शनिवार, 30 अक्टूबर 2021

कम उम्र में गंभीर जानलेवा बीमारियां क्यों



कन्नड़ फिल्मों के मशहूर अभिनेता पुनीत राजकुमार का शुक्रवार को हार्ट के कारण निधन हो गया। वो 46 साल के थे और सोशल मीडिया पर चल रही खबरों के अनुसार एक बड़े समाजसेवी भी थे। स्कूल, अनाथालय, वृद्धाश्रम जैसे धर्मार्थ कार्य उनके व्यक्तित्व को बताने के लिए पर्याप्त है। मुझे ऐसा लगता है बॉलीवुड अभिनेताओं के तुलना में दक्षिण भारतीय अभिनेता समाज को बहुत कुछ देते है।  खबरों की माने तो  पुनीत राजकुमार को जिम में वर्कआउट करते समय हार्ट अटैक के बाद सुबह करीब 11:30 बजे आनन- फानन में बैंगलुरु के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। इससे पहले बुधवार को मशहूर सेलेब्रिटी फिटनेस ट्रेनर कैजाद कपाड़िया का भी हार्ट फेल हो जाने के कारण मौत हो गई थी। हाल ही में इसी तरह युवा बॉलीवुड अभिनेता सिद्धार्थ शुक्ला की भी बहुत ही कम उम्र में हार्ट के कारण मौत हो गई थी। इससे पहले और जाए तो कन्नड़ अभिनेता चिरंजीवी सरजा, इंद्र कुमार जैसे कई उदाहरण मिल जाएंगे जो काफी कम उम्र में हार्ट अटैक से मृत्यु को प्राप्त कर चुके है। मशहूर डांसर रेमो डिसूजा, कपिल देव, सौरभ गांगुली जैसे अनगिनत सेलिब्रेटी है जो इस रोग को झेल चुके है। 
 यदि अब से 15/20 साल पहले जाएं तो हार्ट रोग, कैंसर, बीपी, डायबिटीज जैसे रोग अमीरों और ज्यादा उम्र के माने जाते थे लेकिन अब ऐसा नहीं है। आप अगल बगल झांके तो कोई न कोई कैंसर सहित उन रोगों के मरीज मिल जायेंगे। डायबिटीज तो हर दूसरा तीसरा मिल जाएगा। भारत इन रोगों की राजधानी होती जा रही है।   आखिर ये पिछले 15/20 सालों में हुआ क्या जो ये रोग सामान्य हो गए है। समीक्षा में निकल कर आयेगा अपना खान पान, लाइफ स्टाइल का बिगड़ना।  तो आइए कुछ कारणों को हम जानते है जिससे यह रोग बहुत तेजी से फैलते जा रहे है।

1) तनाव ज्यादा लेना: तनाव आज के जीवन का एक अहम हिस्सा हो गया है। तनाव हमारे शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन छोड़ता है जो एक स्तर तक नियंत्रित न किया जाय तो लोग आत्महत्या तक करने को सोचने लगते है। तनाव हमारे शरीर में कई तरह के बैड हार्मोन छोड़ता है जिससे अनगिनत बीमारियों को फलने फूलने का अवसर मिलता है। हमें प्रसन्न रहना क्योंकि प्रसन्नता गुड हार्मोन स्रावित करता है। सेलिब्रेटी लोगों को हमारे आपकी तुलना में बहुत अधिक तनाव होता है। पर्दे पर जीवन जितना खूबसूरत दिखता है, पर्दे के पीछे उतनी ही अधिक बदसूरत होती है।

2) नींद का खराब होना: विज्ञान के अनुसार सभी को 8 घंटे की आराम और नींद लेनी चाहिए। प्रकृति ने रात सोने के लिए दिया है। जो इसी खिलवाड़ करता है समस्या को आमंत्रित करता है।  ये लोग काम के चक्कर में नींद पूरी नहीं कर पाते हैं, उन्हें रात-रात भर जागकर शूटिंग करना पड़ता है। इस वजह से नींद का पैटर्न पूरी तरह से खराब हो जाता है। नींद पूरी न होने या नींद का पैटर्न खराब होने के कारण हृदय रोग के साथ साथ कई गंभीर जानलेवा बीमारियों का खतरा बढ़ाता है। 

3) फिटनेस फोबिया: वैसे तो व्यायाम को अच्छे स्वास्थ्य का मानक माना जाता रहा है। विज्ञान के अनुसार अच्छे सेहतमंद होने में व्यायाम को भूमिका मात्र 20% ही होती है लेकिन लोगों में इसे 100% समझा जाता है। हाल के वर्षों में देखा गया है कि फिटनेस को लेकर कुछ आवश्यकता से अधिक अलर्ट रहते है। अभिनेता लोग तो अपने शारीरिक बनाकर यानी डोले सोले को लेकर कुछ ज्यादा सचेत रहते है। इसके चक्कर में लोग घटिया किस्म की स्टेराइड तक प्रयोग करते है। हम सभी जानते है कि इसके दुष्प्रभाव क्या होते है। अच्छी फिटनेस को सेहत के लिए जितना फायदेमंद माना जाता है, वहीं फिटनेस को लेकर पागलपन नुकसानदायक भी हो सकता है। जिम में आने वाले सभी लोगों को अपनी क्षमता और ताकत को समझकर ही व्यायाम करना है। जब क्षमता से अधिक होना तो प्रेशर शरीर पर ही पड़ता है। शरीर की क्षमता से अधिक उसपर दबाव बनाना, हार्ट अटैक, फ्रैक्चर जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। यह बात सभी को ध्यान में रखनी चाहिए।

4) नशे का सेवन: आजकल ज्यादातर युवा 18 से 25 साल की उम्र में ही सिगरेट, शराब, गुटखा, तंबाकू का सेवन करना शुरू कर देते हैं। नशा हमारे शरीर में गंभीर बीमारियों को पैदा करता है। डॉक्टरों की मानें तो नशा करने वालों में हार्ट अटैक का खतरा 50% तक बढ़ जाता है।

5) मांसाहार, जंक फूड और तली भुनी चीजें खाना: आज की ज्यादातर युवा पीढ़ी अपनी भूख मिटाने के लिए घर के खाने की जगह जंक फूड पर निर्भर रहती हैं। उनकी थाली में ज्यादातर तली-भुनी चीजों के साथ चाइनीज फूड शामिल रहता है। इन खानों से शरीर में सेचुरेटेड और ट्रांस फैट बढ़ता है जिसकी वजह से शरीर में कैलोरी की मात्रा बढ़ जाती है, जिसका बुरा असर सीधा दिल पर पड़ता है। गलत खानपान से गुड कोलेस्ट्रॉल को कम करता है और बैड कॉलेस्ट्रोल एलडीएल, वीएलडीएल, ट्राई ग्लीसराइड के स्तर बढ़ाता है जो हृदय तक सही मात्रा में ब्लड को पहुंचने नहीं देता है। 

6) न्यूट्रिशन गैप: हमारा शरीर चावल दाल रोटी सब्जी के माध्यम से प्रोटीन, विटामिन, मिनिरल, फाइबर, ओमेगा 3 आदि मांगता है। जितना चाहिए उसे मिल नहीं पाता है। एक सर्वे के अनुसार भारत में 50% से अधिक लोगों में प्रोटीन की भयंकर कमी है। प्रोटीन जो पहली जरूरत होती है, शरीर का बिल्डिंग ब्लॉक कहा जाता है, जब वही नहीं मिल रहा है तो परेशानी तो होगी ही। न्यूट्रिशन गैप का कारण खाद्य पदार्थ को गुणवत्ता खराब होना। सब्जियां इंजेक्शन से पैदा हो रही है, दूध भी भी ऑक्सिटोशिन के इंजेक्शन इस्तेमाल हो रहे है। फलों को लंबे समय तक फार्मलिन से सुरक्षित रखा जा रहा है। बहुत सारे खाद्य पदार्थ अब इस्तेमाल नहीं हो रहे है जैसे अलसी, बाजरा, ज्वार आदि। इसे ध्यान देना है। खान में मौसमी फलों और सब्जियों को शामिल करना है।

7) धूप का न मिलना और एसी का ज्यादा प्रयोग: आप सोचेंगे यह भी कोई कारण है तो जान लीजिए ये भी एक बड़ा कारण है। घर से निकले कार में, कार से निकले ऑफिस में एसी से निकलते ही नहीं , धूप मिलता ही नहीं जिसके कारण विटामिन डी नहीं मिल पाता है। पसीने को निकलने का मौका नहीं मिल रहा है। यह भी कई बिमारियों को पैदा होने जा अवसर देता है। 

उम्मीद है पोस्ट लाभदायक रही।
Why serious life-threatening diseases at a young age

 Renowned Kannada film actor Puneet Rajkumar passed away on Friday due to heart failure.  He was 46 years old and according to the news going on on social media, he was also a big social worker.  Charitable work like school, orphanage, old age home is enough to tell his personality.  I feel South Indian actors give a lot to the society as compared to Bollywood actors.  If reports are to be believed, Puneet Rajkumar was rushed to a hospital in Bangalore at around 11:30 am after a heart attack while working out in the gym where he breathed his last.  Earlier on Wednesday, famous celebrity fitness trainer Kaizad Kapadia also died due to heart failure.  Recently, similarly young Bollywood actor Siddharth Shukla also died due to heart at a very young age.  Before this, many examples will be found like Kannada actor Chiranjeevi Sarja, Indra Kumar who have died due to heart attack at a very young age.  There are countless celebrities like famous dancer Remo D'Souza, Kapil Dev, Sourav Ganguly who have suffered from this disease.
  If we go 15/20 years ago, then diseases like heart disease, cancer, BP, diabetes were considered to be rich and old but now it is not so.  If you look from side to side, you will find some or the other patients of those diseases including cancer.  Diabetes will be found every second third.  India is becoming the capital of these diseases.  After all, what happened in the last 15/20 years that these diseases have become common.  Your diet will come out in the review, the deterioration of your lifestyle.  So let us know some of the reasons due to which this disease is spreading very fast.

 1) Taking more stress: Stress has become an important part of today's life.  Stress releases the hormone cortisol in our body which if not controlled to a level, then people start thinking of committing suicide.  Stress releases many types of bad hormones in our body, which gives opportunity to innumerable diseases to flourish.  We should be happy because happiness secretes good hormones.  Celebrities are under a lot more stress than we do.  The more beautiful life looks on the screen, the more ugly it gets behind the scenes.

 2) Poor sleep: According to science, everyone should take 8 hours of rest and sleep.  Nature has given night to sleep.  Anyone who messes with this invites problems.  These people are unable to complete sleep due to work, they have to stay awake all night and shoot.  Because of this the sleep pattern gets completely disturbed.  Lack of sleep or poor sleep patterns increases the risk of heart disease as well as many serious life-threatening diseases.

 3) Fitness Phobia: By the way, exercise has been considered a standard of good health.  According to science, the role of exercise in being healthy is only 20%, but it is considered 100% among people.  In recent years, it has been seen that some are over-alert regarding fitness.  Actors are a little more conscious about their physical making ie Dole Sole.  In its affair, people even use substandard steroids.  We all know what are its side effects.  As much as good fitness is considered beneficial for health, madness about fitness can also be harmful.  All the people who come to the gym have to exercise only after understanding their ability and strength.  When the capacity is exceeded, the pressure falls on the body itself.  Putting pressure on the body more than its capacity can cause serious problems like heart attack, fracture.  Everyone should keep this thing in mind.

 4) Consumption of intoxicants: Nowadays most of the youth start consuming cigarettes, alcohol, gutka, tobacco at the age of 18 to 25 years.  Drugs cause serious diseases in our body.  According to doctors, the risk of heart attack increases by up to 50% in drug users.

 5) Eating non-vegetarian, junk food and fried fried things: Most of the young generation today depend on junk food instead of home food to satisfy their hunger.  His plate mostly consists of Chinese food along with fried and fried items.  These foods increase saturated and trans fat in the body, due to which the amount of calories in the body increases, which directly affects the heart.  Poor diet lowers good cholesterol and increases the level of bad cholesterol LDL, VLDL, triglyceride, which does not allow the right amount of blood to reach the heart.

 6) Nutrition gap: Our body demands protein, vitamins, minerals, fiber, omega 3 etc. through rice dal roti vegetable.  He doesn't get what he wants.  According to a survey, more than 50% of the people in India are severely deficient in protein.  Protein, which is the first requirement, is called the building block of the body, when it is not available then there will be trouble.  The reason for the nutritional gap is the deterioration of the quality of the food item.  Vegetables are being produced by injection, milk is also being used for injection of oxytocin.  The fruits are being preserved with formalin for a long time.  Many food items are no longer being used like flaxseed, millet, jowar etc.  Pay attention to it.  Seasonal fruits and vegetables should be included in the diet.

 7) Lack of sunlight and excessive use of AC: If you would think that this is also a reason, then know that this is also a big reason.  In the car leaving the house, leaving the car in the office, not even coming out of the AC, there is no sunlight, due to which vitamin D is not available.  Not getting a chance to sweat.  It also gives opportunities to many diseases to arise.



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गुरुवार, 28 अक्टूबर 2021

शीर्ष पर स्थान हमेशा खाली रहता है



किसी भी क्षेत्र में शीर्ष स्थान किसी की बपौती नहीं होती है या वो आरक्षित नहीं होती, वो हमेशा रिक्त रहता है। पोस्ट में 2 फोटो है एक वर्ष 2017 के पोस्ट की है तो दूसरी वर्तमान की है। पोस्ट 2017 की है जिसे आज के अनुसार थोड़ा सा एडिट करके फिर से प्रस्तुत कर रहा हूं। 

