इसके बाद सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह होता है कि आखिर स्टॉक कहां से और कैसे सेलेक्ट किया जाय। आज हम उसी विषय पर चर्चा करेंगे। ज्यादातर लोग किसी टीवी चैनल, यू ट्यूब चैनल, मार्केट एक्सपर्ट, दिग्गज निवेशकों को देखकर उनके द्वारा बताए स्टॉक को लेते है। मेरे विचार से यह तरीका सही नहीं होता, हमें उनके इन्वेस्टमेंट आइडियोलॉजी को फॉलो करना चाहिए। स्टॉक के लिए स्वयं रिसर्च करना चाहिए। दूसरे के टिप्स को नहीं लेना चाहिए, जैसे दूसरे के कंधे पर रखकर बंदूक चलाना गलत है। उसी प्रकार पैसा बनेगा तो अपने रिसर्च से दूसरे के रिसर्च से नहीं। मैं यहां कुछ सफल तरीकों पर बात करूंगा जहां से मल्टी बैगर स्टॉक चुन लेंगे।
1) अपने घर से रिसर्च
हम अपने आस पास देेेेेखे तो पाएंगे कि जो भी हम वस्तु प्रयोग में लाते है, किसी न किसी बड़ी कंपनी के उत्पाद है। उन सभी कंपनियों ने विगत में ह्यूज वैल्थ क्रिएट किया है जिसका हम लाभ नहीं उठा सके है। तो हम जिन उत्पादों/सेवाओं को प्रयोग करते है, उनसे संतुष्ट है और दूसरों को भी वो वस्तु खरीदने की सलाह देते है। यकीन कीजिए आपके पोर्टफोलियो का सबसे बड़ा मल्टी बैगर स्टॉक है वो। तो फिर देर किस बात की सुबह से लेकर शाम तक कौन कौन से उत्पाद प्रयोग करते है, उसे नोट करना है। सुबह बाथरूम जाते है तो टाइल्स, सेनेटरी आइटम, प्लंबिंग आइटम, हैंड वाश, साबुन, पेस्ट, चाय, खाने में मसाले, तेल, किचन के उत्पाद, घर में पेंट, बिजली के उत्पाद, फ्रिज, एसी, जूते,चप्पल, कपड़े, गाड़ी, बैंक, कंप्यूटर, मोबाइल इंटरनेट सेवा आदि सब कुछ किस किस कंपनी का लेते हैै, सभी को नोट करना है। अब देखना है उसमें कौन कौन सी लिस्टेड है। वो आपके पोर्टफोलियो के स्टॉक हो गए।
2) मार्केट कैपिटल के आधार पर
देश की बड़ी कंपनियां निवेश के लिए कम जोखिम वाली होती है। मार्केट कैपिटल के हिसाब से शीर्ष के 15/20 कम्पनी चुन लेते है। गूगल में से यह सूची आसानी से मिल जाएगी जो लिस्ट मिले उसमें से शीर्ष के 15 या 20 ले ली जाय या फिर एक सेक्टर से ज्यादा से ज्यादा 2। उदाहरण के लिए बात करे तो इस समय शीर्ष कम्पनियों की सूची चित्र में है। स्क्रीन शॉट में जैसे बैंक में देखिए तो hdfc, icici, kotak, sbi और एक्सिस भी दिख रहा है तो कोई 2 को पोर्टफोलियो में रख लीजिए। इसी तरह आईटी में भी टीसीएस, इंफोसिस, एचसीएल और विप्रो 4 दिख रहे है तो कोई 2 को लीजिए। यह प्रक्रिया तब तक करते रहेंगे जब तक कि पर्याप्त स्टॉक न हो जाय।
3) मार्केट के आउट परफॉर्मर स्टॉक से
हालांकि पुराने रिटर्न आगे भविष्य में रिटर्न मिलने की गारंटी नहीं होती फिर भी वो स्टॉक जो पहले से मार्केट को आउट परफॉर्म करते आ रहे है उन पर दाव खेलना ज्यादा सही रहता है। आज कम सूचनाएं हर जगह उपलब्ध है बस थोड़ा सा ध्यान रखना है। नीचे चित्र में मार्केट के आउट परफॉर्म करने वाले स्टॉक की सूची है। ध्यान से देखिए इसमें पैसा लगाना कभी भी घाटे का सौदा नहीं रहेगा। ये सभी कंपनियां अपने सेक्टर की लीडर है और बिजनेस स्थापित है, शानदार मैनेजमेंट है, किसी भी विपरीत परिस्थिति से निकलने का माद्दा रखते है।
4) म्यूचुअल फंड के पोर्टफोलियो से
