शनिवार, 17 अप्रैल 2021

जेट एयरवेज का बर्बाद होना.

एक अच्छी कम्पनी का बर्बाद होना ---
कहते है कि जब नाविक अच्छा हो तो खराब से खराब नाव को किनारे तक पहुंचा देता है और जब वो खराब हो तो अच्छे से अच्छे नाव को जल्दी डूबो भी देता है। बिज़नस के मामले में प्रमोटर वो नाविक होता है। अच्छे और खराब नाविकों के उदाहरण से मार्केट भरे पड़े है। यश बैंक, दीवान हाउसिंग, किंगफिशर, जेट एयरवेज, अनिल अंबानी ग्रुप, भूषण स्टील, मनपसंद बेवरीज, वीडियोकॉन, पीसी ज्वेलर जैसे अनगिनत उदाहरण हमारे समक्ष है। दिग्गज निवेशक विजय केडिया का मानना है कि खराब प्रमोटर के साथ निवेश करना उसी तरह है जैसे कि हम दुश्मन के साथ सोते है। जैसे दुश्मन कभी भी विश्वासघात कर सकता है ठीक उसी प्रकार खराब निवेशक कभी भी धोखा दे सकता है। इसलिए निवेश करते समय प्रमोटर की शुद्धता बहुत जरूरी है। 
     आज केे इस पोस्ट में यहां खराब नाविकों में से जेट एयरवेज के प्रमोटर नरेश गोयल के बारे में चर्चा कर रहा हूं
                    नरेश गोयल 
 जिनकी जिद ने जेट एयरवेज को के डूबा। वैसे एयरवेज कारोबार घाटे वाला कारोबार भी समझा जाता है, इसलिए निवेश के लिए यह सेक्टर सही नहीं माना जाता है।  बहरहाल जेट के बारे में जानते है। 
      जेट एयरवेज़ की स्थापना सन 1992 में एक एयर टैक्सी फ्लाइट के तौर पर हुई थी जिसके बाद से 5 मई 1993 से इसनें कॉमर्शियल फ्लाइट प्रारंभ किया। वहीँ मार्च 2004 से इसने चेन्नई से कोलम्बो सेवा की शुरुआत करके अंतर्राष्ट्रीय विमान सेवा की शुरुआत की। भयंकर घाटे और कर्ज के संकट से कम्पनी इस अप्रेल 2019 से इसके उड़ान बंद है। हालांकि इसे फिर से प्रारंभ करने के कई प्रयास किया गया है लेकिन मूर्त रूप नहीं लिया है। बहरहाल एक समय देश की एक बड़ी एयर लाइन रही थी जिसका कामकाज बंद हुए आज ठीक 2 साल हो चुका है। कभी सपनों की उड़ान भरने वाली ये एयरलाइन आज बस इस उम्मीद पर है कि बैंकरप्सी रेज्योलूशन के बाद एकबार फिर वो अपने पंख फैला पाएगी।

 वैसे तो जेट एयरवेज का कामकाज  17 अप्रैल 2019 को बंद हुआ था लेकिन इसकी शुरुआत काफी पहले ही हो गई थी। जेट एयरवेज के डूबने की कहानी 2018 की दिवाली से ही हो गई थी। दिवाली का ही वक्त था जब नरेश गोयल अपने फाइनेंशियल एडवाइजर्स के साथ दीपक पारेख से सलाह लेने मुंबई के उनके घर पर गए थे। वह जानना चाहते थे कि जेट एयरवेज को कैसे बचाया जाए। तब टाटा ग्रुप संकट में घिरी जेट को खरीदना चाहता था। उस वक्त TPG कैपिटल की अगुवाई में एक प्राइवेट इक्विटी कंसोर्शियम भी दौड़ में था। तब दीपक पारेख ने नेरश गोयल को यह सलाह दी थी कि वह पीछे हट जाएं और नए निवेशकों को मौका दें। पारेख अबू धाबी सरकार के मुख्य सलाहकार थे और अबू धाबी की सरकारी एयरलाइन कंपनी एतिहाद, जेट की पार्टनर थी।

नरेश गोयल की दोस्ती कई नेताओं, पॉलिसीमेकर्स, चीफ एग्जिक्यूटिव, एयरलाइन लीज पर देने वालों और मैन्युफैक्चर्स से हैं। जेट एयरवेज को बचाने के लिए उन्होंने सबकी बात सुनी लेकिन की अपने मन की। उन्होंने पद छोड़ने से मना कर दिया। गोयल को यह भरोसा था कि वह अपनी कंपनी बचा लेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। अभी तक इस डील में रूचि ले रहे टाटा ग्रुप ने भी अपना हाथ पीछे खींच लिया। जानकारों का कहना है कि गोयल ने एयरलाइन चलाने के लिए जिन लोगों को हायर किया था उनपर और भरोसा करना चाहिए था। उन्होंने कई गलतियां की जिसके वजह से कम्पनी का बिजनेस गिरता रहा।  दबाव के बावजूद वो कम्पनी से निकल नहीं रहे थे, उनके लिए कंपनी से निकलना मुश्किल फैसला था जिसकी वजह से हालात और खराब हुए हैं। यहां तक कि उनके पास टाटा ग्रुप जैसा इनवेस्टर निवेश के लिए तैयार था लेकिन गोयल किसी और को मौका देने के लिए तैयार नहीं हुए। उन्होंने जनवरी 2019 तक अपना पद जैसे-तैसे संभाल रखा था। लेकिन जेट एयरवेज का बुरा दौर शुरू हो चुका था। घाटा भयंकर रूप से बढ़ता जा रहा था और अंततः कारोबार बंद करना पड़ा। कारोबार बंद करने से कुछ दिन पहले तक जेट एयरवेज को हर दिन 21 करोड़ का लॉस हो रहा था। इसके अलावा कंपनी पर कम से कम 1500 करोड़ रुपए का कर्ज था। जानकारों का कहना है कि जेट की मुश्किल तब से ही शुरू हो गई थी जब वर्ष 2007 में प्रतिद्वंदी कंपनी सहारा को 1450 करोड़ रुपए में खरीदा था। इस डील के साथ ही जेट फाइनेंशियल, लीगल और HR की कई मुश्किलों में फंस गई।गोयल ने एयर डक्कन, इंडिगो और स्पाइसजेट को टक्कर देने के लिए सहारा को खरीदा था। लेकिन यह रणनीति पूरी तरह उल्टी पड़ गई।