पिछले दिनों एक न्यूज़ आयी थी कि इलेक्ट्रिक वाहन बनाने वाली कम्पनी टेस्ला के प्रमोटर एलन मस्क  की संपत्ति में एक दिन में 25.6 अरब डॉलर यानी करीब 19.23 खरब रुपये की वृद्धि हुई। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि टेस्ला के शेयरों में तेजी के चलते पहली बार कंपनी का वैल्यूएशन एक ट्रिलियन डॉलर यानी एक लाख करोड़ डॉलर (लगभग 75 लाख करोड़ रुपये) को पार कर गया। ऐसा तब हुआ जब किराये पर कार देने वाली कंपनी हेर्त्स ने टेस्ला से एक लाख इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) खरीदने का ऐलान किया। Forbes पत्रिका के अनुसार सोमवार को अमेरिकी शेयर बाजार बंद होने के वक्त मस्क की कुल संपत्ति शुक्रवार की शाम से 11.4 फीसदी ज्यादा 255.2 अरब डॉलर हो गई। इतनी संपत्ति‍ संभवत: अब तक कभी किसी व्यक्ति के पास नहीं रही। 
 लगभग इन्ही दिनों वर्ष 2017 की खबरों के अनुसार अमेज़न के संस्थापक जेफ बेजोस दुनिया के सबसे बड़े अमीर बन गए थे। न्यूज़ में स्पष्ट लिख था कि अमेज़न के शेयर में 13% की वृद्धि होने पर ऐसा हुआ है। 
   इस गणित को ठीक से समझने की जरूरत है। भोजपुरी में एक कहावत है कि चूहा कितना भी मोटा होगा तो लोढ़ा होगा। कोई भी कारोबार जब तक स्टॉक मार्केट में नहीं आएगा बहुत बड़ा नहीं होगा, सीमित विकास होगा। इसको जरा ठीक से समझते है होता क्या है कि कंपनिया जब अपने शेयर स्टॉक मार्केट में लिस्ट कराती है तो उसके बिजनेस में छोटे छोटे और साधारण लोगों को भी मौका मिलता है उनके बिजनेस में हिस्सेदारी लेने का। प्रमोटर के पास फंड की उपलब्धता बढ़ती है जिससे बिजनेस में ग्रोथ की नई संभावनाएं बढ़ती है। जैसे जैसे उस कंपनी का बिजनेस बढ़ता है वैसे वैसे उसके शेयर के दाम भी बढ़ते है।  इस प्रकार जिसके पास उस विशेष कंपनी के जितने अधिक शेयर होते है उसी अनुपात में उसकी वैल्यू भी बढ़ती है। जब शेयर के भाव गिरते है तो उनकी संपत्ति भी कम होती है। किसी समय विशेष किसी किसी कम्पनी के शेयर बहुत तेज बढ़ते है तो उनके प्रमोटर की संपत्ति तेज बढ़ती है।  जेफ बेजोस कंपनी के प्रमोटर है इसलिए उनके पास अमेज़न के सबसे अधिक शेयर होगे। 
यद्यपि ऐसा नही होता है कि हमेशा शेयर भाव बढ़ता ही है , इसका भाव गिरता भी है और इस दशा में उनकी संपति में कमी भी आती है। अपने देश मे देखा जाय तो पिछले 2/3 सालो में रिलायंस इंडस्ट्री के प्रमोटर मुकेश अम्बानी, अडानी ग्रुप के प्रमोटर गौतम अडानी, वेदांता ग्रुप के अनिल अग्रवाल आदि की संपत्ति भी खूब बढ़ी है इसके पीछे भी इन कंपनी के शेयरों के भाव बढ़ना है। पिछले कुछ सालों में भारतीय कंपनियों के शेयर बहुत बढ़े है।

 इससे हमें कुछ सीखना है---

किसी भी अर्थतंत्र में अमीर होने के सीमित तरीके होते है:
1) बहुत बड़ा बिजनेस बनाइए
2) निवेशक बनकर ऐसे बिजनेस में हिस्सेदारी लीजिए
3) रियल एस्टेट का काम कीजिए
4) कोई सिस्टम बनाइए जैसे फेसबुक, बायजू, पेटीएम, ओला आदि के तरीके से। 
 बिजनेस आशय यह नही होता है कि एक दुकान खोलकर बैठ जाना। बिजनेस का मतलब बड़ा बिजनेस जिसमे हम रहे या न रहे लेकिन बिजनेस बढ़ते रहना चाहिए । यद्यपि दुकानदार लोग भी अपने आपको बिजनेसमैन ही बताते है। इसे समझने के लिए यह आवश्यक है कि मेरा कितना बड़ा टर्न ओवर है, मेरे लिए कितने लोग काम करते है , मेरे अनुपस्थिति में कितने दिनों तक कमाई होती रहेगी। आज की डेट में बड़ा बिजनेस बनाने के लिए एक नया आईडिया और उस पर क्रियान्वयन चाहिए। आने वाले समय paytm के विजय शेखर शर्मा, फ्लिपकार्ट के संदीप बंसल, ओला के संस्थापक आदि जैसे लोग  भारत के सबसे अमीर लोगों की सूची में रहेंगे। ऐसे बिजनेस खड़ा कर पाना सभी के लिए कठिन काम है। 

साधारण लोगों के लिए सबसे आसान तरीका है निवेश का माध्यम। निवेश का मतलब स्टॉक मार्केट में निवेश। दुर्भाग्य से मध्यम वर्ग में यह सट्टा जुआ समझा जाता है। अपने परिवार में किसी से कह दीजिए कि हम स्टॉक मार्केट में करियर बनाना चाहते है, अचानक से आलोचकों की संख्या बढ़ जाएगी। स्टॉक मार्केट मतलब लोगों को रोज खरीदना बेचना ही समझ में आता है। निःसंदेह स्टॉक मार्केट एक जुआ है यदि हम बिना सोचे समझे, बिना किसी रिसर्च के पैसा लगाते हैं तो पक्का जुआ खेलने जैसा है। स्टॉक मार्केट में ट्रेडिंग नहीं निवेश करना है जिसका मतलब है कि  जिन कंपनियो के बिजनेस बढ़ रहे हो उनकी अच्छी मात्रा में शेयर खरीदना, जैसे जैसे बिजनेस में बढ़ोत्तरी हो और हमारी उम्मीदों पर खरा उतर रहा हो आउट अधिक शेयर लेना। यदि अनुशाषित होकर अच्छी कंपनी के शेयर लिए जाय तो ये तो नही कहा जा सकता कि हम अपने जीवन काल मे बिलेनायर बन पाएंगे लेकिन हमारी आने वाली पीढ़िया अवश्य कहलाएगी। ऐसा होने के पीछे काम करेगा कंपाउंडिंग का मैजिक जो वक्त के साथ विस्फोटक रिटर्न देता है। 
एक नियम के अनुसार मिलने वाले ब्याज का 72 में भाग किया जाय तो भागफल मिलेगा उतने साल में धन दोगुना हो जाएगा। जैसे किसी निवेश साधन में 8% कंपाउंड रिटर्न मिलता है तो 72/8=9 साल में यहां धन दोगुना और 18 साल में 4गुना हो जाएगा। यदि स्टॉक मार्केट की बात की जाय तो लंबी अवधि में यह बाजार आसानी से लगभग 25/26% का कंपाउंड ग्रोथ देता है। यानी 3/3.5 साल में यहां धन दोगुना हो जाता है। थोड़ी सी काबिलियत विकसीत कर लिया जाय तो कहीं अधिक के भी रिटर्न लिए जा सकते है। यानी यहां से हर 3 साल से कम अवधि में धन को दुगुना किया जा सकता है। अपने देश मे राकेश झुनझुनवाला, विजय केड़िया, डॉली खन्ना, पोरिन्जु वेलियाथ, रामदेव अग्रवाल, शंकर शर्मा जैसे अनगिनत नाम है जिन्होंने कुछ हजार से सफर प्रारंभ करके सैकड़ो हजारों करोड़ो रूपये के मालिक बन बैठे है। एक्सएल शीट के अनुसाय यदि हर महीने 20000 रु निवेश का लक्ष्य रखा जाय और 25% का ग्रोथ तो यह रकम 25 सालो में 29 करोड़, 30 सालो में 89 करोड़, 35 सालो में 273 करोड़, 40 सालो में 834 करोड़ और 100 सालो में 54 लाख करोड़ में तब्दील हो सकते है। लेकिन इस पर हम अमल नहीं करेंगे क्योंकि मध्यम वर्ग में संसाधनों का उपभोग अपने जीवन काल में ही कर लेना चाहते है। बहुत सारे लोग अपनी बाइक का तो इंश्योरेंस कराते है लेकिन अपना यह सोचकर नहीं कराते कि उस पैसे का क्या फायदा जो हमें मिले ही नहीं और मिले भी तो मरने के बाद।   
किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए 3B का अवधारणा है। एक बी मतलब बिलीव यानी विश्वास, दूसरा बी मतलब बिहेव यानी किसी चीज पर विश्वास करके उसके प्रति व्यवहार करना और तीसरा बी का आशय है बिजनेस बनना। 
तो स्टॉक मार्केट पर  विश्वास कीजिए वेल्थ क्रिएशन का इससे सरल कोई उपाय नहीं है। अब व्यवाह कीजिए यानी अपने बचत को इधर रुख कीजिए और फिर देखिए कैसे बिजनेस खड़ा होता है। 

उम्मीद है लेख बहुत अच्छा लगा होगा। हालांकि है तो बहुत बड़ा। आउट बहुत से लोग शिकायत भी करते है कि बहुत बड़ा लिखता हूं तो क्या करूं छोटे में हमारी बात समा ही नहीं पाती है। 

प्रश्नों का स्वागत है
The space at the top is always empty

 The top position in any field is not inherited or reserved, it always remains vacant.  There are 2 photos in the post, one is from the year 2017 and the other is from the present.  The post is from 2017 which I am presenting again with a slight edit as of today.

 Recently, there was a news that the wealth of Elon Musk, the promoter of electric vehicle maker Tesla, increased by $ 25.6 billion or about Rs 19.23 trillion in a day.  This happened because due to the rise in Tesla shares, for the first time the valuation of the company crossed one trillion dollars i.e. one trillion dollars (about 75 lakh crore rupees).  This happened when Hirts, a car rental company, announced the purchase of one lakh electric vehicles (EVs) from Tesla.  According to Forbes magazine, at the time of the US stock market closing on Monday, Musk's net worth increased 11.4 percent from Friday evening to $ 255.2 billion.  Such wealth has probably never been with any person till now.
  According to the news of the year 2017, Amazon founder Jeff Bezos had become the world's richest man.  It was clearly written in the news that this happened when Amazon's stock increased by 13%.
    This math needs to be understood properly.  There is a saying in Bhojpuri that no matter how fat a rat is, it will be a lodha.  No business will be very big until it comes to the stock market, there will be limited growth.  Let us understand it a little properly, what happens is that when companies list their shares in the stock market, then even small and ordinary people in its business get a chance to take a stake in their business.  The availability of funds with the promoter increases, which opens up new opportunities for growth in the business.  As the business of that company grows, so does the price of its shares.  In this way, the number of shares held by that particular company increases in proportion to its value.  When stock prices fall, their assets also decrease.  If the shares of a particular company increase very fast at any time, then the assets of their promoters increase rapidly.  Jeff Bezos is the promoter of the company, so he will have the most shares in Amazon.
 Although it does not happen that the share price always increases, its value also falls and in this case their wealth also decreases.  If seen in our country, in the last 2/3 years, the assets of Reliance Industries promoter Mukesh Ambani, Adani Group promoter Gautam Adani, Vedanta Group's Anil Agarwal etc.  The shares of Indian companies have increased a lot in the last few years.

  We have something to learn from this...

 There are limited ways to get rich in any economy:
 1) Build a big business
 2) Become an investor and take a stake in such business
 3) Do real estate work
 4) Create a system like Facebook, Byju's, Paytm, Ola etc.
  Business intention is not to open a shop and sit down.  Business means big business in which we live or not but business should keep growing.  Although shopkeepers also call themselves businessmen.  To understand this it is necessary that how big is my turnover, how many people work for me, for how many days will I continue to earn in my absence.  To make a big business in today's date, a new idea and implementation is required.  People like Vijay Shekhar Sharma of Paytm, Sandeep Bansal of Flipkart, Founder of Ola etc. will be in the list of richest people in India in the coming times.  It is a difficult task for everyone to set up such a business.

 The easiest way for ordinary people is through the medium of investment.  Investing means investing in the stock market.  Unfortunately in the middle class this is considered speculative gambling.  Tell someone in your family that we want to make a career in stock market, suddenly the number of critics will increase.  Stock market means it makes sense for people to buy and sell everyday.  Undoubtedly the stock market is a gamble, if we invest money without thinking, without any research, then it is like gambling for sure.  Trading in the stock market is not investing, which means buying a good amount of shares of companies whose business is growing, as the business grows and is meeting our expectations, taking out more shares.  If the shares of a good company are taken after being disciplined, then it cannot be said that we will be able to become a billionaire in our lifetime, but our coming generations will definitely be called.  The magic of compounding will work behind this happening which gives explosive returns over time.
 According to a rule, if the interest received is divided by 72, then the quotient will be obtained, the money will double in that number of years.  For example, if an investment instrument gives 8% compound return, then in 72/8 = 9 years, the money will double here and in 18 years it will be 4 times.  If we talk about the stock market, then this market easily gives compound growth of around 25/26% in the long term.  That is, money doubles here in 3/3.5 years.  If a little ability is developed, then even more returns can be taken.  That is, from here the money can be doubled every less than 3 years.  There are innumerable names in our country like Rakesh Jhunjhunwala, Vijay Kedia, Dolly Khanna, Porinju Veliyath, Ramdev Agarwal, Shankar Sharma, who have become owners of hundreds of thousands of crores by starting their journey from a few thousand.  According to the XL sheet, if the target is to invest Rs 20000 every month and growth of 25% then this amount is 29 crores in 25 years, 89 crores in 30 years, 273 crores in 35 years, 834 crores in 40 years and 54 in 100 years  It can turn into lakh crores.  But we will not implement this because the middle class wants to consume the resources in their lifetime.  Many people insure their bikes, but do not make them think that what is the use of that money which we do not get and even after death.
 The concept of 3B is to move ahead in any field.  One B means believe, second B means behave means to believe in something and behave towards it and third B means to become business.
 So trust the stock market, there is no simpler solution to wealth creation than this.  Get married now means put your savings here and then see how the business stacks up.

 Hope you liked the article very much.  Although it is very big.  Out Many people also complain that if I write too big, then what should I do in small, I can't handle my words.

 questions are welcome

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क्या हम कुछ दे रहे है ? Are we giving something?

 ओशो द्वारा कही गई एक कहानी याद आ रही है जिसमें "देने के सुख" के बारे में बताया गया है। कहानी के अनुसार एक भिखारी रोज की भांति सुबह सुबह भीख मांगने के लिए घर से निकला तो रास्ते में उस राज्य के राजा की सवारी आती दिखी। भिखारी सोचा आज राजा से कुछ ऐसा मांगेंगे कि पीढ़ियों की गरीबी दूर हो जाएगी। अभी इसी ऊहा पोह में सोच ही रहा था कि राजा की बग्घी ठीक उसके सामने रुक गई और राजा उसके सामने आ गए। इससे पहले कि भिखारी कुछ मांगे राजा ने उसके सामने अपनी झोली फैला दी और कहा मेरे राज्य में सुखा पड़ा हुआ है, ज्योत्सियों का कहना है कि आज मुझे भीख मांगकर जो मिले उसे पकाकर भोजन करूं तो राज्य में फिर से बारिश होगी और सुख समृद्धि आयेगी। अब भिखारी के सामने संकट, कहां तो वो अपनी पीढ़ियों की गरीबी दूर करने के बारे में सोच रहा कहां रहा खुद मांगने लगे। भिखारी का छोटा मन कुछ देने की इच्छा नहीं हो रही थी, झोली में हाथ डालता, फिर निकाल लेता। राजा ने कहा सोचो मत जो समझ में आए वही दे दो, मैं लेकर चला जाऊंगा। अंततः भिखारी ने पोटली से केवल 2 चावल के दाने दिया जिसे राजा लेकर चला गया। उस दिन भिखारी दिन कुछ अच्छा गया और अच्छी भीख मिली। घर जब उसकी पत्नी भीख में मिले अनाज को रख रही थी तो उसमें उसे 2 सोने के दाने मिले। पत्नी ने पूछा कि किसने सोने के दाने दिए तो उसने मना किया और सोचा हो न हो यह राजा को दो चावल के दाने देने का परिणाम हो और अब अफसोस कर रहा था कि काश पूरा चावल दे दिया होता तो आज तस्वीर कुछ अलग होती।

