता हूं।
 बहरहाल अब टॉपिक पर आते है। इस समय दुनिया भर के शेयर बाजार के साथ साथ भारतीय स्टॉक मार्केट भी काफी नीचे चला गया है। निफ्टी अभी कुछ दिन पहले अपने 52 सप्ताह के लो पर चला गया था जो कुछ रिकवर होकर 15800 के आस पास आया है, लेकिन यह तेजी पर्याप्त नहीं है। लगभग सबका पोर्टफोलियों घाटे में नजर आ रहा है। ऐसे में सवाल आता है कि नए निवेशक क्या करें। आइए यहां कुछ ऐसी बातों पर चर्चा करते हैं जिसको अपनाकर हम घाटे से बच सकते हैं।

1) आप घाटे की स्थिति में है, घाटा हुआ नहीं है
यदि आप निवेशक है और अच्छे बिजनेस चुनकर स्टॉक खरीदते है तो निश्चिंत रहिए क्योंकि आपके निवेश की वैल्यू कम हुई है जो फिर से परिस्थिति बदलने पर बढ़ जाएगी लेकिन इस मध्य घबराकर स्टॉक बेच देंगे तो जो अभी तक घाटे को स्थिति में है उसे वास्तविक घाटे में बदल देंगे। ध्यान देना है मार्केट शॉर्ट टर्म यानी 2 से 3 साल की अवधि में उतार चढ़ाव उसका मूल स्वभाव है और लॉन्ग टर्म में मार्केट की दिशा अंततः उपर की ओर ही है। अपने देश में जनसंख्या इतनी अधिक है, उपभोग इतना अधिक है कि सोते रहे तब भी 10% से उपर का ग्रोथ मिलना ही है। 

2) मार्केट के प्रति अधिक ज्ञान नहीं बल्कि इसके प्रति आपका व्यवहार सफलता दिलाता है
कुछ लोग हमेशा नई नई जानकारी लेते रहते है। मार्केट को मैथ समझकर पूरा फॉर्मूला समझना चाहते है फिर भी पैसा नहीं बना पाते है। उसके पीछे कारण है कि हम अपने को समझ ही नहीं पाते। जिसके अंदर बिजनेस को समझने को हल्का सा भी ज्ञान हो और साथ में धैर्य व अनुशासन हो तो ज्यादा ज्ञान रखने वालों से अधिक पैसा बनाता है। ज्यादा ज्ञान नहीं अपितु कम ज्ञान लेकिन उसका ज्यादा उपयोग पैसा दिलाता है। मेरे कई जानने वाले है जो मार्केट की बहुत समझ नहीं रखते, वो केवल कुछ स्टॉक चुनकर जब जब गिरता है उसे खरीदते और उपर जाने पर बेचने की प्रक्रिया में अनुशासन रखते है, वो दूसरों से अच्छा पैसा बनाते हैं। 
 
3) मार्केट से दूर रहकर नहीं बल्कि बना रहकर पैसा बनता है
कुछ लोग जैसे ही मार्केट गिरावट आती है तत्काल होल्डिंग बेच देते है और गिरावट थमने का इंतजार करते है लेकिन गिरावट में भी भय के कारण खरीदारी नहीं कर पाते। मार्केट जब बढ़ता है तो बताकर नहीं बढ़ता है और जो मार्केट की टाइमिंग करने की कोशिश करते है वो पैसा नहीं बना पाते। इसलिए मार्केट में निकलना ही होगा तो आंशिक तौर पर ही निकलना चाहिए, पूरी तरह से कभी भी न निकले। सबसे बेहतर होता है कोई महीने का बजट बनाकर हर महीने खरीदारी करते रहिए, ये सबसे उत्तम तरीका है पैसे बनाने का।

4) कंपनी को पहले समझें, फिर निवेश करें
यह निवेश का पहला और बेसिक नियम है, जिसे हर एक निवेशक को फॉलो करना चाहिए। वैसे हर आदमी से यह उम्मीद करना मुश्किल है कि वह हर एक कंपनी की समझ रखे। इसके बावजूद हमें प्रयास करना चाहिए कि कम से कम कंपनी के बिजनेस की बेसिक समझ रखें, जैसे कंपनी क्या करती है और अपनी प्रतिद्वन्दी कंपनियों के सामने कैसे खड़ी है। सामान्य तौर पर हम जिन प्रोडक्ट को लंबे समय तक प्रयोग कर रहे है और आगे भी प्रयोग करते रहेंगे तो अच्छे बिजनेस होने की संभावना अधिक होती है। कुछ उत्पाद जिसे हम प्रयोग करते है कोलगेट, एशियन पेंट, हवेल्स, रिलायंस, टाटा, गोदरेज आदि बहुत सी है।

