रविवार, 25 अप्रैल 2021

निवेशकों को कोरोना से क्या सबक लेना चाहिए

COVID-19 महामारी हमारे जीवन में कुछ ऐसे घाव लेकर आई है जो मानव जाति के इतिहास पर अमिट छाप छोड़कर जायेगी।  अतत: हमें  इससे निजात तो मिलनी ही है इससे पूर्व भी मानवों ने ऐसे संकटों पर विजय श्री प्राप्त किया है। इस पर प्राप्त करेंगे लेकिन ये हमें ऐसे सबक सीखा कर जायेगी जिनकी कभी उपेक्षा नहीं की जा सकती। अपने देश में जिस तरह से इसके दूसरे स्टेन ने तबाही मचाई है कि शब्दों में बयान करना मुश्किल है। इसने सभी क्षेत्रों में लोगों को कुछ न कुछ सबक दिए है लेकिन हम बात कर रहे है स्टॉक मार्केट, इन्वेस्टमेंट और वैल्थ क्रिएशन के लिए काम करने वाले निवेशकों का जिन्हें बहुत कुछ सीखा रहा है।  आइए देखते है -----

1- निवेशकों की दुनिया में आम तौर पर कहा जाता है कि बाजार की गिरावट में अच्छे शेयरों में खरीद का मौका मिलता है, ये मंत्र कोरोना काल में भी उपयोगी है। वर्तमान अच्छे अच्छे बिजनेस और दिग्गज कम्पनियां एक सुनहला अवसर लेकर आई है। कई कंपनियां अपने उच्चतम स्तर से नीचे उपलब्ध है।

2-  समय-समय पर अपने निवेश की समीक्षा करते रहनी चाहिए और यदि किसी कम्पनी के बिजनेस में किसी दिक्कत के कारण बढ़त या कमी देखने को मिले तो उसके अनुसार अपने निवेश में भी बदलाव करने चाहिए। जैसे इस समय रिटेल, मल्टीप्लेक्स, घूमने फिरने, होटल, रिटेल लोन में निवेश को कम करना चाहिए जबकि फार्मा, आईटी, टेलीकॉम, एफएचसीजी में निवेश बढ़ाने चाहिए। फिर समय बदलने पर पोर्टफोलियो को बैलेंस करना चाहिए।

3- निवेशको के बीच ये बहुत ही प्रसिद्ध कहावत है कि अपने सारे अंडे एक ही टोकरी ना रखें यानी किसी एक ही स्टॉक या एक ही सेक्टर में पूरा पैसा न लगाए या किसी एक ही स्टॉक में बहुत ज्यादा पैसा न लगाए जाएं। उस सेक्टर या स्टॉक की स्थिति खराब होने पर पूरे पोर्टफोलियो पर प्रेशर ला देता है।

4- ये एक सफल निवेशक बनने के लिए नम्बर 3 एक अहम रुल है।  निवेश का डायवर्सिफेकेशन जरूरी है। पोर्टफोलियो में विविध सेक्टर से स्टॉक होने चाहिए जिसकी नंबर 2 में बताए गए तरीकों के अनुसार बदलाव भी करना चाहिए । यानी समय-समय पर अपने निवेश की समीक्षा और उसकी रीबैलेसिंग करते रहने चाहिए।

5- समय-समय पर अपने एसेट एलोकेशन की समीक्षा और रीबैलेसिंग करके मुनाफे को और बढ़ाया का सकता हैं। एसेट एलोकेशन मतलब पैसे को डेट, गोल्ड, इक्विटी और कैश में रखना। इस प्रक्रिया में निफ्टी के PE रेश्यो बहुत काम आ सकता है। मार्केट के ऐतिहासिक आंकड़ों को देखा जाय तो जब जब मार्केट एक निश्चित PE लेवल पर पहुंचता है तब तब गिरता है। और नीचे के एक लेवल के बाद बढ़ता है। मार्केट बताकर नहीं चढ़ता/ उतरता PE लेवल को वाच करते रहा जाय तो यह काम आसान हो जाता है।

6) शेरों के शिकार करने के तरीको को देखा जाय तो वो कमजोर जानवर को पकड़ता है या भागने के दौरान सबसे पीछे होता है। हमें भी अपने स्टॉक मार्केट की सफर में कम मुनाफे वाले या घाटे वाले स्टॉक्स से निकलकर अधिक रिटर्न देने वाले स्टॉक्स में अपना निवेश ट्रांसफर करने चाहिए हैं उससे बेहतर रिटर्न की उम्मीद बढ़ती है।

7- इक्विटी मार्केट में निवेश के साथ सदैव अनिश्चितता और जोखिम जुड़ा रहता है लेकिन अगर हम डर और लालच की भावाना से उबरकर सही निर्णय ले तो जोखिमों से बच सकते हैं। इसके लिए जरूरी है कि न जल्दबाजी बेचने में की जाय और न ही खरीदारी में जल्दबाजी करनी चाहिए। अभी के हालात में खास ध्यान रखना है।

8- बाजार के मुश्किल दौर में टिप के लिए टीवी, मीडिया, विशेषज्ञों पर बहुत ज्यादा निर्भर नहीं रहना है। जैसे तैरने के लिए पूल में उतरना पड़ता है ठीक उसी तरह स्टॉक मार्केट में पैसा बनाने के लिए खुद उतरकर रिसर्च करना सीखना होगा। हमारी योग्यता बढ़ती है और पैसा योग्यता के बराबर आती है जितनी योग्यता बढ़ेगी पैसा भी उतना ही बढ़ेगा। वर्तमान में हमें अपने भावनाओं पर नियंत्रण रखने की जरुरत होती है और मार्केट की भेंड़ चाल से बचना चाहिए।