तो जो दूसरों को कुछ देता है प्रकृति उसे और अधिक देती है। पैसे का सुख खर्च करने में होता है। एक आदमी का खर्च किसी अन्य की आमदनी भी होती है। वो धन व्यर्थ है जिसे सहेज सहेज कर संचित की जाय, कहीं खर्च न किया जाय, इस तरह के धन जो अपने या परिजनों के काम न आ सका व्यर्थ है। हमारे मित्र संदीप साहनी ऐसे लोगों को एटीएम का चौकीदार कहते है। धन की ही तरह ज्ञान, हुनर, विचार को भी न बांटा जाय तो व्यर्थ हो जाता है। गीतकार मनोज मुंतशिर अपने रास्ते में आने वाले चुनौतियों के संबंध मे एक इंटरव्यू में कहते है कि वो मुंबई में अपनी लेखनी के माध्यम से कुछ देने के लिए आए थे। यदि हमारे पास कुछ ऐसा है जिससे दूसरों का कुछ भला हो सकता है तो हमें दूसरों में उसे बांटना चाहिए। यदि हम ऐसा नहीं करते है तो वह एक तरह का अपराध है।  प्रयोग में नहीं लाया गया ज्ञान, हुनर भी उसी तरह खत्म हो जाती है जैसे कोई मशीन बिना इस्तेमाल मशीन खराब हो जाती है। हमारे आस पास ऐसे बहुत सारे लोग है जिनके ढेर सारे अनुभव आउट ज्ञान है जिससे बहुत से लोगों का भला हो सकता है लेकिन वो नीरस, उत्साहहीन, आराम तलब और मशीनी जीवन व्यतीत करने को अभिशप्त होते है क्योंकि बांटने लायक ज्ञान को वो स्वयं तक सीमित रखते है। यह प्रकृति के नियमों के विपरीत है ऐसे लोगों के जीवन का कद बड़ा नहीं हो पाता है। जिस ज्ञान को व्यवहार में न लाया जाय वह बोझ बन जाता है। जीवन की त्रासदी मृत्यु ही नहीं होती है बल्कि उस ज्ञान और हुनर का क्षरण हो जाना भी होता है जिससे दूसरों को लाभ हो सकता है।

मैं अपनी बात कहूं तो मैं उपर बताए कार्यों को करता रहता हूं। मेरे पास अर्थ, वित्त, निवेश, सेहत, प्रतियोगी परीक्षा आदि के संबंध में रुचि के कारण कुछ अधिक जानकारी रखता हूं जिसे लोगों के मध्य शेयर करता रहता हूं। इस कार्य के लिए कहीं बाहर घूमने की जरूरत नहीं है सोशल मीडिया एक जबरदस्त प्लेटफॉर्म है जहां हमारा काम है लिखना और जिसे जरूरत होती है वो ले लेता है। हमारा काम है करते रहना, लोग आते रहते है।

Reminds me of a story told by Osho about the "pleasure of giving". According to the story, when a beggar came out of the house in the morning to beg as usual, he saw the king's ride on the way. The beggar thought today that he would ask the king for something that the poverty of generations would be removed. Right now I was thinking in this hustle and bustle that the king's wagon stopped right in front of him and the king came in front of him. Before the beggar asked for something, the king spread his bag in front of him and said that there is a drought in my kingdom. The prophet says that if I cook and eat whatever I get after begging, then it will rain again in the state and happiness and prosperity will come. Now the crisis in front of the beggar, where is he thinking about removing the poverty of his generations and started asking himself. The small mind of the beggar was not wanting to give anything, put his hand in the bag, then took it out. The king said, don't think, give only what you understand, I will take it away. Eventually the beggar gave only 2 rice grains from the bundle, which the king took away. That day the beggar had a good day and got a good alms. When his wife was keeping the grains found in begging at home, she found 2 gold grains in it. The wife asked who gave the gold grains, then he refused and thought that it may not be the result of giving two rice grains to the king and now regretting that if I had given the whole rice, today the picture would have been different.
So the one who gives something to others, nature gives more to him. The pleasure of money lies in spending it. One man's expense is another's income. That money is useless which should be saved and stored, it should not be spent anywhere, such money which could not be useful for oneself or family members, is useless. My friend Sandeep Sahni calls such people the watchman of the ATM. Like money, if knowledge, skills and ideas are not shared, then it becomes useless. Lyricist Manoj Muntashir says in an interview about the challenges that come in his way that he came to Mumbai to give something through his writing. If we have something that can do some good to others, then we should share it with others. If we don't do this, then that is a kind of crime. Unused knowledge and skills are lost in the same way as a machine without use gets damaged. There are many such people around us who have a lot of experience out knowledge, which can benefit many people but they are doomed to lead a monotonous, restless, restless and mechanical life because they limit themselves to share the knowledge. Keeps. It is contrary to the laws of nature, the stature of such people's life does not grow. Knowledge that is not put into practice becomes a burden. The tragedy of life is not only death, but also the loss of knowledge and skills that can benefit others.
If I tell my point, I keep on doing the above mentioned tasks. I have some more information due to interest in relation to economics, finance, investment, health, competitive exam etc., which I keep sharing among the people. There is no need to go anywhere for this work, social media is a tremendous platform where our job is to write and take what is needed. Our work is to keep doing it, people keep coming.

रविवार, 24 अक्टूबर 2021

एसेट खरीदना है न कि लायबिलिटी Buying an asset and not a liability

 आज हुई एक बातचीत ने मेरा ध्यान आकर्षित किया जिसमें एक लोग अपने कार को बेचने की बात कह रहे है तो दूसरे व्यक्ति द्वारा कंजूसी से दूर रहने की बात कही जा रही है। दो टिप्पणियों का स्क्रीन शॉट बताने के किए पर्याप्त है।

ड्यूशनबेरी एक अर्थशास्त्री ने एक प्रदर्शनकारी प्रभाव का उल्लेख किया है जिसमें यह बताते है मध्यम वर्ग बहुत सारी चीजों को इसलिए नहीं खरीदते है कि उसकी जरूरत होती है, बल्कि इसलिए खरीदते है कि कोई आस पास दूसरा लिया होता है। इसके कारण उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर बनी रहती है। मध्यम वर्ग को कमजोर बनाने वाला एक वस्तु है कार। हम सभी कार लेकर अगले 5/7 सालों तक अपने को ईएमआई के चंगुल में फंसा लेते है। पेट्रोल इतना खर्च होता है कि रोज चलते नहीं है इसके लिए बाइक या स्कूटी ही पर्याप्त होती है। बेवजह का अपने कमाई का एक बड़ा हिस्सा बैंक को दे रहे होते है।
कुछ वर्ष पहले मैं एकदम सुबह सुबह 5/6 बजे के आस पास रोज कुछ सेकेंड के लिए कार स्टार्ट होने की आवाज सुनता था। कभी ध्यान नहीं दिया कि कौन करता है। कुछ दिनों बाद दोपहर को उधर से गुजर रहा है तो एक लोग को देखा कार को बोनट खोलकर कुछ करते हुए, जिज्ञासा में पूछ लिया तो पता चला कि कार की रखे रखे बैटरी खराब हो गई है, उसी को चार्ज कराने जा रहे है। पिछले 5 सालों से कार वो राखी हुई थी चली मात्र 1200 किलोमीटर, हमेशा वो खड़ी ही रहती थी। वो सिर्फ इस संतुष्टि के लिए ईएमआई जमा कर रहे थे कि कभी गांव जाना होगा तो इससे जाएंगे। साल में मुश्किल से 3 या 4 बार जाना होता है उसके लिए सिर्फ कार रखना एक बेहद महंगा सौदा है। आज की डेट में ओला, उबर और ट्रेवल्स की सेवाएं इतनी सहज उपलब्ध है कि उनकी सेवाएं लेना सस्ता सौदा रहेगा। यदि कार से प्रतिदिन या आए दिन नहीं चलना है तो उसको रखना या खरीदना एक गलत निर्णय है। किसी ने बहुत बढ़िया बात कही है कि यदि हम उन चीजों को खरीदते है, जिसकी जरूरत नहीं है तो एक दिन जरूरी की चीजों को बेचनी पड़ सकती है।

दो चीजे होती है एक लायबिलिटी और दूसरी संपत्ति। यदि कोई वस्तु हमारे जेब से पैसे लेकर जाए तो वो लायबिलिटी है जैसे कार ईएमआई पर लेना, कमान होम लोन से लेना, ये सभी लायबिल्टी है और फाइनेंस की भाषा में निगेटिव माना जाता है। दूसरी तरफ जो हमारे जेब में पैसे लाए तो वो एसेट यानी संपत्ति है। जैसे कार हम लेकर किराए पर चलाए तो वो जेब में पैसे लायेगा। घर लेकर किराए पर दे। मोबाइल फोन में व्हाट्सएप, फेसबुक इस्तेमाल करते है तो लायबिलिटी है। वहीं इससे स्टॉक ट्रेडिंग करते हैं, यू ट्यूब पर वीडियो बनाकर पोस्ट करते है तो वो एसेट है जो फाइनेंस की भाषा में पॉजिटिव होता है।
तो हमें जीवन में एसेट खरीदना है न कि लायबिलिटी। 

A conversation I had today caught my attention in which one person is talking about selling his car and another person is being told to stay away from skimping. A screen shot of two comments is enough to explain.
Dushanberry, an economist, has noted a demonstrative effect in which the middle class buys many things not because they are needed, but because one is nearby. Due to this their financial condition remains weak. One thing that weakens the middle class is the car. We all take a car and get caught in the clutches of EMI for the next 5/7 years. Petrol is spent so much that bike or scooty is enough for it not to run everyday. Unnecessarily, they are giving a large part of their earnings to the bank.
A few years ago, I used to hear the sound of the car starting for a few seconds every day around 5/6 in the morning. Never cared who did. A few days later, when he was passing by in the afternoon, he saw a person doing something by opening the bonnet of the car, asked in curiosity, then came to know that the battery kept in the car got damaged, he is going to charge it. For the last 5 years the car was kept, it lasted only 1200 kms, always it used to stand still. He was depositing the EMI only for the satisfaction that if he ever had to go to the village, he would go through it. Only having a car is a very expensive deal for which you have to go hardly 3 or 4 times in a year. The services of Ola, Uber and Travels are so easily available in today's date that taking their services will be a cheap deal. If the car is not to be driven every day or day, then keeping or buying it is a wrong decision. Someone has said very well that if we buy those things which are not needed, then one day the essential things may have to be sold.
There are two things one is liability and the other is asset. If any item takes money out of our pocket, then it is a liability such as taking it on car EMI, taking it from home loan, all these are liabilities and are considered negative in the language of finance. On the other hand, what brings money in our pocket is an asset. Like if we take a car on rent, it will bring money in the pocket. Take home and rent it. There is a liability if you use WhatsApp, Facebook in mobile phone. At the same time, doing stock trading, making and posting videos on YouTube, then it is an asset which is positive in the language of finance.
So in life we ​​have to buy assets and not liabilities.
Hope you liked the article. 

रविवार, 17 अक्टूबर 2021

और ज्यादा प्राप्त करने का सूत्र



और ज्यादा मतलब हमारे पास जो कुछ सुख सुविधाएं, संसाधन है उसमें वृद्धि करना। व्यक्ति प्रत्येक क्षेत्र में उत्तरोत्तर उन्नति करना चाहता है लेकिन ऐसा हो नहीं पाता, ज्यादातर मामलों में या तो वह स्थिर होता है या फिर पीछे जा रहा होता है। पैसा कमाता तो है लेकिन बचा नहीं पाता, अपनी कमाई बढ़ाना चाहता है लेकिन अपने कृत्यों से जो भी कमाई होती है, उसी में आटा गीला किए रहता है। सेहत भी सही नहीं रहती। 
  उसके पीछे जो सबसे बड़ा कारण होता है अपने दृष्टि का, आखिर वो कहां है अभावों पर है या जो अपने पास है, उसके ऊपर। 
   कहा जाता है कि अपने जीवन में अभाव पर ध्यान मत दो। जो हमें  मिला है, उसे देखना है, उसके लिए कृतज्ञता का भाव रखना है। तब, समृद्धि बढ़ती है। रांडा बर्न ने अपनी पुस्तक जादू में इसका रहस्योद्घाटन करती है, वो लिखती है 
"जिसके भी पास है, उसे अधिक दिया जाएगा और वह समृद्ध होगा। जिसके पास नहीं है, उसके पास जो है वह सब भी उससे ले लिया जाएगा"
  इसे बार बार पढ़िए और समझने की कोशिश कीजिए। हालांकि उपर वाला वाक्य बड़ा अन्यायपूर्ण लगता है। सुखी और अधिक सुखी होगा, अमीर आदमी और अधिक अमीर बनेगा। गरीब लोग और ज्यादा गरीब बनेंगे। पूरे वाक्य समूह में एक रहस्य है, एक पहेली है, जब हम इसे सुलझा देते है और इसका सही अर्थ जान लेते है तो हमारे सामने संभावनाओं का एक नया संसार खुलने लगेगा। 
वो पहेली है " कृतज्ञता"
अब उपर वाले वाक्य को पढ़ते है 

"जिसके भी पास कृतज्ञता है, उसे अधिक दिया जाएगा और वह समृद्ध होगा। जिसके पास कृतज्ञता नहीं है, उसके पास जो है वह सब भी उससे ले लिया जाएगा"
कृतज्ञता का आशय क्या है ? इसका आशय है जो कुछ भी हमारे पास है उसके लिए सबसे पहले दाता के प्रति कृतज्ञ होना पड़ेगा। जैसे ईश्वर के प्रति कृतज्ञता कि हे ईश्वर मुझे 10000 रूपये की नौकरी मिली है, इसके लिए हम आपके कृतज्ञ है, मुझे 20 हजार की नौकरी दिला दो तो ईश्वर जरूर उसे फलीभूत कराता है। इसके बजाय यदि 10 हजार को ही कोसना शुरू कर दे, तो क्या ज्यादा पैसा मिलेगा कभी, नामुमकिन है। 
इसे एक उदाहरण के माध्यम से समझने का प्रयास करते है। मान लीजिए 5000 रूपये की जरूरत है और हम अपने पिता से मांगते है और किसी कारण वश मात्र 2500 रू देते है। हमारे पास 2 विकल्प है या तो हम न लेवे और वापस कर दे और गुस्सा करे कि मांगा है 5000 और आप दे रहे हो ढाई हजार, नहीं चाहिए। इस तरह से जो मिलना था, वो भी नहीं मिलेगा। 
दूसरा विकल्प यह है कि हम उनसे पिताजी बहुत बहुत धन्यवाद जो आपने हमें 2500 दिया है यदि 2500 और मिल जाते तो कृपा होती। फर्क देखिए वही पिता किसी न किसी तरीके से पैसे का प्रबंध करने को कोशिश करेगा। 
ठीक इसी तरह नौकरी के उदाहरण में भी लिया जाय और नियोक्ता से कहा जाय कि बहुत बहुत धन्यवाद जो आपने हमें 10 हजार की नौकरी दिया, हमें और पैसे मिल जाते तो कृपा होती। वो नियोक्ता आशावादी रुख अपनाते हुए जरूर कहेगा, अभी काम करो, एक वक्त बाद जरूर बढ़ा देंगे। 
     चूंकि रुपए पैसे का उदाहरण आसानी से समझ में आ जाता है, इसलिए मैने प्रयोग किए। इस फॉर्मूला को किसी भी क्षेत्र में अपनाइए ज्यादातर मामलों में सही साबित होगी।

