बड़ा अजीब सा शीर्षक है लेकिन गंभीर विषय है। इसे ठीक से समझने के लिए कुछ अन्य बाते करते है। सरकार और व्यक्ति के बजट में एक बुनियादी अंतर यह होता है कि सरकार अपने खर्च देखकर आय तय करता है जबकि व्यक्ति आय देखकर अपने खर्च तय करता है। आशय यह है कि व्यक्ति जो 10000 पाता है तो अपने सभी खर्च इसी में करता है और 50 हजार पाता है तो उसके अनुसार खर्च करता है। आदमी 10 हजार में भी रह लेता है और 1 लाख में भी नहीं रह पाता है। जैसी आमदनी वैसे खर्च। जो हम खर्च करते है, वो अपने पर ही तो खर्च करते है, फिर स्वयं को भुगतान करने का आशय क्या है ?
अपने को भुगतान करने का आशय है कि एक संकल्प करना है कि जो भी कमाते है उसमें से कुछ पैसे बचत करेंगे और उसे निवेश करेंगे। जो भी हम पैसा कमाते है उसका एक निश्चित हिस्सा सबसे पहले अपने लिए अलग करेंगे, उसके लिए एक विशेष बैंक अकाउंट खोलेंगे जिसमें पैसा डालेंगे, वो अमाउंट कितना हो, कम हो या ज्यादा हो, मायने नहीं रखता, वो धनराशि कितना ही छोटा क्यों न हो, बस डालना है। पैसे डालने के अवसर ढूंढेंगे, कैसे बढ़ाया जाए इसका अध्ययन करेंगे। इन पैसे को अच्छे निवेश साधन में निवेश करना है, सबसे बेस्ट जगह म्यूचुअल फंड है जहां दीर्घ काल में आसानी से 12% से भी अधिक का चक्रवृद्धि ग्रोथ मिल जाती है।बचत प्रायः सभी लोग कर लेते है लेकिन निवेश सही से नहीं कर पाते है। प्रायः यह भी देखने में आता है कि कुछ एलआईसी एजेंट के सलाह से बीमा योजनाओं में घटिया तरीके से पैसा लगाते है जहां इनफ्लेशन के प्रभाव को भी दूर नहीं कर पाते हैं। बीमा एक सुरक्षा उत्पाद है और इसे सुरक्षा के लिए ही लिया जाना चाहिए, निवेश के लिए नहीं। निवेश को समझना है और इस बचत/निवेश की आदत को जीवन भर अपनाना है। हालांकि यह इतना आसान भी नहीं है, इसके लिए संकल्प और इच्छाशक्ति के साथ धैर्य और अनुशासन की जरूरत होती है। इसे लक्ष्य की तरह बनाना होगा। इसे लिखना है, योजना बनाना है, इस पर काम करना है। पैसे एक हिस्सा स्वयं के ऊपर खर्च करना है, स्वयं को ज्यादा सीखने पर फोकस करना है। संभव हो तो आय के एक से अधिक साधन भी बनाना है। जब यह आदत बन जाएगी तो कई तरह की दिक्कत परेशानियों से हम बचा लेंगे।
ध्यान देना है पैसा कहता है कि आज मुझे बचा लो, आपका कल मैं बचा लूंगा। प्रत्येक पैसे के साथ सावधानी करनी है।
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