5) पोर्टफोलियों कैसा होना चाहिए
अक्सर हम देखते हैं कि निवेशक या तो अपने पोर्टपोलियो में विविधता नहीं रखते या फिर अत्यअधिक विविधता कर लेते हैं इसका आशय है कि नियमानुसार अलग अलग सेक्टर के स्टॉक रखने चाहिए, तो लोग या तो एक दो सेक्टर में ही पैसा लगाते है या फिर बहुत ज्यादा स्टॉक चुन लेते है। सामान्य तौर पर 10 से 20 अलग अलग सेक्टर के लीडर या पोटेंशियल वाले स्टॉक का पोर्टफोलियो आदर्श समझा जाता है। लोग ज्यादा लाभ कमाने या सभी स्टॉक से लाभ कमाने के लिए 50/60 स्टॉक रख लेते है। जबकि इन दोनों के बीच संतुलन रखना सबसे महत्वपूर्ण है। जैसे मान लीजिए आपके पास दस शेयर हैं और आपने किसी एक या दो सेक्टर के ही सारे शेयर ले रखें हैं। इससे बचना चाहिए. दस में से दो बैंकिंग सेक्टर, दो मेटल सेक्टर, दो फार्मा सेक्टर, दो टेक सेक्टर इस तरह से पोर्टफोलियों में विविधता रखनी चाहिए।  ज्यादा संख्या में भी शेयर रखने से बचना चाहिए। इसलिए जोखिम से बचने के लिए एक संतुलित वाली पोर्टफोलियों रखें।

6) अपनी निवेश के सिद्धांत पर अडिग रहें 
जब हम किसी कंपनी को निवेश के लायक समझते हैं तब हम उससे संबंधित कुछ प्रमुख मानक देखते हैं। कंपनी कितना विकास करेगी और भविष्य में कंपनी की रणनीति क्या होगी, ऐसी बहुत सारी चीजें हम समझते हैं। यह कंपनी का एक्सपेंसन प्रोजेक्ट, रेवेन्यू ग्रोथ, मार्केट शेयर गेन, प्रोडक्ट की आगे वैल्यू एडिशन जैसे महत्वपूर्ण बिंदु होते हैं। यदि इनमें से किसी भी चीज को आप निवेश के बाद गड़बड़ होते हुए पाते हैं तो तुरंत समीक्षा करिए।
हर निवेशक के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज है इसे सीखना और इससे बचना। सभी लोग कभी न कभी, किसी न किसी स्टॉक में गलत निर्णय ले लेते हैं, यह कोई बड़ी बात नहीं है। यह हमारे सीखने की प्रक्रिया का भी हिस्सा है। अगर कभी आप गलत शेयर ले लिए हैं और घाटा हो रहा है तो घाटे से डरिए मत, उससे निकल लीजिए। ज्यादा देर मत करिए और किसी दूसरे स्टॉक में मौका देखिए। घाटे से डरिए मत, सीखिए.

7) पेनी स्टॉक से बचना चाहिए
पैनी उन स्टॉक को कहते है जिनके स्टॉक मूल्य 10 रू के आस पास के होते है। वैसे मेरे विचार से जिन स्टॉक के मार्केट कैपिटल बहुत कम हो जैसे 1000 cr के नीचे तो उन्हें पैनी समझिए। अक्सर नए निवेशक जल्दी पैसा कमाने के चक्कर में पेनी स्टॉक में पैसा लगा देते हैं। उन्हे 2000 रुपए के 1 शेयर लेने की जगह 2 रू का 1000 शेयर लेना पसंद करते है। उन्हे लगता है कि 2 रुपया वाला 10 भी हो जाय तो 5 गुना हो जायेगा। लेकिन व्यवहार में उल्टा मिलता है 95% से अधिक पैनी स्टॉक वेल्थ डिस्ट्रॉय करते है। इनमें पैसा लगाने के लिए बहुत अधिक समझ की जरूरत पड़ती है जो  सामान्य लोगों के लिए आसान नहीं होता। इसलिए किसी दूसरे का सुन के कि इस 2 रुपए के स्टॉक ने 6 महीने में 500% रिटर्न दिया, निवेश नहीं करना चाहिये। पेनी स्टॉक जब चढ़ता है या उसमें अपर सर्किट लगने लगता है तो लोग पैसा लगाने के लिए जल्दीबाजी करने लगते है। लेकिन जब पेनी स्टॉक गिरता है या उसमें लोअर सर्किट लगता है तो निवेशक शेयर बेच भी नहीं पाते औऱ घाटा उठाना पड़ता है। इसलिए हमेशा फंडामेंटली मजबूत कंपनियों में निवेश करें।