उम्मीद है लेख पसंद आया होगा

formula to get more

 And more it means to increase whatever comfort facilities, resources we have.  One wants to progress progressively in each field but this does not happen, in most cases either he is stagnant or is going backwards.  He earns money but is not able to save, wants to increase his earnings, but whatever he earns from his actions, he keeps the flour wet in the same.  Health is also not good.
   The biggest reason behind that is his vision, after all, where is he on the shortcomings or on what he has.
    It is said that do not focus on the lack in your life.  We have to see what we have got, have a feeling of gratitude for that.  Then, prosperity increases.  Randa Byrne reveals this in her book Magic, she writes
 "Whoever has, he will be given more and he will prosper. He who does not have, all that he has will also be taken away from him."
   Read it again and again and try to understand.  However, the above sentence seems very unfair.  Happy will be more happy, rich man will become richer.  Poor people will become poorer.  The whole sentence set is a mystery, a riddle, when we solve it and know its true meaning, then a new world of possibilities will open before us.
 That riddle is "Gratitude"
 Now read the above sentence

 "Whoever has gratitude, more will be given and he will prosper. He who does not have gratitude, all that he has will also be taken away from him."
 What is the meaning of gratitude?  It means that for whatever we have, we have to be grateful to the giver first.  Just as we are grateful to God that I have got a job of Rs 10000, O God, for this we are grateful to you, if you give me a job of 20 thousand, then God definitely makes it fruitful.  Instead, if you start cursing only 10 thousand, then will you ever get more money, it is impossible.
 Let us try to understand it through an example.  Suppose 5000 rupees are needed and we ask our father and for some reason give only 2500 rupees.  We have 2 options either we should not take it and return it and get angry that we have asked for 5000 and you are giving two and a half thousand, don't want.  In this way what was meant to be received, he will not get.
 The second option is that we thank him very much to his father, which you have given us 2500, if we had got 2500 more, then it would have been grace.  See the difference, the same father will try to manage money in some way or the other.
 Similarly, take the example of a job and tell the employer that thank you very much for giving us a job of 10 thousand, if we would have got more money, it would have been a blessing.  That employer, adopting an optimistic attitude, will definitely say, work now, you will definitely increase it after a while.
      Since the example of rupee money is easily understood, I did experiments.  Apply this formula in any field will prove to be correct in most of the cases.

 hope you liked the article

शनिवार, 16 अक्टूबर 2021

सबसे बड़ा सुख निरोगी काया

सबसे बड़ा सुख निरोगी काया


greatest health


 Staying healthy is not a difficult task, it is very easy.  It just takes willpower.  Health planning should be done in the same way as financial planning is.  Just like financial planning removes many problems, health planning also does not allow diseases to come near.

 Good health consists of 4 things


 1) Balance Diet

 Eating well means that food which is liked by the body, not the tongue.  And the body likes the right balance of proteins, fats, carbohydrates, vitamins and minerals.  Its role in staying healthy is more than 80%.


 2) Light exercise

 The structure of the body is such that it has to be kept active.  Earlier there was agricultural work, the body used to remain active, now work is being done sitting down, walking has reduced, machines are being used more, due to which now the body remains less active.  Therefore, for this, you have to take out a separate time.  Taking time aside doesn't mean joining gym, dumb nephew.  Even half an hour passes in a day, then the body gets its need.


 3) Adequate sleep and rest

  The body's repair work takes place while sleeping and resting.  According to science, everyone must take at least 8 hours of sound sleep.


 4) Positive thinking

 It also has a big role.  According to science, positive thoughts make good hormones in the body whereas negative thoughts make bad hormones.  In the state of stress, the dangerous hormone cortisol is formed which causes damage in many ways.


 Hope you liked the article.  But the problem is that the focus of all of us is on number 2 the most, while the maximum focus should be on number 1.  One, we do not take the right food and drink, even what we take from above is not of good quality.  Milk and vegetables come by injection of oxytocin, chicken is being prepared quickly by giving antibiotics in poultry farm, vegetables and fruits are being preserved for a long time by the use of various chemicals, pollution also harms.  So the most attention we have to pay attention to our mine.

सेहतमंद रहना कोई कठिन कार्य नहीं, बहुत आसान है। बस इच्छाशक्ति की जरूरत होती है। जैसे फाइनेंशियल प्लानिंग होती है ठीक उसी तरह हेल्थ प्लानिंग करनी चाहिए। जैसे फाइनेंशियल प्लानिंग बहुत सारे परेशानियों को दूर करता है तो हेल्थ प्लानिंग भी रोगों को पास में आने नहीं देता है। 

अच्छा सेहत 4 चीजों से मिलकर बनता है


1) बैलेंस डाइट 

अच्छा खान पान मतलब वो भोजन जो जीभ को नहीं बल्कि, जो शरीर को पसंद आते है। और शरीर को पसंद आता है प्रोटीन, फैट, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन मिनिरल का सही संतुलन। सेहतमंद रहने में इसकी भूमिका 80% से भी अधिक होती है।


2) हल्का फुल्का व्यायाम

शरीर को बनावट कुछ ऐसी होती है कि इसे क्रियाशील रखना पड़ता है। पहले कृषि कार्य होता था तो शरीर क्रियाशील रहता था, अब बैठकर काम हो रहा है, पैदल चलना कम हो गया, मशीन ज्यादा प्रयोग हो रहा है जिसके कारण अब शरीर कम सक्रिय रहता है। इसलिए इसके लिए अलग से समय निकालना पड़ता है। अलग से समय निकालने का मतलब यह नहीं है कि जिम ज्वाइन करे, डंबल भांजे। दिन भर में आधा घंटा भी समय निकल जाता है तो शरीर को जरूरत पूरी हो जाती है। 


3) पर्याप्त नींद और आराम

 शरीर के मरम्मत का कार्य सोते और आराम करते समय होता है। विज्ञान के अनुसार सभी को कम से कम 8 घंटे की अच्छी नींद अवश्य लेनी चाहिए।


4) सकारात्मक सोच

इसकी भी बड़ी भूमिका होती है।  विज्ञान के अनुसार सकारात्मक होने पर शरीर में अच्छे हार्मोन बनते है जबकि नकारात्मक विचार बैड हार्मोन बनाते हैं। तनाव की अवस्था में खतरनाक कोर्टिसोल हार्मोन बनता है जो कई तरह से नुकसान करता है।  


उम्मीद है लेख आपको पसंद आया होगा। लेकिन दिक्कत यह है कि हम सभी का फोकस सबसे अधिक  नंबर 2 पर होता है जबकि सबसे अधिक फोकस नंबर 1 पर होना चाहिए। एक तो हम सही खान पान नहीं लेते है, उपर से जो लेते है वो भी गुणवत्ता अच्छी नहीं होती। दूध और सब्जियां ऑक्सिटोसीन के इंजेक्शन से आता है, चिकन पोल्ट्री फार्म में एंटीबायोटिक देकर जल्दी तैयार किया जा रहा है, सब्जियां और फल विभिन्न तरह के रसायनों के प्रयोग से लंबे समय तक सुरक्षित रखी जा रही है, प्रदूषण भी नुकसान करता है। तो सबसे अधिक ध्यान हमें अपने खान पर ध्यान देना है। 

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मंगलवार, 28 सितंबर 2021

अपने ईंधन यानी खान पान को ध्यान दीजिए

जैसे गाड़ी का ईंधन पेट्रोल/डीजल होता है वैसे ही शरीर का ईंधन है हमारा खान पान। जितना अधिक डीजल/पेट्रोल शुद्ध होता है हमारी गाड़ी भी उतनी ही बढ़िया स्थिति में होती है। मिलावट का तेल इस्तेमाल होगा तो गाड़ी में बार बार खराबी होती है।
अब जरा अपने ईंधन यानी खान पान को ध्यान दे तो खान पान दूषित हो चुका है। खाद्य पदार्थों के मिलावट, पेस्टिसाइड और कीटनाशक प्रयोग सामान्य बात हो गई है जो किसी न किसी तरीके से हमारे शरीर के सेहत को खराब कर रहा है। खान पान से शरीर को प्रोटीन, विटामिन, मिनिरल, फाइबर, ओमेगा 3 आदि मिल ही नहीं पा रहा है जिसकी कमी के कारण लाइफ स्टाइल रोगों मोटापा, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, फैटी लीवर, कैंसर, हृदय रोग जैसे रोग होने आम बात हो गए है। सभी में न्यूट्रिशन गैप हो गया है जिसके कारण फिटनेस भी प्रभावित होती है। सामान्य बात होने पर भी तबियत खराब हो जाती है।
लोगों से जब भी सेहत के संबंध में बात कीजिए वो हमेशा योग, व्यायाम, टहलना, दौड़ना, साइकल चलाने करना बताते है, वो जानते ही नहीं है कि भाग दौड़ की भूमिका तो मात्र 20% ही होती है जबकि खान पान की भूमिका 80% है जिस पर कोई ध्यान ही नहीं देता।

अपने ईंधन पर ध्यान दीजिए, सब सुधार हो जायेगा।
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सोमवार, 20 सितंबर 2021

घर में प्रयोग होने वाली चीनी

घर में प्रयोग होने वाला चीनी के बारे में जानते है ----

हमारे किचन में जितनी सेहत के दुश्मन मिलते है उसमें एक बड़ा नाम है चीनी। यह चीनी शिवाय नुकसान के कुछ नहीं करता। गन्ने से बनाते समय इसकी सभी पोषक वैल्यू समाप्त हो जाती है और इसके सेवन से मोटापा, डायबिटीज, हृदय आदि गंभीर किस्म के स्टाइल रोग उत्पन्न होते है। चीनी एक सिंपल कार्ब होता है जो खाते ही ब्लड में तत्काल घुलकर ग्लूकोज का लेवल बढ़ाता है, इंस्टेंट एनर्जी देता है जिससे दिमाग को अच्छा लगता है। हमारे शरीर को जितनी मात्रा में मिठास की जरूरत होती है वो हमें रोटी, चावल, सब्जी जैसे खाद्य पदार्थों से मिल जाते है इसलिए इस सफेद चीनी रूपी सेहत के दुश्मन को जितनी जल्दी रसोई घर से बाहर कर दिया जाय, श्रेयस्कर होगा। इसके जगह पर गुड, खजूर, किशमिश, मिसरी आदि इस्तेमाल की जाय तो हम लंबे समय तक सेहतमंद रह सकते है।

बहरहाल आज उसी दुश्मन रूपी चीनी के बारे में कुछ जानते है।आमतौर पर घर में सफेद चीनी का ही इस्तेमाल किया जाता है. पर क्या आप यह जानते हैं कि कौन सी चीनी है आपके लिए बेस्ट? 

मार्केट में कुल  चीनी तीन तरह की पाई जाती है.
 सफेद चीनी (White Sugar),
 ब्राउन चीनी (Brown Sugar)
और 
सल्फर फ्री चीनी (Sulphur Free Sugar).

सफेद चीनी-
इसमें कैलोरी बहुत ज्यादा पाई जाती है. इसे खाने से शरीर को नुकसान पहुंच सकता है. सफेद चीनी और भी महीन बनाने के लिए इसमें सल्फर मिलाया जाता है जिससे सांस की दिक्कत पैदा हो सकती है.

ब्राउन शुगर (चीनी)
इसमें सफेद चीनी की तुलना में कम कैलोरी होती है. इसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम और आयरन होता है, पर शरीर को जितने आयरन की जरूरत होती है उससे कम मिलता है।

सल्फर फ्री चीनी -
अंत में सल्फर फ्री चीनी की बात करें तो इसमें सफेद और ब्राउन चीनी की तुलना में कैलोरी काफी कम होती है. इसमें सल्फर बिल्कुल भी नहीं होता है और इसी के चलते यह सेहत के लिए ऊपर के दोनो की तुलना में कम खतरनाक है.

#stayhealthystayfit #weightlosschellenge #Fitness #पहला_सुख_निरोगी_काया 
#HealthyandHappyLife

बुधवार, 11 अगस्त 2021

पैकेट बंद आटा की हकीकत

ताजा ताजा खाद्य पदार्थों का उपयोग करना चाहिए। सभी खाद्य पदार्थों के शुद्ध रहने की एक समयावधि होती है, जो उसके पैकेट पर लिखा रहता है। उस समय के व्यतीत होने के बाद वो खराब होने लगता है और उसमें कीड़े पड़ जाते है। कुछ खाद्य पदार्थों को केमिकल मिलाकर उसके खराब होने की प्रोसेस को धीमा कर दिया जाता है। उदाहरण के लिए आटा को ही ले तो बहुत कुछ उसमें मिलावट होती है जो नुकसान करती है। 

एक प्रयोग करके देखें गेहूं का आटा पिसवा कर उसे 2 महीने स्टोर करने का प्रयास करें,आटे में कीड़े पड़ जाना स्वाभाविक हैं,आप आटा स्टोर नहीं कर पाएंगे। 

फिर ये बड़े बड़े ब्रांड कैसे आटा स्टोर कर पा रहे हैं? यह सोचने वाली बात है। 

एक केमिकल है- बेंजोयलपर ऑक्साइड, जिसे ' फ्लौर इम्प्रूवर ' भी कहा जाता है। जिसे अधिकतम 4 मिलीग्राम तक प्रयोग किया जा सकता है, लेकिन आटा बनाने वाली फर्में 400 मिलीग्राम तक ठोक देती हैं। कारण क्या है? आटा खराब होने से लम्बे समय तक बचा रहे। बेशक़ उपभोक्ता की किडनी का बैंड बज जाए। 

कोशिश कीजिये खुद सीधे गेहूं खरीदकर अपना आटा पिसवाकर खाएं।

नियमानुसार आटे का समय..
ठंड के दिनों में    30 दिन
गरमी के दिनोंमें 20 दिन
बारिस के दिनोंमें 15 दिन का बताया गया है। 

ताजा खाइये स्वस्थ रहिये...