यह भी एक सफल तरीका है। म्यूचुअल फंड मैनेजर के पास रिसर्च टीम होती है जो हजारों कम्पनियों की बारीकी से मूल्यांकन करते है जो एक छोटे निवेशक नहीं कर पाते है। इसके अतिरिक्त इनके ऊपर लोगों को अच्छे रिटर्न दिलाने की जिम्मेदारी होती है इसलिए देखने में आता है कि वो गलत स्टॉक सेलेक्ट नहीं करते है, लॉन्ग टर्म में अच्छे रिटर्न देने वाले स्टॉक पोर्टफोलियो में रखते है। म्यूचुअल फंड द्वारा होल्डिंग के टॉप 10, टॉप 25 या टॉप 50 स्टॉक सूची में से पसंद के 15/20 स्टॉक का पोर्टफोलियो बनाना भी सही रहेगा। वर्तमान में टॉप 10 की सूची इस तरह से है
5) FII होल्डिंग स्टॉक से
नंबर 4 के तरीके से ही विदेशी संस्थागत निवेशकों के होल्डिंग वाले टॉप 10, टॉप 25 या टॉप 50 की सूची देखकर उसमें से 15/20 स्टॉक चुन लिया जाय। विदेशी संस्थागत निवेशक भी काफी ठोक बजाकर स्टॉक खरीदते है। सामान्यतया म्यूचुअल फंड की तरह भी इनके पसंदीदा स्टॉक के भी फंडामेंटल स्ट्रॉन्ग होते है, एक छोटे निवेशकों को बहुत ज्यादा सोचना विचारना की जरूरत नहीं है।
6) FII और म्यूचुअल फंड होल्डिंग से
इस तरीके से भी अच्छे स्टॉक चुने जा सकते हैं। इस तरीके में क्या करेंगे कि एफआईआई और म्यूचुअल फंड के टॉप 25 स्टॉक की सूची अलग अलग लेंगे और उनमें ऐसे स्टॉक चुनेंगे जो दोनो में उपलब्ध है।
7) दिग्गज निवेशकों के पोर्टफोलियो से
यह तरीका भी खूब अपनाया जाता है। इसमें मार्केट के दिग्गज निवेशकों राकेश झुनझुनवाला, राधा किशन दमानी, रमेश दमानी, रामदेव अग्रवाल, विजय केडिया, अनिल अग्रवाल, आशीष कचौलिया, सौरभ मुखर्जी आदि के पसंद के स्टॉक। हालांकि यह तरीका थोड़ा जोखिम वाला हो सकता है, क्योंकि सभी के रिस्क प्रोफाइल अलग अलग होता है। साथ ही स्टॉक लेते समय यह भी ध्यान रखना चाहिए वो स्टॉक विशेष उनके पोर्टफोलियो का कितना हिस्सा है। जैसे एक उदाहरण दिया जाय तो yes bank और जेपी एसोसिएट्स राकेश झुनझुनवाला के पोर्टफोलियो का मुश्किल से 1 प्रतिशत भी हिस्सा नहीं था, यदि स्टॉक न बढ़े तब भी पोर्टफोलियो पर कोई असर नहीं होगा। बहुत सारी चीज है जिस पर कभी अलग से चर्चा की जाएगी।
8)सेक्टर के आधार पर
यह भी एक बेहतरीन तरीका हो सकता है। इसमें सबसे पहले सेक्टर चुनना है फिर उस सेक्टर से शीर्ष की कंपनियों में निवेश या शीर्ष की 2 या 3 स्टॉक चुनना। जैसे हमें लगता है कि आईटी सेक्टर आने वाले समय में बहुत तेजी से ग्रोथ करेगा तो हम देखते है कि इस सेक्टर में शीर्ष की कौन कौन सी कंपनी है। वर्तमान में इसमें टीसीएस, इंफोसिस, एचसीएल टेक आदि है तो इनमे से कोई 2 या 3 चुन लेते है। इसी तरह कम से कम 8/10 सेक्टर से स्टॉक चुनकर पोर्टफोलियो बना लेते है। यह भी एक शानदार पोर्टफोलियो बनेगा।
9) अपने ब्रोकर की सलाह से
हमारा जिस भी ब्रोकर के यहां डीमैट अकाउंट होता है वहां से नियमित रूप से निवेश सलाह दिया जाता है। उनकी भी एक रिसर्च टीम होती है, जिनके द्वारा एक आदर्श पोर्टफोलियो बनाकर प्रस्तुत किया जाता है। इनके द्वारा लार्जकैप,मिडकैप और स्माल कैप सभी सेगमेंट में स्टॉक बताए जाते है।
10) मार्केट के एक्सपर्ट की सलाह लेकर
NSE और BSE में पंजीकृत ढेर सारे एक्सपर्ट होते है जिन्हे फाइनेंशियल एक्सपर्ट कहा जाता है। इनकी भी सलाह लिया जा सकता है। इनसे भी पोर्टफोलियो डिजाइन कराया जा सकता है। कई सारे एक्सपर्ट तो पोर्टफोलियो मैंनेजमेंट सर्विस देते है जिन्हे हम अपना पैसा देकर निश्चिंत रह सकते है, वो अपने बुद्धि और कुशलता का प्रयोग कर हमें अधिक से अधिक रिटर्न दिलाते है।
और भी बहुत सारे उपाय है। आर्टिकल कैसा लगा, बताइए... आपके प्रश्नों का स्वागत है।
Paisa,paisa banata hai👍
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