8) रातों रात अमीर बनने की चाहत वाले शेयर बाजार से दूर रहें
अक्सर नए निवेशक शेयर बाजार में रातों रात करोड़पति बनना चाहते हैं। वो किसी और का सुन रख होते हैं या फिर बाजार को सट्टा का अड्डा समझते है। ऐसा सोचने वालों को बाजार से दूर रहना चाहिए। शेयर बाजार लॉन्ग टर्म के लिए निवेश की बेहतर जगहों में से एक है न कि जुआ घर। मजबूत कंपनी में निवेश करिए औऱ लंबे समय या मध्यम अवधि के लिए अच्छा रिटर्न पाइए। ये शुद्ध रूप से बिजनेस है कम्पनी का प्रॉफिट बढ़ता है तो स्टॉक के मूल्य बढ़ते है। जिसके लिए धैर्य और संयम की जरूरी पड़ती है।

9) फ्यूचर/ऑप्शन/इंट्रा डे ट्रेडिंग से दूर रहे
लोग ट्रेडिंग से पैसा नहीं कमा पाते है,  हालांकि उन्हे लगता है वो पैसा कमा रहे है। वो बकरी को खाते हुए देखा है बहुत तेज खाती है लेकिन मात्रा में कम खाती है। उसी तरह ट्रेडिंग में होता है। पैसा  स्विंग ट्रेडिंग में मिलेगा और बड़ा पैसा निवेश से मिलेगा।
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बुधवार, 25 मई 2022

म्यूचुअल फंड इन्वेस्टमेंट

लाभ की बाते

*यदि आप शेयर बाजार के बारे में नहीं जानते है तो कोई नुकसान नहीं है लेकिन आप एक बड़े लाभ से वंचित है*

मैं अक्सर लोगों से ये कथन कहता रहता हूं। मध्यमवर्ग जीवन भर पैसे के लिए संघर्ष करता रहता है लेकिन वो पैसे की समझ को बढ़ाना नहीं चाहता है। वो अपने पैसे को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से जीवन बीमा, जमीन, गहना, एफडी, आरडी, एनएससी जैसे साधनों में निवेश करता है। वो जोखिम लेना पसंद नहीं करता है जबकि जीवन में जोखिम न लेना ही सबसे बड़ा जोखिम होता है। उसे शेयर बाजार जुआ लगता है, बड़े लोगों का खेल लगता है, सोचता है साधारण लोगों के लिए ये जगह ही नहीं है। यदि किसी के प्रभाव में वो शेयर बाजार में आता भी है तो रातों रात अमीर बनने की चाहत और डेली पैसे निकालने के चक्कर में ट्रेडिंग करने लगता है। जब वो जमीन खरीदता है या एफडी में पैसा लगाता है तो कल से ही उसका खरीदार नहीं खोजने लगता है। लेकिन शेयर बाजार में पहले तो बिना समझे बुझे पैसा लगाता है, ऊपर मोबाइल में दिन में हर मिनट भाव देखना शुरू कर देता है। अरे भाई जो प्रॉसेस जमीन या एफडी वाले में करते हो, वही शेयर बाजार में दिखाओ ना, फिर देखो कमाल यहां का।
स्टॉक मार्केट से लाभ लेने के दो तरीके होते हैं। एक डायरेक्ट जिसमें डीमैट अकाउंट खोलकर स्टॉक चुनना, खरीदारी करना, होल्ड करना होता है। यह बाहर से जितना सरल दिखता है वास्तव में उतना ही क्लिष्ट होता है। इसके लिए धैर्य, अनुशासन के साथ साथ नियमित रूप से सीखना पड़ता है, अनुभव लेना पड़ता है। याद रखना है कि मार्केट की जितनी अधिक समझ बढ़ाएंगे उतना अधिक वेल्थ बनाएंगे। समझ बढ़ने से हमारी बड़े पैसे कमाने और होल्ड करने की पात्रता विकसित होती है।
दूसरा तरीका होता है इन डायरेक्ट यानी बिचौलियों के माध्यम से जिसमें अपने देश में लगभग 50 म्यूचुअल फंड और कई पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विस होती है जहां वो एक छोटी फीस लेकर पैसे को मैनेज करते है। उनका काम ही होता स्टॉक मार्केट में लोगों को रिटर्न दिलाना इसलिए वो उसकी पढ़ाई भी करते हैं। इनके माध्यम से पैसा लगाना मतलब जोखिम कम होना और लाभ की प्रत्याशा बढ़ जाना। म्यूचुअल फंड बहुत ही सरल और आसान निवेश साधन है, हमारी जैसी जरूरत होती है, उसके अनुसार प्रोडक्ट डिजाइन किए जाते है। सामान्यतया आसानी से 12/15% का चक्रवृद्धि ग्रोथ मिल जाती है। हालांकि ये रिटर्न गारंटीड नहीं होते हैं और 1/2 साल की अवधि में निगेटिव भी दिखाता है लेकिन यदि 5 साल से उपर का समय दिया जाता है तो आसानी उपरोक्त रिटर्न मिल ही जाता है।