वजन कम करने के लिए संपर्क कीजिए

मोटापा या अधिक वजन आज की तिथि में एक बड़ी महामारी के रूप में फैलती जा रही है। खराब खान पान और गलत लाइफ स्टाइल के कारण हर दूसरे तीसरे आदमी का बीएमआई इंडेक्स खतरे के संकेत के पास है। संलग्न पेपर कटिंग में खतरनाक स्तर 32 के बीएमआई की चर्चा की गई है। 

बीएमआई क्या है
इसका पूरा नाम है बॉडी मास इंडेक्स जो हमारे शरीर में ऊंचाई और वजन के अनुसार उपलब्ध फैट की मात्रा को दर्शाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार ऊंचाई का वर्ग करके उसे वजन से विभाजित किया जाता है।

 बीएमआई =वजन (किलोग्राम)/लंबाई ² (मीटर)

अब मैं अपना उदाहरण लेकर देखता हूं
वजन = 80 किलोग्राम
लंबाई = 184 सेंटीमीटर = 1.84 मीटर
बीएमआई = 80 किलोग्राम/(1.84 × 1.84) मीटर
= 80किलोग्रॅम/3.38 मीटर
=23.66

बीएमआई की कितनी श्रेणी होती है
1) यदि BMI की माप 18 से कम आए, तो वजन सामान्य से कम है।
2) यदि BMI की माप 18.5 से 24.9 के बीच आए, तो आपका वजन सामान्य है।
3) यदि BMI की माप 25 से 29 के बीच आए, तो आपका वजन ज्यादा है। ऐसे में सांस फूलना, अधिक पसीना आना, सीढी चढ़ने में तकलीफ, फैटी लिवर जैसी प्रॉब्लम हो सकती हैं।
4) यदि BMI की माप 29.9 से ज्यादा आए, तो आप मोटापे के शिकार हैं। इसके कारण हार्ट डिज़ीज़, कैंसर, डायबिटीज़ की प्रॉब्लम हो सकती है। ये खतरनाक स्तर होता है और शीघ्र मोटापे से मुक्ति के लिए प्रयास किए जाने चाहिए। 

आप भी अपना बीएमआई पता कीजिए और कमेंट में बताए कि किस श्रेणी की है। पेपर कटिंग में आपरेशन विधि से फैट निकलवाने की बात कही जा रही है जिसके अलग से नुकसान होता है। पेपर कटिंग में बैरिएट्रिक सर्जरी का जिक्र किया गया है जिसमें सर्जरी से पेट के आकार को छोटा कर दिया जाता है, जिसमें पाचनतंत्र भी शामिल रहता है. इस सर्जरी के बाद भूख कम लगने लगती है जिससे लोग भोजन का कम मात्रा में उपयोग करते हैं, जिससे वजन धीरे-धीरे कम होने लगता है। ऐसा करने के कई सारे साइड-इफेक्ट्स हैं जिनमें संक्रमण, अस्थि विकृति, रक्तल्पता, डायरिया, पोषण में कमी, पथरी, हार्निया, महिलाओं के लिए गर्भावस्था में परेशानी और समय से पहले बच्चे का जन्म जैसी कई समस्याएं जन्म लेती हैं।

मैने कैसे वजन को कम किया

मेरा भी एक समय यानी 2 साल से पहले वजन 100 किलो के उपर था और बीएमआई 29 से उपर था जिसके कारण स्लिप एपनिया, सायटिका, सांस फूलना, कमर दर्द जैसी समस्याएं हो रही थी। फिर मैने हेल्थ और न्यूट्रिशन क्लब ज्वाइन किया जहां से खान पान, नॉर्मल एक्सरसाइज, पानी पीना और लाइफ स्टाइल में बदलाव किया जिसे पहले महीने में 5 किलों और अब 20 किलो से अधिक  का वेट लॉस  और कमर से 5 इंच से अधिक का इंच लॉस करके सेहत के आदर्श मानकों पर रह रहा हूं। कपड़ों की साइज xxl से xl पर आ गाया और पैंट 40 इंच से 36 पर आ गया है। अब मैं ऐसा हूं और ऐसा ही रहूंगा क्योंकि क्लब के माध्यम से सेहत के संबंध में इतनी जानकारी हो गई है कि जब चाहे वजन बढ़ा ले और जब चाहे घटा ले। 

मैं Health, Wealth and Happiness रूपी तीनों मुहिम  पर समान रूप से सक्रिय रहता हूं और जो व्यक्ति चाहे हमारे इस मुहिम का हिस्सा बन सकता है। मोबाइल नंबर 9889307067 और 7272957000 पर संपर्क कीजिए।

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सोमवार, 9 अगस्त 2021

रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी कैसे बढ़ाएं

वर्तमान कोरोना संकट काल में प्रत्येक जगह इम्यूनिटी अर्थात रोग प्रतिरोधक क्षमता की चर्चा हो रही है। अचानक से इम्यूनिटी की खोज करना मतलब प्यास लगने पर कुएं खोदने जैसा है। यह कोई वस्तु नहीं है जिसे किसी दुकान से पैसे देकर खरीद कर एक दिन में तैयार किया जा सके। यह एक सतत की जाने वाली प्रक्रिया है।  
इम्युनिटी 2 प्रकार की होती है
एक जन्म से मिलता है और दूसरे को समय के साथ बनाना पड़ता है। 
1) बच्चा जब मां के गर्भ में रहता है, तभी से इम्यूनिटी बनने लगती है। इसे हम जेनेटिक या मेटरनल इम्यूनिटी कहते हैं । जब बच्चा पैदा होता है तो मां के दूध से इम्यूनिटी मिलती है। इसके बाद सही खानपान और रुटीन के माध्यम से यह और मजबूत होता है। जैसे ही हमारा शरीर संक्रमित होता है हमारे शरीर के अंदर इम्यूनिटी वाले मौजूद रक्षा सैनिक बचाव करने उतर जाते है। ये सभी के अंदर स्व निर्मित होता है लेकिन दिक्कत तब होती है जब बाहर से कोई बड़ा आक्रमण होता है जिससे ये रक्षा सैनिक बचाव करने में सक्षम नहीं होते है तो उससे रक्षा के लिए बाहर से इम्यूनिटी लेनी पड़ती है।

2) जब बच्चे का वैक्सिनेशन होता है तो जिस बीमारी से बचाव का टीका लगा है , उसके प्रति इम्यूनिटी विकसित हो जाती है। अलग अलग रोगों के लिए अलग अलग टिके विकसित होते है। चूंकि कोरोना पहले नहीं था, इसलिए इसका टीका भी नहीं था जो बनन  के बाद टीकाकरण की शुरुआत हुई। अभी भी इसका टिका पूर्ण रक्षा प्रदान नहीं कर पाया है।
बहरहाल हमारी इम्यूनिटी हमारी सबसे बड़ी रक्षा सैनिक है ये जितना स्ट्रॉन्ग होता है हमें रोगों के दुष्प्रभाव से बचने में सक्षम होते है। जिनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है वो रोगों से शीघ्र प्रभावित होते है।  जिन लोगों ने अपने खान पान पर ध्यान नहीं देते है, उन लोगों के लिए इम्यूनिटी एक बड़ा मुद्दा है। यहां हमें एक चीज और नोट करना है कि कोराना कोई आखिरी वायरस नहीं है, इसके बाद भी कोई वायरस बगैर किसी सूचना के आता रहेगा इसलिए जरूरी है कि इम्यूनिटी पर काम किया जाय। 
कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता का कारण और समस्या का निवारण

इम्यूनिटी में सबसे अहम रोल होता है हमारे खान पान का, यदि हम पोषक पदार्थों से रहित खाद्य पदार्थ खाते है तो शरीर के लिए आवश्यक विटामिन, मिनिरल, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फैट आदि का संतुलन बिगड़ जाता है। इसके अतिरिक्त एक्सरसाइज न करना, पर्याप्त मात्रा में पानी न पीना, जनक फूड खाना आदि भी इम्यूनिटी को कमजोर करता है।  बेहतर तो ये होता है कि हम अपने खान पान में फल, सब्जियों, अनाजों, ड्राई फूट्स को सही से ले। लेकिन खाद्य पदार्थ वर्तमान में मिलावट और दूषित भी आ रहे है इसलिए इसके साथ डॉक्टर्स/डाइटीशियन की मदद से फूड सप्लीमेंट ले सकते है। इसके अतिरिक्त एक और बड़ी अजीब दशा है अपने देश की, देश में एक बड़ी संख्या में  लोग सिरदर्द, फ्लू, वायरल, खांसी , दर्द आदि  के लिए बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक दवाएं ले लेते हैं, खुद से दवा लेने का  असर एक या दो दिन में नहीं, बल्कि तीन से चार साल के अंदर नजर आता है। दवाओं के अधिक इस्तेमाल के बाद शरीर में बैक्टीरिया के खिलाफ काम करने वाला  इम्यून सिस्टम खराब  हो जाते हैं और उन पर दवाओं का असर लगभग खत्म हो जाता है। ऐसे में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने से आसानी से कैंसर, टीबी और एड्स जैसी गंभीर बीमारियों का जन्म हो रहा  है। हम लोगो को सतर्क हो जाना चाहिए और बगैर डाक्टर के सलाह से दवा  कम से कम एंटी बायोटिक तो लेनी ही नहीं चाहिए . इस मामले में चित्र से मदद मिल सकती है।
इस संबंध में विशेष जानकारी के लिए मेरे नंबर 9889307067 और 7272957000 पर कॉन्टेक्ट किया जा सकता है। हमारे यहां खान पान और लाइफ स्टाइल में बदलाव करके सेहतमंद रहना सिखाया जाता है। 
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रविवार, 27 जून 2021

यूनाइटेड किंगडम, ब्रिटेन और इंग्लैण्ड में अंतर

हम सभी पिछले कई सालो से एक देश के सन्दर्भ में यूनाइटेड किंगडम, ब्रिटेन और इंग्लैण्ड नाम प्रयोग होते सुनते आये है। इधर पिछले कुछ हफ़्तों से बहुत ज्यादा सुनने को मिल रहा है लेकिन इन सबमे क्या अंतर है या क्या ये तीनो नाम एक ही देश के नाम है, बहुत कम लोगो को इसका पता होगा। आईये इस बारे में संक्षेप में जानकारी बढ़ाते है। 

युनाइटेड किंग्डम एक देश नहीं है बल्कि 4 देशों का संगठन है। ये देश हैं- इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, वेल्स और नॉर्थन आयरलैंड। 

ग्रेट ब्रिटेन वास्तव में कोई राजनीतिक नाम नहीं है। यह एक भौगोलिक नामकरण जैसा है। यह युनाइटेड किंग्डम के उस भूभाग से संबंधित है जिसमें इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स का हिस्सा आता है। वास्तव में, युनाइटेड किंग्डम एक शॉर्ट वर्जन है जिसका पूरा नाम 'द युनाइटेड किंग्डम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन एंड नॉर्दर्न आयरलैंड' है।

अब इंग्लैण्ड तो क्लियर हो ही गया होगा।

गुरुवार, 17 जून 2021

Horse Blinders क्या होता है

हम सभी ने अक्सर ऐसे घोड़ों को देखा होगा जो उनकी आंखों को ढक दिया गया रहता है। क्या कभी हमने जानने का प्रयास किया है कि यह क्यों लगाया जाता है और इसका महत्व क्या है। 
  दरअसल घोड़े की आंखों का दृष्टि क्षेत्र 180° होता है जिससे तांगे में चलते हुए या घुड़दौड़ आदि में उसका ध्यान इधर उधर भटक जाता है और वो बिदक जाता है। इस समस्या से समाधान के लिए घोड़े के दोनों आंखों के बाहर की तरफ़ चमड़े की पट्टी लगाने की शुरुआत हुई जिसे Horse Blinders कहा जाता है।  Horse Blinder लगाने के बाद घोड़ा का दृष्टि क्षेत्र 30° तक ही सीमित हो जाता है और इससे वो सिर्फ सामने अपना ध्यान केंद्रित रखता है।

शनिवार, 12 जून 2021

बीजू और कलमी आम

आप सोचेंगे कि इस आम के चित्र क्या ख़ास बात है,  संख्या में कुल 8 है सभी पके है हाँ इनके आकार में जरूर अंतर है। बहुत कुछ है इस चित्र में, आईये कुछ जानकारी बढ़ाते है----

वस्तुतः आम के पैदा किये जाने के तरीके के आधार पर आम दो प्रकार का होता है प्रथम बीजू जिसे गुठली से पेड़ लगाया जाता है. ये पेड़ काफी विशाल होते है और फल काफी आकार में छोटे होने के साथ पैदावार भी कम होती है। इसके फलो को गुणवत्ता उच्च कोटि की होती है इसके अंदर रोगों से लड़ने वाले कई तत्व पाये जाते है। 
द्वितीय किस्म है कलमी का जिसमे किसी पेड़ की डाल को थोडा छीलकर मीट्टी से किसी तरीके से एक तय समय के लिए ढक देते है तो उसमे  से जड़ निकलता है और वहां से एक नए पेड़ बन जाता है फिर उसे कहीं भी काटकर लगाया जा सकता है। इसके पेड़ काफी छोटे और फल काफी बड़े होने के साथ साथ पैदावार भी काफी अधिक होती है। इसलिए व्यावसायिक दृष्टि से कलमी काफी सफल रहता है। इसके फल की गुणवत्ता काफी कम होती है और इसे खाने से डायबटीज भी हो सकता है। 

लखनऊ में आम की पैदावार खूब होती है यहाँ के मलीहाबादी आम काफी दूर दूर तक जाता है और इसके दशहरी के काफी लोग दीवाने है। मैं लखनऊ में रहता हूँ इसलिए आम खाकर तृप्त हो जाता हूँ। मैं एक खासियत पिछले 7-8 सालो से देख रहा हूँ और वो है इसकी कीमत में। एक सामान्य नौकरी करने वाले की आय इस अवधि में दो गुने से अधिक बढ़ी है लेकिन आम की कीमत औसतन  वही 25-40 रूपये किलो के भाव से है। पता नहीं किसान को कितना मिलता होगा इसमें से। पता नहीं क्यों कृषि से सम्बंधित बस्तुओं में उत्पादकों को वो लाभ मिल पाते जो लाभ दूसरे पेशे के लोगो को मिल जाया करता है। आज भी लौकी, करेला, तरोई, बैगन, टमाटर, भिन्डी आदि की कीमत 20-30 रु प्रति किलो है। कभी कभार किल्लत होती है तो जरूर एक दिन दो दिन के लिए उछाल मार देता है जिसका भी लाभ उत्पादकों को नहीं मिल पाता। कृषि से सम्बंधित पूरी की पूरी इंडस्ट्री असंगठित है बिचौलिए लाभ सबसे अधिक ले रहे है। 

अब चित्र पर आते है ऊपर वाले चारो बड़े दशहरी है कलमी है और बाजार से क्रय किये हुए है। चुकी फ्रिज से निकाला है इसलिए उस पर कुछ बर्फ का भी अस्तित्व दिख रहा है। निचे के चारो बीजू किस्म के है जो मेरे आवास में लगे पेड़ से गिरे है। मैं दोनों का लाभ ले रहा हूँ।

मंगलवार, 8 जून 2021

वर्षा के प्रकार

 गर्मी से राहत के लिए वर्षा का इंतजार किया जा रहा है। तो आइए जानते है कि वर्षा कैसे होती है-------

वर्षा सामान्यतया दो किस्म की होती है । 
1-मानसूनी वर्षा और
 2- संवहन वर्षा। 
मानसूनी वर्षा मैदानी इलाको में होती है जब हवा उच्च वायुदाब से निम्न वायु दाब की ओर जाती है तो अपने साथ बारिश भी लाती है। अपने देश के सन्दर्भ में गर्मियो में उत्तर पश्चिम इलाके में तापमान काफी अधिक होने के कारण निम्नवायु दाब जोन बन जाता है। हवा की यह प्रकृति है कि वो हमेशा उच्च वायुदाब से निम्न वायु दाब की ओर जाती है। अरब सागर में उच्च वायु दाब होता है इसलिए यहाँ से हवा चलती है जो भारत के पश्चिमी घाटो से प्रवेश कर पूर्वी घाट होते हुए बंगाल की खाड़ी होकर पुनः भारत के मैदानी इलाके में प्रवेश करती है। इस समय समुद्र से नमी भी साथ रहती है जो वर्षा को जन्म देती है। 
फिर यही जाड़े के दिनों में हवाए वापस आती है तो तमिलनाडु और आन्ध्र में बारिश करती है। इसे लौटती मानसूनी वारिश कहते है। 

अब आईये संवहन पे आते है। ये पहाड़ी इलाको और अत्यंत गर्म प्रदेशो में बारिश करता है। जब कोई क्षेत्र चारो ओर पहाड़ी से घिरा होता है तो हवा गर्म होकर ऊपर उठनी शरू हो जाती है जो एक पॉइंट के बाद बारिश होने लगता है। मासिन राम और चेरापूंजी जैसे जगहों की वर्षा इसी श्रेणी में आती है। दुसरा विषुवत रेखीय प्रदेशो में जहाँ अत्यंत गर्मी होती है वह भी ऐसे ही बारिश होती है। 