9. बाजार में किसी रैली या करेक्शन के दौरान निवेशक बाजार का ट्रेंड जानने के लिए एक्सपर्ट्स के पास भागते हैं क्योंकि निवेश का मुख्य लक्ष्य ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाना और घाटे को कम से कम रखना है। बाजार में गिरावट के दौर में अक्सर निवेशक पेनिक सेलिंग करने लगते है लेकिन यह ध्यान रखने की बात है कि पेनिक सेलिंग और सोच-समझकर लिए गए एक अच्छे निर्णय के बीच में बहुत पतली सी रेखा होती है।

10-हमें बाजार के इस मुश्किल दौर में चालू ट्रेंड को समझते हुए विवेकपूर्ण तरीके से निर्णय लेनें चाहिए। उदाहरण के लिए पिछले कुछ दिनों के दौरान बाजार के कई पंडित ये दावा कर रहे थे कि अभी हमें और तेजी देखने को मिलेगी लेकिन हमें उसका उल्टा देखने को मिला। बाजार अपने उच्चतम स्तर से गिरावर का रुख पकड़ लिया है।

11-निवेशकों के लिए धैर्य, विवेक और अनुशासन की जरुरत होती है हम अपने रणनीति पर जितना अधिक टिके रहते है पैसा बनने की उम्मीद उतनी ही अधिक बढ़ जाती है।

12. वर्ष 2020 में COVID-19 के दौरान बहुत से निवेशकों का सोचना था कि जब तक कोरोना पर विजय प्राप्त नहीं होगा तब तक मार्केट में तेजी नहीं आयेगी और लोगों ने मार्केट से दूरी बना ली, बेहतर मौके का इंतजार करते रह गए, लेकिन हुआ इसका उलटा। तो मार्केट से दूर रहकर पैसा नहीं बन सकता, पैसा बनाने के इसमें रहना ही पड़ेगा। इंतजार करने वाले सिर्फ इंतजार करते रह जाते है। मार्केट को जो टाइमिंग करने की कोशिश करता है वो भी कुछ नहीं कर सकता। सफलता का सबसे उत्तम तरीका है जब पास में पैसे हो तो निवेश किया जाय और जब जरूरत हो निकाल  जाय। 

13. मार्केट कैसा भी हो हमेशा कुछ सेक्टर/स्टॉक ऐसे होते हैं जो मार्केट को आउट परफॉर्म करते है। उन्हे चिन्हित कर हमेशा मुनाफा कमाया जा सकता है। इसके लिए मार्केट के विभिन्न सेक्टर इंडेक्स होते है जिनकी बेंचमार्क निफ्टी और सेंसेक्स से प्रदर्शन की तुलना करते रहना चाहिए। कुछ इंडेक्स नीचे है
14. इस दौरान कुछ ऐसे ही स्टॉक होते है जो जिनपर बहुत कम असर पड़ता है। पिछली बार यानी वर्ष 2018 से 2020 के मध्य आई बिकवाली बहुत व्यापक थी और केवल कुछ ही शेयर इस आंधी में अपने को संभाल सके। ऐसे समय में क्वालिटी का महत्व पता चलता है। मौजूदा गिरावट में ऐसा ट्रेंड दिख सकता है। इसलिए क्वालिटी बहुत मायने रखता है।

15. भारतीय बेंचमार्क सूचकांक निफ्टी अभी  मार्च  2021  के अपने उच्चतम स्तर 15431 से लगभग 10 % नीचे नजर आ रहे हैं जिसको जानकार मानते है कि अभी और गिर सकता है । मैंने 11 अप्रैल को इसे लेकर एक ब्लॉग लिखा था जिसमें मैंने अनुमान लगाया है कि आगामी कुछ महीनों में 12 हजार का लेवल छू ले तो कोई आशचर्य नहीं होगा. बहरहाल उस ब्लॉग का लिंक निचे है 
 
 https://vskarahiya.blogspot.com/2021/04/blog-post_11.html 

इसको देखते हुए हमारा मानना है कि COVID-19 संकट अभी बढ़ सकता है, 2 मई को चुनाव नतीजो के उपरान्त कोई दिशा निकल सकती है. फिलहाल ब्लूचिप और दिग्गज कंपनियों के शेयर लेने के अवसर आ रहे है। मार्किट में हमेशा अच्छे अवसर होते है जो छोटे से आगे बढ़कर दिग्गज बन जाते है तो कुछ बर्बाद हो जाते है. ये सोचना पूरी तरह गलत  है कि बाजार में कोई पूरी तरह से फॉलप्रूफ  है। अगर ये सही होता तो सभी ऐतिहासिक ब्लूचिप कंपनियां बाजार में होती और उनमें मजबूती बनी रहती। ऐसी 22 कंपनियां जो 2008 में निफ्टी का हिस्सा थी अब वो वहां नहीं है। इसमें से कई कंपनियां या तो दिवालिया हो गई है या उनका दीवाला पिटने के कगार पर है। बाजार बदलता है और उसी के हिसाब से स्ट़ॉक्स भी बदलते हैं। आज का ब्लूचिप कल का पेनी स्टॉक भी बन सकता है। निवेशकों को सलाह है कि वह निवेश करते समय क्वालिटी और ग्रोथ पर फोकस करें और शेष चीजें अपने आप ठीक हो जाएंगी।  बाजार गिरावट के दौर से गुजर रहा है सिर्फ इसलिए अपने दीर्घाअवधि निवेश के लक्ष्यों में बदलाव नहीं करना ह.

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