डायबिटीज अपने देश के बहुत तेजी से फैलती हुई एक बीमारी है। लोग समझते है कि मीठा खाने से डायबीटीज़ होती है जबकि ऐसा नहीं है. इतना वश्य है कि जिन्हे यह रोग है उन्हे मीठा खाने से परहेज करना चाहिए. आज यह इतना फैल्चुका है कि आस पास नजर दौड़ाया जाय तो सर्किल में कोई न कोई इस रोग से ग्रस्त लोग मिल जाएंगे। पहले यह रोग अमीर और ज्यादा उम्र के लोगों का रोग माना जाता था लेकिन अब ऐसा नहीं है। अब छोटी उम्र में और सामान्य लोगों को भी हो रहा है। भारत जिन रोगों की राजधानी बनता जा रहा है उसमें से एक रोग डायबिटीज भी है। इस रोग भयावहता इतनी है कि मौत के 7 सबसे बड़े कारणों में ये रोग आता है। इस रोग को सबसे खराब पहलू यह है कि यह अकेला नहीं आता है, अपने साथ कई रिश्तेदारों को लेकर आता है। सबसे पहले यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को रोकता है जिससे अन्य रोग आसानी से पकड़ने लगते है और पकड़ते हैं तो जल्दी ठीक भी नहीं हो पाते है। इसको दवाएं ब्लड प्रेशर और किडनी पर भी असर डालती है। इसलिए इस रोग से जितना अधिक दूर रहा जाय श्रेयस्कर होगा। यह लाइफ स्टाइल डिजीज माना जाता है यानी ऐसा रोग जो हमारे जीवन शैली और खान पान में परिवर्तन से पैदा होते है। इसके मरीज लोग जीवन भर एहतियात व परहेज का जीवन व्यतीत करते है. वो कहते है न कि जानकारी ही बचाव है।
इस रोग को समझते है
जो हम भोजन लेते हैं उसमे मुख्य रूप से उसमें प्रोटीन, फैट, कार्बोहाइड्रेट होता है जिनसे शरीर को ऊर्जा मिलती है। भोजन में मौजूद कार्बोहाइड्रेट ग्लूकोज में परिवर्तित होकर ब्लड में घूलकर अपना काम करते हैं जब यही ग्लूकोज का लेवल जब ब्लड में बढ़ जाता है तो कहा जाता है कि डायबिटीज रोग है। जब इसकी मात्रा सही लेबिल में होते है तो शरीर बिल्कुल सही चलता है मगर मात्रा सही लेबिल से अलग होती है तो शरीर में गंभीर नुकसान पहुचाने वाली स्थितियाँ बन जाती हैं। यह इंसुलिन की कमी के कारण होता है। इंसुलिन एक प्रकार का हार्मोन है जो हमारे अग्न्याशय में बनता है। यह हमारे शरीर में खाने को ऊर्जा में बदलना होता है। साथ ही इंसुलिन ही हमारे शरीर में शुगर की मात्रा को कंट्रोल करने में मदद करता है।
डायबिटीज दो तरह की होती है
टाइप-1 डायबिटीज वह है जो हमें अनुवांशिक तौर पर होती है। यानी जब किसी के परिवार में मां पिता, दादी-दादा में से किसी को डायबिटीज की बीमारी रही हो तो ऐसे व्यक्ति में इस बीमारी की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।
टाइप-2 जब कुछ लोगों में गलत लाइफस्टाइल और खान-पान के कारण यह बीमारी होती है तो इस स्थिति को टाइप-2 डायबिटीज कहते हैं।
ग्लूकोज का निर्धारित लेवल क्या है
1- खाना खाने के 2 घंटे बाद अगर आपका शुगर लेवल 200 mg/dL (मिलीग्राम प्रति डेसी लीटर) से ऊपर है तो इस अवस्था को डायबिटीज होना कहा जाता है , जबकि 140 से 199 में डायबिटीज की प्रारंभिक अवस्था है जिसमें सतर्क होने की जरूरत होती है। अगर यह 140 से कम है तो नॉर्मल हैं
2 -फास्टिंग पर रात को खाना खाने के बाद सुबह खाली पेट शुगर टेस्ट किया जाता है और यह 126 mg/dL से ऊपर है तो डायबिटीज और 100 से 125 तब प्रारंभिक अवस्था 100 से नीचे हों तो नॉर्मल माना जाता है
3 जब कभी अचानक कराया जाय तो 140 mg/dL से कम है तो नॉर्मल हैं
140 से 199 तब prediabetes हैं
200 या ऊपर तब diabetes
डायबिटीज की पहचान-
1-अचानक से वजन का अनियंत्रित होना
2-बार बार पेशाब का लगना
3-बार बार भूख लगना
4-जल्दी थकावट हो जाना
5-बहुत तेज प्यास का लगना
6-शारीर में जल्दी जल्दी फोड़े फुंशी होना और जल्दी ठीक न होना
7-तबियत खराब होने पर जल्दी ठीक न होना
8- घाव का जल्दी ठीक न होना
9- नजर कमजोर होना
10-सुनाई कम देना
11-आँखों के आगे डार्क सर्किल होना
डायबिटीज का कारण -
1) हमारे शरीर में अग्न्याशय (Pancreas) में इंसुलिन नामक हार्मोन बनता है जो शरीर में ग्लूकोज को नियंत्रित करता है. कई कारणों से इन्सुलिन या तो बनन बंद हो जाता है या कम हो जाता है जिससे खून में ग्लूकोज का लेवल बढ़ जाता है।
2) खाना बार बार खाने से शरीर को बार बार जल्दी जल्दी इंसुलिन रिलीज करना पड़ता है जिससे भी दिक्कत होती है।
3) शारीरिक श्रम कम करने से
4) पानी कम पीने से भी शुगर का लेवल बढ़ जाता है
5) बहुत ज्यादा मीठा खाना शुगर लेवल को बढ़ाता है
6) मोटापा भी डायबिटीज का एक कारण है।
7) फास्ट फूड, पैकेज्ड और अन हेल्दी खाना भी एक कारण है
8) पर्याप्त आराम न करना
9) आनुवांशिक यानी परिवार में किसी को हुआ रहता है तो चांसेज बढ़ जाता है
10) ज्यादा चिंता और तनाव
11) शरीर में फैट जब अधिक होती है तो शरीर के नाजुक अंगों के चारो तरफ एकत्रित फैट अंग के कार्य क्षमता को कम कर देता है।
12) दवाओं का साइड इफेक्ट से भी डायबिटीज होता है
डायबिटीज से बचने का उपाय
वजन नियंत्रित रखना
बहुत अच्छी जीवन शैली अपनानी चाहिए
नियमित व्यायाम, तेज चलना कम से कम आधा घंटा
पर्याप्त नींद लेना
वाइट शुगर से दूरी
योग साइकलिंग आदि भी संतुलित कर सकते हैं -अधिक भी न करेँ
फाइबर लेना चाहिए
पर्याप्त पानी पीना
प्रोटीन रिच डाइट लेना
टेंशन से बचे
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