सोमवार, 31 मई 2021

राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार क्या होता है



 संविधान के अनुच्छेद 74 व 75 में मंत्रिपरिषद का प्रावधान किया गया है। 
सरकार चलाने के लिए कुछ लोगों की आवश्यकता होती है, जो सभी प्रकार के निर्णय लेते है, इन सभी व्यक्तियों के समूह को मंत्रिपरिषद कहा जाता है। मंत्री परिषद का कार्यकाल प्रधानमंत्री से तय होता है। प्रधानमंत्री की सलाह से राष्ट्रपति द्वारा मंत्री बनाये या हटाये जाते है। कुल चार प्रकार के मंत्री बनाये जाते है और  प्रत्येक मंत्री अपने विभाग का प्रमुख होता है तथा विभाग से सम्बंधित प्रश्नों का उत्तर देने के लिए उत्तरदायी होता है। मंत्री बनाते समय किसी सदन का सदस्य होना अनिवार्य नहीं है लेकिन 6 माह के अंदर किसी न किसी सदन की सदस्यता लेनी पड़ती है।

मंत्रिपरिषद में चार प्रकार के मंत्री होते है--
1-कैबिनेट मंत्री
2-राज्य मंत्री
3-स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री और
4-उप मंत्री

कैबिनेट मंत्री-----
प्रधान मंत्री सबसे योग्य मंत्रियों को कैबिनेट मंत्री के रूप में चुनता है, कैबिनेट सरकार के सभी निर्णयों के लिए बैठक करती है, इस बैठक में लिए गए निर्णय ही सरकार को दिशा- निर्देश प्रदान करते है । इन्हें अन्य मंत्रियों की तुलना में अधिक शक्ति और सुविधा प्रदान की जाती है। कैबिनेट की प्रत्येक बैठक में सभी कैबिनेट मंत्री का पहुंचना अनिवार्य रहता है।

राज्य मंत्री-----
कैबिनेट मंत्री के सहयोग के लिए राज्य मंत्री पद का निर्माण किया गया है, इस पद पर व्यक्ति कैबिनेट मंत्री के निर्देशानुसार कार्य करता है, राज्य मंत्री कैबिनेट मंत्री की बैठक में भाग नहीं ले सकता है । विशेष परिस्थति में वह कैबिनेट में भाग ले सकता ह

स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री----
इस पद पर व्यक्ति अपने विभाग का प्रमुख होता है, यह कैबिनेट मंत्री के अधीन नहीं होता है, यह अपने विभाग की रिपोर्ट सीधे प्रधानमंत्री को देता है, प्रधानमंत्री इसके लिए किसी विशेष मंत्री को भी नियुक्त कर सकते है | जब कैबिनेट की बैठक में स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री के विभाग से सम्बंधित चर्चा करनी होती है, उस समय स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री को बैठक में उपस्थित रहना अनिवार्य रहता है 

उप मंत्री----
किसी मंत्री के सहयोग के लिए उप मंत्री पद का निर्माण किया गया है, यह अपने वरिष्ठ मंत्री का कार्यभार देखता है तथा उनकी अनुपस्थिति में वह सम्पूर्ण विभाग के प्रमुख के रूप में कार्य करता है

मंगलवार, 4 मई 2021

100 साल पुरानी कम्पनी

अपने देश में ऐसी बहुत सारी कम्पनियां है जो पिछले 100 वर्षों से भी अधिक समय से काम कर रही है। इन कंपनियों के स्टॉक ने अपने निवेशकों को खूब वेल्थ क्रिएट किया है। तो आइए आज बात करते है कुछ 100 साल पुरानी कपनियों के बारे में जिन्होंने एक लम्बे अनुभव और उत्पादों के दम पर ब्रांड वैल्यू बनाई है. इनके उत्पादों को  हम आये दिन प्रयोग करते है. ये अभी भी मार्केट की फेवरिट हैं और हमेशा फेवरेट होने की उम्मीद भी है क्योंकि इनका रिसर्च एंड डेवलपमेंट बढ़िया है।  कहने केएस आशय है ओल्ड इज गोल्ड।

1-आईटीसी--
1910 में इंपीरियल टोबैको कंपनी नाम से स्थापित जिसे वर्ष 1970 में नाम बदलकर इंडियन टोबैको लिमिटेड और 1974 में आईटीसी कर दिया गया। आईटीसी देश की सबसे बड़ी सिगरेट निर्माता कंपनी है जो wills ब्रांड नाम से बनाती है। सिगरेट का कंपनी की कुल आय में 80 फीसदी योगदान है। 1970 में कंपनी एफएमसीजी, होटल, पेपरबोर्ड, पैकेजिंग, एग्री कारोबार में उतरी और अपने को एक एफएमसीजी कारोबार पर फोकस बढ़ा रही है। रेवेन्यू में 
सिगरेट पर ज्यादा आश्रित रहने के कारण और सरकार के टैक्स संबंधी प्रावधानों के कारण पिछले 10 सालों में निवेशकों को कुछ भी पैसा बनाकर नहीं दिया है। इस बीच डिविडेंड भी खूब देती है।  आईटीसी के लिए बड़ा पॉजिटिव है।  कंपनी एफएमसीजी पर फोकस बढ़ाना चाहती है। कंपनी 2030 तक एफएमसीजी से आय बढ़ाकर 1 लाख करोड़ करना चाहती है। आशीर्वाद, बी नैचुरल, सनफीस्ट, बिंगो, यीप्पी कंपनी के मजबूत ब्रान्ड हैं। वर्तमान में 200 रूपये पर ट्रेड कर रहा है। बहुत धैर्य मांगता है यह स्टॉक। मेरा अपना मानना है कि जब तक यह शेयर 300 के उपर एक लंबे समय तक होल्ड नहीं करता है तब तक कोई लम्बा रन अप देखने को नहीं मिलेगा। अभी फिलहाल इसमें ट्रेडिंग के बेहतरीन अवसर है। यह साल में 3 से 4 बार खरीदने बेचने का अवसर दे दे रहा है जहां एक बार के ट्रेड में 10 प्रतिशत से अधिक का रिटर्न आ जाएगा।

2-टाटा स्टील-------
1907 में इसकी शुरुआत जमशेदपुर, झारखंड में हुई थी, ये एशिया की पहली स्टील कंपनी है। टाटा स्टील एंड आयरन कंपनी के नाम से इसकी शुरुआत हुई थी। 1938 में जेआरडी टाटा कंपनी के चेयरमैन बने। 50 देशों में कंपनी का कारोबार और 5 महाद्वीपों में इसके कर्मचारी हैं। ये दुनिया की सबसे सस्ती स्टील बनाने वाली कंपनी है। टाटा स्टील की 5 साल में क्षमता बढ़ाकर दोगुनी करने की योजना है। कंपनी अपने टाटा मेटालिक, टाटा स्पॉन्ज, भूषण स्टील को मर्ज करने जा रहे है जो कि बहुत ही अच्छा है। वैसे भी टाटा ग्रुप पिछले कुछ सालों से अपने बिजनेस को पुनर्गठित करने में लगा हुआ है जिस कड़ी में टाटा ग्लोबल और टाटा केमिकल से टाटा कंज्यूमर बनाया, टाटा मोटर्स सभी को बेहतरीन बना रहे है।  टाटा स्टील ने यूरोप में नुकसान वाली यूनिट बेच दी है। भूषण स्टील के अधिग्रहण से कंपनी की ऑटो सेक्टर में पहुंच बढ़ी है। अभी 1063 रु पर ट्रेड कर रही है 
3-ब्रिटानिया--------
126 साल से ब्रिटानिया का जलवा कायम है। 1892 में 295 रुपये के निवेश से कंपनी की शुरुआत हुई थी। भारत में 13 फैक्ट्री के साथ 60 देशों में कंपनी की मौजूदगी है। ब्रिटानिया बिस्कुट इंटस्ड्री में मार्केट लीडर है। इसके गुड डे, मैरीगोल्ड, मिल्क बिकीस और टाइगर ब्रैंड हिट हैं। कंपनी बिस्कुट के अलावा डेयरी प्रोडक्ट में भी है। एक बेहतरीन रिटर्न देने वाली कंपनी है और इस समय अच्छे करेक्शन पर भी उपलब्ध है। 3435 रूपये पर ट्रेड कर रही है।

4-फीनिक्स मिल्स------
1905 में बनी फीनिक्स मिल्स 100 साल से ज्यादा का पुराना इतिहास है। मुंबई में टैक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के तौर पर इसकी शुरुआत हुई। सन 2000 के आसपास कंपनी ने टेक्सटाइल यूनिट बंद कर दी। बाद में कंपनी मॉल डेवलपर बनकर धमाल मचाया। यूनिट की जमीन पर हाई स्ट्रीट फीनिक्स मॉल बनाया। हाई स्ट्रीट फीनिक्स मॉल मुंबई का सबसे चर्चित मॉल है। आज देश के हर बड़े शहरों में इसके मॉल हैं ।

5-टीवीएस मोटर----
1911 में टीवीएस ग्रुप की शुरुआत हुई। इसने 1911 में दिल्ली में पहली बस सर्विस शुरू की। आज 90 से ज्यादा कंपनियां ग्रुप के अंदर हैं। कंपनी ने 1980 में मोपेड उतारकर धमाका किया। टू-सीटर 50सीसी मोपेड ने ऑटो सेक्टर की दिशा बदल दी थी। ये देश की तीसरी सबसे बड़ी टू-व्हीलर कंपनी है। फाइनेंस, इंश्योरेंस, टायर, हाउसिंग, एविएशन में भी कंपनी का कारोबार है। कंपनी आज स्कूटर, मोटरसाइकिल, मोपेड, थ्री-व्हीलर बनाती है।
6-गोदरेज इंडस्ट्रीज-----
गोदरेज इंडस्ट्रीज 119 साल पुरानी कंपनी है। अरदेशीर गोदरेज ने इसकी स्थापना की थी। ये गोदरेज ग्रुप की एक होल्डिंग कंपनी है। अदि गोदरेज ग्रुप के चेयरमैन हैं। कंपनी कंज्यूमर प्रोडक्ट, एग्री, रियल एस्टेट और रिटेल कारोबार में है। कंपनी का कारोबार 18 देशों में फैला है। ग्रुप की कई कंपनियों की लिस्टिंग संभव। कंपनी के प्रोमोटर की इमेज बेहद अच्छी है। कंपनी हर साल मोटा डिविडेंड देती है।

शेयरों में निवेश के नियम

स्टॉक मार्केट एक ऐसी जगह है जहाँ जिस तरह का वेल्थ बनता है उस तरह का कहीं भी नहीं बनता. इसा इसलिए होता है क्योंकि हम यहाँ पैसे से बिजनेस खरीदते है. हमारा पैसा हमारे लिए काम करता है. न तो हमें अकाउंट की देखभाल करनी है, न ही होलसेलर रिटेलर का झंझट झेलनी है जैसी सभी समस्याएं दूसरों के हिस्से में आती है. हमारा काम है उस कंपनी के स्टॉक लेकर बैठना.  याद रखना है हमें निवेश करना है, ट्रेडिंग नहीं. ट्रेडिंग से हम बड़े लाभ को छोटे लाभ में बदल देते है, याद रखना है कि फर्क 10/20% से नहीं पड़ेगा, फर्क पड़ेगा तो 100, 200 और 500 प्रतिशत या इससे भी अधिक से. और ये रिटर्न तभी मिलेंगे जब निवेश के कुछ नियमों का पालन करेंगे. तो आईये चलते है कुछ नियमों के बारे में जानने के लिए

1. सही कंपनी चुनना है - वेल्थ क्रियेशन की पहली शर्त होती है अच्छी कंपनी में पैसा लगाना. यहाँ याद रखना है कि मार्किट में हजारों की संख्या में कम्पनियाँ लिस्टेड है जिसमें ज्यादातर खराब किस्म की है इसलिए सही कंपनी की पहचान बहुत जरुरी है. प्रश्न यह है कि सही कम्पनी की पहचान क्या होती है ? क्या इनके कोई स्टार लगे होते है ? तो इसकी पहली पहचान है कंपनी के  मुनाफे में लगातार बढोत्तरी होना. हम कंपनी के 5 साल के आकड़ें को देखना है कि उनका बिजनेस, टर्न ओवर, लाभ  आदि लगातार बढ़ रहा है कि नहीं, यदि बढ़ रहा है तो ओके है अन्यथा दुसरे पहलुओं पर विचार करने की आवश्यकता है। अल्प काल में तो शेयर न्यूज़, अफवाह, घटनाए आदि से घटती बढती है लेकिन लॉन्ग टर्म के शेयर केवल उनके बिज़नस और लाभ से प्रभावित होते है और इसके लिए का से कम पांच साल का समय लिया जाय तो वो एक आदर्श समय होता है. सही कंपनी को किस तरह से सेलेक्ट करे इसके लिए मैंने एक पोस्ट लिख राखी है जिसमें कई पॉइंट दिए गए है जांचने के. उसे पढ़कर काफी जानकारी प्राप्त की जा सकती है.

2.धैर्य व अनुशासन का रहना  बहुत जरुरी है - शेयर में निवेश एक लंबी सीखने की प्रक्रिया है, जिसमें  हम अपनी गलतियों से सीखते हैं। यह एक ऐसी जगह है जहाँ हम हर रोज कुछ न कुछ नया सीखते है. निवेश की प्रक्रिया में जो में जो भी कार्य करने है उसमें धैर्य व अनुशासन का होना बहुत जरुरी है, याद रखना है, मार्केट अनुशाषित निवेशको को रिवार्ड देती है और गैर अनुशाषित पैसा गंवाता है, मार्किट गैर अनुशाषित से पैसा लेकर अनुशाषित निवेशक को देती है. इसलिए जितना अधिक अनुशासित रहेंगे लाभ की उम्मीदे और बढ़ जाती है. 