जेट एयरवेज का कारोबार अगर डूबा है तो यह उसके प्रमोटर की नाकामी भी है। इंडस्ट्री के कई लोगों कहते थे कि गोयल का मानना है कि मैं ही जेट एयरवेज में हूं। जब लोग जेट एयरवेज की तरफ देखते हैं तो वो मेरी तरफ देखते हैं। गोयल बातचीत करने में माहिर थे। अपने जवाब से वह सबको लाजवाब कर देते थे। लेकिन जेट एयरवेज की हालत देखकर लगता है कि वह बात करते रह गएं और कंपनी बिना किसी काम की रह गई। कंपनी के बोर्ड में एतिहाद के रहते हुए भी गोयल ने डेल्टा एयरलाइंस से खेलना नहीं छोड़ा। डेल्टा ने कंपनी में स्टेक लेने के लिए 300 रुपए प्रति शेयर का ऑफर दिया। उस वक्त नरेश गोयल 400 रुपए प्रति शेयर पर अड़े रहे। यह वो दौर था जब कंपनी के शेयर पिछले 6 महीनों में 182 रुपए से लेकर 347 रुपए के बीच ट्रेड कर रहे थे। इसके बाद गोयल ने दूसरी गलती कर दी। उन्होंने 10 एयरबस A330 और बोइंग 777 प्लेन का ऑर्डर दे दिया। दो तरह के प्लेन खरीदकर जेट ने अपना खर्च बढ़ाने के अलावा कुछ नहीं किया। इसके साथ ही गोयल ने सीट भी कम रखी। ग्लोबल प्रैक्टिस में जहां 400 सीटें होती हैं वहां इसमें सिर्फ 308 सीटें थीं। यानी रेवेन्यू का एक चौथाई हिस्सा खुद खत्म कर लिया।

इसके ऊपर कि गोयल यह मानने को तैयार नहीं थे कि फ़र्स्टक्लास की 8 सीटों से कोई कमाई नहीं हो रही है। उस वक्त अधिकारियों ने इन सीटों को हटाने की सलाह दी लेकिन गोयल नहीं माने। यानी 250 किलो की एक-एक सीट का बोझ बिना किसी वजह एयरक्राफ्ट पर लदा था।
 
लेंडर्स ने जब जेट को नीलाम करने की कोशिश की तो गोयल ने लंदन से बोली लगाई। लेकिन उनका ऑफर खारिज कर दिया गया। ऐसे कई मौकों पर एतिहाद और TPG ने धमकी दी कि अगर नरेश गोयल अपना हाथ नहीं खींचेंगे तो वो बाहर हो जाएंगे। 

जैसा कि हम सभी जानते है कि इसके पूर्व  2012 में किंगफिशर भी बंद हो गया था।

इस पूरी घटना से निवेशकों को क्या सबक है 
1) भयंकर कर्ज वाली कंपनियों से बचना चाहिए। उसके कर्ज पर नियमित निगाह रखनी चाहिए। उसके लिया डेट इक्विटी रेश्यो पर ध्यान देना चाहिए और प्रयास करना चाहिए कि जिसका .50 से कम हो, उसी में निवेश किया जाय

2) निवेश से पहले कंपनी कितना लाभ कमा रही है और वो लाभ बढ़ रहा है कि घट रहा है, जरूर ध्यान देना चाहिए।

3) प्रमोटर की क्वालिटी इस बात से पता चल सकता है कि वो अपने सलाहकारों की बात कितनी मानता है

4) कंपनी में जैसे ही कोई संकट दिखाई दे तत्काल निकल जाना चाहिए। उस सौदे में हमें कितना घाटा हो रहा है, को दरकिनार करके हर हाल में बेच देना चाहिए क्योंकि अब वो शेयर और भी नीचे जायेगा। और जब तक उसमें संकट हो फिर से निवेश नहीं करूंगा
 
तो आज के लिए इतना ही #HappyInvesting #WealthCreation #Investment

2 टिप्‍पणियां:

  1. No 3 कोई निवेशक कैसे पता कर पायेगा ?

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    1. ब्रोकर की रिपोर्ट आती रहती है उन्हें पढ़ने से काफी जानकारियां मिलती है

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