म्यूचुअल फंड में निवेशकों के लिए इक्विटी में पैसा लगाने का एक सुरक्षित तरीका है। इसमें सीधे किसी स्टॉक में पैसे लगाने की जगह म्यूचुअल फंड मैनेजर अलग अलग शेयरों में पैसा लगाते हैं, जिससे निवेशकों को डाइवर्सिफिकेशन का फायदा मिलता है। म्यूचुअल फंड में भी पैसा लगाने का सबसे सुरक्षित तरीका सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी SIP है जहां एक छोटी रकम भी नियमित अंतराल पर निवेश होती रहती है। यह निवेश के लिए वो सभी मानक धारण किए रहता है जो सफल निवेश के लिए चाहिए। यह लंबी अवधि को बढ़ावा देने का वाला विकल्प है, जिसमें बाजार के कई रिस्क कम हो जाते हैं। जानकार हमेशा लंबी अवधि तक SIP चलाने की बात करते हैं। इससे कंपाउंडिंग का भी जबरदस्त फायदा इसमें मिलता है।
असल में SIP में निवेशकों को किसी फंड में एकमुश्त पैसा लगाने की बजाए मंथली निवेश की सुविधा मिलती है। कई ऐसे फंड हैं, जिनमें मिनिमम 100 रुपये से भी निवेश शुरू किया जा सकता है। यह छोटे रिटेल निवेशकों के लिए बेहतर तरीका है। उन्हें अपनी बचत में से एक तय रकम हर महीने निवेश करना होता है। इसमें समय समय पर वे अपने निवेश की समीक्षा भी कर सकते हैं जिसके आधार पर SIP में टॉप अप कराने या पॉज करने की भी सुविधा मिलती है।

बाजार में ऐसी कई स्कीम हैं, जिन्होंने लंबी अवधि में निवेशकों को करोड़पति बना दिया है। आइए कुछ फंड के बारे में जानते हैं

1) ICICI Prudential Technology Fund जो एक विशेष सेक्टर आईटी में पैसा लगाता है। वैसे सेक्टर फंड बहुत अधिक जोखिम वाले होते है, जिसका समय 10 साल से अधिक हो, उसी को सेक्टर फंड लेने चाहिए।

20 साल में SIP रिटर्न: 20% सालाना
5000 रुपये मंथली SIP की वैल्यू: 1.25 करोड़ रु
1 लाख एकमुश्त निवेश की वैल्यू: 42.37 लाख रु
मिनिमम SIP: 100 रुपये

2) SBI Consumption Opportunities Fund
20 साल में SIP रिटर्न: 19% सालाना
5000 रुपये मंथली SIP की वैल्यू: 1.14 करोड़ रु
1 लाख एकमुश्त निवेश की वैल्यू: 42.43 लाख रु
मिनिमम SIP: 500 रुपये

3) SBI Magnum Global Fund
20 साल में SIP रिटर्न: 18.75% सालाना
5000 रुपये मंथली SIP की वैल्यू: 1.05 करोड़ रु
1 लाख एकमुश्त निवेश की वैल्यू: 53 लाख रु
मिनिमम SIP: 500 रुपये

4) ICICI Prudential FMCG Fund
20 साल में SIP रिटर्न: 18.53% सालाना
5000 रुपये मंथली SIP की वैल्यू: 1 करोड़ रु
1 लाख एकमुश्त निवेश की वैल्यू: 41 लाख रु
मिनिमम SIP: 100 रुपये

5) SBI Large & Midcap Fund
20 साल में SIP रिटर्न: 18.22% सालाना
5000 रुपये मंथली SIP की वैल्यू: 1 करोड़ रु
1 लाख एकमुश्त निवेश की वैल्यू: 44 लाख रु
मिनिमम SIP: 500 रुपये

प्रश्नों का स्वागत है
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