3-निवेश में विविधता-विविधता बहुत जरुरी है, पैसा कई सेक्टरों में लगाने चाहिए.  किसी भी  एक शेयर में अपने फण्ड का 10% से ज्यादा नहीं डालना चाहिए भले ही वो बहुत बढ़िया कंपनी हो, दूसरी ओर बहुत अधिक शेयरों में भी निवेश न करें क्योंकि उनकी  निगरानी करना मुश्किल होता है। जानकारों के अनुसार 15-20 विभिन्न सेक्टरों के शेयर रखे जाय तो अच्छा पोर्टफोलियो बनता है।.अपनी कंपनी के प्रदर्शन का विश्लेषण उसके तिमाही आकड़ों से करते रहन है। जैसे ही कोई गड़बड़ी प्रतीत हो बगैर किसी राग द्वेष से निकल जाना है.
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4).किसी शेयर को सिर्फ इसलिए नहीं खरीदना है कि वो बहुत गिर गया है- यह छोटे निवेशकों द्वारा की जाने वाली बहुत बड़ी गलती होती है. किसी शेयर का गिरता भाव निचे गिरते चाकू की तरह होता है जिसे पकड़ने पर घायल होने की आशंका काफी अधिक होती है. खरीदने से पहले यह जांचना है कि शेयर क्यों गिर रहा है और जब तक उसके गिरने का कारण दूर नहीं होता तब तक उसमें हाथ नहीं डालना है. इसी के उल्टा किसी स्टॉक को सिर्फ इसलिए नहीं बेच देना है कि वो बहुत बढ़ गया है. एक चीज हमेशा याद रखना है कि निचे के अंक की एक सीमा होती है कि शून्य हो सकता है लेकिन ऊँचाई की कोई सीमा नहीं होती. किसी से पूछिये कि सबसे बड़ा अंक कौन सा है कोई नहीं बता सकता लेकिन सबसे छोटी कौन सी संख्या है सभी बता देगे. इसके अतिरिक्त यह भी ध्यान रखना है कि बहुत सारे लोग पन्नी स्टॉक खरीदते है इस उम्मीद में कि वो बहुत बढ़ जाएगा, वो एक भयंकर गलती कर रहे होते है. कोई स्टॉक कम कीमत का है तो कोई न कोई कारण होगा, एक और चीज समझना है कि अच्छी चीज सस्ती नही मिलती और महँगी चीज सस्ती नहीं होती, वो कहावत है न सस्ता रोये बार बार,  महंगा रोये एक बार, यानी अच्छे स्टॉक लेने पर एक बार रोना पड़ता है लेकिन जीवन भर सुखी रखती है. किसी स्टॉक के महंगा और सस्ता होने का बहुत सारे मानक होते है एक 5 रुपया कीमत वाली कंपनी 1000 रुपे के भाव वाली कंपनी से महंगी हो सकती है. हमें स्टॉक की कीमत पर नहीं बल्कि मार्किट कैपिटल पर ज्यादा ध्यान देना है

5)-न एक बार में कोई शेयर खरीदना है और न ही एक बार में पूरा बेचना है- बहुत अच्छा फार्मूला है कि एक बार न पूरा स्टॉक खरीदना और न ही एक बार में पूरा बेचना. मार्किट की भविष्यवाणी कोई नहीं कर सकता. इसलिए सबसे सही स्ट्रेटेजी होती है टुकड़ों टुकड़ों में स्टॉक खरीदना और बेचना. इसे निवेश के क्षेत्र में पिरामिड स्टाइल कहा जाता है. जब स्टॉक गिर रहे होते है तो ज्यादा मात्रा में स्टॉक मिलते है जिससे लागत कम होती है. उसी तरह जब भाव बढ़ रहे होते है तो लाभ की उम्मीद और बढ़ जाती है 

6- मार्किट की टाइमिंग करने की कोशिश बेकार है- मार्किट की टाइमिंग मतलब जब मार्किट एकदम निचे के स्तर पर होगा तो स्टॉक खरीदना और जब सबसे उच्चत्तम स्तर पर होगा तो बेचना. यह कोई नहीं कर सकता. विजय केडिया कहते है कि सबसे उच्चत्तम स्तर पर बेचना और सबसे निचे के भाव पर खरीदना दो ही आदमी करते है एक तो भगवान् और दुसरे झूठा व्यक्ति. मतलब कोई नहीं जानता कि स्टॉक का सबसे न्यूनतम और उच्चतम स्तर क्या है. जो मार्केट में आदर्श समय का  इन्तजार करता है वो इन्तजार ही करता रह जाता है, मार्किट में सबसे अच्छा समय होता है जब हमारे पास पैसे हो और बिकवाली का सबसे उत्तम समय है जब हमे पैसे की जरुरत हो या फिर जब लक्ष्य की प्राप्ति हो जाय. 

7) रोज कुछ न कुछ सीखना है- एक चीज सभी को समझना है कि पैसा औकात देखकर आता है, जितनी हमारी औकात होती है, उतनी ही आता है, कभी कभार झटके में ज्यादा पैसा आ जाएगा लेकिन वो टिक नहीं पायेगा, पैसा तभी टिकेगा जब अपनी औकात बढ़ाई जायेगी. यहाँ औकात से आशय है अपनी योग्यता को लगातार बढ़ाना जीतनी योग्यता बढ़ेगी लाभ भी उतना ही बढेगा तो अपनी योग्यता बढानी है. किसी भी मानवा का सबसे बड़ा इन्वेस्टमेंट होता है अपने में निवेश करना. हम शारीर के लिए अच्छा और स्वादिष्ट खाना तो खाते है, सुन्दर दिखने के लिए अच्छे कपडे पहनते है लेकिन जहाँ से हम पैसा कमाते है यानी दिमाग, क्या उसको कभी कोई खुराक देते है ? नहीं न तो मष्तिष्क को भी खुराक चाहिए और वो खुराक है निवेश और पर्सनाल्टी ग्रोथ से सम्बंधित बुक्स को पढ़ना. सफल लोगों के इंटरव्यू पढ़ना, फंड मैनेजर की स्ट्रेटेजी समझना, FII के माइंड सेट को समझना, ब्रोकर रिपोर्ट पढ़ना आदि सभी चीजे हमारी योग्यता को दिन दुनी रात चौगुनि बढ़ाती है. हम जिनता पढेंगे उतना अधिक सीखेंगे, उतनी हमारी योग्यता बढ़ेगी और कमाई भी उसी अनुपात में बढ़ेगी.

8) कम आओगे कमाओगे और रोज आओगे रो जाओगे- बहुत बड़ा कोटेशन है जितना ही कम मार्किट में हम आते है यानी कम ट्रेड करते है तो  उतना ही अधिक कमाने की उम्मीद बढ़ जाती है और जितना ही अधिक आते है उतना ही अधिक ट्रेड करते है तो हम अपने ब्रोकर को पैसा कमाने का एक जरिया बन जाते है क्यंकि हम जब भी कुछ खरीदते और बेचते है दोना  बार में उसे कमीशन जाता है जो एक समय बाद गन्ना की जाती है तो कुल लाभ को कम कर देता है. बार बार स्टॉक को खरीदने  बेचने में हम एक बड़े लाभ को छोटे लाभ में बदल देते है.

9) गलतियों से सीखना है - समीक्षा के दौरान अपनी गलतियों को पहचानना है  और उनसे सीखें, क्योंकि  खुद के अनुभव को कोई नही हरा सकता। यही अनुभव आपके ‘ ज्ञान के मोती ’ बनेंगे जो निश्चित ही हमें एक सफल शेयर निवेशक बनाने में सहायक होंगे।

सोमवार, 3 मई 2021

दिग्गज निवेशकों के स्टॉक्स

  कई लोग निवेश के लिए शेयरों का चुनाव खुद करते हैं जिसके काफी अध्ययन करते है. खुद स्टॉक सेलेक्ट कर निवेश में सफलता के लिए कई चीजे बहुत जरुरी होता है जो सभी नहीं कर पाते है एक आम निवेशक तो कर ही नहीं पाता. इसके उलट  कुछ लोग दिग्गज निवेशकों के पसंद के स्टॉक में पैसा लगाना पसंद करते हैं. कुछ दिग्गज निवेशकों के नाम है राकेश झुनझुनवाला, आर के दमानी, रमेश दमानी, रामदेव अग्रवाल, डोली खन्ना, आशीष कचौलिया, अनिल अग्रवाल, विजय केडिया, पोरिन्जू वेलियाथ, मोहनीश पबराइ आदि जिनके पोर्टफोलियों में शामिल शेयरों में लोग निवेश करते हैं. स्टॉक मार्किट में लिस्ट कंपनियों को 1% से अधिक हिस्सेदार लोगों की सूचि एक्सचेंज को देनी पड़ती है जहाँ से यह पता लग जाता है दिग्गज निवेशको की होल्डिंग पता चल जाती है .हम आपको शेयर बाजार के दिग्गज निवेशकों के पोर्टफोलियो के बारे में बता रहे हैं. 

१-राकेश झुनझुनवाला 

भारत के Warren Buffett कहे जाने वाले दिग्गज निवेशक राकेश झुनझुनवाला को शेयरों में निवेश का मास्टर माना जाता है। इनके प्रमुख स्टॉक है 

TITAN

LUPIN

FEDERAL BANK

VIP INDUSTRY

KARUR VYASYA BANK

JUBILANT LIFE

FIRST SOURCE SOLUTION

AGRO TECH FOOD

TV 18

AUTOLINE INDUSTRY

TATA MOTORS

FORTIS HOSPITAL 

VA TECH WABAG

ESCORT

ION EXHANGE

2-राधाकिशन दमानी 

इस कड़ी में अब बात करेंगे राधाकिशन दमानी के पोर्टफोलियो की जो वैल्यू-पिक के लिए जाने जाते हैं। ये  डी-मार्ट रिटेल चेन के ओनर व प्रमोटर भी है । 

VST INDUSTRY

UNITWD BEWRIES 

3 M INDIA 

SUNDARAM FINANCE

TRENT

BLUE DART

TV 18  

INDIA CEMENT

3-ASHISH KACHAULIA

उन्हें क्वालिटी शेयरों की पहचान करने में महारत हासिल है.
उन्हें क्वालिटी शेयरों की पहचान करने में महारत हासिल है.

NOCIL

BIRLASOFT

IFB INDUSTRY

MAJESCO

MASTEK

VAIBHAW GLOBAL

POKARANA

DFM FOOD

KEI INDUSTRY

 

4-DOLLY KHANNA  

चेन्नई आधारित निवेशक डॉली खन्ना आम निवेशकों के बीच खासी लोकप्रिय हैं. उनके पोर्टफोलियो का प्रबंधन उनके पति राजीव खन्ना करते हैं, जो शुरुआती दौर में क्वालिटी शेयर भांपने की काबिलियत रखते हैं.  केमिकल सेक्टर में एक से बढ़कर एक मल्टी बैगर स्टॉक ये चुने है

NOCIL

RAIN INDUSTRY 

RADICO KHETAN

NILKAMAL LTD

JK PAPER

MUTHOOT CAPITAL

SOM DISTELERIES

IFB AGRO

RSWM LTD

BUTTERFLY  

5-VIJAY KEDIA 

SUDERSHAN CHEMICAL

VAIBHAW GLOBAL

REPRO INDIA

EVERST IND

CERA SANITAYWARE

HERITEJ FOOD

APCOTEX IND 

ASTEC LIFE

KOKUYO CAMLIN

ATUL AUTO 

6-ANIL KUMAR GOEL

DHAMPUR SUGER

TRIVENI ENG

UTTAM SUGAR

AVADH SUGER

VARDHMAN SPG

MAJESTIC AUTO

SEMTEX FASHION 

SRIKALAHASTI PIPE


1. डॉली खन्ना चेन्नई आधारित निवेशक डॉली खन्ना आम निवेशकों के बीच खासी लोकप्रिय हैं. उनके पोर्टफोलियो का प्रबंधन उनके पति राजीव खन्ना करते हैं, जो शुरुआती दौर में क्वालिटी शेयर भांपने की काबिलियत रखते हैं. डॉली खन्ना के पास कई कंपनियों में बड़ी हिस्सेदारी है.
1. डॉली खन्ना चेन्नई आधारित निवेशक डॉली खन्ना आम निवेशकों के बीच खासी लोकप्रिय हैं. उनके पोर्टफोलियो का प्रबंधन उनके पति राजीव खन्ना करते हैं, जो शुरुआती दौर में क्वालिटी शेयर भांपने की काबिलियत रखते हैं. डॉली खन्ना के पास कई कंपनियों में बड़ी हिस्सेदारी है.

 

आशीष कचोलिया वैल्यू निवेशक के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले आशीष कचोलिया के प्रशंसकों की संख्या कम नहीं है. उन्हें क्वालिटी शेयरों की पहचान करने में महारत हासिल है. उनके पोर्टफोलियों में एस्टर इंडट्रीज, शैली इंजीनियरिंग प्लास्टिक्स और वैभव ग्लोबल की खास जगह है.
1. डॉली खन्ना चेन्नई आधारित निवेशक डॉली खन्ना आम निवेशकों के बीच खासी लोकप्रिय हैं. उनके पोर्टफोलियो का प्रबंधन उनके पति राजीव खन्ना करते हैं, जो शुरुआती दौर में क्वालिटी शेयर भांपने की काबिलियत रखते हैं. डॉली खन्ना के पास कई कंपनियों में बड़ी हिस्सेदारी है.
1. डॉली खन्ना चेन्नई आधारित निवेशक डॉली खन्ना आम निवेशकों के बीच खासी लोकप्रिय हैं. उनके पोर्टफोलियो का प्रबंधन उनके पति राजीव खन्ना करते हैं, जो शुरुआती दौर में क्वालिटी शेयर भांपने की काबिलियत रखते हैं. डॉली खन्ना के पास कई कंपनियों में बड़ी हिस्सेदारी है.
1. डॉली खन्ना चेन्नई आधारित निवेशक डॉली खन्ना आम निवेशकों के बीच खासी लोकप्रिय हैं. उनके पोर्टफोलियो का प्रबंधन उनके पति राजीव खन्ना करते हैं, जो शुरुआती दौर में क्वालिटी शेयर भांपने की काबिलियत रखते हैं. डॉली खन्ना के पास कई कंपनियों में बड़ी हिस्सेदारी है.

ध्यान देना है कि हम किस श्रेणी में है

समाज में ऐसे काफी लोग मिल जायेगे जिनके ये पिक्चर अबूझ पहेली है. इस पहेली को समझने के हमे कुछ पुस्तकें पढ़नी पड़ेगी तब जाके इसका महत्व और मतलब समझ में आएगा. कुछ किताबो के नाम इस प्रकार है -बिज़नस स्कूल, कैश फ्लो क्वाड्रेंट, रिटायर यंग रिटायर रिच, रिच डैड पुअर डैड , पैराबोला ऑफ़ पाईप लाईन, कोपी कैट मार्केटिंग 101 आदि . इन सभी बुक को पढने के बाद सही कांसेप्ट समझ में आता है . वैसे अपने आस पास बारीकी से मूल्यांकन किया जाय तब भी आसानी से समझा जा सकता है लेकिन उसके लिए जिस तरह की दृष्टि और समझ चाहिए वो आसानी से नहीं मिलता। बहरहाल जो भी हो, मुख्य विषय पर आते है।  इन किताबो में बताया गया है कि हम अपना जीविकोपार्जन के लिए कौन सा पेशा करते है, उस पेशे का हमारे जीवन पर कितना असर होता है, वो समाज में हमें कहां लेकर जाता है और उसका क्या परिणाम मिलता है। वो कहते है न कि अपने लिए तो सभी जीते है, सफल जीवन तो वो होता है जिसमें हम दूसरे लोगों को भी आगे लेकर चलते है।  हमे कौन सा काम करना चाहिए जिससे कि हम अपना भला तो करे ही साथ में अपनी आने वाली पीढ़िया और समाज के लिए भी कुछ कर सके। इस विषय पर बहुत अच्छे से प्रकाश डाला गया है। 
   आईये थोडा डिटेल में चलते है . रैगनर नर्क्से नामक अर्थशास्त्री ने '' गरीबी के दुश्चक्र '' को परिभाषित किया है जिसमे इन्होने बताया है कि ये  एक ऐसा चक्र होता है जिसमें कोई अर्थव्यवस्था फंसी रहती है। किसी देश में यह दुश्चक्र अनेक शक्तियों का ऐसा चक्रीय समूह होता है जो एक-दूसरे को प्रभावित करता है। एक गरीब देश में आय कम होती है जिससे बचत भी कम होती है, कम बचत के कारण निवेश भी कम होता है, जिससे इंडस्ट्री नहीं बढ़ती है और  उत्पादकता कम होती है, इससे रोजगार भी कम मिलता है और  पुन: कम आय को उत्पन्न करती है । देश निकालने की  लाख कोशिश करता है लेकिन निकल नहीं पाता। ठीक उसी प्रकार रोबेर्ट टी कियोसाकी ने व्यक्ति के लिए चूहा दौड़ यानी Rat Race की परिभाषा दिया है जिसमें आदमी व्यस्त तो हमेशा रहता है लेकिन उपलब्धियां कुछ नहीं मिलती। उन्होंने कहा है कि मध्यम वर्ग हमेशा इसमें पिसा रहता है और उसे पता ही नहीं होता कि वो कर क्या रहा है और करना क्या चाहिए। जब हम  एक आम मध्यम वर्ग की लाइफ को देखते है , वो खूब मन लगा के पढता है किसके लिए नौकरी के लिए और जीवन भर गरीब रहने का रास्ता चुनता है क्योंकि नौकरी मतलब पूरे जीवन रेंगकर व्यतीत होता है। गाड़ी लोन पे, मकान लोन पे ,घर का सारा सामान लोन पे और कर्ज की किस्ते चुकाते चुकाते जीवन की इह लीला को समाप्त कर लेते है और कोई जान भी नहीं पाता। फिर भी वही आदमी अपने बच्चो को अपने जैसा ही  बनाने का प्रयास करता है। कितना बेवकूफाना काम करता है वो। संतोषम परम सुखं में रहता है। अपने  पैसे का 80% मार्केट में खर्च करता है  और 20% बचत में से सपने पूरा करने को सोचता हैै। क्या ये संभव है ? दरअसल उसकी समस्या उस आय की प्रकृति की होती है जिसे वो समझ ही नहीं पाता। दुर्भाग्य से अपने देश में पैसे की समझ के बढ़ाना ही नहीं चाहते लोग। उन लोगो के लिए ये उबाऊ विषय है . यदि आप लोगो को जीवन में आर्थिक रूप से फ्री होना है तो इस पैसे की समझ को बढ़ाना ही होगा। हमारी मूल समस्या पैसा है तो इसकी प्रकृति और स्रोतों के बारे में जानना पड़ेगा। 
  वैसे आम लोगो से बात की जाय कि आय/इनकम कितने प्रकार का होता है तो सभी लोग कहेगे की दो प्रकार का 1- नंबर 1 की इनकम और 2- नंबर 2 की इनकम जो भ्रष्ट तरीके से मिलती है . लेकिन यहाँ पे बताया गया है की दो प्रकार की होती तो है लेकिन रेखीय या एक्टिव इनकम और एक्स्पोंसिअल या पैसिव इनकम।  एक में बहुत स्लो गति से बढ़ती है जैसे 1, 2, 3, 4, 5 .... इसमें नियमित रूप से काम करना पड़ता है, काम बंद पैसा भी बंद हो जाता है। जब कि दूसरी में बहुत तेज बढ़ती है जैसे 1, 2, 4, 8, 16 .....। शुरू शुरू में तो 0 से स्टार्ट होता है या बहुत कम से स्टार्ट होता है लेकिन धीरे धीरे एक लंबे समय इतना तेज बढ़ता है कि उसकी कल्पना ही नहीं की जा सकती और इनकम के लिए सक्रियता भी कम हो जाती है, हम काम करे या न करे लेकिन इनकम बंद नहीं होती है। इन इनकमों को पाने के लिए कुल चार तरह के लोग होते है।  उपर का चित्र उसी को प्रदर्शित करता है...
 
1) E यानी Employee अर्थात नौकरी करने वाले --
 ये जीवन में नौकरी करने के लिए ही पढ़ते है और अपनी सभी समस्याओं को इससे समाधान करने का प्रयास करते है, सोचते है कि सभी सपने पूर्ण हो जाएंगे। ये पढ़ने लिखने मे स्कालर होते है ये जानते है किसी भी काम को कैसे किया जाय।  इनका "How यानी कैसे किया जाय" काफी स्ट्रॉन्ग होता है। ये शिक्षा लेके एक योग्यता बनाते है और उसी योग्यता को बेचने का काम करते है। हालांकि कोई इसे स्वीकार नहीं करता है, लेकिन यही यथार्थ और यही कटु सत्य है। हम अपनी योग्यता को बेचते है तो हमें सेलरी मिलती है। जितने समय बेचते हैं उतनी इनकम होती है, कुछ लोग अतिरिक्त योग्यता जैसे Btech और एमबीए साथ कर लिए, अर्जित करके थोड़ा ज्यादा पैसा कमाते है, लेकिन यह इनकम तभी तक मिलती है जब तक उसे टाइम के अनुसार बेचते हैं. जिनकी जितनी बड़ी योग्यता उतनी बड़ी इनकम। ये अस्थाई इनकम होती है जो उसके जीवन के साथ ही ख़त्म हो जाती है। नौकरी करने वालो को यह अधिकार नहीं होता कि अपने बच्चो को अपने बाद वहां बैठा दे। उन्हे भी शून्य से शुरू करनी पड़ती है। अब तो सरकारी नौकरियो में पेंसन और आश्रित कोटे की नौकरी के भी लाले पड़ गए है.

आय = योग्यता * समय 

 अब मान लेते है कि उन्हे इनकम बढ़ाना है तो या तो समय बढ़ावे या फिर योग्यता जिसकी एक सीमा  है। ईश्वर ने एक मामले में सभी के साथ न्याय किया है वो ये कि सभी को 24 घंटे का समय दिया है। चाहे राजा हो या भिखारी सभी को 24 घंटे, किसी को भी एक्स्ट्रा एक मिनट भी नहीं मिलता।  योग्यता के लिए मान लेते है कि कोई मैथ का teacher  है और सरकार मैथ की सभी नौकरिया ख़त्म कर दे तो ये संभव नहीं होगा की वो फिर से कोई डिग्री ले, कोई दूसरी योग्यता बनाए, कोई और नौकरी करे .वैसे भी रिटायर मेंट पे इनकम भी आधी हो जाती है . अंत में डिपार्टमेंट भागवत गीता पकड़ा के नमस्कार कर लेता है .बच्चे को भी एकदम नए सिरे से स्टार्ट करना पड़ता है .   . 

 2- S यानी Self Employee - हिंदी में कहे तो स्वरोजगारी
अब आईये चर्चा करते है यस पे . एस मीन्स सेल्फ एम्प्लाई  यानि स्वरोजगारी . इसमें होता क्या है व्यक्ति अपने अन्दर कोई गुण विकसित करके छोटा सा सिस्टम बनता है और खुद को ही नौकरी पे रख लेता है . चुकी वो अपने क्षेत्र का एक्सपर्ट होता है इससे उसे लगता है की सबसे बढ़िया काम वही कर सकता है। इसमें दुकानदार , प्लम्बर, आर्किटेक्ट, डाक्टर, वकील, सीए आदि आते है। ये अपने योग्यता और समय के साथ पूंजी का भी प्रयोग करते है जिससे ये थोड़ा बेहतर स्तिथि में होते है। लेकिन इनके यहाँ सबसे बड़ी जरुरी ये होता है कि अपने आपको लगातार अपडेट करते रहे अन्यथा दूसरा उनको मार्केट से बाहर करके उनका स्थान ले लेगा। इनका इनकम सूत्र ये है 
 योग्यता * समय * पूजी = मनी
 इनमे से कोई भी जीरो होता है तो इनकम भी जीरो हो जाता है .अर्थात अस्थायी आय होती है। काफी ऐसे सेल्फ एम्प्लाई ऐसे लोग मिलते है जो अपने आपको बिज़नस मैन बताते है. लेकिन ऐसा नहीं होता। बिज़नस का सीधा फंडा है कि यदि हम महीने साल भर काम करना बंद कर देते है तो इनकम कम न हो। चेक करे कि महीने दो महीने हम काम नहीं करते है, तो क्या इनकम आती रहेगी, यदि उत्तर हां मिले तो बिजनेस में है अन्यथा स्वरोजगारी। यानी हम असुरक्षित है। 

3) B यानी Business 
ये अपने आप में बिलकुल अलग ही विधा होती है। फ़ोर्ब्स मैगजीन के अनुसार यदि आपके लिए 500 से अधिक व्यक्ति काम करते है और आप के बगैर रहे वो काम हो रहा है तो इसका मतलब आप बिज़नस कर रहे है. ये लोग काम नहीं करते है बल्कि काम किससे और कैसे कराया जाय यही सीखते है। ये खुद कोई खास पढ़े लिखे नहीं होते है लेकिन कैसे काम लिया जाय बखूबी जानते है। इनका ह्वाई अर्थात काम क्यों किया जाय, एकदम क्लियर होता है।  यदि किसी उद्योग पति को कोई नया कारोबार करना है तो क्या करते है ये। एक छोटा सा उदाहरण लेते है कि मान लीजिए किसी को कोई ब्रेड की फैक्ट्री लगानी है तो क्या करते है ? मजदूरों को खरीद लेते है, कैसे बनता है उसके लिए इंजीनियर, एक एमबीए किया हुआ मैनेजर, अकाउंट, होलसेल, रिटेल आदि सभी के लिए अलग अलग लोगों को नौकरी पर रख लेते है। स्वयं फ्री रहते है। और इनकम की बात की जाय तो सबसे अधिक कमाते है क्योंकि सभी लोग बिजनेस मैन के लिए काम करते है। यदि उस ब्रेड फैक्ट्री में 50 लोग भी 8/8 घंटे नौकरी करते है तो बिजनेस मैन के लिए एक दिन के लिए कुल काम होता है
50*8=400 घंटे
तो बिजनेस मैन को कमाई होती है 400 घंटे की, जबकि नौकरी करने वाले को मिलता है मात्र 8 घंटे का पैसा और दूसरी चीज किसी एक नौकरी करने वाले को कुछ होता है तो उसकी तो दुनिया ही उजड़ जाती है लेकिन बिजनेस मैन की इनकम पर कोई फर्क नहीं पड़ता है। इनके मरने के बाद इनके परिवार के लोग बिजनेस संभाल लेते है जो पीढ़ियों तक चलता है। कुल मिलाकर ये सबसे अधिक सुरक्षित होते है। 

4)I यानी Investor हिंदी में निवेशक
 ये वो लोग होते है बिजनेस में पैसा लगाकर पैसे से पैसा बनाते है। पैसा इनके लिए काम करता है। 
अभी लिखना बाकी है। 

रविवार, 2 मई 2021

पूर्व में दिए गए ट्रेडिंग आइडिया की समीक्षा

वैसे तो मैंने ब्लॉग और यू ट्यूब चैनल काफी पहले एक्टिव कर दिए थे लेकिन कभी उस पार काम किया नहीं। मुझे अनगिनत लोगों ने सलाह दिया कि इस पर काम करे जिससे लोगों की सलाह पर मैने 2019 में यू ट्यूब पर और 2021 में ब्लॉग पर काम शुरू कर दिया। शुरू में खूब वीडियो बनाए लेकिन इधर कुछ अन्य व्यस्तताओं के कारण कोई वीडियो नहीं बनाया। वीडियो न बनाने का एक कारण अच्छा वीडियो न बनन भी रहा। मुझे बहुत कुछ सीखना है इन सभी चीजों में। बहरहाल अपने यू ट्यूब चैनल पर काफी ट्रेडिंग आइडिया लेकर आता रहता हूं और एक समय उन स्टॉक की भी समीक्षा करता हूं। समीक्षा में मैने पाया कि मेरे चुने हुए 10 में लगभग 6/7 स्टॉक आसानी से दो महीने की अवधि में 10/15 प्रतिशत का आसानी से रिटर्न दे देते है। मेरे चुने स्टॉक फंडामेंटल तौर पर स्ट्रॉन्ग होते है और 2 महीने का समय स्टॉप लॉस भी होता है, यानी यदि 2 महीने में सकारात्मक रिटर्न नहीं दिया तो उसे बेचकर निकल जाना है। समीक्षा की कड़ी में पिछली बार नवंबर और दिसंबर में कुछ स्टॉक चुने थे जिसकी समीक्षा करने जा रहा हूं। 
Date 07.12.2020 को कुल 3 स्टॉक चुने थे। सभी स्टॉक का 1/1 महीने के अंतराल पर क्या भाव रहा है उसका भी उल्लेख कर रहा हूं
 1) Metropolish Healthcare
7.12 को 1958, 7.01 को 2100, 7.02 को 2169, 7.03 को 1949, 7.04 को 2271 और 1.05 को 2394 

2) Rallis India 
7.12 को 293, 7.01 को 283, 7.02 को 271, 7.03 को 272, 7.04 को 270 और 1.05 को 293

3)JB CHEMICAL
7.12 को 1004, 7.01 को 1055, 7.02 को 1033, 7.03 को 1207, 7.04 को 1245 और 1.05 को 1349

1 दिसंबर 2020 को चुने गए स्टॉक
 1) DR REDDY
1.12 को 4830, 1.01 को 5241, 1.02 को 4448, 1.03 को 4453, 1.04 को 4587 और 1.05 को 5163

2) ADVANCE ENZYME
1.12 को 350, 1.01 को 336, 1.02 को 327, 1.03 को 348, 1.04 को 353 और 1.05 को 401

3) LAURUS LAB
1.12 को 322, 1.01 को 353, 1.02 को 350, 1.03 को 363, 1.04 को 365 और 1.05 को 452

4) IOL Chemical
1.12 को 748, 1.01 को 752, 1.02 को 689, 1.03 को 548 , 1.04 को 552 और 1.05 को 591

25 नवंबर को चुने स्टॉक
1) COFORGE
25.11 को 2424, 25.12 को 2652, 25.01 को 2448, 25.02 को 2516 , 25.03 को 2751, 25.04 को 2808 और 1.05 को 5163

2) MINDTREE
25.11 को 1376, 25.12 को 1597, 25.01 को 1740, 25.02 को 1604 , 25.03 को 1969, 25.04 को 2018 और 1.05 को 2104

3) KPIT TECH
25.11 को 101, 25.12 को 119, 25.01 को 133, 25.02 को 146 , 25.03 को 170, 25.04 को 196 और 1.05 को 197

कुल मिलाकर 10 स्टॉक चुने गए थे जिसमें IOL CHEMICAL, RALLIS के स्टॉक को छोड़ दिया जाय तो अन्य से जबरदस्त रिटर्न दिया है जिसमें KPIT और माइंड ट्री ने जबरदस्त प्रदर्शन किया है। पूरी पोस्ट में डेट के अनुसार भाव लिखने का आशय है कि जो मार्केट को हमें आउट परफॉर्म करते है उन्हे जब जब 52 विक हाई से 10 प्रतिशत के आस पास करेक्शन देते है तो खरीदने के मौके देते है और नया हाई बनाने के फिर करेक्शन देते है तो पुनः खरीदारी करनी चाहिए। खरीदने के दौरान दो माह का स्टॉप लॉस रखा जाय यानी वहां घाटे में हो तो बेच दिया जाय तो IOL के उदाहरण से हम देख सकते है कि हम कुछ बचा भी लेते है। 

इस प्रकार ग्रोथ स्टॉक के साथ हम जब भी ट्रेडिंग/इन्वेस्टमेंट करते है तो लाभ की उम्मीद बढ़ जाती है। ग्रोथ स्टॉक ऐसे स्टॉक होते है जिनमें कुछ ऐसे गुण भी मिलते है कि मार्केट किसी भी दिशा में हमेशा आउट परफॉर्म करते है। 2 माह की स्टॉप लॉस की प्रक्रिया खराब स्टॉक को अपने आप पोर्टफोलियो से बाहर कर देता है।